Tuesday, August 8, 2017

भ्रष्टाचार-विरोध पर कटघरे में PM मोदी l

3 महीनों से PMO में अटका पड़ा है भ्रष्ट IAS सदाकांत के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला - RTI खुलासा।






लखनऊ/08 अगस्त 2017


भ्रष्टाचार विरोध पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक आरटीआई जबाब ने कटघरे में खड़ा कर दिया है। बीते 9 मार्च को भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में दायर की गई यह आरटीआई है यूपी की राजधानी लखनऊ निवासी इंजीनियर और समाजसेवी संजय शर्मा की जिस पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अनुसचिव और सीपीआईओ  राजकिशन वत्स ने बीते 31 मई को संजय को जो जबाब भेजा है उसने भ्रष्टाचार विरोध पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले पीएम मोदी को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

वत्स ने आरटीआई एक्सपर्ट संजय शर्मा को बताया है कि 10 मामले ऐसे हैं जिनमें भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे IAS अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी द्वारा भ्रष्टाचार करने का दोषी पाए जाने पर अभियोजन की स्वीकृति मांगी गई थी जो अभी तक नहीं दी गई है।इनमें सबसे पुराना मामला राजस्थान कैडर के IAS गिरिराज सिंह का है जिसकी FIR साल 2005 में लिखी गई थी।अन्य 9 मामलों में आईएएस अधिकारियों में मनमोहन सिंह,एस. इन.मोहंती,सदाकांत शुक्ल,राजेन्द्र कुमार,नीरज कुमार,टी. सूरज, रॉडनी लॉरिनव्म,के.एस. क्रोफा,के.सी.सामरिया,ऐ. सुबिहा वह 10 अधिकारी हैं जिनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के मामलों को मोदी सरकार लंबे समय से लंबित रखे हुई है।

गौरतलब है कि यूपी में पीआईएल एक्टिविस्ट के रूप में प्रसिद्ध संजय शर्मा लंबे समय से यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी और वर्तमान में यूपी के लोक निर्माण विभाग में अपर मुख्य सचिव सदाकांत शुक्ला द्वारा भारत सरकार के गृह मंत्रालय में तैनाती के दौरान लेह लद्दाख में भारत की सीमा की सुरक्षा खतरे में डालकर सम्बेदनशील अभिलेख लीक कर 200 करोड़ का घोटाला करने के भ्रष्टाचार के मामले में CBI द्वारा साल 2010 में दर्ज कराई गई FIR पर साल 2012 से लंबित अभियोजन स्वीकृति मामले की लड़ाई लड़ रहे हैं।

देश के नामचीन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में शुमार होने वाले संजय बताते है कि सदाकांत  के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के इस मामले में दर्जनों ज्ञापन और आरटीआई के सहारे उन्होंने इस प्रकरण को CBI से गृह मंत्रालय, गृह मंत्रालय से डीओपीटी और अब डीओपीटी से अंतिम पायदान यानि कि PMO को भिजवा दिया है जहां भी यह मामला लगभग 3 महीनों से लंबित है।

पीएमओ द्वारा सदाकांत के भ्रष्टाचार पर नरम रुख अख्तियार करने पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए संजय ने बताया कि उन्होंने पीएमओ को पत्र भेजकर इस मामले का निस्तारण तत्काल करने की मांग की है।

सदाकांत के भ्रष्टाचार के मामले को 3 महीने तक दबाए रखने के आधार पर संजय ने नरेंद्र मोदी द्वारा आगामी 15 अगस्त से भ्रष्ट बाबुओं से मुक्ति के लिए घोषित किये गए अभियान को महज दिखावा बताते हुए भ्रष्टाचार विरोध पर पीएम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।


Sunday, August 6, 2017

UP : यशभारती अनियमितताओं पर नर्म CM योगी।



यशभारती अनियमितताओं पर शोर बहुत पर न जांच, न दंड,न सम्मान के मार्गदर्शी सिद्धांतों या पेंशन नियमावली में कोई संशोधन।

To download original RTI papers, please click this weblink http://tahririndia.blogspot.in/2017/08/up-cm-rti.html


लखनऊ/ 6 अगस्त 2017

बीते मार्च में सूबे की कमान संभालने पर पूर्ववर्ती सरकार द्वारा दिये गए
यशभारती सम्मानों पर उंगली उठाते हुए बड़ी बड़ी बयानबाजी करने वाले यूपी के सीएम
योगी आदित्यनाथ अब अखिलेश द्वारा दिये गए इन सम्मानों पर नरम पड़ते नज़र आ रहे
हैं।चौंकाने वाला यह खुलासा यूपी की राजधानी लखनऊ के निवासी इंजीनियर और
समाजसेवी संजय शर्मा द्वारा यूपी के मुख्य सचिव के कार्यालय में बीते मई माह
में दायर की गई एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश संस्कृति निदेशालय की संयुक्त
निदेशक अनुराधा गोयल द्वारा दी गई सूचना से हुआ है।

