Monday, August 8, 2022
Wednesday, July 27, 2022
अवैध निर्माण पर सिटी मोंटेसरी स्कूल को आवास विकास परिषद का नोटिस.
लखनऊ/ गुरूवार, 28 जुलाई 2022…………………
विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर साल 2019 में गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में जगह बनाने वाले और साल 2002 में पीस एजुकेशन के लिए यूनेस्को प्राइज जीतने वाले यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित सिटी मोंटेसरी स्कूल की 20 शाखाओं में वर्तमान में साढ़े चार हज़ार से अधिक स्टाफ 58 हज़ार से अधिक शिक्षार्थियों के अध्यापन कार्य में लगे हैं. डा. जगदीश गाँधी और डा. भारती गाँधी द्वारा साल 1959 में 5 विद्यार्थियों के साथ शिक्षा के क्षेत्र में उच्च आदर्शों का प्रतिमान स्थापित करने, छात्रों को सामाजिक रूप से प्रेरित और जागरूक नागरिक बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह विद्यालय अब बाजारीकरण की अंधी दौड़ में शामिल होकर उच्च आदर्शों की बात तो भरपूर और निरंतर करता है पर धरातल पर इन आदर्शों का पालन करता नज़र नहीं आता है. बच्चों में नैतिक चरित्र निर्माण की बात करने वाला सिटी मोंटेसरी स्कूल स्वयं नैतिकता को ताक पर रखकर काम करता दिखाई दे रहा है.
राजधानी लखनऊ निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा ने एक प्रचलित लोकोक्ति “हाथी के दांत खाने के दांत और दिखाने के और” की बात कहते हुए जगदीश गाँधी और भारती गाँधी के सिटी मोंटेसरी स्कूल के प्रबंधन की कथनी करनी में जमीन आसमान का फर्क होने का आरोप लगाया है. संजय कहते हैं कि यूनाइटेड किंगडम का ग्लोबल पायनियर अवार्ड,क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफ़ास्ट से मानद डॉक्टरेट डिग्री तथा यूपी सरकार के यश भारती पुरस्कार के साथ-साथ देश विदेश के सैकड़ों पुरस्कार और मानद उपाधियाँ प्राप्त करने वाले जगदीश गाँधी तथा उनकी पत्नी भारती गाँधी के साथ साथ सीएमएस प्रबंधन सार्वजनिक मंचों से हमेशा उच्च नैतिक आदर्शों की बात करते दिखाई देते हैं लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनका सीएमएस अब अपने छुद्र निजी लाभों के लिए अधिकांश विद्यालयों की ढांचागत सुरक्षा और अग्निशमन सुरक्षा के प्रति अगंभीर रुख अपनाकर विद्यालय में पढने वाले छात्रों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर रहा है.
संजय बताते है कि हाल ही में उन्होंने सीएमएस की राजाजीपुरम की थाना तालकटोरा के सामने स्थित शाखा तथा राजाजीपुरम ई ब्लाक मार्किट के पास नाले किनारे बनी नई शाखा के अवैध निर्माणों के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायतें कीं थीं जिनमें जांच के बाद शिकायतें सही पाई गईं और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने इन दोनों शाखाओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की सुसंगत धाराओं में कार्यवाही शुरू कर दी है.
संजय बताते हैं कि सीएमएस की अधिकांश शाखाओं में ढांचागत सुरक्षा, अग्निशमन सुरक्षा तथा अन्य सरकारी नियम-कानूनों के अनुपालन में कमी हैं जिनमें अपेक्षित सुधार करना सीएमएस प्रबंधन का नैतिक दायित्य है. संजय ने सभी राजनेताओं,पत्रकारों,धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों और समाजसेवियों से सार्वजनिक रूप से अपील की है कि वे अपने-अपने निहित स्वार्थों को त्यागकर तब तक सीएमएस के कार्यक्रमों का बहिष्कार करें जब तक यह विद्यालय अपनी सभी शाखाओं में ढांचागत सुरक्षा, अग्निशमन सुरक्षा तथा अन्य सरकारी नियम-कानूनों का अनुपालन शत-प्रतिशत मानकों के हिसाब से नहीं कर लेता है.
