Wednesday, November 18, 2015

अमिताभ ठाकुर दंपति के आधा दर्जन एनजीओ नहीं हैं पंजीकृत

19:38:13, 18-11-2015


अमिताभ ठाकुर दंपति के आधा दर्जन एनजीओ नहीं हैं पंजीकृत


लखनऊ। अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपति पारदर्शिता और जबाबदेही के मुद्दे पर खुद ही कटघरे में आ गए हैं। उत्तर प्रदेश के फर्म, सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार के कार्यालय में भेजी गयी एक शिकायत से खुलासा हुआ है कि इस दंपति द्वारा बनाए गए आधा दर्जन एनजीओ में से कोई भी उत्तर प्रदेश के फर्म,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार के कार्यालय में पजीकृत नहीं पाया गया है।
 
सामाजिक संस्था ‘तहरीर के संस्थापक अध्यक्ष लखनऊ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने उत्तर प्रदेश के फर्म,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार को लोकायुक्त की रिपोर्ट प्रेषित करते हुए ठाकुर दंपत्ति द्वारा बनाए गए इन एनजीओ की विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी।
 
उत्तर प्रदेश के फम्र्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार पीएन दुबे ने बीते 19 अक्टूबर के एक पत्र के माध्यम से संजय को बताया है कि उनके कार्यालय में उपलब्ध कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड में नेशनल आरटीआई फोरम,पीपुल्स फोरम, पीके-ओएमजी ट्रस्ट, इंस्टिट्यूट फॉर डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और आरटीआई फंड में से कोई भी एनजीओ पंजीकृत नहीं पायी गयी है।

ठाकुर दम्पत्ति पारदर्शिता और जबाबदेही के मामले में कटखरे में!

 
अमिताभ-नूतन की 6 में से एक भी एनजीओ पृजीकृत नहीं
 
लखनऊ। पारदर्शिता और जबाबदेही के मुद्दों पर लोगों से जवाब मांगने वाले अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति खुद ही पारदर्शिता और जबाबदेही के मुद्दे पर कटघरे में आ गए है। उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार के कार्यालय में भेजी गयी एक शिकायत से खुलासा हुआ है कि ठाकुर दंपत्ति द्वारा बनाए गए आधा दर्जन एनजीओ में से कोई भी उत्तर प्रदेश के फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार के कार्यालय में पजीकृत नहीं है। 
 
बताते चलें कि सामाजिक संस्था ‘तहरीर’ के संस्थापक व सामाजिक कार्यकर्ता संजय शर्मा ने ठाकुर दंपत्ति द्वारा संचालित एनजीओ नेशनल आरटीआई फोरम, पीपुल्स फोरम,पीके-ओएमजी ट्रस्ट, इंस्टिट्यूट फॉर डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और आरटीआई फंड की गतिविधियों को संदिग्ध बताते हुए इनके माध्यम से पीआईएल ट्रेडिंग करने और काला धन सफेद करने की सम्भावना व्यक्त करते हुए इसकी शिकायत उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त से की थी। लोकायुक्त ने संजय की इस शिकायत को सही पाते हुए शिकायत पर अग्रिम जांच हेतु अनुशंसा राज्य सरकार को प्रेषित की थी। बीते 07 अक्टूबर को संजय ने उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार को लोकायुक्त की रिपोर्ट प्रेषित करते हुए ठाकुर दंपत्ति द्वारा बनाए गए इन एनजीओ की संदिग्ध गतिविधियों, इनके माध्यम से पीआईएल ट्रेडिंग करने और काला धन सफेद करने, इनके आय के स्रोतों,बैलेंस शीट,ऑडिट रिपोर्ट व अन्य जांचे कराने का अनुरोध किया था। जिस पर बीती 19 अक्टूबर को भेजे गए जवाब पर उत्तर प्रदेश के फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार पी० एन० दुबे ने बताया है कि उनके कार्यालय में उपलब्ध कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड में नेशनल आरटीआई फोरम,पीपुल्स फोरम,पीके-ओएमजी ट्रस्ट,इंस्टिट्यूट फॉर डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और आरटीआई फंड में से कोई भी एनजीओ पंजीकृत नहीं पायी गयी है। 
 