दरअसल आरटीआई एक्सपर्ट संजय शर्मा ने बीते मई माह की 27 तारीख को यूपी के
मुख्य सचिव कार्यालय में 8 बिंदुओं पर आरटीआई दायर कर पूर्व में दिए गए
यशभारती सम्मानों पर सूबे की नई बनी योगी सरकार द्वारा की गई कार्यवाही की
सूचना मांगी थी।मुख्य सचिव कार्यालय के पीआईओ और अनुसचिव पी. के. पांडेय ने
एक्टिविस्ट संजय की यह अर्जी बीते 31 मई को शासन के संस्कृति विभाग के जन
सूचना अधिकारी को अंतरित कर दी थी।शासन के संस्कृति विभाग के पास भी संजय
द्वारा मांगी गईं सूचना न होने के कारण यह आरटीआई आवेदन संस्कृति निदेशालय को
अंतरित हुआ जिस पर निदेशालय के जन सूचना अधिकारी अजय कुमार अग्रवाल ने 14
जुलाई को पत्र जारी कर एक्टिविस्ट को सूचना भेजी हैं ।

संजय को दी गई सूचना के अनुसार अभी तक योगी सरकार ने न तो यशभारती के
मार्गदर्शी सिद्धांतों में और न ही पेंशन नियमावली में कोई संशोधन किया
 है।यशभारती सम्मान से सम्मानित व्यक्तियों को पेंशन देने के लिए चालू वित्तीय
वर्ष 2017-18 में 5 माह के लिए 466 लाख का बजटीय प्राविधान होने, यश भारती से
सम्मानित किसी भी व्यक्ति की पेंशन की धनराशि में कटौती करने या पेंशन बन्द
करने का कोई भी आदेश न होने की बात भी अनुराधा ने संजय को बताई है।

यही नहीं, यशभारती सम्मान के वितरण,पेंशन राशि बढ़ाने और पेंशन पाने वालों की
पात्रता में बदलाव करने की कथित अनियमितताओं की कोई जांच रिपोर्ट न होने और
अखिलेश की सरकार की इन कथित अनियमितताओं के लिए किसी भी IAS या PCS अधिकारी को
दंडित न किये जाने की बात भी इस आरटीआई एक्टिविस्ट को बताई गई है।

इस आरटीआई जबाब से यह बात भी सामने आई है कि यश भारती एवं पद्म सम्मान से
सम्मानित महानुभावों को बिना नियमावली के ही 20000/- प्रतिमाह पेंशन दी जा रही
थी और पिछली सरकार ने इस संबंध में बाकायदा नियमावली प्रख्यापित करके इस
धनराशि को 50000/- प्रतिमाह कर दिया था ।

लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही लाने के क्षेत्र में कार्य कर रहे नामचीन
एक्टिविस्टों में शुमार होने वाले और सामाजिक एवं राजनैतिक मुद्दों पर मुखर
होकर विचार रखने वाले संजय शर्मा इस आरटीआई उत्तर को आधार बनाकर कहते हैं कि
योगी ने यशभारती की अनियमितताओं पर जुबानी बयानबाजी तो बहुत की पर जमीनी
कार्यवाही के नाम पर कुछ भी न कर पाए।

पूर्व में दिए गए यशभारती सम्मान की पुनर्समीक्षा के लिए बीते 9 मई को एक आदेश
करने को महज खानापूर्ति बताते हुए संजय ने इसे नाकाफी बताया है और योगी को
पत्र लिखकर इस मामले में समयबद्ध जांच कराकर दोषियों को दंडित करने की माँग
करने की बात कही है।


Saturday, August 5, 2017

UP:यशभारती अनियमितता पर नर्म पड़े CM योगी-RTI खुलासा।

यशभारती सम्मान अनियमितताओं पर भी नर्म हुए योगी।न कोई जांच, न किसी को दंड और न ही सम्मान के मार्गदर्शी सिद्धांतों या पेंशन नियमावली में  हुआ है कोई संशोधन।





लखनऊ/ 5 अगस्त 2017

बीते मार्च में सूबे की कमान संभालने पर पूर्ववर्ती सरकार द्वारा दिये गए यशभारती सम्मानों पर उंगली उठाते हुए बड़ी बड़ी बयानबाजी करने वाले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अब अखिलेश द्वारा दिये गए इन सम्मानों पर नरम पड़ते नज़र आ रहे हैं।चौंकाने वाला यह खुलासा यूपी की राजधानी लखनऊ के निवासी इंजीनियर और समाजसेवी संजय शर्मा द्वारा यूपी के मुख्य सचिव के कार्यालय में बीते मई माह में दायर की गई एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश संस्कृति निदेशालय की संयुक्त निदेशक अनुराधा गोयल द्वारा दी गई सूचना से हुआ है।

