Saturday, September 25, 2021

केन्द्रीय मंत्री कौशल किशोर के हाथों देश भर के प्रख्यात व्यक्तियों को मिलेगा ‘तहरीर रत्न’ सम्मान.



 

लखनऊ / 26 सितम्बर 2021……………….

 

 

पारदर्शिता, जबाबदेही और मानवाधिकार क्रांति के लिए एक पहल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित एक पंजीकृत सामाजिक संस्था है जो लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही की सुनिश्चितता स्थापित करने के साथ-साथ मानवाधिकारों के संरक्षण के क्षेत्रों में विगत कई वर्षों से कार्यशील है. इस संस्था का शार्ट नाम ‘तहरीर’ है .संस्था जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध व्यापक स्वर मुखरण हेतु सतत संघर्षरत एवं कटिबद्ध है. अखिल भारतीय भ्रष्टाचार विरोधी मोबाइल/व्हाट्सएप हेल्पलाइन 7991479999 संस्था द्वारा संचालित है. इस हेल्पलाइन के माध्यम से अब तक असंख्य पीड़ितजन  निःशुल्क राय लेकर अपनी समस्याओं का समाधान करा चुके हैं.  

 

 

 

आगामी 10 अक्टूबर को संस्था द्वारा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक निजी होटल में अपराह्न 4 बजे से ‘स्थापना दिवस’ एवं ‘अखिल भारतीय ‘तहरीर रत्न सम्मान समारोह’ नाम से एक  कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें विधि, विज्ञान, प्रौधौगिकी, समाजसेवा, प्रबंध, पत्रकारिता, जनसंपर्क माध्यम, प्रशासन और शासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले देश भर के समाज में प्रख्यात व्यक्तियों को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय मंत्री कौशल किशोर के हाथों सम्मानित किया जाएगा.

 

 

संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि इस मौके पर संस्था की लीगल हेल्पलाइन 8004560000 तथा आरटीआई हेल्पलाइन 9451036633 का उद्घाटन भी किया जाएगा.

 

 

Friday, September 17, 2021

अगर जेल में बंद पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ईमानदार तो देश में बेईमान कोई नहीं : एक्टिविस्ट संजय शर्मा.

 

लखनऊ /18 सितम्बर 2021 …………

अगर जेल में बंद पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ईमानदार हैं तो देश का कोई भी नेता या अधिकारी बेईमान नहीं है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ऐसा कह रहे हैं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ चुनावी मैदान में उतर कर दो-दो हाथ करने का ऐलान करने वाले लखनऊ के एक्टिविस्ट संजय शर्मा.

 

संजय ने आज लखनऊ में एक प्रेसवार्ता के दौरान लखनऊ की बीकेटी तहसील के अपर जिला सहकारी अधिकारी माधव दत्त द्विवेदी  की 7 पेज की जांच रिपोर्ट मीडिया को देते हुए बताया कि कैसे अमिताभ ठाकुर ने सेवाकाल में फील्ड की पोस्टिंग्स में रहते अपने ऊंचे पुलिस पद का दुरुपयोग करते हुए पुलिसिया हथकण्डे अपनाए और लखनऊ के पॉश गोमतीनगर इलाके में बीघों रिहायशी जमीन अपनी पत्नी नूतन ठाकुर ने नाम करा ली थी.

 

माधव दत्त द्विवेदी की इस रिपोर्ट को आप जैसे जैसे पढ़ते जाते हैं बैसे बैसे आपके दिमाग में हिंदी फिल्मों जैसा एक चलचित्र जैसा चलने लगता है और आप खुद महसूस कर पाते हैं कि उस समय फील्ड में तैनात आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने फिल्मी विलेन की मानिंद लखनऊ की ममता गृह निर्माण समिति के तत्कालीन सचिव डिकर सिंह बिष्ट  को उनके द्वारा आमजनों को बेचे गए 14 प्लॉट्स की रजिस्ट्री दूसरी बार नूतन ठाकुर के नाम में करने पर मजबूर किया होगा और रजिस्ट्री हो जाने के बाद कैसे अमिताभ ने डिकर सिंह बिष्ट  को गायब किया होगा.