इस सम्बन्ध में संजय का कहना है कि रजिस्ट्रार पी० एन० दुबे के जबाब से उनके द्वारा लोकायुक्त के समक्ष ठाकुर दंपत्ति की एनजीओ पर लगाए आरोप खुद-ब-खुद पुष्ट हो रहे हैं। उन्होंने अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति पर पारदर्शिता और जबाबदेही के मुद्दों पर बड़ी-बड़ी बातें करने का ढकोसला मात्र करने का आरोप लगाते हुए दंपत्ति द्वारा गैर कानूनी गतिविधियाँ संचालित करने के उद्देश्य से आधा दर्जन एनजीओ बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह ठाकुर दम्पत्ति की इन सभी गैर-पंजीकृत एनजीओ द्वारा संदिग्ध गतिविधियाँ संचालित करने के मामलों की जांच के लिए सूबे के राज्यपाल,मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखेंगे। 
 

जनता के पैसों से ऐश में पीछे नहीं रही कांग्रेस भी !


जब भारत में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की रिपोर्ट कह रही थी कि एक गरीब 17 रुपये प्रतिदिन में गुजर-बसर कर रहा था, भारत का योजना आयोग 28 रुपये रोजाना खर्च करने वाले को गरीब नहीं मान रहा था और सत्तारूढ़ पार्टी ( कांग्रेस ) के नेता दिल्ली में 12 रुपये में भरपेट भोजन मिलने के दावे कर रहे थे तब देश की सत्तारूढ़ यूपीए सरकारने अपने सालगिरह के जश्न पर प्रति आगंतुक 6871 रुपये की भारी-भरकम रकम खर्च करने से पहले एक बार भी नहीं सोचा था ।

तानाशाह शाहखर्च मायावती !

समझ नहीं आता कि ये लोकतान्त्रिक ढंग से चुने जनप्रतिनिधि हैं या राजतान्त्रिक तानाशाह ?

जनता के पैसों की बर्बादी में मायावती का तो कोई सानी ही नहीं है । मुझे नहीं लगता कि आप सब करोड़ों के नोटों से बनी माला पहनकर सालगिरह का सार्वजनिक जश्न मनाती मायावती को अब तक भूल पाए होंगे ।
अपनी सनक में मायावती ने मुख्यमंत्री रहते विशेष पैकेज की राशि को भी पार्कों, स्मारकों और अपनी मूर्तियों पर खर्च कर दिया था । जेट प्लेन से सैंडल आने बाला विकीलीक्स खुलासा भी याद है न । मायावती ने तब यूपी का मुख्यमंत्री रहते हुए पसंदीदा ब्रांड की सैंडल मुंबई से मंगाने के लिए खाली जेट प्लेन को लखनऊ से मुंबई भेज दिया था । शायद लखनऊवासी मायावती की गाडी आने से पहले सड़कों की विशेष सफाई और धुलाई को अब तक भूले नहीं होंगे ।

कहा जाता है कि अपनी सुरक्षा के डर से मायावती ने अपना खाना बनाने के लिए 9 कुक रखे थे जिसमें सिर्फ दो खाना बनाते थे और बाकी 7 खाना बनता हुआ देखते थे । मायावती को इससे भी संतोष नहीं होता था और वे खाना बनने के बाद दो फूड टेस्टर से उसकी जांच करवाती थीं । मायावती भारत के किसी भी राज्य की पहली ऐसी मुख्यमंत्री हुईं जिन्होंने अपने घर से दफ्तर के लिए निजी सड़कें बनवाईं।

जनता का पैसा है भाई “माले मुफ्त, दिले बेरहम” बाली कहावत तो याद है न ।

सत्ता पाते ही शाहखर्च बने अरविन्द केजरीवाल !