दरअसल आरटीआई एक्सपर्ट संजय शर्मा ने बीते मई माह की 27 तारीख को यूपी के मुख्य सचिव कार्यालय में 8 बिंदुओं पर आरटीआई दायर कर पूर्व में दिए गए यशभारती सम्मानों पर सूबे की नई बनी योगी सरकार द्वारा की गई कार्यवाही की सूचना मांगी थी।मुख्य सचिव कार्यालय के पीआईओ और अनुसचिव पी. के. पांडेय ने एक्टिविस्ट संजय की यह अर्जी बीते 31 मई को शासन के संस्कृति विभाग के जन सूचना अधिकारी को अंतरित कर दी थी।शासन के संस्कृति विभाग के पास भी संजय द्वारा मांगी गईं सूचना न होने के कारण यह आरटीआई आवेदन संस्कृति निदेशालय को अंतरित हुआ जिस पर निदेशालय के जन सूचना अधिकारी अजय कुमार अग्रवाल ने 14 जुलाई को पत्र जारी कर एक्टिविस्ट को सूचना भेजी हैं ।

संजय को दी गई सूचना के अनुसार अभी तक योगी सरकार ने न तो यशभारती के मार्गदर्शी सिद्धांतों में और न ही पेंशन नियमावली में कोई संशोधन किया  है।यशभारती सम्मान से सम्मानित व्यक्तियों को पेंशन देने के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 में 5 माह के लिए 466 लाख का बजटीय प्राविधान होने, यश भारती से सम्मानित किसी भी व्यक्ति की पेंशन की धनराशि में कटौती करने या पेंशन बन्द करने का कोई भी आदेश न होने की बात भी अनुराधा ने संजय को बताई है।

यही नहीं, यशभारती सम्मान के वितरण,पेंशन राशि बढ़ाने और पेंशन पाने वालों की पात्रता में बदलाव करने की कथित अनियमितताओं की कोई जांच रिपोर्ट न होने और अखिलेश की सरकार की इन कथित अनियमितताओं के लिए किसी भी IAS या PCS अधिकारी को दंडित न किये जाने की बात भी इस आरटीआई एक्टिविस्ट को बताई गई है। 

इस आरटीआई जबाब से यह बात भी सामने आई है कि यश भारती एवं पद्म सम्मान से सम्मानित महानुभावों को बिना नियमावली के ही 20000/- प्रतिमाह पेंशन दी जा रही थी और पिछली सरकार ने इस संबंध में बाकायदा नियमावली प्रख्यापित करके इस धनराशि को 50000/- प्रतिमाह कर दिया था ।

लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही लाने के क्षेत्र में कार्य कर रहे नामचीन एक्टिविस्टों में शुमार होने वाले और सामाजिक एवं राजनैतिक मुद्दों पर मुखर होकर विचार रखने वाले संजय शर्मा इस आरटीआई उत्तर को आधार बनाकर कहते हैं कि योगी ने यशभारती की अनियमितताओं पर जुबानी बयानबाजी तो बहुत की पर जमीनी कार्यवाही के नाम पर कुछ भी न कर पाए।

पूर्व में दिए गए यशभारती सम्मान की पुनर्समीक्षा के लिए बीते 9 मई को एक आदेश करने को महज खानापूर्ति बताते हुए संजय ने इसे नाकाफी बताया है और योगी को पत्र लिखकर इस मामले में समयबद्ध जांच कराकर दोषियों को दंडित करने की माँग करने की बात कही है।

Friday, August 4, 2017

UP : मंत्री मोहसिन रज़ा के फ्रॉड और भ्रष्टाचार पर CM योगी का मौन योग ?

UP : मंत्री मोहसिन रज़ा के फ्रॉड और भ्रष्टाचार पर CM योगी का मौन योग ?



