Sunday, March 16, 2025

अवैध सेक्स क्लिनिक को संरक्षण देने वालों पर गरजे संजय शर्मा, उच्च स्तरीय जांच की मांग राजनीतिक संरक्षण और विज्ञापन के लालच में अखबारों द्वारा अवैध सेक्स क्लिनिक को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप

 

अवैध सेक्स क्लिनिक को संरक्षण देने वालों पर गरजे संजय शर्मा, उच्च स्तरीय जांच की मांग

राजनीतिक संरक्षण और विज्ञापन के लालच में अखबारों द्वारा अवैध सेक्स क्लिनिक को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप

 



लखनऊ / रविवार, 16 मार्च 2025 : पारदर्शिता, जवाबदेही, मानवाधिकार और क़ानूनी अधिकारों के लिए संघर्षरत कार्यकर्ता संजय शर्मा ने एक बार फिर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने लखनऊ के इंदिरानगर में संचालित "रॉयल हर्बल क्लिनिक" नामक सेक्स क्लिनिक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह क्लिनिक अनैतिक और अवैध रूप से कार्य कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद इसे राजनीतिक संरक्षण और मीडिया संस्थानों का समर्थन मिल रहा है।

 

बताते चलें कि शर्मा की शिकायत पर क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी लखनऊ डा. राज कुमार यादव ने इस सेक्स क्लिनिक की जांच के लिए एक समिति का गठन कर दिया है जो इस क्लिनिक की जाँच करेगी.

 

शर्मा का कहना है कि उनको बताया गया है कि इस अवैध क्लिनिक को समाजवादी पार्टी से जुड़े कुछ राजनेताओं का आशीर्वाद प्राप्त है, जो इसे कानूनी शिकंजे से बचाने में मदद कर रहे हैं। संजय शर्मा ने और इस सम्बन्ध में  उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग को लेकर प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश विधानसभा और सूचना विभाग के अधिकारियों को भी शिकायतें भेजने की बात कही है ।

 

 

ग़लत विज्ञापनों के ज़रिए जनता को गुमराह करने का आरोप

संजय शर्मा ने इस क्लिनिक को बढ़ावा देने वाले कुछ समाचार पत्रों पर भी निशाना साधा है । उन्होंने आरोप लगाया कि कई अखबारों ने इस क्लिनिक के पक्ष में भ्रामक और गुमराह करने वाले विज्ञापन प्रसारित किए हैं, जिससे आम जनता धोखे का शिकार हो रही है।

 

"ऐसे कई समाचार पत्र हैं जो विज्ञापन के लालच में इस अवैध क्लिनिक का प्रचार कर रहे हैं। इन विज्ञापनों में झूठे दावे किए जाते हैं और जनता को गुमराह किया जाता है। यह सिर्फ़ एक वाणिज्यिक धंधा बन चुका है, जिसमें जनता के स्वास्थ्य और कानून का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है," संजय शर्मा ने कहा।

 

राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा है अवैध क्लिनिक

शर्मा ने आरोप लगाया है कि यह क्लिनिक समाजवादी पार्टी से जुड़े कुछ प्रभावशाली नेताओं के समर्थन से संचालित हो रहा है, जिसके चलते प्रशासन इस पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि इस तरह के क्लिनिक न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि समाज को नैतिक रूप से दूषित करने का कार्य भी कर रहे हैं।

 

"ऐसे क्लिनिक झूठे वादे कर भोले-भाले लोगों से पैसे ऐंठते हैं और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हैं। समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं के समर्थन से यह धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है। अगर इसे रोका नहीं गया, तो आने वाले समय में यह एक गंभीर सामाजिक समस्या बन सकता है," उन्होंने कहा।

 

उच्च स्तरीय जांच की मांग, सूचना विभाग से हस्तक्षेप की अपील

संजय शर्मा ने इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश विधानसभा और सूचना विभाग के समक्ष उठाकर  इस क्लिनिक और इसे समर्थन देने वाले समाचार पत्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाने की बात कही है ।

 

उनका कहना है कि सूचना विभाग को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और उन समाचार पत्रों की जांच करनी चाहिए, जो पैसों के लालच में अवैध क्लिनिकों का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि इस प्रकार के ग़ैर-क़ानूनी और अनैतिक कार्यों पर रोक लगाई जा सके।

 

प्रशासन की भूमिका पर सवाल, क्या होगी कड़ी कार्रवाई?

अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कोई ठोस कार्रवाई करेगा? क्या समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच होगी? और क्या सूचना विभाग उन अखबारों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा जो इस अवैध क्लिनिक का प्रचार कर रहे हैं?