 

माधव दत्त द्विवेदी की इस रिपोर्ट में लिखा है कि नूतन ठाकुर की बजह से 14 आम जन अपनी गाढ़ी कमाई लुटाकर इन 14 प्लॉट्स की रजिस्ट्री कराने के बाद भी अपने-अपने भूखंड से बेदखल कर दिए गए. नूतन द्वारा किये गए अवैध कब्जे की सूचना थाना गोमतीनगर को दिए जाने लेकिन थाना गोमतीनगर द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किये जाने की बात भी इस रिपोर्ट में लिखी है.

 

अमिताभ की पुलिसिया हनक का आलम यह रहा  कि नूतन ने समिति की सड़क यानि कि आम रास्ता भी बंद करके अपने प्लाट में मिला लिया. ‘सैयां भये कोतवाल तो डर कहे का’ कहावत आपने सुनी तो बहुत होगी पर अगर आपको देखना हो कि यह कहावत धरातल पर क्या-क्या चमत्कार कर सकती है तो माधव दत्त द्विवेदी की रिपोर्ट को पढने के बाद एक बार उन 14 बदनसीबों से भी जाकर मिल आइये जिनकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई इन दोनों पति-पत्नी की जमीनों पर कब्ज़ा करने की हवस की भेंट चढ़ चुकी है और इन बेचारों की आहों को भी महसूस कर आइये.

                                                                

 

संजय कहते हैं कि अमिताभ ठाकुर द्वारा पुलिस तंत्र का दुरुपयोग करके डिकर सिंह बिष्ट  को धरती से गायब करा देने के चर्चे लम्बे समय से आम हैं. बकौल संजय उनको विश्वास है कि यदि सरकार डिकर सिंह बिष्ट  मामले की सीबीआई जांच करा ले तो इस समय जेल में बंद अमिताभ ठाकुर डिकर सिंह बिष्ट  मामले में भी जेल की सलाखों की पीछे पंहुचेगा.

 

 

संजय ने कहा कि भू-माफियाओं और गुंडों की तरह जमीनों पर अवैध कब्जे करके मामलों को सिविल कोर्ट की कानूनी प्रक्रिया में उलझाकर गरीब आमजनों के हकों पद डाका डालने वालों को समाजसेवी कहलाने के कोई नैतिक अधिकार नहीं है. संजय ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर को तब तक समाजसेवी न लिखें जब तक ठाकुर दंपत्ति माधव दत्त द्विवेदी की रिपोर्ट में लिखे 14 पीड़ितों को उनकी जमीनें बापस नहीं कर देते.

 

 

ईमानदार दिखने और ईमानदार होने में बहुत बड़ा अंतर होने की बात कहते हुए संजय ने माधव दत्त द्विवेदी की रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि अगर देश का कोई मीडिया संस्थान जेल में बंद पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को ईमानदार कहता है तो फिर उस मीडिया संस्थान को देश के किसी भी नेता या अधिकारी को बेईमान कहने का कोई नैतिक हक़ नहीं है. 








 

 

 

Friday, September 10, 2021

भारत में पेगासस स्पाइवेयर प्रयोग मामले की जांच के लिए क्या किया,आरटीआई में नहीं बताएगा पीएमओ.

 

 

PMOs big ‘NO’ to disclose information under RTI act on actions taken to enquire use of Pegasus spyware in India.

 



 

लखनऊ / 10 सितम्बर 2021 ……………

इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ द्वारा बनाये गए पेगासस नाम के स्पाइवेयर प्रोग्राम के भारत में प्रयोग किये जाने के मामले की जांच कराने के लिए भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की गई कार्यवाही की सूचना को भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय ने आरटीआई एक्ट के तहत सार्वजनिक करने से मना कर दिया है.

 

दरअसल यूपी की राजधानी लखनऊ के आरटीआई एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा ने प्रधानमंत्री कार्यालय में सूचना का अधिकार कानून के तहत अर्जी देकर यह जानना चाहा था कि बहुचर्चित पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए देश के प्रधानमंत्री कार्यालय ने क्या-क्या कार्यवाहियां कीं हैं.

 

प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव एवं केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी प्रवीन कुमार ने संजय को पत्र भेजकर कहा है कि संजय द्वारा माँगी गई सूचना सूचना का अधिनियम 2005 की धारा 2(f) के अंतर्गत सूचना की परिभाषा में नहीं आती है और सूचना देने से इन्कार कर दिया है.