To download original RTI papers, please click the link http://tahririndia.blogspot.in/2017/07/up.html

लखनऊ/04 अगस्त 2017

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर अपने पूर्ववर्ती सीएम अखिलेश यादव की तरह अपने दागी मंत्री पर मुलायम रुख अख्तियार करने और कोई कार्यवाही न करने का आरोप लग रहा है। यह मंत्री हैं यूपी के राज्यमंत्री मोहसिन रज़ा और सीएम आदित्यनाथ पर यह आरोप लगाया है राजधानी लखनऊ के आरटीआई कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने।शर्मा ने योगी पर यह आरोप उनके द्वारा उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव कार्यालय में दायर की गई आरटीआई पर गोपन विभाग के अनुभाग अधिकारी और जन सूचना अधिकारी धर्मपाल सिंह द्वारा दिये गए जबाब के आधार पर लगाया है।

संजय ने बताया कि शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने योगी के मंत्री मोहसिन रज़ा द्वारा वक्फ कागज़ातों में कूटरचना कर कब्रों की बिक्री कर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए योगी से शिकायत कर जांच की मांग करने संबंधी समाचार संज्ञान में आने पर उन्होंने बीते मई महीने में यूपी के मुख्य सचिव के कार्यालय में एक आरटीआई दायर कर दागी मंत्री रज़ा के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई कार्यवाही के संबंध में 6 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी।मुख्य सचिव कार्यालय के अनुसचिव एवं जन सूचना अधिकारी पी. के. पांडेय ने बीते 31 मई को संजय का RTI आवेदन गोपन अनुभाग-1 को अंतरित किया था।गोपन अनुभाग-1 के पीआईओ धर्मपाल सिंह ने बीते 19 जून के पत्र के माध्यम से संजय को बताया है कि मोहसिन रज़ा के कथित अपराध और भ्रष्टाचार से संबंधित कोई भी शिकायती पत्र गोपन अनुभाग-1 में प्राप्त नहीं हुआ है और इस आधार पर रज़ा के खिलाफ जांच,कार्यवाही,स्पस्टीकरण,FIR आदि से संबंधित सूचना देने से मना कर दिया है।

लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही स्थापित करने वाले के क्षेत्र में मुखर रूप कार्यशील संजय कहते हैं कि योगी ने बीते मार्च में यूपी की बागडोर संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए 'जीरो टॉलरेंस टु करप्शन' का दम भरते हुए अनगिनत घोषणाएं कीं थीं पर अब खुद के मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप पर दागी मंत्री का स्पस्टीकरण तलब करने या जांच बैठाने जैसी प्राथमिक कार्यवाही शुरू तक न कराने से यह साफ होता जा रहा है कि यूपी में सिर्फ नाम बदले है और सत्ता आज भी उच्च पदासीन भ्रष्ट व्यक्तियों को बचाने की उसी मानसिकता से काम कर रही है जिससे पूर्ववर्ती सपा शासनकाल में कर रही थी।

PIL एक्टिविस्ट संजय ने बताया कि वे इस संबंध में सूबे राज्यपाल से व्यक्तिगत भेंटवार्ता हेतु मिलने का समय लेकर उनको सम्पूर्ण प्रकरण से अवगत कराकर उनसे इस प्रकरण में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे।



Monday, July 31, 2017

UP: जनता दर्शन और जनसुनवाई के नाम पर बाबाजी का ठुल्लू !

UP-महज दिखावा बने CM योगी के जनता दर्शन और जनसुनवाई : RTI खुलासा ।

लखनऊ/31 जुलाई 2017

यूपी की आम जनता को उसकी परेशानियों से निजात दिलाने की बात कहकर योगी से राजा बने आदित्यनाथ भी सत्तानशीन होने के बाद पहले के मुख्यमंत्रियों की मानिंद अपने वादे पूरे नहीं कर पा रहे हैं और सरकार बदलने पर नई सरकार द्वारा बड़ी-बड़ी बातें कर जनता को नई उम्मीदें बंधाने पर उन उम्मीदों पर खरा न उतरने की पुरानी परिपाटी का अनुसरण करते नज़र आ रहे हैं।यह बात योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार और मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के संदर्भ में उठाई गई है और यह बात उठाई गई है यूपी की राजधानी लखनऊ में रहने वाले इंजीनियर और आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय में दायर की गई आरटीआई पर दिए गए जबाब के आधार पर।

दरअसल मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्यमंद करने वाले समाजसेवी संजय शर्मा ने बीते मई महीने  में मुख्यमंत्री कार्यालय में एक एक आरटीआई अर्जी देकर जनता दरबारों के संबंध में 6 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी।संजय की RTI पर मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुभाग अधिकारी और जनसूचना अधिकारी सुनील
 कुमार मंडल ने बीते 10 जुलाई को पत्र भेजकर जो सूचना दी है उससे सीएम योगी की जनता दरबार और जनसुनवाई जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर शासन की असंवेदनशीलता और गैर जिम्मेवाराना रवैये को उजागर करके रख दिया है।

मंडल ने संजय को बताया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में विभिन्न माध्यमों से प्राप्त प्रत्यावेदन IGRS प्रणाली के अंतर्गत अपलोड किये जाते है और इनका अलग से कोई डाटा  उपलब्ध नहीं होने के कारण जनता दरबारों में प्राप्त शिकायतों और इन शिकायतों में से निस्तारित शिकायतों की सूचना देने में असमर्थता व्यक्त कर दी है।

