Tuesday, October 25, 2022

एलडीए में मानचित्र जमा किये बिना ही अवैध रूप से बनकर चल रहा है होटल पाल अवध : आरटीआई खुलासा.

 



 

लखनऊ / बुधवार, 26 अक्टूबर 2022 …………………..

लखनऊ यूपी की राजधानी है और राजधानी के विकास प्राधिकरण से ये उम्मीद की जाती है कि वह अपने अमले की सभी व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखेगा लेकिन लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) इन उम्मीदों को पूरा करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है. अब इसे एलडीए के प्रशासनिक अधिकारियों और इंजिनियरों की अक्षमता कहा जाए या उनका भ्रष्टाचार कि राजधानी के नाका हिंडोला क्षेत्र में सुभाष मार्ग, दुगावान स्थित प्लाट संख्या 215 बटा 409 पर बनी बिल्डिंग में चल रहे होटल पाल अवध का हाल भी उस होटल लेवाना जैसा ही है जिसमें कुछ सप्ताह पहले हुए भीषण अग्निकांड में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. राजधानी के राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा बीती 26 सितम्बर को दायर की गई आरटीआई पर एलडीए के मानचित्र सेल के अधिशासी अभियंता ने बीती 19 अक्टूबर को पत्र जारी करके संजय को बताया है कि नाका हिंडोला क्षेत्र में सुभाष मार्ग, दुगावान स्थित प्लाट संख्या 215 बटा 409 के नाम से मानचित्र जमा की कोई भी सूचना प्राधिकरण के रिकॉर्ड में नहीं है.

 

 

एलडीए द्वारा दी गई सूचना के बाद संजय ने एलडीए के जोन 6 के सहायक अभियंता ओमकार चौधरी, अवर अभियंता रंगनाथ सिंह के साथ-साथ लखनऊ के जिलाधिकारी कार्यालय,अग्निशमन विभाग,पर्यटन विभाग और नगर निगम को कटघरे में खड़ा करते हुए इन सबकी कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाया है और सवाल उठाया है कि आखिर कैसे बिना मानचित्र जमा किये ही होटल पाल अवध न केवल बन गया बल्कि राजधानी में खुलेआम व्यवस्थाओं को मुंह चिढाते हुए इन सभी विभागों के आला अधिकारियों की नाक के नीचे चल भी रहा है. संजय का कहना है कि या तो इन विभागों के जिम्मेदार अधिकारी अपने कार्य को करने में अक्षम हैं जिसके लिए सरकार द्वारा इनको अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर घर बैठा दिया जाना चाहिए या ये अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त होकर इस होटल को अवैध रूप से चलाने के गैरकानूनी काम को संरक्षण दे रहे है जिसके लिए सरकार द्वारा इनके साथ-साथ होटल मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इनको जेल भेज दिया जाना चाहिए.

 

 

बकौल संजय ऐसे अधिकारियों से बने लचर और भ्रष्ट तंत्र के कारण ही चारबाग के एस.एस.जे. होटल अग्निकांड और हजरतगंज के होटल लेवाना अग्निकांड जैसी वारदातें होती हैं जिसकी कीमत इन अधिकारियों और सरकारी तंत्र पर विश्वास करके ऐसे होटलों में ठहरने वाले लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है.

 

एलडीए में मानचित्र जमा किये बिना ही अवैध रूप से बनकर चल रहे होटल पाल अवध को इस आरटीआई जवाब के आधार पर ‘मौत का होटल’ बताते हुए संजय ने सूबे के मुखिया को पत्र लिखकर इस होटल को तत्काल बंद कराने की मांग उठाने की बात कही है. बकौल संजय उनको उम्मीद है कि सीएम एक्शन लेकर एलडीए के साथ-साथ लखनऊ के जिलाधिकारी कार्यालय,अग्निशमन विभाग,पर्यटन विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के पेंच कसेंगे और राजधानी के होटल पाल अवध जैसे सभी होटलों को जल्द से जल्द बंद कराकर पर्यटकों को राजधानी में सुरक्षित होटल-प्रवास की गारंटी देंगे.

 

 

 

  

Tuesday, October 18, 2022

चौधरी कैफुलवरा की अध्यक्षी में बदहाल यूपी उर्दू एकेडमी : आरटीआई खुलासा.

 

















लखनऊ / मंगलवार,18 अक्टूबर 2022 ………

उर्दू भाषा और साहित्य के विकास और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए साल 1972 में स्थापित की गई उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी वर्तमान अध्यक्ष चौधरी कैफुलवरा के कार्यकाल में बदहाली के दौर से गुज़र रही है. उर्दू एकेडमी की बदहाली का खुलासा राजधानी लखनऊ के राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा की आरटीआई अर्जी पर एकेडमी के जन सूचना अधिकारी आमिर द्वारा बीती 30 सितम्बर को दिए गए जबाव से हुआ है.