संजय ने बताया कि सीएमएस द्वारा आगामी नवम्बर माह में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 के विषय पर विश्व भर के मुख्य न्यायाधीशों की 23वीं इंटरनेशनल कांफ्रेंस में शिरकत करने वाले सभी संभाव्य व्यक्तियों को वे सीएमएस द्वारा ढांचागत सुरक्षा, अग्निशमन सुरक्षा तथा अन्य सरकारी नियम-कानूनों के अनुपालन में कमी के साथ विद्यालय चलाने के सरकारी दस्तावेजी प्रमाण ई मेल से भेजते हुए सभी से इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने की नैतिक अपील इस आशय से करेंगे कि वे सब सीएमएस के कैम्पसों में पढने वाले आधा लाख से अधिक छात्रों व हज़ारों स्टाफ का जीवन पूर्णरूपेण सुरक्षित करने की उनकी इस मुहिम में सहभागी बनें और इस विद्यालय द्वारा अपनी सभी शाखाओं में ढांचागत सुरक्षा, अग्निशमन सुरक्षा तथा अन्य सरकारी नियम-कानूनों का अनुपालन शत-प्रतिशत मानकों के हिसाब से कर लेना स्वयं के स्तर से सुनिश्चित कर लेने के बाद ही इस विद्यालय के कार्यक्रमों में प्रतिभाग करें. संजय ने विश्वास जताया है कि निजी जीवन में नैतिकता का पालन करने वाले सभी जिम्मेदार व्यक्ति उनकी इस नैतिक अपील को अवश्य मानेंगे.
नोट : सम्बंधित प्रपत्र वेबलिंक https://tahririndia.blogspot.com/2022/07/blog-post_24.html से निःशुल्क डाउनलोड कर निःशुल्क प्रयोग किये जा सकते हैं.
Sunday, July 24, 2022
जगदीश गाँधी के सिटी मोंटेसरी स्कूल के खाने के दांत और दिखाने के और !
लखनऊ/ सोमवार, 25 जुलाई 2022…………………..
विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर साल 2019 में गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में जगह बनाने वाले और साल 2002 में पीस एजुकेशन के लिए यूनेस्को प्राइज जीतने वाले यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित सिटी मोंटेसरी स्कूल की 20 शाखाओं में वर्तमान में साढ़े चार हज़ार से अधिक स्टाफ 58 हज़ार से अधिक शिक्षार्थियों के अध्यापन कार्य में लगे हैं. डा. जगदीश गाँधी और डा. भारती गाँधी द्वारा साल 1959 में 5 विद्यार्थियों के साथ शिक्षा के क्षेत्र में उच्च आदर्शों का प्रतिमान स्थापित करने, छात्रों को सामाजिक रूप से प्रेरित और जागरूक नागरिक बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह विद्यालय अब बाजारीकरण की अंधी दौड़ में शामिल होकर उच्च आदर्शों की बात तो भरपूर और निरंतर करता है पर धरातल पर इन आदर्शों का पालन करता नज़र नहीं आता है. बच्चों में नैतिक चरित्र निर्माण की बात करने वाला सिटी मोंटेसरी स्कूल स्वयं नैतिकता को ताक पर रखकर काम करता दिखाई दे रहा है.
राजधानी लखनऊ निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा ने एक प्रचलित लोकोक्ति “हाथी के दांत खाने के दांत और दिखाने के और” की बात कहते हुए जगदीश गाँधी और भारती गाँधी के सिटी मोंटेसरी स्कूल के प्रबंधन की कथनी करनी में जमीन आसमान का फर्क होने का आरोप लगाया है. संजय कहते हैं कि यूनाइटेड किंगडम का ग्लोबल पायनियर अवार्ड,क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफ़ास्ट से मानद डॉक्टरेट डिग्री तथा यूपी सरकार के यश भारती पुरस्कार के साथ-साथ देश विदेश के सैकड़ों पुरस्कार और मानद उपाधियाँ प्राप्त करने वाले जगदीश गाँधी तथा उनकी पत्नी भारती गाँधी के साथ साथ सीएमएस प्रबंधन सार्वजनिक मंचों से हमेशा उच्च नैतिक आदर्शों की बात करते दिखाई देते हैं लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनका सीएमएस अब अपने छुद्र निजी लाभों के लिए अधिकांश विद्यालयों की ढांचागत सुरक्षा और अग्निशमन सुरक्षा के प्रति अगंभीर रुख अपनाकर विद्यालय में पढने वाले छात्रों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर रहा है.
संजय बताते है कि हाल ही में उन्होंने सीएमएस की राजाजीपुरम की थाना तालकटोरा के सामने स्थित शाखा तथा राजाजीपुरम ई ब्लाक मार्किट के पास नाले किनारे बनी नई शाखा के अवैध निर्माणों के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायतें कीं थीं जिनमें जांच के बाद शिकायतें सही पाई गईं और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने इन दोनों शाखाओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की सुसंगत धाराओं में कार्यवाही शुरू कर दी है.
संजय बताते हैं कि सीएमएस की अधिकांश शाखाओं में ढांचागत सुरक्षा, अग्निशमन सुरक्षा तथा अन्य सरकारी नियम-कानूनों के अनुपालन में कमी हैं जिनमें अपेक्षित सुधार करना सीएमएस प्रबंधन का नैतिक दायित्य है. संजय ने सभी राजनेताओं, पत्रकारों, धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों और समाजसेवियों से सार्वजनिक रूप से अपील की है कि वे अपने-अपने निहित स्वार्थों को त्यागकर तब तक सीएमएस के कार्यक्रमों का बहिष्कार करें जब तक यह विद्यालय अपनी सभी शाखाओं में ढांचागत सुरक्षा, अग्निशमन सुरक्षा तथा अन्य सरकारी नियम-कानूनों का अनुपालन शत-प्रतिशत मानकों के हिसाब से नहीं कर लेता है.