जनता दरबारों में प्राप्त शिकायतों के आधार पर किसी भी अधिकारी को दंडित न किये जाने और जनता दरबारों पर राजकोष से व्यय की गई धनराशि की जानकारी न होने का चौंकाने वाला खुलासा भी मंडल के इस जबाब से हुआ है।

एक्टिविस्ट संजय ने इस RTI खुलासे के आधार पर सीएम योगी के जनता दरबारों और IGRS के नाम पर चल रहे ऑनलाइन जनसुनवाई पोर्टल को जनता के साथ किया जा रहा छलावा बताया है और सीएम योगी को पत्र लिखकर जनता दरबारों और IGRS जनसुनवाई पोर्टल की शिकायतों के अनुश्रवण और दोषी लोकसेवकों को दंडित करने की मुकम्मल व्यवस्था करने और उसे लगातार बनाये रखने की मांग उठाने की बात कही है।

PIL एक्टिविस्ट संजय ने बताया कि यदि सीएम जनहित के इस मुद्दे पर गंभीरता पूर्वक कार्य करने में विफल रहते है तो वे इस मामले को जनहित याचिका के माध्यम से उच्च न्यायालय लेकर जाएंगे।


Thursday, July 20, 2017

UP : दागी मंत्री पर अखिलेश की तरह मुलायम योगी।



लखनऊ/20 जुलाई 2017

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर अपने पूर्ववर्ती सीएम अखिलेश यादव की तरह अपने दागी मंत्री पर मुलायम रुख अख्तियार करने और कोई कार्यवाही न करने का आरोप लग रहा है। यह मंत्री हैं यूपी के राज्यमंत्री मोहसिन रज़ा और सीएम आदित्यनाथ पर यह आरोप लगाया है राजधानी लखनऊ के आरटीआई कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने।शर्मा ने योगी पर यह आरोप उनके द्वारा उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव कार्यालय में दायर की गई आरटीआई पर गोपन विभाग के अनुभाग अधिकारी और जन सूचना अधिकारी धर्मपाल सिंह द्वारा दिये गए जबाब के आधार पर लगाया है।

संजय ने बताया कि शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने योगी के मंत्री मोहसिन रज़ा द्वारा वक्फ कागज़ातों में कूटरचना कर कब्रों की बिक्री कर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए योगी से शिकायत कर जांच की मांग करने संबंधी समाचार संज्ञान में आने पर उन्होंने बीते मई महीने में यूपी के मुख्य सचिव के कार्यालय में एक आरटीआई दायर कर दागी मंत्री रज़ा के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई कार्यवाही के संबंध में 6 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी।मुख्य सचिव कार्यालय के अनुसचिव एवं जन सूचना अधिकारी पी. के. पांडेय ने बीते 31 मई को संजय का RTI आवेदन गोपन अनुभाग-1 को अंतरित किया था।गोपन अनुभाग-1 के पीआईओ धर्मपाल सिंह ने बीते 19 जून के पत्र के माध्यम से संजय को बताया है कि मोहसिन रज़ा के कथित अपराध और भ्रष्टाचार से संबंधित कोई भी शिकायती पत्र गोपन अनुभाग-1 में प्राप्त नहीं हुआ है और इस आधार पर रज़ा के खिलाफ जांच,कार्यवाही,स्पस्टीकरण,FIR आदि से संबंधित सूचना देने से मना कर दिया है।

लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही स्थापित करने वाले के क्षेत्र में मुखर रूप कार्यशील संजय कहते हैं कि योगी ने बीते मार्च में यूपी की बागडोर संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए 'जीरो टॉलरेंस टु करप्शन' का दम भरते हुए अनगिनत घोषणाएं कीं थीं पर अब खुद के मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप पर दागी मंत्री का स्पस्टीकरण तलब करने या जांच बैठाने जैसी प्राथमिक कार्यवाही शुरू तक न कराने से यह साफ होता जा रहा है कि यूपी में सिर्फ नाम बदले है और सत्ता आज भी उच्च पदासीन भ्रष्ट व्यक्तियों को बचाने की उसी मानसिकता से काम कर रही है जिससे पूर्ववर्ती सपा शासनकाल में कर रही थी।

संजय ने बताया कि वे इस संबंध में सूबे राज्यपाल से व्यक्तिगत भेंटवार्ता हेतु मिलने का समय लेकर उनको सम्पूर्ण प्रकरण से अवगत कराकर उनसे इस प्रकरण में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे।