 संजय बताते हैं कि बीते साल के सितम्बर महीने की 10 तारीख को चौधरी कैफुलवरा को एकेडमी का अध्यक्ष बनाया बनाया गया था इसीलिए उन्होंने कैफुलवरा के कार्यकाल की बीती अगस्त माह की 29 तारीख तक की सूचनाएं मांगीं थीं.

 आमिर ने संजय को जो सूचना दी है उससे इस बात का खुलासा हुआ है कि उर्दू एकेडमी के वर्तमान अध्यक्ष चौधरी कैफुलवरा के अब तक के कार्यकाल में उर्दू भाषा का संरक्षण करने, उर्दू को बढाने और उर्दू का विकास करने से सम्बंधित कोई भी सूचना एकेडमी में नहीं है. आमिर ने संजय को यह भी बताया है कि इस कालखंड में प्रकाशित होने वाली साहित्यिक और अकादमिक योग्यता की मूल रचनाएँ और उर्दू में लोकप्रिय और बच्चों की किताबें लिखने वाले  लेखकों के नामों की सूचना भी एकेडमी में नहीं है. इस अवधि में साहित्यिक और वैज्ञानिक कार्यों के साथ-साथ अन्य विषयों की उर्दू भाषा में अनुवादित कार्यों की सूचना एकेडमी में नहीं होने की बात भी आमिर ने संजय को बताई है. आमिर ने संजय को यह भी लिखकर दिया है कि उपरोक्त अवधि के दौरान उर्दू में तैयार और प्रकाशित संदर्भ कार्यों के और प्रकाशित कराये गए पुराने उर्दू साहित्य के वैज्ञानिक रूप से संपादित ग्रंथों के नामों की भी कोई सूचना एकेडमी के रिकॉर्ड में नहीं है. इस अवधि में एकेडमी में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किए गए प्रख्यात विद्वानों और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नामों के साथ-साथ एकेडमी द्वारा अर्जित की गई चल एवं अचल संपत्ति की सूचना भी एकेडमी में नहीं होने की बात भी संजय को बताई गई है.   

 संजय का कहना है कि उनको दी गई सूचना से यह बात सीधे सीधे सामने आ रही है चौधरी कैफुलवरा के कार्यकाल में उर्दू अकादमी अपने संस्थापन प्रलेख ( मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन ) में दिए गए अनेकों प्रमुख कार्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कोई भी काम नहीं कर सकी है.  
 आमिर ने संजय को बताया है कि इस अवधि में 6 पुस्तकें अप्रकाशित हैं जिनका प्रकाशन किया जाना है. आमिर द्वारा दी गई सूचना के अनुसार इस अवधि में उर्दू के 19 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक सहायता दी गई है जिनका पूरा व्योरा भी आमिर ने संजय को दिया है. इस अवधि में साल 2020 की पुस्तकों पर पुरस्कार भी दिए गए हैं जिनकी 9 पेजों की उर्दू में लिखी सूची भी आमिर ने संजय को दी है. इस अवधि में 125 से अधिक बूढ़े, जरूरतमंद लेखकों को मासिक सहायता देने के साथ-साथ कक्षा 6 से पी.एच.डी. तक के 2301 छात्रों को मेरिट के आधार पर 76 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने की बात भी आमिर ने संजय को बताई है.
 आमिर ने संजय को यह भी बताया है कि इस अवधि में मुशायरा,सेमिनार, शाम-ए-ग़ज़ल,उर्दू ड्रामा,दास्तान-गोई,बैत-बाजी के 62 कार्यक्रम कराये गए हैं. इस अवधि में उर्दू अकादमी ने मासिक खबरनामा,त्रैमासिक अकादमी और मासिक बागीचा नाम की 3 पत्रिकाओं का प्रकाशन करने के साथ-साथ सेल डिपो से पुस्तकें बेंचकर 7 लाख से अधिक की आय भी प्राप्त की है.
 संजय ने चौधरी कैफुलवरा से सार्वजनिक अपील की है कि वे उर्दू अकादमी के मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन में दिए गए सभी कार्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए काम करें ताकि उर्दू अकादमी अपने गठन के उद्देश्यों को पूरा कर सके.  
 
 

  

 

 

 

 

  

Monday, October 3, 2022

जगदीश गाँधी के CMS स्कूलों के अवैध निर्माणों के मामलों को लेवाना अग्निकांड PIL के साथ जुडवाने के लिए संजय शर्मा ने हाई कोर्ट न्यायमित्र से की बात.