संजय ने बताया कि सीएमएस द्वारा आगामी नवम्बर माह में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 के विषय पर विश्व भर के मुख्य न्यायाधीशों की 23वीं इंटरनेशनल कांफ्रेंस में शिरकत करने वाले सभी संभाव्य व्यक्तियों को वे सीएमएस द्वारा ढांचागत सुरक्षा, अग्निशमन सुरक्षा तथा अन्य सरकारी नियम-कानूनों के अनुपालन में कमी के साथ विद्यालय चलाने के सरकारी दस्तावेजी प्रमाण ई मेल से भेजते हुए सभी से इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने की नैतिक अपील इस आशय से करेंगे कि वे सब सीएमएस के कैम्पसों में पढने वाले आधा लाख से अधिक छात्रों व हज़ारों स्टाफ का जीवन पूर्णरूपेण सुरक्षित करने की उनकी इस मुहिम में सहभागी बनें और इस विद्यालय द्वारा अपनी सभी शाखाओं में ढांचागत सुरक्षा, अग्निशमन सुरक्षा तथा अन्य सरकारी नियम-कानूनों का अनुपालन शत-प्रतिशत मानकों के हिसाब से कर लेना स्वयं के स्तर से सुनिश्चित कर लेने के बाद ही इस विद्यालय के कार्यक्रमों में प्रतिभाग करें. संजय ने विश्वास जताया है कि निजी जीवन में नैतिकता का पालन करने वाले सभी जिम्मेदार व्यक्ति उनकी इस नैतिक अपील को अवश्य मानेंगे.
Tuesday, July 19, 2022
होटल सौभाग्य इन नाम से एलडीए में जमा नहीं है कोई नक्शा : आरटीआई खुलासा.
लखनऊ / 20 जुलाई 2022 ……………….
लखनऊ विकास प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार लखनऊ की स्टेशन रोड पर छितवापुर पुलिस चौकी के पास स्थित होटल सौभाग्य इन के नाम से कोई भी मानचित्र कभी जमा ही नहीं किया गया है तो ऐसी स्थिति में होटल सौभाग्य इन के नाम से एलडीए से मानचित्र पास होने का तो सवाल ही खड़ा नहीं होता है. यह खुलासा लखनऊ निवासी इंजीनियर संजय शर्मा की एक आरटीआई अर्जी पर लखनऊ विकास प्राधिकरण के मानचित्र सेल के अधिशासी अभियंता द्वारा बीती 13 जुलाई को संजय को जारी किये गए एक पत्र से हुआ है.
संजय ने बताया कि इस मामले की आरटीआई अर्जी उनके रिकॉर्ड में नहीं है लेकिन लखनऊ विकास प्राधिकरण के मानचित्र सेल के अधिशासी अभियंता के पत्र में यह मामला सूचना आयोग में वाद संख्या एस-3-450/सी/2021 पर दर्ज होना बताया गया है. संजय ने बताया कि वे मामले की अगली सुनवाई में सूचना आयोग जाकर इस मामले की आरटीआई अर्जी को आयोग के रिकॉर्ड से प्राप्त करके आगे की कार्यवाही करेंगे.
संजय ने बताया कि फिलहाल वे एलडीए के इस पत्र को सूबे के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और लखनऊ के जिलाधिकारी को भेजकर जनहित के दृष्टिगत इस होटल का लाइसेंस निरस्त कराने की मांग उठाने जा रहे हैं.
Thursday, July 14, 2022
LDA के रिकॉर्ड में नहीं हैं BJP MLC पवन सिंह चौहान के शिक्षण संस्थानों की बिल्डिंग्स के नक़्शे.
लखनऊ / शुक्रवार, 15 जुलाई 2022 ……………
उत्तर प्रदेश के सीतापुर से भाजपा के विधान परिषद सदस्य और समाजसेवी तथा शिक्षाविद के रूप में अपनी पहचान बना चुके पवन सिंह चौहान के राजधानी लखनऊ के बक्शी का तालाब क्षेत्र स्थित चार शिक्षण संस्थाओं की बिल्डिंग्स के स्वीकृत मैप लखनऊ विकास प्राधिकरण के रिकॉर्ड में नहीं है. लखनऊ निवासी इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा इस सम्बन्ध में की गई एक जनसुनवाई शिकायत पर लखनऊ विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन – पांच के सहायक अभियंता राहुल वर्मा ने स्थलीय निरीक्षण के बाद भवन स्वामी से सभी चार बिल्डिंग्स के एलडीए द्वारा स्वीकृत मानचित्रों की मांग कर ली है.