 

संजय शर्मा का कहना है कि यदि जल्द ही इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इसे न्यायालय और मानवाधिकार आयोग के समक्ष भी ले जाएंगे।

 

निष्कर्ष

यह मामला यह दिखाता है कि कैसे राजनीतिक संरक्षण और मीडिया की अनैतिक गतिविधियों के चलते ग़ैर-क़ानूनी क्लिनिकों को फलने-फूलने का अवसर मिलता है। अब यह देखना होगा कि क्या सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

 

Friday, November 22, 2024

सिटी मोंटेसरी स्कूल द्वारा गंभीर उल्लंघनों के कारण 25वीं अंतर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन का बहिष्कार करने की अपील

 







लखनऊ, 23 नवम्बर 2024 — एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और कानूनी अधिकारों के पैरोकार संजय शर्मा ने 25वीं अंतर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन के लिए आमंत्रित प्रमुख न्यायाधीशों, विधिक विशेषज्ञों और अन्य सम्माननीय व्यक्तित्वों से इस सम्मेलन के बहिष्कार की अपील की है, जो 20-24 नवम्बर 2024 के बीच लखनऊ में आयोजित होने वाला है। शर्मा ने यह अपील सिटी मोंटेसरी स्कूल (CMS) द्वारा सम्मेलन आयोजित करने के कारण की है, क्योंकि यह संस्था गंभीर कानूनी, सुरक्षा और मानवाधिकार उल्लंघनों में लिप्त है।

सिटी मोंटेसरी स्कूल, जो भारत के सबसे बड़े निजी विद्यालयों के रूप में पहचाना जाता है, वर्तमान में एक ऐसे संस्थान के रूप में जांच के दायरे में है, जो कई कानूनी और संवैधानिक मानकों का उल्लंघन कर रहा है। संजय शर्मा ने अपने पत्र में उन उल्लंघनों की विस्तार से जानकारी दी है, जिनसे छात्रों, कर्मचारियों और समाज के व्यापक हितों को नुकसान हो रहा है।

शर्मा ने इस पत्र में चार प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला है:

1.     आग सुरक्षा मानकों का उल्लंघन: सिटी मोंटेसरी स्कूल के विभिन्न कैम्पसों में आग सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल के कई कैंपसों में आग बुझाने के उपकरण, अलार्म, और उचित निकासी मार्ग की कमी है, जो राष्ट्रीय भवन कोड 2005 के तहत अनिवार्य है। इस प्रकार की लापरवाही बच्चों और स्टाफ की जान को खतरे में डालती है, जिसे अनदेखा किया जा रहा है।

2.     आवासीय और विकास मानकों का उल्लंघन: CMS के कैंपसों का निर्माण बिना आवश्यक मंजूरी के किया गया है, जो स्थानीय भवन निर्माण नियमों और भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 का उल्लंघन है। यह स्कूल के निर्माण की वैधता पर सवाल खड़ा करता है और भवन सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न करता है।

3.     शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) का उल्लंघन: सिटी मोंटेसरी स्कूल को शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत बच्चों के प्रवेश में भेदभाव करने, अत्यधिक फीस वसूलने और मुफ्त शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने के अधिकार का उल्लंघन है, और यह न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

4.     नगर निगम और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी: CMS पर स्वच्छता, सैनिटेशन, और कचरा निस्तारण की समस्याओं के लिए आरोप लगे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल परिसर में साफ-सफाई के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जो न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुँचाता है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 का उल्लंघन है, जो राज्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करने का कर्तव्य सौंपता है।

शर्मा का पत्र केवल सिटी मोंटेसरी स्कूल के कृत्यों की निंदा नहीं करता, बल्कि उन अधिकारियों और न्यायधीशों से भी यह सवाल करता है कि क्या वे ऐसे सम्मेलन में भाग लेने पर विचार करेंगे, जो एक ऐसे संस्थान द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जो कानूनी, संवैधानिक और मानवाधिकार उल्लंघनों में लिप्त है। शर्मा का तर्क है कि इस सम्मेलन में भाग लेकर वे यह जोखिम उठा सकते हैं कि वे एक ऐसे संस्थान की स्वीकृति दे रहे हैं, जो न्याय, सुरक्षा और मानवाधिकार के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन कर रहा है।

उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि अगर सम्मेलन में भाग लिया जाता है, तो यह एक खतरनाक उदाहरण पेश करेगा, क्योंकि यह ऐसे संस्थान के कार्यों को अप्रत्यक्ष रूप से सही ठहराएगा, जो कानून और शासन के मानकों का उल्लंघन कर रहा है। शर्मा ने सभी अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि सिटी मोंटेसरी स्कूल सभी कानूनी, सुरक्षा और शैक्षिक मानकों का पालन करता है। यदि ऐसा नहीं है, तो सम्मेलन में भाग लेने का निर्णय पुनर्विचार करने योग्य है, ताकि इस प्रकार के उल्लंघनों का समर्थन करने से बचा जा सके।

शर्मा का यह पत्र न केवल सिटी मोंटेसरी स्कूल के कृत्यों के खिलाफ है, बल्कि उन अधिकारियों की भी आलोचना करता है जिन्होंने इन उल्लंघनों को नजरअंदाज किया है। यह पत्र उस संदेश को प्रदर्शित करता है जो दुनिया भर के न्याय और शासन के अग्रणी विचारकों से अपेक्षित है: क्या हम एक ऐसे संस्थान का समर्थन करेंगे जो बच्चों और समाज के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति लापरवाह है?

अंततः, यह सवाल उठता है कि क्या वे प्रमुख न्यायाधीश और विधिक अधिकारी जो इस सम्मेलन में भाग लेने जा रहे हैं, वे न्याय, सुरक्षा और मानवाधिकार के सर्वोत्तम सिद्धांतों के पक्ष में खड़े होंगे, या एक ऐसे संस्थान का समर्थन करेंगे जो इन मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन कर रहा है। संजय शर्मा की अपील एक गहरी चेतावनी है, जो समाज और शिक्षा के क्षेत्र में वास्तविक बदलाव लाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।