Tuesday, July 18, 2017

योगी आदित्यनाथ,महंत अवैद्धनाथ के चुनावी हलफनामे सार्वजनिक करने से इंकार।

यूपी की सरकार ने सूबे के वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ और उनके आध्यात्मिक गुरु महंत अवैद्धनाथ समेत गोरखपुर के अब तक के सभी विजयी सांसदों के चुनावी हलफनामों को आरटीआई एक्ट के तहत सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया है।चौंकाने वाला यह खुलासा सूबे की राजधानी लखनऊ के मानवाधिकार कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा दायर की गई एक आरटीआई पर गोरखपुर के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा दिये गए जबाब से हुआ है।

संजय ने बताया कि उन्होंने बीते मई माह में एक आरटीआई दायर कर साल 1951-52,1957,1962,1971,1977,1980,1984,1991,1996,1998,1999,2004,2009 और 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में यूपी की गोरखपुर सीट से विजयी हुए प्रत्याशियों के चुनावी हलफनामों की प्रतियां मांगी थीं।गोरखपुर के सहायक जिला निर्वाचन 
अधिकारी और जन सूचना अधिकारी ने बीते 19 जून को संजय को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव नियोजन के आदेश दिनांक 18 अप्रैल 2017 का हवाला देते हुए चुनावी हलफनामे आरटीआई में सार्वजनिक करने से मना कर दिया है।

एक्टिविस्ट संजय ने बताया कि हालाँकि चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के चुनावी हलफनामे अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना आरंभ किया है किंतु पूर्व के वर्षों के हलफनामे वेबसाइट पर न होने के कारण ही उन्होंने यह आरटीआई लगाई थी जिस पर गलत आधार देते हुए सूचना देने से मना किया गया है जो गैरकानूनी है।संजय ने जनसूचना अधिकारी पर सीएम की चापलूसी में आरटीआई एक्ट के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है।


जनसूचना अधिकारी के जबाब से असंतुष्ट संजय ने इस मामले में अपील दायर कर सूचना लेने की बात कही है।

Thursday, June 8, 2017

UP : एंटी भू-माफिया टास्कफोर्स पंहुची IPS अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर के अवैध कब्जों की शिकायत ।


To download original documents, please click this weblink http://tahririndia.blogspot.in/2017/06/activist-sanjay-sharma-complains-in.html



Lucknow/ 08-06-17
यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की एक्टिविस्ट पत्नी नूतन ठाकुर पर भू-माफिया होने का गंभीर आरोप लगा है। 


लखनऊ के मानवाधिकार कार्यकर्ता संजय शर्मा ने नूतन ठाकुर पर अपने आईपीएस पति अमिताभ ठाकुर के उच्च पुलिस पद की आड़ में दबंगई द्वारा सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जे करने का गंभीर आरोप लगाते हुए लखनऊ के जिलाधिकारी और  जिला एन्टी भू-माफिया टास्क फोर्स के पदेन अध्यक्ष को शिकायत भेजते हुए नूतन द्वारा कब्जाई गई भूमि को कब्जामुक्त कराते हुए नूतन ठाकुर के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही करने की मांग की है।



एक्टिविस्ट संजय ने नूतन पर अवैध रूप से रजिस्ट्रियां कराकर दर्जनों मूल आबंटियों के साथ धोखाधड़ी करने और ग्राम समाज की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हो जाने का आरोप भी लगाया है।




एक्टिविस्ट संजय ने बताया कि उन्होंने तहसीलदार सदर द्वारा जन सूचना अधिकार में दी गई सूचना के साथ 4 अन्य प्रमाण भेजते हुए प्रमाणों के सम्यक संज्ञान लेकर  नियमानुसार कार्यवाही करते हुए नूतन ठाकुर द्वारा गोमतीनगर विस्तार लखनऊ के खरगापुर में अपने आईपीएस पति अमिताभ ठाकुर के उच्च पुलिस पद की आड़ में दबंगई द्वारा अवैध रूप से कब्जाई गई भूमि को कब्जामुक्त कराते हुए नूतन ठाकुर के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही करते हुए कृत कार्यवाही से उन्हें अवगत भी कराने की मांग जिलाधिकारी से की है।

Activist Sanjay Sharma complains in ANTI BHOO MAFIA TASKFORCE against UP IPS Amitabh Thakur's wife Nutan.