 लखनऊ / सोमवार, 03 अक्टूबर 2022 ………….

शिक्षाविद के रूप में देश-विदेश प्रसिद्धि पा चुके जगदीश गाँधी द्वारा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थापित सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की शाखाओं की बिल्डिंग्स के अवैध निर्माणों का मामला हाई कोर्ट जा रहा है. राजधानी लखनऊ निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा ने सीएमएस स्कूल समूह के स्कूलों की बिल्डिंग्स के अवैध निर्माणों के सभी मामलों को हाई कोर्ट में चल रही लेवाना होटल अग्निकांड जनहित याचिका में जुडवाने के लिए हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त किये गए न्यायमित्र से बात की है.

 

बताते चलें कि विगत दिनों लखनऊ के हजरतगंज इलाके में हुए लेवाना होटल अग्निकांड मामले में हाई कोर्ट इलाहाबाद की लखनऊ बेंच ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करके सुनवाई शुरु की. इसके बाद कई लोगों ने हाई कोर्ट के समक्ष हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल करके कोर्ट से अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्यवाही की गुहार लगाईं जिसके बाद कोर्ट ने आदेश जारी कर कहा कि अगर कोई व्यक्ति अवैध निर्माण से जुड़ी कोई समस्या उठाना चाहता है तो कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमित्र अधिवक्ता के जरिये कोर्ट के समक्ष रख सकता है.

 

बकौल संजय, सूचना का अधिकार ( आरटीआई ) अधिनियम के तहत लखनऊ विकास प्राधिकरण,उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद और अग्निशमन महकमे ने उनको जो सूचनाएं दी हैं उनसे उनसे यह बात सीधे सीधे सामने आ रही है कि गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की अधिकाँश शाखाओं की बिल्डिंग्स अवैध निर्माणों से अटी पड़ी हैं अर्थात ढांचागत रूप से असुरक्षित हैं और इन शाखाओं में अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्थायें भी मानकों के अनुसार नहीं हैं और इस ये बिल्डिंग्स ढांचागत सुरक्षा और अग्निशमन सुरक्षा की दृष्टि से नितांत असुरक्षित हैं जिनमें होटल लेवाना जैसी दुर्घटना कभी भी हो सकती है जिस कारण से इन शाखाओं में पढने वाले शिक्षार्थियों का जीवन निरंतर खतरे में हैं .

 

 

संजय ने बताया कि ढांचागत सुरक्षा और अग्निशमन सुरक्षा की दृष्टि से असुरक्षित बिल्डिंग्स में चल रही सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की शाखाओं के अवैध निर्माणों के सम्बन्ध में प्राथमिक जानकारी देते हुए उन्होंने होटल लेवाना अग्निकांड पीआईएल मामले में नियुक्त न्यायमित्र अधिवक्ता से बात की है और इस मामले को होटल लेवाना पीआईएल में जुड़वाने के लिए हाई कोर्ट के सामने रखने की बात रखी है.

 

संजय ने बताया कि मामले से सम्बंधित प्रपत्र प्राप्त करने के लिए न्यायमित्र अधिवक्ता ने उनको समय दे दिया है और न्यायमित्र अधिवक्ता द्वारा दिए समय पर वे सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की अनियमिताओं और इन अनियमितताओं को सम्बंधित लोकसेवकों के संरक्षण से सम्बंधित प्रपत्र न्यायमित्र को सौंपकर ढांचागत सुरक्षा और अग्निशमन सुरक्षा की दृष्टि से असुरक्षित बिल्डिंग्स में चल रही सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की शाखाओं को बंद कराकर इन शाखाओं में पढ़ रहे देश के नौनिहालों के जीवन को सुरक्षित कराने और मामले में दोषी विद्यालय प्रबंधन और लखनऊ विकास प्राधिकरण,उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद और अग्निशमन महकमे के लोकसेवकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग करेंगे.

 


 

 

Wednesday, August 31, 2022

एलडीए के मानचित्र सेल और जोन-7 के अधिशासी अभियंताओं पर 25-25 हज़ार का अर्थदंड : इंजीनियर संजय शर्मा के मामले में सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही की कड़ी कार्यवाही.

