Friday, January 19, 2018

UP में भूख से मौतों पर योगी सरकार की संवेदनहीनता एक्टिविस्ट संजय शर्मा की RTI से उजागर l



लखनऊ/20 January 2018............
समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा  ( स्वतंत्र पत्रकार )
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj 
आजादी के 70 साल बाद भी यदि भारत जैसे मजबूत लोकतंत्र में किसी नागरिक की मौत भूख की बजह से हो तो यह देश के नागरिकों  द्वारा चुनी गई सरकारों के लिए निहायत ही शर्म की बात होने के साथ-साथ सरकारों के लिए ऐसी मौतें रोकने के लिए भविष्य में हर संभव प्रभावी कदम उठाने के लिए कड़ा चेतावनी सन्देश भी होता है l चुनी हुई सरकारों से अपेक्षा तो यह होती है कि वे ऐसी स्थिति ही न आने दें  जिसके कारण कोई नागरिक भूख की बजह से मरे पर देखा जाता है कि भूख से मौत होने पर सरकारें अधिकतर अपनी जिम्मेदारी मानने से इनकार करती नज़र आती है और मौत के मामले को जांचों के मकड़जाल में उलझा देती हैं l कुल मिलकर कहें तो लब्बोलुआब यही है कि सरकारें इस संवेदनशील मुद्दे के प्रति अक्सर ही असंवेदनशील बनी रहती है l  भूख से मौतों के मुद्दे पर सरकार द्वारा  असंवेदनशील रुख रखने की ताजा खबर आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश से आ रही है जहाँ की सत्ता इस समय एक संत के हाथों में है l राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड आरटीआई कंसलटेंट और इंजीनियर संजय शर्मा की एक आरटीआई पर शासन के राजस्व विभाग ने कुछ ऐसा जबाब दे दिया है जिसने भूख से मौतों के मुद्दे पर योगी सरकार की संवेदनशीलता को कटघरे में खड़ा कर दिया है l   



लोकजीवन में पारदर्शिता,जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के लिए काम कर रहे देश के नामचीन  कार्यकर्ताओं में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बीते 15  नवम्बर को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के कार्यालय में एक आरटीआई अर्जी देकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भूख से होने वाली मौतों को रोकने के लिए की सरकारी नीति, की गई सरकारी कार्यवाहियों, भुखमरी कोष के गठन, भूख से मौत के मामलों में पीड़ित परिवारों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से दिए गए मुआवजों, ऐसी मौतों की संख्या,भूख से मौत के मुद्दे पर शासन स्तर पर आहूत बैठकों और इन मौतों की जिम्मेवारी लोकसेवकों पर नियत करने की नीति आदि के सम्बन्ध में 8 बिन्दुओं पर सूचना माँगी थी l मुख्य सचिव कार्यालय के जन सूचना अधिकारी और अनु सचिव पी. के. पाण्डेय ने बीते 30 नवम्बर को संजय की अर्जी को उत्तर प्रदेश के राजस्व विभाग के जन सूचना अधिकारी को अंतरित कर दिया था l राजस्व अनुभाग-10 के अनुभाग अधिकारी और जन सूचना अधिकारी अभिषेक गंगवार ने बीते 3 जनवरी को पत्र जारी करके संजय को जो सूचना दी है उसने भुखमरी के मुद्दे पर योगी सरकार की संवेदनशीलता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा  दिया है l   




प्रशासनिक सुधार अनुभाग-2 की 3 दिसम्बर 2015 की अधिसूचना की नियमावली के बिंदु संख्या 1(3) की बात लिखते हुए अभिषेक गंगवार ने संजय शर्मा के आरटीआई आवेदन को ग्राह्य नहीं बताया है और आरटीआई आवेदन के आठों बिन्दुओं पर सूचना देने से इनकार कर दिया है l 