UP : एंटी भू-माफिया टास्कफोर्स पंहुची IPS अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर के अवैध कब्जों की शिकायत ।

यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की एक्टिविस्ट पत्नी नूतन ठाकुर पर भू-माफिया होने का गंभीर आरोप लगा है। 

लखनऊ के मानवाधिकार कार्यकर्ता संजय शर्मा ने नूतन ठाकुर पर अपने आईपीएस पति अमिताभ ठाकुर के उच्च पुलिस पद की आड़ में दबंगई द्वारा सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जे करने का गंभीर आरोप लगाते हुए लखनऊ के जिलाधिकारी और  जिला एन्टी भू-माफिया टास्क फोर्स के पदेन अध्यक्ष को शिकायत भेजते हुए नूतन द्वारा कब्जाई गई भूमि को कब्जामुक्त कराते हुए नूतन ठाकुर के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही करने की मांग की है।

एक्टिविस्ट संजय ने नूतन पर अवैध रूप से रजिस्ट्रियां कराकर दर्जनों मूल आबंटियों के साथ धोखाधड़ी करने और ग्राम समाज की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हो जाने का आरोप भी लगाया है।


एक्टिविस्ट संजय ने बताया कि उन्होंने तहसीलदार सदर द्वारा जन सूचना अधिकार में दी गई सूचना के साथ 4 अन्य प्रमाण भेजते हुए प्रमाणों के सम्यक संज्ञान लेकर  नियमानुसार कार्यवाही करते हुए नूतन ठाकुर द्वारा गोमतीनगर विस्तार लखनऊ के खरगापुर में अपने आईपीएस पति अमिताभ ठाकुर के उच्च पुलिस पद की आड़ में दबंगई द्वारा अवैध रूप से कब्जाई गई भूमि को कब्जामुक्त कराते हुए नूतन ठाकुर के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही करते हुए कृत कार्यवाही से उन्हें अवगत भी कराने की मांग जिलाधिकारी से की है।

Sunday, June 4, 2017

नमामि गंगे के 3 साल : वादा 12000 करोड़ का, खर्च पाए महज़ 1836.40 करोड़ ( 15.30%) - ऐसे कैसे साफ होगी गंगा? कक्षा 11 की छात्रा का मोदी अंकल से सबाल?

नमामि गंगे के 3 साल : वादा 12000 करोड़ का, खर्च पाए महज़ 1836.40 करोड़ ( 15.30%) - ऐसे कैसे साफ होगी गंगा? कक्षा 11 की छात्रा का मोदी अंकल से सबाल? 


3 सालों में 12000 करोड़ खर्चने की घोषणा के बाद बजट प्राविधान हुआ 5378 करोड़ का जिसमें से स्वीकृत हो पाए 3633 करोड़ जिसमें से वास्तव में खर्च हो पाए महज़ 1836.40 करोड़ रुपये।

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लखनऊ/05  मई 2017

आज विश्व पर्यावरण दिवस है यानि साल का वह दिन जब पूरा विश्व पर्यावरण संरक्षण की अपनी जिम्मेदारी को याद कर निभाने की कसम खायेगा । पर पर्यावरण संरक्षण की कसम खाने वाले वास्तव में अपनी कसम कितनी निभाएंगे , ये उनकी अपनी खुद की नैतिकता  का सवाल हो सकता है लेकिन अगर आज पर्यावरण दिवस के दिन भारत की जीवनदायिनी गंगा नदी को पुनर्जीवन देने के सम्बन्ध में समय समय पर किये गए बड़े-बड़े वादों की  बात न की  जाए तो बात कुछ अधूरी सी रहेगी । क्या आप जानते हैं कि वैज्ञानिक दृष्टि से गंगा का जल  पीने और नहाने के योग्य नहीं रह गया है और इसकी पूरी जिम्मेदारी हमारी सरकारों की है । बड़ा सबाल यह है कि  केंद्र की वर्तमान सरकार और पीएम मोदी ने गंगा की साफ सफाई पर किए गए अपने वादे पूरे किए हैं या पिछले लोक सभा चुनाव और उसके बाद की गई घोषणाएं महज जुमला बनकर रह गई हैं और यही एक कारण है की गंगा मैया आज भी मैली की मैली ही हैं।  अब राजधानी लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल की राजाजीपुरम शाखा   की कक्षा 11 की 15 वर्षीय छात्रा और देश में 'आरटीआई गर्ल' के नाम से प्रसिद्ध ऐश्वर्या पाराशर द्वारा लगाई गई एक आरटीआई के जवाब से जो चौकाने वाला खुलासा हुआ है उसने केंद्र की बीजेपी सरकार और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गंगा साफ सफाई पर किए गए बड़े-बड़े वादों की हवा निकाल दी है।

दरअसल ऐश्वर्या ने बीते अप्रैल माह की 15 तारीख को भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय में एक आरटीआई दायर कर साल 2014 से 2017 तक के समय में नमामि गंगे योजना पर किए गए खर्चे और गंगा सफाई योजनाओं के संबंध में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठकों की जानकारी मांगी थी।