 लखनऊ/31 अगस्त 22……………

सूचना कानून को हल्के में लेना लखनऊ विकास प्राधिकरण ( एलडीए ) के मानचित्र सेल और जोन-7 के अधिशासी अभियंताओं को भारी पड़ गया है. उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही ने राजधानी निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा के एक मामले की सुनवाई करते हुए प्राधिकरण के इन दोनों अधिकारियों को साशय सूचनाएं उपलब्ध न कराने एवं सूचना आयोग के आदेश की अवहेलना करने का दोषी मानते हुए इनके विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के तहत 250/- प्रतिदिन के हिसाब से पृथक-पृथक अर्थदंड अधिरोपित करते हुए वसूली का आदेश पारित कर दिया है.


 

संजय द्वारा साल 2020 के दिसम्बर महीने की 5 तारीख को मांगी गई सूचना के इस मामले में एलडीए के प्रथम अपीलीय अधिकारी ने बीते साल के मार्च महीने की 19 तारीख को मानचित्र सेल और जोन-7 के अधिशासी अभियंताओं को आदेशित किया था कि वे 15 दिन के अन्दर संजय को सूचनाएं उपलब्ध करा दें. इसके बाद भी संजय को सूचनाएं नहीं दिए जाने पर बीते साल के अक्टूबर महीने की 27 तारीख को हुई आयोग की सुनवाई में सूचनाएं देने में देरी करने के लिए एलडीए के इन दोनों अधिकारियों की आयोग के समक्ष व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ स्पष्टीकरण तलब किया गया और अन्यथा की स्थिति में अर्थदण्ड लगाने का नोटिस दिया गया. 


 

बीती जुलाई की 18 तारीख को हुई अगली सुनवाई में भी जब ये दोनों अधिकारी नोटिस के बाबजूद न तो आयोग के  सामने उपस्थित हुए और न ही इन्होने कोई स्पष्टीकरण दाखिल किया तो सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही ने इनको साशय सूचना नहीं देने का दोषी करार दिया और जुर्माना लगाते हुए मामले को समाप्त कर दिया.

शाही ने अपने आदेश में लिखा है कि अधिरोपित अर्थदंड की वसूली इन दोनों अधिकारियों के जनसूचना अधिकारियों के रूप में कार्यावधि की गणना के आधार पर पृथक-पृथक की जायेगी किन्तु किसी भी जनसूचनाधिकारी से वसूली जाने वाली अर्थदंड की धनराशि रुपये 25000/- से अधिक नहीं होगी.

शाही ने सूचना आयोग के रजिस्ट्रार को निर्देशित किया है कि वे इन दोनों अधिकारियों से अर्थदंड की वसूली कराकर धनराशि को सरकारी खजाने में जमा कराकर अनुपालन आख्या उनको उपलब्ध करायें. इस आदेश की प्रति अनुपालन के लिए प्रमुख सचिव आवास को भी भेजी गई है और मामले की पत्रावली संरक्षित करा दी है.

 


Thursday, August 25, 2022

एलडीए के रिकॉर्ड में नहीं हैं डा. एम. सी. सक्सेना ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस के नक़्शे : इंजीनियर संजय की शिकायत से खुलासा.

लखनऊ / शुक्रवार, 26 अगस्त 2022 ……………

लखनऊ के दुबग्गा क्षेत्र की आई.आई.एम. बाईपास रोड के पास 171, भरावनकला, माल रोड स्थित कैंपस में  डा. एम. सी. सक्सेना ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस के 6 निजी शिक्षण संस्थान चल रहे हैं. इनमें से किसी भी संस्थान की बिल्डिंग का स्वीकृत मानचित्र लखनऊ विकास प्राधिकरण ( एलडीए ) के रिकॉर्ड में नहीं है.चौंकाने वाला यह खुलासा राजधानी निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत पर प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन-7 के सहायक अभियंता आर.एस.तोमर द्वारा बीती 11 अगस्त को दी गई जांच आख्या से हुआ है.

 


बकौल संजय भरावनकला स्थित कैंपस में  डा. एम. सी. सक्सेना ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेज के बैनर तले कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी, पॉलिटेक्निक संस्थान, कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन, कॉलेज ऑफ़ मैनेजमेंट के साथ-साथ  कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी चल रहे हैं तथा कॉलेज ऑफ़ मेडिकल साइंसेज शुरू होने की प्रक्रिया में  है. संजय कहते हैं कि उन्होंने इन 6 संस्थानों की बिल्डिंग्स में अब तक हुए वास्तविक निर्माणों की लखनऊ विकास प्राधिकरण के कार्यालय में उपलब्ध स्वीकृत मानचित्रों के सापेक्ष जांच कराने  तथा विचलन की स्थिति में नियमानुसार सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करने की मांग की थी.

