Friday, December 9, 2022

  मोदी सरकार ने पेश की मितव्ययिता और पैसे के सदुपयोग की मिसाल : महज़ 1 करोड़ 2 लाख में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ और 9 करोड़ 48 लाख में कर दिखाए ‘हर घर तिरंगा अभियान’ जैसे देशव्यापी विशाल और भव्य आयोजन : आरटीआई खुलासा.

 लखनऊ/शनिवार,10 दिसम्बर 2022 …………………………………

देश भर को एकता के सूत्र में पिरोकर देश विदेश में रह रहे भारतीयों के मन मस्तिष्क में देशभक्ति की भावना का सैलाब लाने वाले ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ और ‘हर घर तिरंगा अभियान’ जैसे  देशव्यापी विशाल और भव्य आयोजनों को केंद्र सरकार ने जिस मितव्ययिता के साथ संपन्न किया है उसका कोई सानी नहीं है. मोदी सरकार द्वारा सरकारी खजाने का पूरा-पूरा सदुपयोग करने का खुलासा करने वाले यह बात यूपी की राजधानी लखनऊ के राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा बीती 13 अक्टूबर को डाली गई एक आरटीआई अर्जी पर भारत सरकार के संस्कृति विभाग के अंडर सेक्रेटरी पप्पुन्जय कुमार द्वारा बीती 11 नवम्बर को दी गई सूचना से सामने आई है.


 

 

पप्पुन्जय ने संजय को बताया है कि आजादी का अमृत महोत्सव मनाने का निर्णय लेने सम्बन्धी कोई भी फाइल नहीं है. भारत के फ्लैग कोड के आदेश संस्कृति विभाग द्वारा जारी नहीं करने की बात बताते हुए पप्पुन्जय ने संजय को बताया है कि हर घर तिरंगा अभियान की फाइल  एक ई-फाइल है जिसका निरीक्षण संजय द्वारा अपनी सुविधानुसार कभी भी किया जा सकता है.

 


हर घर तिरंगा अभियान के लिए झंडे भारत सरकार की टेक्सटाइल मिनिस्ट्री द्वारा सप्लाई किये जाने की बात बताते हुए अभियान के बाद तिरंगे का सम्मान बनाए रखने के लिए भारत सरकार के गृह कार्य विभाग द्वारा आदेशिका जारी करने की बात भी पप्पुन्जय ने संजय को भेजे पत्र में लिखी है.

 

फ्लैग कोड के सम्बन्ध में जन-जागरूकता के लिए चलाये गए अभियानों पर अलग से फंड्स की व्यवस्था नहीं होने की बात भी  पप्पुन्जय ने संजय को बताई है.

 

इन कार्यक्रमों के आयोजनों में मोदी सरकार द्वारा सरकारी पैसे के पूरे-पूरे सदुपयोग के साथ-साथ अतिशय मितव्ययिता की मिसाल पेश करने की बात कहते हुए संजय ने मोदी सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा की है.

 


Tuesday, December 6, 2022

शुभ उपकार अखबार छापने वाली प्रिंटिंग प्रेसों पर भी कसा जांच का शिकंजा : हरदोई के डीएम ने जिला सूचना अधिकारी को सौंपी जांच.

 लखनऊ/बुधवार, 07 दिसम्बर, 2022 ………………………..

यूपी के जिले हरदोई जिले से प्रकाशित होने वाले डा. संपत लाल साहू के हिंदी दैनिक शुभ उपकार और उर्दू दैनिक शुभ उपकार समाचार पत्रों की आरएनआई जांच के बाद अब इन समाचार पत्रों की छपाई करने वाली प्रिंटिंग प्रेसें भी जांच की जद में आ गई हैं. इन अखबारों के मालिकों और इनकी छपाई करने वाली प्रिंटिंग प्रेसों पर घोषित प्रसार संख्या से कम संख्या में समाचार पत्रों की छपाई करके फर्जीबाड़ा करने का आरोप लगाते हुए राजधानी के राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा की गई एक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम हरदोई ने जिला सूचना अधिकारी को अखबारों और अखबारों को छापने वाली प्रिंटिंग प्रेसों की जांच करने का आदेश दिया है जिसके बाद जिला सूचना अधिकारी ने बीती 2 दिसम्बर को संपत लाल साहू से जवाब माँगा है और इसकी सूचना एक अलग पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी हरदोई को भी दी है.