 

बकौल संजय सूचना का अधिनियम 2005 की धारा 2(f) के अनुसार किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में धारित अभिलेख,दस्तावेज,ज्ञापन,ई-मेल,मत,सलाह,प्रेस विज्ञप्ति,परिपत्र,आदेश,लागबुक,संविदा रिपोर्ट,कागज़ पत्र, नमूने, मॉडल, आंकड़ों संबंधी सामग्री सूचना की परिभाषा में आते है और इस आधार पर संजय का कहना है कि इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ द्वारा बनाये गए पेगासस नाम के स्पाइवेयर प्रोग्राम के भारत में प्रयोग किये जाने के मामले की जांच कराने के लिए भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की गई कार्यवाही की सूचना भी सूचना की परिभाषा से आच्छादित है.

 

प्रवीन कुमार के इस उत्तर को मनमाना और आरटीआई एक्ट के अनुसार नहीं होने की बात कहते हुए संजय ने आरटीआई एक्ट की धारा 19(1) के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रथम अपीलीय अधिकारी को बीते कल प्रथम अपील भेज दी है.

 

बताते चलें कि पेगासस एक स्पाइ सॉफ्टवेयर है जिसे अगर किसी स्मार्टफ़ोन फ़ोन में पंहुचा दिया जाए, तो हैक करने वाला उस स्मार्टफोन के माइक्रोफ़ोन, कैमरा, एन्क्रिप्टेड ऑडियो और एन्क्रिप्टेड टेक्सट मेसेज, ईमेल और लोकेशन तक की जानकारी पा सकता है.

 

 

 

PMO’s big ‘NO’ to disclose information under RTI act on actions taken to enquire use of Pegasus spyware in India.

 

 

भारत में पेगासस स्पाइवेयर प्रयोग मामले की जांच के लिए क्या किया,आरटीआई में नहीं बताएगा पीएमओ.

 

 



लखनऊ / 10 सितम्बर 2021 ……………

इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ द्वारा बनाये गए पेगासस नाम के स्पाइवेयर प्रोग्राम के भारत में प्रयोग किये जाने के मामले की जांच कराने के लिए भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की गई कार्यवाही की सूचना को भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय ने आरटीआई एक्ट के तहत सार्वजनिक करने से मना कर दिया है.

 

दरअसल यूपी की राजधानी लखनऊ के आरटीआई एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा ने प्रधानमंत्री कार्यालय में सूचना का अधिकार कानून के तहत अर्जी देकर यह जानना चाहा था कि बहुचर्चित पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए देश के प्रधानमंत्री कार्यालय ने क्या-क्या कार्यवाहियां कीं हैं.

 

प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव एवं केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी प्रवीन कुमार ने संजय को पत्र भेजकर कहा है कि संजय द्वारा माँगी गई सूचना सूचना का अधिनियम 2005 की धारा 2(f) के अंतर्गत सूचना की परिभाषा में नहीं आती है और सूचना देने से इन्कार कर दिया है.

 

बकौल संजय सूचना का अधिनियम 2005 की धारा 2(f) के अनुसार किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में धारित अभिलेख,दस्तावेज,ज्ञापन,ई-मेल,मत,सलाह,प्रेस विज्ञप्ति,परिपत्र,आदेश,लागबुक,संविदा रिपोर्ट,कागज़ पत्र, नमूने, मॉडल, आंकड़ों संबंधी सामग्री सूचना की परिभाषा में आते है और इस आधार पर संजय का कहना है कि इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ द्वारा बनाये गए पेगासस नाम के स्पाइवेयर प्रोग्राम के भारत में प्रयोग किये जाने के मामले की जांच कराने के लिए भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की गई कार्यवाही की सूचना भी सूचना की परिभाषा से आच्छादित है.

 

प्रवीन कुमार के इस उत्तर को मनमाना और आरटीआई एक्ट के अनुसार नहीं होने की बात कहते हुए संजय ने आरटीआई एक्ट की धारा 19(1) के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रथम अपीलीय अधिकारी को बीते कल प्रथम अपील भेज दी है.

 

बताते चलें कि पेगासस एक स्पाइ सॉफ्टवेयर है जिसे अगर किसी स्मार्टफ़ोन फ़ोन में पंहुचा दिया जाए, तो हैक करने वाला उस स्मार्टफोन के माइक्रोफ़ोन, कैमरा, एन्क्रिप्टेड ऑडियो और एन्क्रिप्टेड टेक्सट मेसेज, ईमेल और लोकेशन तक की जानकारी पा सकता है.