 

संजय की शिकायत पर प्राधिकरण के अवर अभियंता भानु प्रकाश वर्मा ने शिकायत का भौतिक सत्यापन करते हुए जांच की है और इस जांच के बाद सहायक अभियंता तोमर ने डा. एम. सी. सक्सेना ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस को स्वीकृत मानचित्र की प्रतियाँ उपलब्ध  कराये जाने का आदेश देते हुए  एलडीए कार्यालय से पत्र प्रेषित करा दिये हैं.

 

तोमर ने संजय को यह भी बताया है कि डा. एम. सी. सक्सेना ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस द्वारा स्वीकृत नक़्शे जमा करने के लिए एलडीए द्वारा दी गई मियाद ख़त्म होने के बाद एलडीए आगे की कार्यवाही करेगा.

 


Tuesday, August 23, 2022

यूपी में सिंगल यूज पॉलिथीन बनाने की कोई फैक्ट्री नहीं : आरटीआई खुलासा.

लखनऊ / मंगलवार, 23 अगस्त 2022……………………….

सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से उत्तर प्रदेश में सिंगल यूज पॉलिथीन बनाने की कोई भी फैक्ट्री वित्तीय वर्ष 2020 से कभी भी थी ही नहीं. चौंकाने वाली इस बात का खुलासा राजधानी लखनऊ निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा की आरटीआई पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए गए जवाब से हुआ है.

 



दरअसल संजय ने बीती 10 जुलाई को सूबे के मुख्यमंत्री कार्यालय में एक आरटीआई अर्जी देकर उत्तर प्रदेश राज्य में हाल ही में प्रतिबंधित की गई श्रेणियों के सिंगल यूज प्लास्टिक और सिंगल यूज पॉलिथीन बनाने वाली फैक्ट्रियों आदि से सम्बंधित 01-04-2020 से 10-07-2022 तक के कालखंड की 6 बिन्दुओं की सूचना सुसंगत रिकॉर्ड की सत्यापित प्रति के साथ मांगी थी. संजय ने जानना चाहा था कि राज्य सरकार द्वारा ऐसी  जितनी फैक्ट्रियों को बंद किया गया हो और वर्तमान में जो भी ऐसी फैक्ट्रियां चल रही हों उनकी संख्या और उनके नामों की सूचना उनको दी जाए.ऐसी फैक्ट्रियों को बंद कराने विषयक राज्य सरकार द्वारा जारी किये गए शासनादेशों की सत्यापित प्रतियाँ मांगने के साथ-साथ ऐसी फैक्ट्रियों के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा की गई कार्यवाहियों की सूचना भी संजय ने मांगी थी.

 


मुख्यमंत्री कार्यालय ने बीती 10 जुलाई को संजय की आरटीआई अर्जी को राज्य के पर्यावरण विभाग को ट्रान्सफर कर दिया था. राज्य के पर्यावरण विभाग ने संजय की आरटीआई अर्जी को बीती 27 जुलाई को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ट्रान्सफर किया था जिस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बीती 02 अगस्त को संजय को सूचना दी है कि उनकी आरटीआई अर्जी के बिंदु संख्या 1 से 6 तक की सूचना शून्य है क्योंकि बोर्ड में सिंगल यूज़ पॉलिथीन बनाने वाली कोई भी निर्माण इकाई पंजीकृत नहीं है.

 

सिंगल यूज़ पॉलिथीन का प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित होने के बाद भी इस पॉलिथीन का प्रयोग बदस्तूर जारी है और छापेमारी में सरकारी विभागों को हमेशा भारी मात्रा में प्रतिबंधित श्रेणी की पॉलिथीन प्रयोग होते हुए मिलती है. संजय कहते हैं कि जब सूबे में प्रतिबंधित पॉलिथीन का निर्माण विगत कई वर्षों से हो ही नहीं रहा है तो इतनी भारी मात्रा में प्रतिबंधित श्रेणी की पॉलिथीन प्रयोग के लिए उपलब्ध होना राज्य सरकार के खुफिया तंत्र और अन्य सम्बंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रहा है. संजय ने सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ से सार्वजनिक अपील की है कि वे राज्य सरकार के खुफिया तंत्र और अन्य सम्बंधित विभागों के पेंच कसकर सूबे में प्रतिबंधित पॉलिथीन के प्रयोग को पूरी तरह से धरातल पर बंद करायें. संजय ने आम जनमानस से भी अपील की है कि वे भी अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए अवैध रूप से चल रही पॉलिथीन निर्माण इकाइयों और पॉलिथीन विपणन कर रही इकाइयों की शिकायतें करके अथवा हेल्पलाइन 7991479999 पर सूचना देकर उनको बंद कराने में सहायक बनकर  स्वयं भी पॉलिथीन का प्रयोग बंद करें और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण का तोहफा और आशीर्वाद दें.