दरअसल संजय ने मुख्यमंत्री के ऑनलाइन जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करके लखनऊ के एन.एच. 24, सीतापुर रोड, बक्शी का तालाब स्थित कैंपस में चल रहे चार व्यवसायिक संस्थानों क्रमशः एस.आर. इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, एस.आर.एम. बिज़नस स्कूल, एस.आर. ग्लोबल स्कूल तथा एस.आर. इंटरनेशनल स्कूल एंड स्पोर्ट्स अकादमी की बिल्डिंग्स में अब तक हुए वास्तविक निर्माणों की एलडीए कार्यालय में उपलब्ध इन बिल्डिंग्स के स्वीकृत मानचित्रों के सापेक्ष जांच कराने तथा विचलन की स्थिति में नियमानुसार सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्यवाही कराने की मांग की थी.
राहुल ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि वर्णित निर्माण लगभग 10 वर्ष पूर्व का है और वर्तमान में कोई निर्माण होते हुए नहीं पाया गया है. राहुल ने संजय को बताया है कि एस आर ग्रुप के मालिकों द्वारा बिल्डिंग्स के स्वीकृत मानचित्र उपलब्ध करा पाने अथवा न करा पाने के सम्बन्ध में स्थिति स्पष्ट होने के बाद जांचोपरांत इन बिल्डिंग्स के खिलाफ सुसंगत धाराओं में कार्यवाही की जायेगी.
संजय का कहना है कि राजनीति में आने से पहले पवन सिंह चौहान की पहचान एक समाजसेवी और शिक्षाविद की रही है और मौका मिलने पर उन्होंने सार्वजनिक मंचों से सदैव ही उच्च आदर्शों की बात की है इसीलिए सार्वजनिक जीवन में अब इस मामले में उनसे भी आदर्शों के उन्हीं उच्च मानकों का पालन अपेक्षित है जिनकी बात वे अब तक सार्वजनिक मंचों से करते आये हैं.
बकौल संजय, उनको उम्मीद है कि पवन सिंह चौहान का एस.आर. ग्रुप जल्द ही एलडीए द्वारा मांगे गए नक्शों के सम्बन्ध में स्थिति स्पष्ट कर देगा. संजय ने बताया कि यदि एलडीए ने इस मामले में एक महीने में कार्यवाही नहीं की तो वे इस मामले को यूपी के आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव के सामने रखेंगे.
Friday, July 8, 2022
BOB MD के एडवाइजर अखिल हांडा की सूचना सार्वजनिक करने से अपराधियों के अन्वेषण, पकड़े जाने या अभियोजन की प्रक्रिया में पड़ेगी अड़चन : आरटीआई खुलासा !
लखनऊ / शनिवार, 09 जुलाई 2022 ……………
अखिल हांडा वह नाम है जो 110 साल पुराने देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक यानि कि बैंक ऑफ़ बड़ोदा के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की अगुआई कर रहा है. अखिल इससे पहले फिनटेक उधमी, उद्योग विश्लेषक और निवेश बैंकर के साथ साथ चर्चित एनजीओ सिटीजन्स फॉर एकाउंटेबिल गवर्नेंस के संस्थापक सदस्य भी रह चुके हैं. हालिया समय में अखिल बैंक ऑफ़ बड़ोदा के प्रबंध निदेशक और सीईओ के सलाहकार होने के साथ साथ फिनटेक के मुखिया और बैंक के न्यू बिज़नेस इनिशिएटिव के मुखिया भी है जो बैंक ऑफ़ बड़ोदा को डिजिटल बैंक में बदलने को संभव और मुमकिन बनाने की जिम्मेवारी निभा रहे हैं. जब समाजसेवी इंजीनियर संजय शर्मा ने अखिल हांडा के प्रोफेशनल क्रियाकलापों के सम्बन्ध में आरटीआई से सूचना मांगीं तो बैंक ऑफ़ बड़ोदा के केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी ने एक बेहद चौंकाने वाला उत्तर दिया है.
बीती 17 जून को संजय ने अखिल की जॉइनिंग,चयन, डेट ऑफ़ बर्थ,एजुकेशन क्वालिफिकेशन, बैंकिंग एक्सपीरियंस,सेवा शर्तों,सेवा के लाभों,ली गई छुट्टियों, सेवा के अधिकारों और चयन में राजनैतिक दखल होने अथवा नहीं होने के सम्बन्ध में 18 बिन्दुओं पर सूचना मांगी थी.
मुंबई स्थित बड़ोदा कॉर्पोरेट सेंटर के उप महाप्रबंधक ( आरबीएस ) एवं जन सूचना अधिकारी बिपिन चन्द्र खन्ना ने बीती 5 जुलाई को पत्र जारी करके संजय को जो जानकारी दी है वह बेहद चौंकाने वाली है. संजय की आरटीआई अर्जी के सभी 18 बिन्दुओं पर बिपिन ने लिखा है कि “मांगी गई सूचना तृतीय पक्ष से सम्बंधित है जो व्यक्ति की गोपनीयता पर अवांछित आक्रमण का कारण बनेगी इसलिए हम आपको मांगी गई सूचना आरटीआई कानून की धारा 8(1)(ज) के अंतर्गत प्रदान करने में असमर्थ हैं.