आरटीआई मामलों के एक्सपर्ट संजय ने अभिषेक पर योगी सरकार की नाकामियों को छुपाने के लिए नियमावली के नियम की गलत व्याख्या करके सूचना देने में जान-बूझकर रोड़ा अटकाने का आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत आयोग में करने के साथ-साथ अपील दायर करके सूचना को सार्वजनिक कराने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही है lसंजय का कहना है कि नियमावली का नियम 1(3) कहता है कि ऐसी शिकायतें और अपीलें जो इस नियमावली के प्रारंभ होने के दिनांक को या उसके पूर्व दाखिल की गईं हैं और उचित पाई गईं हैं और उक्त दिनांक के पूर्व पहले से ही पंजीकृत हैं,के सम्बन्ध में कार्यवाही पूर्ववत की जायेगी और उनका उसमें किसी शैथिल्य के कारण उपशमन नहीं किया जाएगा अथवा उन्हें नामंजूर नहीं किया जाएगा l संजय के अनुसार यह नियम अपीलों और शिकायतों पर लागू होने के कारण इसका सम्बन्ध आयोग से है न कि जन सूचना अधिकारी से और इस आधार पर संजय ने अभिषेक पर सरकारी अक्षमता छुपाने के लिए कलुषित भावना से मानवाधिकारों के इस मुद्दे पर असंवेदनशील रवैया अख्तियार करने का आरोप लगाया है और अभिषेक के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत करने की बात कही है l  




भूख से होने वाली मौतों को समाज और सरकार के मुंह पर कालिख पोतने जैसा बताते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता संजय शर्मा ने  योगी आदित्यनाथ से उच्च अपेक्षाओं की बात कही है और अपने अपंजीकृत संगठन ‘तहरीर’ की ओर से योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर भुखमरी रोकने में प्रभावी कदम उठाने के साथ-साथ माँगी गई प्रश्नगत सूचनाएं सरकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग उठाने की बात इस स्वतंत्र पत्रकार से की गई एक  एक्सक्लूसिव वार्ता में कही है l 

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News written by freelance journalist Urvashi Sharma  

Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj 
( Disclaimer - This news item can be copy pasted free of charge if used without editing. This news item can be used free of charge with edits but only with proper reference of both of yaishwaryaj &name of this freelance journalist or with prior permission of news author, i.e. a telephonic permission taken on her mobile number 8081898081)


Thursday, January 18, 2018

J&K आतंकवाद : मनमोहन के मुकाबले मोदी काल में 33% घटी शहीद सैनिकों की संख्या– संजय शर्मा की RTI से हुआ खुलासा l



लखनऊ/18 January 2018............
समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा  ( स्वतंत्र पत्रकार )
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj

केंद्र की वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर की आतंकवादी हिंसा में शहीद होने वाले सुरक्षाकर्मियों और सैनिकों की संख्या में पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के मुकाबले कमी लाने में कामयाब होती नज़र आ रही है l चौंकाने वाला यह खुलासा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड आरटीआई कंसलटेंट और इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा दायर की गई एक आरटीआई पर भारत सरकार के गृह मामलों के मंत्रालय द्वारा दिए गए एक जबाब से हुआ है l 




लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के लिए काम कर रहे देश के नामचीन  कार्यकर्ताओं में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बीते 20 नवम्बर को भारत सरकार को एक आरटीआई अर्जी देकर इस सम्बन्ध में सूचना माँगी थी l भारत सरकार के गृह मामलों के मंत्रालय की निदेशक ( सुरक्षा ) एवं केन्द्रीय जनसूचना अधिकारी सुलेखा ने बीते 9 जनवरी को पत्र जारी कर संजय को सूचना दे दी है l ( संजय की आरटीआई और सुलेखा का जबाब इस स्वतंत्र पत्रकार के पास उपलब्ध है और मोबाइल नंबर 8081898081 पर ई-मेल पता SMS करके e-mail द्वारा  प्राप्त किया जा सकता है l )




सुलेखा ने संजय को बताया है कि 01 जनवरी 2004 से 31 दिसम्बर 2014 तक की 11 वर्षों की अवधि में जम्मू और कश्मीर राज्य में हुई आतंकवादी हिंसा में कुल 1102 सुरक्षा बल और सेना के कार्मिक शहीद हुए l सुलेखा ने संजय को यह भी बताया है कि 01 जनवरी 2015 से 31 दिसम्बर 2017 तक की 3 वर्षों की अवधि में जम्मू और कश्मीर राज्य में हुई आतंकवादी हिंसा में कुल 201 सुरक्षा बल और सेना के कार्मिक शहीद हुए हैं l 