 


संजय बताते हैं कि उनको हेल्पलाइन 7991479999 पर शिकायत मिली थी कि लखनऊ निवासी संपत लाल साहू ने हरदोई से निकलने वाले हिंदी समाचार पत्र , RNI पंजीकरण संख्या UPHIN/2003/12001RNI टाइटल कोड UPHIN32967 के लिए अपना पता सूरी हाउस,गाँधी भवन के सामने, हरदोई ई-मेल dainikshubhupkar04@gmail.com मोबाइल नंबर 8400606091 दिया है और इस समाचार पत्र की छपाई चार प्रिंटिंग प्रेसों क्रमशः प्रियदर्शिनी युवा कल्याण प्रिंटिंग प्रेस एलडीए कॉलोनी लखनऊ, पॉइंट ओफ़्सेट लखनऊ, शुभ उपकार प्रकाशन प्रिंटर्स लखनऊ और चकगति प्रेस हरदोई में होनी बताई है. इसी नाम के दूसरे उर्दू समाचार पत्र , RNI पंजीकरण संख्या UPURD/2010/33730, RNI टाइटल कोड UPURD04384 के लिए साहू ने अपना पता B-74, आवास विकास कॉलोनी हरदोई ई-मेल saurabh.258@rediffmail.com मोबाइल नंबर 9452275438 दिया है और इस समाचार पत्र की छपाई सात प्रिंटिंग प्रेसों रॉयल ऑफसेट प्रेस हुसैनगंज लखनऊ और अन्य 6 प्रेसों में होनी बताई गई है. 

 

संजय ने अपनी शिकायत में लिखा था कि साहू द्वारा उपरोक्त दोनों समाचार पत्रों की घोषित प्रसार संख्या के आधार पर समस्त सरकारी लाभ लिए जा रहे हैं किन्तु प्रिंटिंग प्रेसों के मालिकों और प्रबंधन के साथ मिलकर घोषित प्रसार संख्या से कम संख्या में समाचार पत्रों की छपाई करके अपने निजी लाभ के लिए सरकार के साथ धोखाधड़ी की जा रही है जिसकी जांच समाचार पत्रों के प्रसार के प्रमाणों, अखबार बेचने से प्राप्त धनराशि, प्रिंटिंग प्रेसों द्वारा छापे गए सभी अखबारों की संख्या के सापेक्ष प्रिंटिंग प्रेसों द्वारा खरीदे गए कच्चे माल, खर्ची गई बिजली, प्रिंटिंग मशीन की क्षमता, प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या व अन्य स्टाफ की संख्या आदि की अभिलेखीय जांच से की जा सकती है जिस पर डीएम हरदोई ने जांच कराने का निर्णय लिया है.   

                                            

बकौल संजय क्योंकि पी.आर.बी. अधिनियम 1867 के तहत समाचार पत्रों के अनियमित कृत्यों के सम्बन्ध में जांच कराने के लिए जिलाधिकारी सक्षम प्राधिकारी हैं इसीलिए उन्होंने यह  अनुरोध किया है कि इन समाचार पत्रों और प्रिंटिंग प्रेसों द्वारा मिलकर किये जा रहे फर्जीबाड़े की जांच कराकर समाचार पत्रों और प्रिंटिंग प्रेसों के खिलाफ अग्रेत्तर प्रशासनिक एवं विधिक कार्यवाही कार्यवाही की जाए.

 

बकौल संजय पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए फर्जी प्रसार संख्या दर्शाने वाले समाचार पत्रों और इन समाचार पत्रों के फर्जीबाड़े में सहयोग करने वाली प्रिंटिंग प्रेसों पर लगाम कसना अब समय की आवश्यकता है और इसी मुहिम के तहत उन्होंने शुभ उपकार अखबार का मामला एक टेस्ट केस की तरह उठाया है.

 

Friday, December 2, 2022

  ‘शुभ उपकार’ अखबार के दिल्ली और यूपी के 4 एडिशनों के सर्कुलेशन की जांच कर CBC को रिपोर्ट दे RNI : भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का फरमान.