संजय कहते हैं कि आरटीआई कानून की धारा 8(1)(ज) के अंतर्गत किसी नागरिक को ऐसी सूचना देने की बाध्यता नहीं होगी जिससे अपराधियों के अन्वेषण, पकड़े जाने या अभियोजन की प्रक्रिया में अड़चन पड़ेगी.
संजय ने बताया कि बिपिन के इस उत्तर के आधार पर वे लोकपाल में शिकायत दर्ज करके अखिल की जॉइनिंग,चयन, डेट ऑफ़ बर्थ,एजुकेशन क्वालिफिकेशन, बैंकिंग एक्सपीरियंस,सेवा शर्तों,सेवा के लाभों,ली गई छुट्टियों, सेवा के अधिकारों और चयन में राजनैतिक दखल होने अथवा नहीं होने के सम्बन्ध में जांच करने की मांग करने जा रहे हैं.
बिपिन ने संजय को प्रथम अपीलीय अधिकारी का विवरण देते हुए लिखा है कि यदि वे उत्तर से संतुष्ट नहीं हैं तो 30 दिन के अन्दर अपील दायर कर सकते हैं. संजय ने कहा है कि सूचना लेने के लिए वे प्रथम अपील दायर करेंगे और यदि आवश्यक हुआ तो बाद में आवश्यकतानुसार केन्द्रीय सूचना आयोग और उच्च न्यायालय की भी शरण लेंगे.
Wednesday, June 29, 2022
सेल्फीबाज पत्रकार सावधान, यूपी विधान सभा,लोक भवन,एनेक्सी या सचिवालय में ली सेल्फी तो होगा कड़ा एक्शन – आरटीआई खुलासा.
लखनऊ / गुरुवार ~ 30 जून 2022 …………..
उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधियों को सूचना विभाग के मार्फत सूबे के विधान सभा,लोकभवन, एनेक्सी, सचिवालय में प्रवेश के लिए सचिवालय प्रशासन और विधान सभा प्रशासन के द्वारा वार्षिक प्रवेश पत्र समाचार संकलन के काम के लिए निर्गत किये जाते हैं. ये प्रवेश पत्र विशुद्ध रूप से समाचारों के संकलन मात्र के लिए होते हैं किन्तु प्रायः देखा गया है कि कुछ शातिर पत्रकार अपनी निजी हनक बनाकर निजी लाभ कमाने के दुरुद्देश्य से इस सुविधा का दुरुपयोग कर विधान सभा,लोकभवन, एनेक्सी, सचिवालय में समाचार संकलन के लिए जारी पासों से प्रवेश करके सेल्फी,फोटो और वीडियो लेकर सोशल मीडिया पर डालते रहते हैं जिसके कारण विधान सभा,लोकभवन, एनेक्सी और सचिवालय की सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न होने की सम्भावना आसन्न हो जाती है.
जब इस मुद्दे पर राजधानी लखनऊ निवासी इंजीनियर संजय शर्मा ने सूबे के सूचना विभाग में आरटीआई डाली तो चला है कि सूबे के विधान सभा,लोकभवन, एनेक्सी और सचिवालय गए मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा इन परिसरों में निजी फोटोग्राफी पूरी तरह से अवैधानिक है और किसी पत्रकार द्वारा ऐसा करने पर उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की व्यवस्था है. चौंकाने वाला यह खुलासा पेशे से इंजीनियर संजय द्वारा बीती 17 मई को यूपी के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय में दायर की गई एक आरटीआई पर निदेशालय के उप निदेशक और जन सूचना अधिकारी दिनेश कुमार सहगल द्वारा बीती 7 जून को दिए गए उत्तर से हुआ है.
संजय ने आरटीआई आवेदन देकर कहा था कि उत्तर प्रदेश विधान सभा, उत्तर प्रदेश लोक भवन, एनेक्सी तथा उत्तर प्रदेश सचिवालय परिसर में निजी फोटोग्राफी निषिद्ध है किन्तु बहुधा मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा समाचार संकलन कार्य से इतर निजी सेल्फी/फोटो लेकर अपने निजी सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सूचना विभाग द्वारा दी गई सुविधाओं का दुरुपयोग करके निजी लाभ लम्बे समय से लिया जा रहा है और इस प्रकार से अनुशासनहीनता भी की जा रही है और सूचना मांगी थी कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए सूचना विभाग द्वारा नियम बनाए जाने अथवा नहीं बनाए जाने की सूचना दें. इस पर सूचना विभाग ने संजय को लिखकर दिया है कि ऐसे मामलों पर सचिवालय प्रशासन द्वारा अनुशासन के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है तथा इसके अतिरिक्त यदि किसी मीडिया प्रतिनिधि द्वारा ऐसा किया जाता है तो सचिवालय/विधान सभा प्रशासन द्वारा नियमानुसार अग्रेतर कार्यवाही प्रस्तावित की जाती है.