इंजीनियर संजय का कहना है कि साल 2004 से 2014 तक की अवधि के 10 वर्षों में मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे जिनके समय में शहीद सैनिकों का औसत 100 सैनिक प्रतिवर्ष था l संजय ने यह भी कहा है कि साल 2015 से 2017 तक के 3 वर्षों में देश की कमान वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में है जिनके समय में शहीद सैनिकों का औसत घटकर 67 सैनिक प्रतिवर्ष पर आ गया है l बकौल संजय इस प्रकार केंद्र की वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर की आतंकवादी हिंसा में शहीद होने वाले सुरक्षाकर्मियों और सैनिकों की संख्या में पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के मुकाबले मोटा-मोटी 33 प्रतिशत की भारी-भरकम कमी लाने में कामयाब रही है l



सुरक्षा बालों और सैनिकों के जीवन को अनमोल बताते हुए आरटीआई विशेषज्ञ संजय शर्मा ने शहीद सनिकों की संख्या में कमी लाने के लिए नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद ज्ञापित करने और अपने अपंजीकृत संगठन ‘तहरीर’ की ओर से पत्र लिखकर जम्मू कश्मीर को पूर्णतया आतंकवाद मुक्त करने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए शुभकामनायें प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की बात इस स्वतंत्र पत्रकार से की गई एक  एक्सक्लूसिव वार्ता में कही है l 


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News written by freelance journalist Urvashi Sharma  
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj
( Disclaimer - This news item can be copy pasted free of charge if used without editing. This news item can be used free of charge with edits but only with proper reference of both of yaishwaryaj & this freelance journalist or with prior permission of news author, i.e. a telephonic permission taken on her mobile number 8081898081)


Sunday, January 14, 2018

गोरखपुर महोत्सव का सच उजागर करेंगी एक्टिविस्ट संजय शर्मा की आरटीआई l

लखनऊ/14 जनवरी 2018 ................... क्या यूपी के सीएम अपने गृह जनपदों में शाही अंदाज में आयोजन करके जनता का पैसा खुले हाथ से बर्बाद करते हैं ? सबाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पूर्व सीएम अखिलेश यादव अपने कार्यकाल में जनता के पैसों से सैफई में शाही अंदाज में महोत्सव मनाते थे तो सूबे की कमान संभालने के बाद संत  और योगी आदित्यनाथ अब अपने चुनावी शहर गोरखपुर में जनता के पैसों से राजसी अंदाज में महोत्सव मनाते नज़र आ रहे हैं l गौर करने की बात यह है कि अखिलेश के कार्यकाल में गोरखपुर महोत्सव ख़बरों में नहीं रहता था तो योगी के कार्यकाल में सैफई महोत्सव की आहट तक नहीं सुनाई दे रही है जबकि इन महोत्सवों के लिए सरकारी धन आबंटित करने वाले अधिकारी आज भी वही हैं जो अखिलेश के समय में थे l तो क्या स्टीलफ्रेम कही जाने वाली ब्यूरोक्रेसी आम जनता के हितों की बजाय सत्ताधारी दल के हितों को ही तवज्जो देते है ?

सैफई महोत्सव की ही तरह गोरखपुर महोत्सव भी विवादों से दूर नहीं रह पाया है  फिर चाहे वह इस महोत्सव पर जनता का पैसा पानी की तरह बहाने के साथ साथ सरकारी अमले का दुरुपयोग करने का आरोप हो,कार्यक्रम के थीम सॉन्ग पर चोरी के आरोप हों या फिर फ़िल्मी कलाकारों के ठुमके लगाने के लिए किये जाने वाले आयोजन हों l इन विवादों पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दलों के एक दुसरे से उलट दावे लगातार सामने आ रहे हैं l सबाल तो गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौतों के बीच महोत्सव मनाने के साथ साथ पर्यटन बढाने की बात कहकर मनाये जाने वाले इन महोत्सवों की सार्थकता पर भी उठ रहे है l
परस्पर विरोधी दावों के बीच जनता के मन में उठ रहे इन जैसे दर्जनों सबालों के सरकारी जबाब जानने के लिए सूबे की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड आरटीआई एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा ने उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में 5 आरटीआई अर्जियां भेजी है l देश के नामचीन समाजसेवियों में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बताया कि वे इस मुद्दे पर पूरा सरकारी सच सामने अवश्य लायेंगे  l  



Friday, December 29, 2017

पीपीपी मॉडल पर रेल स्टेशनों के पुनर्विकास के केंद्र सरकार के दावे झूंठे : आरटीआई खुलासा l


