Wednesday, July 17, 2024

मथुरा के दिवंगत आरटीआई एक्टिविस्ट देवकी नंदन शर्मा के सभी आरटीआई मुद्दों को नए सिरे से उठाकर उनको मरणोपरांत न्याय दिलाने की मुहिम की शुरुआत करेंगे संजय शर्मा

मैं मथुरा के दिवंगत आरटीआई एक्टिविस्ट देवकी नंदन शर्मा के सभी आरटीआई मुद्दों को नए सिरे से उठाकर उनको मरणोपरांत न्याय दिलाने और 60 वर्षीय देवकी नंदन शर्मा के सभी आरटीआई मामलों में अन्तर्निहित भ्रष्टाचार को उजागर करके  दोषियों को सक्षम स्तरों से दण्डित कराने की पूरी कोशिश करूंगा.शायद बहुत अधिक लोगों को न पता हो कि उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की मांट तहसील के गढ़ी गाँव निवासी देवकी नंदन शर्मा विगत 13 वर्षों से ग्राम्य विकास की योजनाओं का भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए आरटीआई का प्रयोग कर रहे थे. लगभग 4 महीने तक भूख हड़ताल का सत्याग्रह करने के बाद विगत जून माह में वे भूख हड़ताल के दौरान ही स्वर्गवासी हो गए थे. देवकी नंदन शर्मा को इस प्रकार श्रद्धांजलि देने के इस पुनीत कार्य में देश-विदेश के जो आरटीआई एक्टिविस्ट मेरे सहयोगी बनना चाहें वे मुझे मोबाइल और व्हाट्सएप नंबर 8004560000 पर संपर्क कर सकते हैं.

 
https://vyus.in/index.php/2024/06/18/the-rti-is-the-culprit-for-fast-unto-death/
 
https://indianexpress.com/article/cities/lucknow/mathura-activist-on-hunger-strike-against-graft-in-rural-development-works-dies-9391690/
 
https://countercurrents.org/2024/06/asked-for-rti-questioned-corruption-then-allowed-to-die/

 

Friday, July 5, 2024

सूचना का अधिकार ( आरटीआई ) से सम्बंधित निम्नलिखित सशुल्क सेवाएं उपलब्ध है

 


सूचना का अधिकार ( आरटीआई ) से सम्बंधित निम्नलिखित सशुल्क सेवाएं उपलब्ध है :-

1)     धारा 6 की आरटीआई अर्जी  की ड्राफ्टिंग                                  -  2500/- प्रति अर्जी

2)     धारा 19(1) की प्रथम अपील की ड्राफ्टिंग                                  -  2500/- प्रति अपील

3)     धारा 19(3) की द्वितीय अपील की ड्राफ्टिंग                               -  2500/- प्रति अपील

4)     धारा 18 की शिकायत की ड्राफ्टिंग                                           -  2500/- प्रति शिकायत

5)     जनसूचना अधिकारी के पत्र पर आपत्तियों की ड्राफ्टिंग            -  2500/- प्रति पत्र

6)     प्रथम अपीलीय अधिकारी के पत्र पर आपत्तियों की ड्राफ्टिंग      -  2500/- प्रति पत्र

7)     सूचना आयुक्त के अंतरिम आदेश पर आपत्ति पत्र की ड्राफ्टिंग   - 2500/- प्रति आदेश

8)     सूचना आयुक्त के अंतिम आदेश पर आपत्ति पत्र की ड्राफ्टिंग     - 5000/- प्रति आदेश

9)     अधिकार पत्र पर सूचना आयोग की सुनवाई में प्रतिनिधि           

के रूप में उपस्थिति                                                                     - 2500/- प्रति सुनवाई प्रति केस

10)                    एक केस में केस की किसी भी स्टेज से उस केस के                 

सूचना आयोग में निस्तारण होने तक की सम्पूर्ण

प्रक्रिया ( पुनर्सुनवाई रहित )                                                      – 25000/- प्रति केस 

11)                    एक केस में केस की किसी भी स्टेज से उस

         केस के सूचना आयोग में निस्तारण होने तक

         की सम्पूर्ण प्रक्रिया ( पुनर्सुनवाई सहित )                         – 50000/- प्रति केस

विशेष नोट :

1.      शुल्क भुगतान बैंक अकाउंट में विभिन्न माध्यमों से मनी ट्रान्सफर द्वारा ही करना होगा l नकद शुल्क भुगतान की कोई व्यवस्था नहीं है l

2.      बैंक अकाउंट की डिटेल्स

a.      बैंक का नाम                   कोटक महिन्द्रा बैंक, राजाजीपुरम, लखनऊ शाखा  

b.     बैंक अकाउंट नंबर            8745410894

c.      खाताधारक का नाम      SANJAY SHARMA

d.     IFSC Code                      KKBK0005205

e.      UPI ID                             9648901234@kotak   

3.      दिया गया शुल्क किसी भी दशा में बापस नहीं किया जायेगा एवं इस सम्बन्ध में कोई भी अन्यथा दावा मान्य नहीं होगा l

4.      कोई भी प्रक्रिया आरम्भ करने से पूर्व 1000/- नॉन रिफंडेबुल प्रीलिमिनरी कंसल्टेशन फी का भुगतान बैंक अकाउंट में करने के बाद भुगतान का प्रमाण व्हाट्सएप नंबर 8004560000 पर भेजना अनिवार्य है l