संजय ने यह भी जानना चाहा था कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए सूचना विभाग द्वारा वर्तमान वर्ष 2022 में सम्बंधित मीडिया प्रतिनिधियों का सचिवालय पास निरस्त करने की संस्तुतियों के मामलों की संख्या,ऐसे मामलों को रोकने के लिए सूचना विभाग द्वारा वर्तमान वर्ष 2022 में सम्बंधित मीडिया प्रतिनिधियों की सूचना विभाग की मान्यता निरस्त करने की संस्तुतियों के मामलों,ऐसे मामलों को रोकने के लिए सूचना विभाग द्वारा वर्तमान वर्ष 2022 में की गई कार्यवाहियों की सूचना उन्हें दी जाये जिस पर सहगल ने संजय को बताया है इन तीनों बिन्दुओं की सूचना शून्य है अर्थात इस वर्ष अभी तक ऐसे पत्रकारों के खिलाफ किसे भी स्तर से कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है.
संजय को यह भी बताया गया है कि वर्तमान वर्ष 2022 में अब तक विभिन्न संस्थानों के 49 प्रेस प्रतिनिधियों के सचिवालय पास बने हैं तथा मीडिया संस्थानों अथवा कर्मचारियों के सरकारी अथवा निजी वाहनों के लिए 17 सचिवालय पास निर्गत किये गए हैं.
Sunday, June 26, 2022
यूपी में अंगूठा टेक भी पा सकते हैं राज्य मुख्यालय, वरिष्ठ या स्वतंत्र पत्रकार की मान्यता – आरटीआई खुलासा.
लखनऊ / सोमवार, 27 जून 2022 …………..
उत्तर प्रदेश का सूचना विभाग मीडिया प्रतिनिधियों को विभिन्न प्रकार की मान्यताएं देता है जिनमें राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार, वरिष्ठ पत्रकार या स्वतंत्र पत्रकार की मान्यताएं उच्चतम श्रेणी की ऐसी मान्यताएं हैं जिनके साथ अनेकों निःशुल्क अथवा सशुल्क सरकारी लाभ भी दिए जाते हैं. इन लाभों में सरकारी आवास आबंटन; रियायती दर पर यात्रा; रिवाल्विंग फण्ड के माध्यम से एस.जी.पी.जी.आई. ( SGPGI ) लखनऊ में निःशुल्क इलाज़; विधान सभा,लोकभवन, एनेक्सी, सचिवालय में प्रवेश समेत अनेकों लाभ शामिल हैं.
सार्वजनिक जीवन में कुछ मान्यता प्राप्त पत्रकारों द्वारा गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को हेय दृष्टि से देखने की घटनाएं प्रायः सामने आती रहती हैं लेकिन क्या आपको पता है कि राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार, वरिष्ठ पत्रकार या स्वतंत्र पत्रकार जैसी उच्चतम श्रेणी की मान्यताएं प्राप्त व्यक्ति यदि अँगूठा टेक भी हों तो भी राज्य सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता है और राज्य सरकार को अंगूठा टेक व्यक्तियों तक को इस प्रकार की मान्यताएं देने में कतई कोई गुरेज नहीं है. यानि कि तिकड़म भिडाकर कोई अंगूठा टेक भी यूपी में राज्य मुख्यालय, वरिष्ठ या स्वतंत्र पत्रकार की मान्यता पा सकता है.चौंकाने वाला यह खुलासा राजधानी लखनऊ निवासी इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा बीती 10 मई को यूपी के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय में दायर की गई एक आरटीआई पर निदेशालय के उप निदेशक और जन सूचना अधिकारी दिनेश कुमार सहगल द्वारा बीती 7 जून को दिए गए उत्तर से हुआ है.
संजय ने आरटीआई आवेदन देकर सूचना मांगी थी कि उनको सूचना विभाग से राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधियों,स्वतंत्र पत्रकारों और वरिष्ठ पत्रकारों की शैक्षिक योग्यता की सूचना मीडिया प्रतिनिधि/पत्रकार के नाम-वार उनको दी जाए. इस पर सहगल ने संजय को लिखकर दिया है कि सूचना विभाग से राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधियों,स्वतंत्र पत्रकारों और वरिष्ठ पत्रकारों के लिए कोई शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं है.