लखनऊ/29 दिसम्बर 2017............ समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा ( स्वतंत्र पत्रकार ) Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj बड़े-बड़े दावों के साथ बड़े जोर-शोर से शुरू की गई भारतीय रेल की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ( पीपीपी ) मॉडल पर रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास करने की योजना अब तक मात्र 1 रेल स्टेशन का ही पुनर्विकास कर पाई है और इस योजना की खामियों को देखते हुए भारतीय रेल अब इस योजना की खामियां दूर करने के लिए इस योजना के तहत मात्र भोपाल के पास स्थित हबीबगंज स्टेशन का पुनर्विकास करने के बाद योजना की समीक्षा करने में जुटा हुआ है l 3पी मॉडल पर रेल स्टेशन पुनर्विकास योजना की संशोधित रणनीति अभी फाइनल नहीं हो पाई है l चौंकाने वाला यह खुलासा यूपी की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड समाजसेवी और इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा बीते 15 जून को दायर की गई एक आरटीआई पर रेलवे बोर्ड के निदेशक स्टेशन विकास (प्रौद्योगिकी) अनिश कुमार द्वारा बीते 03 दिसम्बर के पत्र द्वारा भेजे गए एक जबाब से हुआ है l
अनिश ने संजय को बताया है कि पीपीपी मॉडल पर श्रेणी रेलवे स्टेशनों को लीज पर देने की रणनीति भविष्य में अंतिम होने पर रेल विभाग की वेबसाइट पर अपलोड की जायेगी l संजय द्वारा पीपीपी मॉडल पर लीज पर दिए गए स्टेशनों की संख्या और विवरण के सम्बन्ध में माँगी गई सूचना पर अनिश ने बताया है कि भोपाल ( मध्य प्रदेश ) के पास स्थित हबीबगंज वह एकमात्र स्टेशन है जिसे अब तक पीपीपी मॉडल के तहत लीज पर दिया गया है l हबीबगंज स्टेशन का पुनर्विकास रेल मंत्रालय द्वारा स्टेशनों का पुनर्विकास करने के लिए बनाए गए स्पेशल परपज व्हीकल ‘इंडियन रेलवे स्टेशंस डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड’ (आई.आर.एस.डी.सी.) द्वारा किये जाने और कार्य अभी जारी होने की सूचना देते हुए इस सम्बन्ध में अधिक विवरण आई.आर.एस.डी.सी. के एमडी और सीईओ के नई दिल्ली स्थित कार्यालय से लेने की बात भी संजय से कही गई है l पीपीपी मॉडल पर पुनर्विकसित किये जाने वाले स्टेशनों के नामों की सूची के विषय में अनिश ने संजय को बताया है कि यह सूची अभी फाइनल नहीं है और in स्टेशनों की सूची अंतिम होने पर रेल विभाग की वेबसाइट पर अपलोड की जायेगी l
बताते चलें कि तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बीते फरवरी महीने में केन्द्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर और रेलवे बोर्ड के पदाधिकारियों की उपस्थिति में भारतीय रेल के 23 स्टेशनों के पुनर्विकास कराने के पहले फेज प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था l तब प्रभु ने पीपीपी मॉडल पर देश के 400 A1 और A श्रेणी के स्टेशनों के पुनर्विकास को नॉन-फेयर रेवेन्यु जेनरेशन का सबसे बड़ा कार्यक्रम बताया था l तब इस कार्य को जोनल रेलवेज द्वारा फेयर बिडिंग प्रक्रिया से किये जाने की बात भी प्रभु ने की थी l एक लाख करोड़ से अधिक की वैल्यू के इस कार्यक्रम में भारतीय रेल की 2200 एकड़ अतिक्रमण मुक्त भूमि 45 वर्षों की लीज पर दिए जाने की बात भी कही गई थी l लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही के लिए काम कर रहे देश के नामचीन कार्यकर्ताओं में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने अब अपनी आरटीआई पर दिए गए जबाब के आधार पर भारतीय रेल के बड़े बड़े दावों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए वर्तमान रेल मंत्री को पत्र लिखकर इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित कराते हुए अपने स्तर से सही स्थिति देश के सामने रखने की मांग उठाने की बात इस स्वतंत्र पत्रकार से की गई एक एक्सक्लूसिव वार्ता में कही है l ------------------------------------------------------------------------------------------------ News written by freelance journalist Urvashi Sharma Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj

Friday, December 8, 2017

कैग खुलासे से जागी मोदी सरकार ने इस साल की है हथियारों की रिकॉर्ड खरीद : RTI खुलासा l

News Summary मोदी सरकार ने इस साल तोड़ दिए हैं सेना के हथियार और गोला बारूद की खरीद के पिछले 6 साल के सारे रिकॉर्ड - संसद में पेश कैग रिपोर्ट से भारतीय सेना के पास हथियारों की कमी के खुलासे के बाद जागी केंद्र सरकार का सराहनीय कदम : लखनऊ के फायरब्रांड एक्टिविस्ट संजय शर्मा  की आरटीआई से हुआ खुलासा l 


Get complete details & original RTI at http://upcpri.blogspot.in/2017/12/6-l.html


लखनऊ/09 दिसम्बर 2017

News Author - Urvashi Sharma ( Freelance Journalist )

YAISHWARYAJ News Exclusive ©yaishwaryaj



बीते जुलाई महीने में भारत की संसद में पेश हुई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट ने यकायक पूरे भारतवर्ष को चिंता में दाल दिया था l इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर भारत सरकार के साथ-साथ देश के हर नागरिक का चिंतित होना स्वाभाविक ही था क्योंकि मामला चीन और पाकिस्तान सीमा पर आये दिन सैन्य कार्यवाहियां करती देश की बहादुर सेना के पास गोला-बारूद की भारी कमी होने की बात कैग की इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कही गई थी l कैग द्वारा इस साल जनवरी में सेना के गोला-बारूद प्रबंधन का विश्लेषण करने के बाद डी गई इस रिपोर्ट में तोपखाने और टैंकों के लिए गोला-बारूद,मिसाइल और दूसरे विस्फोटकों में इस्तेमाल होने वाले  इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज़ आदि की गंभीर रूप से किल्लत होने की बातें भी कहीं गईं थीं l साफ-साफ कहें तो इस रिपोर्ट में आंकलन किया गया था कि अगर भारतीय सेना को 10 दिनों तक लगातार युद्ध करना पड़ता तो उसके पास पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद उपलब्ध नहीं था lरिपोर्ट में बताया गया था कि किसी ऑपरेशन की अवधि की जरूरतों के हिसाब से रक्षा मंत्रालय द्वारा निर्धारित 40 दिन की अवधि का “वॉर वेस्टेज रिज़र्वरखा जाना और साल 1999 में भारतीय सेना द्वारा तय किया गया कम से कम 20 दिन का गोला-बारूद रिज़र्व होना आवश्यक था पर सितंबर 2016 में पाया गया था कि लगभग 55% प्रकार के गोला-बारूद की उपलब्धता MARL (Minimum Acceptable Risk Level) से कम थी यानि कि इन प्रकारों के गोला-बारूद की उपलब्धता न्यूनतम अपरिहार्य आवश्यकता परिचालन की ज़रूरत के हिसाब से नहीं था  l  इसके अलावा CAG ने 40%  प्रकार के गोला-बारूद की गंभीर रूप से कमी भी पाई थी जिनका तकरीबन 10 दिन का ही स्टॉक था l



पर अब देश और इसके नागरिकों को चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है l आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे यूपी की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड एक्टिविस्ट और इंजिनियर संजय शर्मा की एक आरटीआई पर भारत के सेना मुख्यालय के जबाब से यह राहत भरा खुलासा हुआ है कि  नरेंद्र मोदी की अगुआई में चल रही केंद्र सरकार ने इस साल सेना के हथियार और गोला-बारूद की खरीद के मामले में पिछले 6 साल के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं l




एक्टिविस्ट संजय शर्मा द्वारा बीते 04 सितम्बर को भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में दायर की गई आरटीआई पर एकीकृत मुख्यालय  रक्षा मंत्रालय ( सेना ) के लेफ्टिनेंट कर्नल और जन सूचना अधिकारी ए. डी. एस. जसरोटिया ने बीते 13 नवम्बर के पत्र के माध्यम से संजय को बताया है कि Arms & Ammunitions की खरीद पर जहाँ एक तरफ भारतीय सेना नें वित्तीय वर्ष 2011-12 में 25.85 Cr. रुपये, वित्तीय वर्ष 2012-13 में 4,051.35 Cr. रुपये, वित्तीय वर्ष 2013-14 में 10,394.37 Cr. रुपये,वित्तीय वर्ष 2014-15 में 3,802.41 Cr. रुपये, वित्तीय वर्ष 2015-16 में 3,427.97 Cr. रुपये,वित्तीय वर्ष 2016-17 में 11,348.92 Cr. रुपये ही खर्चे थे तो वहीं दूसरी तरफ हालिया वित्तीय वर्ष 2017-18 के शुरुआती 7 महीनों में  भारत सरकार 31 अक्टूबर तक  ही 28,303.43 Cr. रुपये खर्च कर चुकी है l 