शाहखर्ची में नवगठित आम आदमी पार्टी के दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पीछे नहीं हैं । अन्ना हजारे जैसी शख्शियत के साथ चलते सत्ता की कुंजी पाए अरविन्द कहने को तो 'वीआईपी कल्चर खत्म करने आए थे' पर सत्ता पाते ही 'वीआईपी कल्चर’ का शिकार हो गए और अपने सिविल लाइन्स स्थित आवास में 2 महीनों में ही जनता के 91,000 रुपए बिजली पर खर्च कर बैठे ।

अब ऐसे में आखिर दोष किसका है ? केजरीवाल जैसे राजनेताओं का जो सत्ता पाते ही अपनी कमजोर इच्छाशक्ति के कारण सत्ता-सुख के स्नान का पूर्ण आनंद लेने के लिए धीरे-धीरे ‘हमाम में नंगे’ होने लगते हैं या उस जनता का जो वोट देते समय सही चुनाव करने से हमेशा चूक जाती है ?

या फिर यही है भारत की नियति और राजनेताओं की इस शाहखर्ची से निजात पाने का कोई भी उपाय है ही नहीं ।

कोई जबाब हो तो बताइए ।

बेवफा और शाहखर्च नरेंद्र मोदी !



चुनावों में स्वयं को 'चाय बेचने वाला' कहकर प्रचारित कर आमजन का वोट पाने वाले नरेन्द्र मोदी भी प्रधानमंत्री बनते ही भूले पुराने दिन - अब नहीं रही वादे पूरे करने और जनता के पैसों से फिजूल शाहख़र्ची न करने की चाहत ।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंदीदा स्वच्छ भारत अभियानके तहत पहले साल में भारत कितना साफ हुआ यह तो सभी जानते है पर मीडिया को उपकृत करने के लिए महज विज्ञापन पर ही सरकार ने जनता के 94 करोड़ रूपए फूँक दिए । क्या आप जानते भी हैं कि स्वच्छ भारत अभियान पर बड़ी-बड़ी बातें करने बाले प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय से थोड़ी सी दूरी पर बीएचयू से सटे गांव छित्तूपुर की एक बस्ती में 250 साल से रह रहे 50 से अधिक परिवारों के लगभग 350 लोग आज भी डेढ़ फीट के रास्ते से होकर अपने झोपड़े पंहुच गन्दगी के बीच रहने को मजबूर हैं क्योंकि यहाँ पानी, सड़क, बिजली , जल निकासी नहीं है जहाँ सोच वहां शौचालय की बात करने बाले मोदी  इस मुसहर बस्ती को अभी तक यह सोच या यूँ कहें कि शौचालय नहीं दे पाए हैं और ये लोग शौच और नहाने के लिए गाँव से बाहर जाने को मजबूर है


बड़ी स्मार्टनेस से बनारस को भी ‘क्योटो’ की तरह बनाने या ‘स्मार्टसिटी’ बनाने के पेंच में फंसा दिया गया है और शिलान्यासों के नाम पर 11-11 करोडी यात्राएं कर जनता को खूब गुमराह किया जा रहा है






पीएम नरेंद्र मोदी बनारस का दौरा तीन बार रद्द  कर जनता के 33 करोड़ रुपये गटर में बहा चुके है । हास्यास्पद कारण रहे हैं साइक्लोन हुदहुद और बारिश । रैली स्थल पर बम विस्फोट तक हो जाने पर भी रैली करने पर अडिग रहने बाले मोदीजी प्रधानमंत्री बनते ही दूर समुद्र में आये हुदहुद और बारिश जैसी चीजों से भी डरने लगे । शायद इसलिए कि रैली में पैसा खुद की पार्टी का लगा था और अब की इन बनारस यात्राओं की तैयारियों में निरीह जनता का । अब कथित रूप से ‘चायवाले’ रहे प्रधानमंत्री को भी जनता के बीच जनप्रतिनिधि के रूप में आने पर भी एसी टॉयलेट और 100 टन के एसी की जरूरत हो तो इसे  फिजूलखर्ची नहीं तो और क्या कहा जाए । इस एसी के मेनटेनेंस के लिए भी अलग से 10 लोग दिल्ली से बनारस आए थे और 1.4 मेगावॉट की बिजली पैदा करने वाले बड़े-बड़े डीजल जनरेटर लगाए थे।






अब यह तो आपको मालूम ही होगा कि जून 2014 से जून 2015 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक 26 देशों की यात्राएं कर चुके थे जिन पर जनता के 37 करोड़ रुपये खर्च किये गए थे ।


क्या ऐसे ही होने चाहिए भारत जैसे गरीब देश के लोकतंत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधि !

खुलासा: अमिताभ-नूतन ठाकुर के एनजीओ फर्जी


लखनऊ। यूपी के फम्र्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार के कार्यालय में भेजी गयी एक शिकायत से खुलासा हुआ है कि अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति द्वारा बनाए गए आधा दर्जन एनजीओ में से कोई भी उत्तर प्रदेश के फम्र्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार के कार्यालय में पजीकृत नहीं है।

बताते चलें कि पारदर्शिता और जबाबदेही पर कार्य करने बाली सामाजिक संस्था तहरीर के संस्थापक अध्यक्ष लखनऊ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने ठाकुर दंपत्ति द्वारा संचालित एनजीओ नेशनल आरटीआई फोरम,पीपुल्स फोरम,पीके-ओएमजी ट्रस्ट,इंस्टिट्यूट फॉर डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और आरटीआई फंड की गतिविधियों को संदिग्ध बताते हुए इनके माध्यम से पीआइएल ट्रेडिंग करने और काला धन सफेद करने की सम्भावना व्यक्त करते हुए इसकी शिकायत उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त से की थी। लोकायुक्त ने संजय की इस शिकायत को सही पाते हुए शिकायत पर अग्रिम जांच हेतु अनुशंषा राज्य सरकार को प्रेषित की थी।

बीते 7 अक्टूबर को संजय ने उत्तर प्रदेश के फम्र्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार को लोकायुक्त की रिपोर्ट प्रेषित करते हुए ठाकुर दंपत्ति द्वारा बनाए गए इन एनजीओ की संदिग्ध गतिविधियों, इनके माध्यम से पीआइएल ट्रेडिंग करने और काला धन सफेद करने, इनके आय के स्रोतों,बैलेंस शीट,ऑडिट रिपोर्ट व अन्य जांचे कराने का अनुरोध किया था। उत्तर प्रदेश के फम्र्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार पीएन दुबे ने बीते 19 अक्टूबर के एक पत्र के माध्यम से संजय को बताया है कि उनके कार्यालय में उपलब्ध कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड में नेशनल आरटीआई फोरम,पीपुल्स फोरम,पीके-ओएमजी ट्रस्ट,इंस्टिट्यूट फॉर डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और आरटीआई फंड में से कोई भी एनजीओ पंजीकृत नहीं पायी गयी है।

इस सम्बन्ध में संजय का कहना है कि उत्तर प्रदेश के फम्र्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार पी एन दुबे के इस जबाब से उनके द्वारा लोकायुक्त के समक्ष ठाकुर दंपत्ति के इन एनजीओ के माध्यम से पीआइएल ट्रेडिंग करने,काला धन सफेद करने आदि गैर-कानूनी गतिविधियाँ संचालित कर धन का घालमेल करने संबंधी आरोप खुद-ब-खुद पुष्ट हो रहे हैं।

http://www.jansandesh.com/archives/11714

सैफई हवाई अड्डे पर 100 करोड़ खर्च !

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
सैफई हवाई अड्डा - एक ऐसा हवाई अड्डा जो केवल मुलायम सिंह यादव परिवार के प्रयोगार्थ है l आम जनता से इसका कोई सरोकार नहीं l

क्या आप जानते हैं कि पिछले साल तक ही इस हवाई अड्डे पर 9249 लाख रुपये खर्च हो चुके थे l इसके बाद इस हवाई अड्डे पर नाईट लैंडिंग की सुविधा मुहैया कराने के लिए 400 लाख और खर्च किये गए हैं l शायद आने बाले सालगिरह जश्न के लिए l

सैफई महोत्सव के अतिरिक्त यादव परिवार के लिए प्रचालित इस राजकीय हवाई अड्डे पर आने बाली राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का और इन उड़ानों आदि से यहाँ प्राप्त राजस्व का कोई रिकॉर्ड सरकार के पास नहीं है l

यह हवाई अड्डा अभी तक राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन है और सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी एअरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने इसे अपने नियंत्रण में नहीं लिया है l कारण शायद हम सभी जानते ही हैं l

सरकार से गुजारिश कि अपने बाकी बचे समय में जनता का पैसा वहीं खर्चें जहाँ यह जनता के लिए महत्तम प्रयुक्त हो सके l


Tuesday, November 17, 2015

यूपी के समाजसेवी ने अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति पर लगाया गैर-पंजीकृत एनजीओ के माध्यम से पीआइएल ट्रेडिंग,मनी लॉन्डरिंग का आरोप l





Activist accuses Amitabh-Nutan Thakur couple of PIL trading,Money laundering thru unregistered NGOs.


अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति के आधा दर्जन एनजीओ पर पीआइएल ट्रेडिंग,काला धन सफेद करने जैसी गैर-कानूनी गतिविधियाँ संचालित करने के आरोप ! :पंजीकृत नहीं है अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति के आधा दर्जन एनजीओ में से कोई भी एनजीओ !


लखनऊ/बुधवार 18 नवम्बर 2015/ जीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही के मुद्दों पर बड़ी-बड़ी बातें करने बाली लखनऊ की अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति पारदर्शिता और जबाबदेही के मुद्दे पर खुद ही कटघरे में आ गयी है l अब उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार के कार्यालय में भेजी गयी एक शिकायत से खुलासा हुआ है कि इस दंपत्ति द्वारा बनाए गए आधा दर्जन एनजीओ में से कोई भी उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार के कार्यालय में पजीकृत नहीं पाया गया है l


बताते चलें कि पारदर्शिता और जबाबदेही पर कार्य करने बाली सामाजिक संस्था ‘तहरीर’ के संस्थापक अध्यक्ष लखनऊ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने ठाकुर दंपत्ति द्वारा संचालित एनजीओ नेशनल आरटीआई फोरम,पीपुल्स फोरम,पीके-ओएमजी ट्रस्ट,इंस्टिट्यूट फॉर डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और आरटीआई फंड की गतिविधियों को संदिग्ध बताते हुए इनके माध्यम से पीआइएल ट्रेडिंग करने और काला धन सफेद करने की सम्भावना व्यक्त करते हुए इसकी शिकायत उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त से की थी l लोकायुक्त ने संजय की इस शिकायत को सही पाते हुए शिकायत पर अग्रिम जांच हेतु अनुशंषा राज्य सरकार को प्रेषित की थी l


बीते 07 अक्टूबर को संजय ने उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार को लोकायुक्त की रिपोर्ट प्रेषित करते हुए ठाकुर दंपत्ति द्वारा बनाए गए इन एनजीओ की संदिग्ध गतिविधियों, इनके माध्यम से पीआइएल ट्रेडिंग करने और काला धन सफेद करने, इनके आय के स्रोतों,बैलेंस शीट,ऑडिट रिपोर्ट व अन्य जांचे कराने का अनुरोध किया था l


उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार पी० एन० दुबे ने बीते 19 अक्टूबर के एक पत्र के माध्यम से संजय को बताया है कि उनके कार्यालय में उपलब्ध कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड में नेशनल आरटीआई फोरम,पीपुल्स फोरम,पीके-ओएमजी ट्रस्ट,इंस्टिट्यूट फॉर डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और आरटीआई फंड में से कोई भी एनजीओ पंजीकृत नहीं पायी गयी है l


इस सम्बन्ध में संजय का कहना है कि उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार पी० एन० दुबे के इस जबाब से उनके द्वारा लोकायुक्त के समक्ष ठाकुर दंपत्ति के इन एनजीओ के माध्यम से पीआइएल ट्रेडिंग करने,काला धन सफेद करने आदि गैर-कानूनी गतिविधियाँ संचालित कर धन का घालमेल करने संबंधी आरोप खुद-ब-खुद पुष्ट हो रहे हैं l संजय ने अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति पर पारदर्शिता और जबाबदेही के मुद्दों पर बड़ी-बड़ी बातें करने का ढकोसला मात्र करने का आरोप लगाते हुए इस दंपत्ति द्वारा गैर कानूनी गतिविधियाँ संचालित करने के उद्देश्य से आधा दर्जन एनजीओ बनाने की बात कही है और इन सभी गैर-पंजीकृत एनजीओ द्वारा संदिग्ध गतिविधियाँ संचालित करने के मामलों  की जांच हेतु सूबे के राज्यपाल,मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जांच कराये जाने की बात कही है l