संजय ने बताया कि उनको भ्रष्टाचार विरोधी मोबाइल हेल्पलाइन नंबर 7991479999 पर कई सूचनाएं प्राप्त हुई थीं कि कतिपय मीडिया संस्थानों के मालिकों ने आपस में दुरभिःसंधि का गठजोड़ स्थापित कर एक दूसरे के मीडिया संस्थानों से अदला-बदली करके स्वयं अथवा अपने ऐसे रिश्तेदारों-नातेदारों को सूचना विभाग से सरकारी मान्यताएं दिलवा रखीं हैं जिनमें एक पेज खबर लिखने तक की क्षमता नहीं हैं इसीलिए उन्होंने इस तथ्य की पुष्टि करने के लिए यह सूचना मांगी थी. संजय के अनुसार कम शिक्षित मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा जुगाड़ बैठाकर सरकारी मान्यताएं प्राप्त कर लेने से पत्रकारिता का स्तर गिरने के साथ-साथ उच्च शिक्षित मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधियों के सामने अपना सम्मान बचाए रखने का संकट भी उत्पन्न हो रहा है.
पत्रकारिता जैसे विशुद्ध रूप से लिखने पढने के पेशे में सरकारी मान्यता लेने ले लिए किसी भी शैक्षिक योग्यता का मानक निर्धारित नहीं होने पर आश्चर्य जताते हुए संजय ने कहा है कि पत्रकारिता के उच्च मानदंडों एवं पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखने के साथ-साथ वर्तमान मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधियों में से उच्च शिक्षित मीडिया प्रतिनिधियों के सम्मान को बचाए रखने के मद्देनज़र वे सूबे के मुखिया को पत्र लिखकर उनसे आग्रह करेंगे कि वे राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधि, स्वतंत्र पत्रकार मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधि, वरिष्ठ पत्रकार मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधि तथा जनपद स्तर पर मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधि जैसी सरकारी मान्यताएं देने की आवश्यक अर्हताओं में स्नातक के साथ साथ पत्रकारिता में डिप्लोमा जैसी कुछ न्यूनतम शैक्षिक योग्यतायें निर्धारित करने के लिए एक कमेटी का गठन करके कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर न्यूनतम शैक्षिक योग्यताओं का निर्धारण करायें.
संजय ने बताया कि यदि आवश्यक हुआ तो वे इस मामले को जनहित याचिका के माध्यम से अदालत लेकर जायेंगे.
Saturday, June 25, 2022
लखनऊ : सिटी मोंटेसरी स्कूल मान्यता की सूचना छुपाने पर संयुक्त शिक्षा निदेशक सुरेन्द्र कुमार तिवारी पर 25 हज़ार रुपयों का जुर्माना.
लखनऊ / शनिवार, 25 जून 2022………….
गिनीज़ रिकॉर्ड बुक में दर्ज लखनऊ के प्रतिष्ठित सिटी मोंटेसरी स्कूल की मान्यता से सम्बंधित सूचना छुपाना जिले के संयुक्त शिक्षा निदेशक षष्ठ मंडल सुरेन्द्र कुमार तिवारी को भारी पड़ गया है. सूबे के सूचना आयोग ने सुरेन्द्र को सूचना कानून की धारा 20 के तहत दोषी मानते हुए 25 हज़ार रुपयों का जुर्माना लगा दिया है. आयोग ने यह कार्यवाही लखनऊ निवासी इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा आयोग में दायर की गई एक शिकायत पर सुनवाई करते हुए की है.
संजय ने साल 2020 के दिसंबर माह की 5 तारीख को संयुक्त शिक्षा निदेशक षष्ठ मंडल लखनऊ के कार्यालय में एक आरटीआई अर्जी देकर शिक्षाविद के रूप में मशहूर जगदीश गाँधी द्वारा संचालित सिटी मोंटेसरी स्कूल की मान्यता से सम्बंधित सूचना मांगी थी. संयुक्त शिक्षा निदेशक के कार्यालय ने बीते साल के जनवरी महीने की 8 तारीख़ और 30 तारीख को संजय को दो पत्र लिखकर सूचनाओं को विस्तृत बताया और सूचना देने से इनकार कर दिया. संयुक्त शिक्षा निदेशक के कार्यालय के इन आदेशों के खिलाफ संजय ने बीते साल राज्य सूचना आयोग में शिकायत दर्ज की थी.
मामले की सुनवाइयों में से एक सुनवाई बीते साल के सितम्बर महीने की 1 तारीख को हुई जिसमें सूचना आयुक्त रचना पाल ने जन सूचना अधिकारी के प्रतिनिधि डा. दिनेश कुमार, विज्ञान प्रगति अधिकारी की उपस्थिति में जन सूचना अधिकारी को साशय सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराने,आयोग के आदेशों की अवहेलना करने और सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के क्रियान्वयन में शिथिलता का दोषी पाते हुए 25 हज़ार रुपयों का अर्थदंड अधिरोपित किया और अर्थदंड के सम्बन्ध में सुनवाई का अवसर देते हुए मामले की सुनवाई के लिए बीते साल के दिसम्बर महीने की 8 तारीख पर सुनवाई फिक्स की.