पेशे से इंजीनियर संजय शर्मा बताते हैं कि इस सूचना से स्पष्ट है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के अंतिम तीन वर्षों में भारतीय सेना ने Arms & Ammunitions की खरीद पर 14471.57 Cr. रुपये खर्चे थे तो वहीं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के आरंभिक तीन वर्षों में भारतीय सेना ने Arms & Ammunitions की खरीद पर 18579.3 Cr. रुपये खर्चे   हैं जो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के खर्चे के मुकाबले 4107.53 Cr. रुपये अधिक है l 



देश के चोटी के आरटीआई विशेषज्ञों में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बताया कि हालांकि बीजेपी सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुकाबले 3 साल में सेना के आर्म्स एंड एम्मुनिशन पर अधिक खर्चा किया पर यह भी काफी कम था जिसका खुलासा CAG की रिपोर्ट में हुआ l संसद में पेश कैग रिपोर्ट से भारतीय सेना के पास गोला बारूद की कमी के खुलासे के बाद जागी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा हालिया वित्तीय वर्ष 2017-18 के शुरुआती 7 महीनों में 31 अक्टूबर तक  ही 28,303.43 Cr. रुपये खर्च करने के कदम को सही बताते हुए एक्टिविस्ट संजय शर्मा  ने नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार सतर्क दृष्टि रखने की अपेक्षा करने की बात एक विशेष बातचीत में इस स्वतंत्र पत्रकार को बताई है l 


News Author - Urvashi Sharma ( Freelance Journalist )

YAISHWARYAJ News Exclusive ©yaishwaryaj



Tuesday, December 5, 2017

UP : जानिये क्यों अयोध्या के रामलला-रामजन्मभूमि मंदिर की सूचना सार्वजनिक नहीं करेगी योगी सरकार – फायरब्रांड एक्टिविस्ट संजय शर्मा की RTI से खुलासा l

लखनऊ/05-12- 2017............
कभी केंद्र में बीजेपी की सरकार बनबाने में अहम भूमिका निभाने वाले राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मुद्दे से सम्बंधित सूचना को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 यानि कि आरटीआई एक्ट में देने से यूपी की महंत आदित्यनाथ योगी की अगुआई में चल रही बीजेपी की सरकार ने मना कर दिया है lलखनऊ के फायरब्रांड आरटीआई एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा ने बीते 16 सितम्बर को यूपी के मुख्य सचिव कार्यालय में एक आरटीआई दायर करके बाबरी ढांचा ध्वस्त होने से अब तक राम लला रामजन्मभूमि मंदिर की सुरक्षा और देखरेख पर हुए खर्चे,मंदिर के तिरपाल पर आये खर्च, तिरपाल बदलने पर आये खर्चे,रामजन्मभूमि-बाबरी विवाद की अदालती कार्यवाहियों पर आये सरकारी खर्चों.बाबरी ढांचा टूटने के उत्तरदाई लोकसेवकों को दिए दंड और राम लला रामजन्मभूमि मंदिर का पुजारी नियुक्त करने की विहित प्रक्रिया की सूचना माँगी थी l

मुख्य सचिव कार्यालय के अनु सचिव और जन सूचना अधिकारी ने देश के जाने माने समाजसेवियों में शुमार होने वाले संजय शर्मा की आरटीआई अर्जी बीते 21 सितम्बर को ही उत्तर प्रदेश के गृह विभाग को अंतरित कर दी थी l अब गृह विभाग के साम्प्रदायिकता नियंत्रण प्रकोष्ठ के विशेष कार्याधिकारी अशोक कुमार सिंह ने संजय को जो बात कहते हुए सूचना देने से मना किया है वह वेहद चौंकाने वाला है l


एक्टिविस्ट संजय की आरटीआई और अशोक कुमार सिंह का जबाब देखने के लिए http://sajagngonews.blogspot.in/2017/11/blog-post_29.html क्लिक करें l