 प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव एवं केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी प्रवीण कुमार ने ऐश्वर्या का आरटीआई आवेदन बीते 12 मई को भारत सरकार के जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय को ट्रांसफर कर दिया था। इस मंत्रालय के अवर सचिव के. के. सपरा ने बीते मई की 29 तारीख को ऐश्वर्या को एक पत्र भेजकर इस संबंध में सूचना दी है।

 सपरा ने ऐश्वर्या को बताया है कि वित्तीय वर्ष 2014 -15 में गंगा साफ सफाई के लिए 2053 करोड़ों रुपयों का बजट प्रावधान किया गया जिसमें से महज 326 करोड़ रुपए रिलीज किए गए और केवल 170 करोड़ 99 लाख रुपये ही खर्च हो पाए।इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2015 -16 में गंगा साफ सफाई के लिए 1650 करोड़ों रुपयों का बजट प्रावधान किया गया जिसमें से 1632 करोड़ रुपए रिलीज किए गए और केवल 602 करोड़ 60 लाख रुपये ही खर्च हो पाए और वित्तीय वर्ष 2016 -17 में 1675 करोड़ रुपयों का बजट प्राविधान कर निर्गत किए गए लेकिन केवल 1062 करोड़ 81 लाख रुपए ही खर्च किए जा सके हैं। जीव विज्ञान की छात्रा ऐश्वर्या कहती हैं कि गंगा साफ सफाई के लिए पिछले 3 सालों में 12000 करोड़ रुपयों का बजट देने की बात कही जाती है उसमें से 5378 करोड़ ही बजट में दिए जाते हैं से उसमें 3633 करोड़ रुपए खर्चने के लिए निकाले जाते हैं जिसमें से केवल 1836 करोड़ 40 लाख रुपए ही वास्तव में खर्चे जाते हैं। बकौल ऐश्वर्या गंगा साफ सफाई पर खर्च की गई यह धनराशि खर्चे के लिए निकाली गई धनराशि की 50% है यानी कि खर्चे के लिए जितना धन वास्तव में निकाला गया उसमें से भी आधा खर्च नहीं हो पाया है। विज्ञान की छात्रा ऐश्वर्या अपनी गणनाओं के आधार पर बताती हैं गंगा सफाई पर खर्ची गई यह धनराशि बजट में निर्धारित 5378 करोड़ की धनराशि की महज 34% ही है।


राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की वेबसाइट के हवाले से ऐश्वर्या बताती हैं कि नमामि गंगे कार्यक्रम की शुरुआत जून 2014 में हुई थी और उस समय गंगा सफाई के इस कार्यक्रम को 5 वर्षों में 20000 करोड़ का बजट देने की बात कही गई थी। इस आधार पर 3 वर्षों का निर्धारित बजट 12000 करोड रुपए मानते हुए हैं अब तक हुए 1836.40 करोड़ के खर्चे को ऐश्वर्या ने निर्धारित बजट का 15.30% होने के आधार पर नाकाफी बताया है।

ऐश्वर्या को बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में गंगा सफाई के लिए 2550 करोड़ का बजट रखा गया है जिसमें बिना पैसा रिलीज हुए ही अब तक 25 करोड़ 71 लाख रुपये खर्चे जा चुके हैं।

गंगा साफ सफाई की मीटिंग के संबंध में मांगी गई सूचना पर सपरा ने ऐश्वर्या को भारत सरकार की वेबसाइट देखने की बात कही जिसके आधार पर ऐश्वर्या ने बताया कि राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की अब तक छह मीटिंग हो चुकी हैं जिनमें से तीन की अध्यक्षता पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की है एक की अध्यक्षता वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है और दो की अध्यक्षता जल संसाधन नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने की है।


जीव विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी में विशेष रूचि रखने वाली इस जागरुक छात्रा ने कहा कि यदि गंगा जिंदा है तो भारत जिंदा है और यदि गंगा जिंदा नहीं रहेगी तो भारत के अस्तित्व पर भी संकट आ जाएगा। आरटीआई जवाब से दुखी ऐश्वर्या ने बताया कि वह जल्द ही अपने मोदी अंकल को पत्र लिख उन से अनुरोध करेंगी कि वह अपने वादे के अनुसार नमामि गंगे कार्यक्रम के लिए निर्धारित 20,000 करोड़ रुपए में से बचे पैसे बाकी बचे 2 वर्षों में खर्चने की व्यवस्था करें और गंगा में गिरने वाले सीवरों के ट्रीटमेंट प्लांट के प्रबंधन और औद्योगिक कचरा रोकथाम प्रबंधन की दिशा में कड़े कदम उठाएं ताकि वे गंगा से किये अपने वादे निभाकर ऐश्वर्या जैसे देश के करोड़ों बच्चों को एक बेहतर भविष्य दे सकें।