लखनऊ के थाना कृष्णानगर क्षेत्र स्थित कानपुर रोड एलडीए कॉलोनी के सेक्टर D-1 के आवास संख्या SS-2 बटा 1654 निवासी डा. संपत लाल साहू की प्रिंटिंग प्रेस और अखबारों पर सरकारी जांचों का शिकंजा कसता चला जा रहा है. जिलाधिकारी लखनऊ के कार्यालय के साथ धोखाधड़ी करके लखनऊ के नाका हिंडोला क्षेत्र में राधिका धर्मशाला के पास चकमाकी दुगावा स्थित आवासीय प्लाट संख्या 274 बटा 31 स्थित श्री बालाजी प्रकाशन प्रिंटर्स नाम की प्रिंटिंग प्रेस के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही कई अन्य व्यक्तियों द्वारा कई अन्य नामों से प्रिंटिंग प्रेसों का पंजीकरण करा लेने का आरोप लगाकर राजधानी के राजाजीपुरम क्षेत्र निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा की गई शिकायतों पर अभी जांच चल ही रही है कि इसी बीच संजय की एक और शिकायत को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ़ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन के उपनिदेशक डा. चिराग भोर्निया ने बीती 28 नवम्बर को पत्र जारी करके डा. संपत लाल साहू के दिल्ली और उत्तर प्रदेश से “शुभ उपकार” नाम से निकलने वाले 4 संस्करणों के सर्कुलेशन, पब्लिशरों के नाम, ओनर्स के नाम, अखबारों के प्रिंटर्स के नाम और इनके पतों का वेरिफिकेशन करके केन्द्रीय संचार ब्यूरो ( CBC ) को उपलब्ध कराने के लिए भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक के कार्यालय ( RNI ) को आदेशित किया है. इस पत्र की प्रति शिकायतकर्ता संजय को भी भेजी गई है जिसमें RNI की रिपोर्ट के आधार पर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा इन अखबारों के खिलाफ आगे की कार्यवाही करने की बात भी लिखी है.

संजय बताते हैं कि शुभ उपकार नाम से दिल्ली से निकलने वाले हिंदी दैनिक का सर्कुलेशन 17500; यूपी के हरदोई से निकलने वाले उर्दू दैनिक का सर्कुलेशन 16500; यूपी के हरदोई से निकलने वाले हिंदी दैनिक का सर्कुलेशन 25000 और लखनऊ से निकलने वाले साप्ताहिक हिंदी का सर्कुलेशन 15800 डिक्लेअर किया गया है जबकि वास्तव में इन अखबारों की नाम मात्र की प्रतियाँ छापी जा रही हैं और चार्टर्ड अकाउंटेंट की फर्जी रिपोर्ट और फर्जीबाड़ा कर चल रही बालाजी प्रिंटर्स जैसी प्रिंटिंग प्रेसों के नाम देकर फर्जी सर्कुलेशन के आधार पर विज्ञापन बटोरने का गोरखधंधा चलाया जा रहा है. संजय ने बताया कि वे इन अखबारों की वेरिफिकेशन रिपोर्ट देने वाले चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के लाइसेंस रद्द कराने के लिए सक्षम फोरम पर अलग से शिकायत करने जा रहे हैं.

संजय का कहना है कि इन अखबारों ने छपाई के लिए जिन प्रिंटिंग प्रेसों के नाम दिए हैं उनके पास इतना इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है कि वे उन सब अखबारों की घोषित प्रसार संख्या में छपाई कर सकें जिनसे इन प्रिंटिंग प्रेसों ने छपाई का करार किया हुआ है और उनकी शिकायत में यह भी एक प्रमुख बिंदु है जिसकी जांच अब भारत सरकार की संस्था RNI गहनता से करेगी.

संजय ने बताया कि ईमानदारी के साथ अखबार और प्रिंटिंग प्रेस चलाने वाले पत्रकारिता जगत के बहुतायत लोग फर्जी सर्कुलेशन दिखाकर चलने वाले चंद अखबारों और फर्जी छपाई दिखाने वाली चंद प्रिंटिंग प्रेसों के गोरखधंधों की बजह से जबरदस्त रूप से प्रताड़ित है और लगातार घाटा सहने के कारण शनैः शनैः उसी प्रकार कम होते जा रहे हैं जैसे एक खोटे सिक्के के बाज़ार में आ जाने से सभी खरे सिक्कों को बाज़ार से रुखसत होना पड़ जाता है.

संजय ने सार्वजनिक रूप से यह अपील भी की है कि अख़बारों और प्रिंटिंग प्रेसों के फर्जीबाड़े से पीड़ित व्यक्ति भ्रष्टाचार विरोधी व्हाट्सएप हेल्पलाइन 7991479999 पर प्रमाण भेजें ताकि देश में ईमानदार पत्रकारिता को बचाए रखा जा सके.