बीते साल के दिसम्बर महीने की 8 तारीख पर हुई सुनवाई में जनसूचना अधिकारी के प्रतिनिधि उपनिरीक्षक, संस्कृत पाठशालाएं, षष्ठ मंडल लखनऊ ने आयोग से एक अवसर की माँग की जिस पर सूचना आयुक्त रचना पाल ने अंतिम अवसर देते हुए मामले की सुनवाई के लिए बीते मई महीने की 25 तारीख पर सुनवाई फिक्स की.
बीते मई महीने की 25 तारीख पर हुई सुनवाई में जनसूचना अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर मामले की सुनवाई कर रहे सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही ने संयुक्त शिक्षा निदेशक षष्ठ मंडल सुरेन्द्र कुमार तिवारी के वेतन से 25 हज़ार रुपयों के जुर्माने की बसूली कराने के लिए सूचना आयोग के रजिस्ट्रार को आदेशित करने के साथ साथ माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और निदेशक को भी दण्ड की बसूली के लिए आदेशित किया है.
Thursday, June 16, 2022
यूपी में आपराधिक इतिहास वाले मीडिया प्रतिनिधियों की निरस्त होगी सरकारी मान्यता – आरटीआई खुलासा.
लखनऊ / 17 जून 2022 …………..
उत्तर प्रदेश का सूचना विभाग मीडिया प्रतिनिधियों को विभिन्न प्रकार की मान्यताएं देता है जिनके साथ अनेकों निःशुल्क अथवा सशुल्क सरकारी लाभ भी दिए जाते हैं. इन लाभों में सरकारी आवास आबंटन, रियायती दर पर यात्रा, रिवाल्विंग फण्ड के माध्यम से एस.जी.पी.जी.आई. ( SGPGI ) लखनऊ में निःशुल्क इलाज़ समेत अनेकों लाभ शामिल हैं. सूचना विभाग द्वारा दी जाने वाली मान्यताओं की श्रेणियों में राज्य मुख्यालय मान्यता, स्वतंत्र पत्रकार मान्यता, वरिष्ठ पत्रकार मान्यता के साथ-साथ मंडल,जिला और तहसील स्तर पर मान्यताएं दी जाती हैं. इन मान्यताओं को दिए जाने के लिए कड़े नियम कानून भी बने हैं फिर भी यदि आपराधिक इतिहास वाला कोई मीडिया प्रतिनिधि कभी किसी भी प्रकार की मान्यता येन-केन-प्रकारेण प्राप्त कर लेता है तो आपराधिक इतिहास वाले ऐसे मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधि की मान्यता आसानी से निरस्त कराई जा सकती है. इस बात का खुलासा राजधानी लखनऊ निवासी इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा बीती 17 मई को यूपी के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय में दायर की गई एक आरटीआई पर निदेशालय के उप निदेशक और जन सूचना अधिकारी दिनेश कुमार सहगल द्वारा बीती 7 जून को दिए गए उत्तर से हुआ है.
संजय ने यह जानना चाहा था कि आपराधिक इतिहास वाले व्यक्तियों को सूचना विभाग से मीडिया प्रतिनिधि की किसी भी प्रकार की मान्यता प्राप्त करने से रोकने के लिए कौन से नियम प्रचलित हैं. इस पर सहगल ने संजय को लिखकर दिया है कि आपराधिक इतिहास वाले मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधियों के सम्बन्ध में आवश्यक अभिलेख एवं साक्ष्य प्राप्त होने की दशा में सम्बंधित मीडिया प्रतिनिधि की मान्यता निरस्त कर दी जाती है.
संजय ने बताया कि उनको मोबाइल हेल्पलाइन नंबर 7991479999 पर सूचनाएं प्राप्त हुई हैं कि कतिपय मीडिया प्रतिनिधियों ने कतिपय गोलमाल करते हुए आपराधिक इतिहास होते हुए भी मान्यतायें प्राप्त कर रखी हैं अतः पत्रकारिता में शुचिता के उच्च मानदंडों को बनाए रखने के मद्देनज़र वे सूबे के मुखिया को पत्र लिखकर उनसे आग्रह करेंगे कि वे गृह विभाग को निर्देशित करके राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त 887 मीडिया प्रतिनिधियों, स्वतंत्र पत्रकार मान्यता प्राप्त 114 मीडिया प्रतिनिधियों, वरिष्ठ पत्रकार मान्यता प्राप्त 71 मीडिया प्रतिनिधियों तथा जनपद स्तर पर मान्यता प्राप्त 3389 मीडिया प्रतिनिधियों के आपराधिक इतिहास के सम्बन्ध में गहनता से जांच कराकर जांच के परिणाम के आधार पर सूचना विभाग के नियमों के तहत अग्रेतर कार्यवाही अवश्य करायेंगे.









