5.      प्रीलिमिनरी कंसल्टेशन के उपरांत उपरोक्त में से कोई भी सेवा अग्रेत्तर लेने पर उक्त  1000/- उस सेवा के शुल्क में समायोजित हो जायेंगे l

6.      उपरोक्त में से कोई भी सेवा लेने के लिए सेवा लेने से पूर्व उस सेवा सम्बंधित पूर्ण शुल्क का भुगतान बैंक अकाउंट में करना तथा भुगतान का प्रमाण व्हाट्सएप नंबर 8004560000 पर भेजना अनिवार्य है l

7.      बिना पूर्ण शुल्क का भुगतान हुए और भुगतान का प्रमाण व्हाट्सएप नंबर 8004560000 पर प्राप्त हुए कोई कार्य आरम्भ नहीं किया जाएगा l

8.      ड्राफ्ट किये गए प्रपत्र व्हाट्सएप और ई-मेल के माध्यम से वर्ड और पीडीएफ फोर्मट्स में सेवा लेने वाले को प्रेषित किये जायेंगे l

सेवा प्रदाता – इं. संजय शर्मा, फ्रीलांसर कंसलटेंट. मोबाइल और व्हाट्सएप नंबर 8004560000, ई-मेल sanjaysharmalko@icloud.com , अन्य मोबाइल नंबर 9415007567, 9454461111

Thursday, July 4, 2024

हिंदी टेक्स्ट जांचने के बाद ही खरीदें नए क्रिमिनल मैन्युअल के द्विभाषी संस्करण नहीं तो पड़ेगा पछताना.


 लखनऊ / शुक्रवार, 5 जुलाई 2024 ..............

बीती 1 जुलाई से देश भर में नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं. अब कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर  1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, इंडियन पीनल कोड 1860 की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023 और इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 नाम के 3 नए कानून लागू कर दिए गए हैं और इसी के साथ कानून के क्षेत्र से जुड़े न्यायाधीश,जुडिशिअल मजिस्ट्रेट्स, एडवोकेट्स, शिक्षक,स्टूडेंट्स के साथ साथ कानूनी प्रक्रियाओं से प्रभावित अथवा कानून में रूचि रखने वाले देश के अन्य नागरिकों ने इन नए कानूनों की बुक्स खरीदना शुरू कर दिया है. इनमें सबसे अधिक पॉपुलर नए आपराधिक कानूनों के हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअल हैं जिनमें एक ही बुक में इन तीनों कानूनों की धाराओं का विवरण आमने सामने के पन्नों में मिलने से ये सभी को सुविधाजनक लगते हैं.

 

इन सबके बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के राजाजीपुरम क्षेत्र निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा ने दावा किया है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केट में बिक रहे अधिकांश पब्लिकेशन्स के नए आपराधिक कानूनों के हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों की हिंदी में कई कानूनी गलतियाँ हैं जिनके कारण से इन हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों की विश्वसनीयता संदिग्ध हो गई है.

 

उदाहरण के लिए संजय बताते है कि भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 76 एवं 77 को जेंडर न्यूट्रल बनाया गया है यानि कि इन अपराधों को कोई भी महिला, पुरुष इत्यादि करें तो वह अपराध होगा किन्तु ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केट में बिक रहे अधिकांश पब्लिकेशन्स के नए आपराधिक कानूनों के हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों की हिंदी में लिखी धाराओं में “जो कोई” की जगह “कोई ऐसा पुरुष” शब्द का प्रयोग किया गया है जो देश में लागू की गई भारतीय न्याय संहिता 2023 से मेल नहीं खा रहा है और जिससे ऐसा असत्य सन्देश जा रहा है कि यदि पुरुषों के आलावा महिलाएं व अन्य इन अपराधों को करते हैं तो वे अपराध नहीं होंगे जो कि इन मैन्युअलों के सामान्य पाठकों को उलझन में डालेगा.

 

संजय ने बताया कि उनको लगता है कि शायद इन पब्लिकेशन्स के लेखकों ने भारतीय न्याय संहिता के बिल के हिंदी संस्करण के आधार पर इन हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों की इन धाराओं को हिंदी में छाप दिया है क्योंकि यदि इन हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों को गज़ट हुए कानूनों के हिंदी संस्करणों के आधार पर छापा जाता तो ये गलतियाँ नहीं होतीं.  

 

संजय ने बताया कि वे अभी इन हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों का गहन अध्ययन कर रहे हैं और यदि उनको अन्य नई  गलतियाँ मिलती हैं तो वे उनको भी समय समय पर आम जनता के सामने लायेंगे.

 

संजय ने सभी से अपील की है कि वे नए आपराधिक कानूनों के हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों का हिंदी टेक्स्ट ठीक से जांचने के बाद ही नए क्रिमिनल मैन्युअल के द्विभाषी संस्करण खरीदें नहीं तो कहीं ऐसा न हो कि हिंदी में लिखी भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 76 एवं 77 जैसी गलतियों के कारण उलझन में पड़ उनको बाद में पछताना पड़े या उनका अन्य कोई नुक्सान हो जाए.