Friday, July 5, 2024

सूचना का अधिकार ( आरटीआई ) से सम्बंधित निम्नलिखित सशुल्क सेवाएं उपलब्ध है

 


सूचना का अधिकार ( आरटीआई ) से सम्बंधित निम्नलिखित सशुल्क सेवाएं उपलब्ध है :-

1)     धारा 6 की आरटीआई अर्जी  की ड्राफ्टिंग                                  -  2500/- प्रति अर्जी

2)     धारा 19(1) की प्रथम अपील की ड्राफ्टिंग                                  -  2500/- प्रति अपील

3)     धारा 19(3) की द्वितीय अपील की ड्राफ्टिंग                               -  2500/- प्रति अपील

4)     धारा 18 की शिकायत की ड्राफ्टिंग                                           -  2500/- प्रति शिकायत

5)     जनसूचना अधिकारी के पत्र पर आपत्तियों की ड्राफ्टिंग            -  2500/- प्रति पत्र

6)     प्रथम अपीलीय अधिकारी के पत्र पर आपत्तियों की ड्राफ्टिंग      -  2500/- प्रति पत्र

7)     सूचना आयुक्त के अंतरिम आदेश पर आपत्ति पत्र की ड्राफ्टिंग   - 2500/- प्रति आदेश

8)     सूचना आयुक्त के अंतिम आदेश पर आपत्ति पत्र की ड्राफ्टिंग     - 5000/- प्रति आदेश

9)     अधिकार पत्र पर सूचना आयोग की सुनवाई में प्रतिनिधि           

के रूप में उपस्थिति                                                                     - 2500/- प्रति सुनवाई प्रति केस

10)                    एक केस में केस की किसी भी स्टेज से उस केस के                 

सूचना आयोग में निस्तारण होने तक की सम्पूर्ण

प्रक्रिया ( पुनर्सुनवाई रहित )                                                      – 25000/- प्रति केस 

11)                    एक केस में केस की किसी भी स्टेज से उस

         केस के सूचना आयोग में निस्तारण होने तक

         की सम्पूर्ण प्रक्रिया ( पुनर्सुनवाई सहित )                         – 50000/- प्रति केस

विशेष नोट :

1.      शुल्क भुगतान बैंक अकाउंट में विभिन्न माध्यमों से मनी ट्रान्सफर द्वारा ही करना होगा l नकद शुल्क भुगतान की कोई व्यवस्था नहीं है l

2.      बैंक अकाउंट की डिटेल्स

a.      बैंक का नाम                   कोटक महिन्द्रा बैंक, राजाजीपुरम, लखनऊ शाखा  

b.     बैंक अकाउंट नंबर            8745410894

c.      खाताधारक का नाम      SANJAY SHARMA

d.     IFSC Code                      KKBK0005205

e.      UPI ID                             9648901234@kotak   

3.      दिया गया शुल्क किसी भी दशा में बापस नहीं किया जायेगा एवं इस सम्बन्ध में कोई भी अन्यथा दावा मान्य नहीं होगा l

4.      कोई भी प्रक्रिया आरम्भ करने से पूर्व 1000/- नॉन रिफंडेबुल प्रीलिमिनरी कंसल्टेशन फी का भुगतान बैंक अकाउंट में करने के बाद भुगतान का प्रमाण व्हाट्सएप नंबर 8004560000 पर भेजना अनिवार्य है l

5.      प्रीलिमिनरी कंसल्टेशन के उपरांत उपरोक्त में से कोई भी सेवा अग्रेत्तर लेने पर उक्त  1000/- उस सेवा के शुल्क में समायोजित हो जायेंगे l

6.      उपरोक्त में से कोई भी सेवा लेने के लिए सेवा लेने से पूर्व उस सेवा सम्बंधित पूर्ण शुल्क का भुगतान बैंक अकाउंट में करना तथा भुगतान का प्रमाण व्हाट्सएप नंबर 8004560000 पर भेजना अनिवार्य है l

7.      बिना पूर्ण शुल्क का भुगतान हुए और भुगतान का प्रमाण व्हाट्सएप नंबर 8004560000 पर प्राप्त हुए कोई कार्य आरम्भ नहीं किया जाएगा l

8.      ड्राफ्ट किये गए प्रपत्र व्हाट्सएप और ई-मेल के माध्यम से वर्ड और पीडीएफ फोर्मट्स में सेवा लेने वाले को प्रेषित किये जायेंगे l

सेवा प्रदाता – इं. संजय शर्मा, फ्रीलांसर कंसलटेंट. मोबाइल और व्हाट्सएप नंबर 8004560000, ई-मेल sanjaysharmalko@icloud.com , अन्य मोबाइल नंबर 9415007567, 9454461111

Thursday, July 4, 2024

हिंदी टेक्स्ट जांचने के बाद ही खरीदें नए क्रिमिनल मैन्युअल के द्विभाषी संस्करण नहीं तो पड़ेगा पछताना.


 लखनऊ / शुक्रवार, 5 जुलाई 2024 ..............

बीती 1 जुलाई से देश भर में नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं. अब कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर  1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, इंडियन पीनल कोड 1860 की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023 और इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 नाम के 3 नए कानून लागू कर दिए गए हैं और इसी के साथ कानून के क्षेत्र से जुड़े न्यायाधीश,जुडिशिअल मजिस्ट्रेट्स, एडवोकेट्स, शिक्षक,स्टूडेंट्स के साथ साथ कानूनी प्रक्रियाओं से प्रभावित अथवा कानून में रूचि रखने वाले देश के अन्य नागरिकों ने इन नए कानूनों की बुक्स खरीदना शुरू कर दिया है. इनमें सबसे अधिक पॉपुलर नए आपराधिक कानूनों के हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअल हैं जिनमें एक ही बुक में इन तीनों कानूनों की धाराओं का विवरण आमने सामने के पन्नों में मिलने से ये सभी को सुविधाजनक लगते हैं.

 

इन सबके बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के राजाजीपुरम क्षेत्र निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा ने दावा किया है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केट में बिक रहे अधिकांश पब्लिकेशन्स के नए आपराधिक कानूनों के हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों की हिंदी में कई कानूनी गलतियाँ हैं जिनके कारण से इन हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों की विश्वसनीयता संदिग्ध हो गई है.

 

उदाहरण के लिए संजय बताते है कि भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 76 एवं 77 को जेंडर न्यूट्रल बनाया गया है यानि कि इन अपराधों को कोई भी महिला, पुरुष इत्यादि करें तो वह अपराध होगा किन्तु ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केट में बिक रहे अधिकांश पब्लिकेशन्स के नए आपराधिक कानूनों के हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों की हिंदी में लिखी धाराओं में “जो कोई” की जगह “कोई ऐसा पुरुष” शब्द का प्रयोग किया गया है जो देश में लागू की गई भारतीय न्याय संहिता 2023 से मेल नहीं खा रहा है और जिससे ऐसा असत्य सन्देश जा रहा है कि यदि पुरुषों के आलावा महिलाएं व अन्य इन अपराधों को करते हैं तो वे अपराध नहीं होंगे जो कि इन मैन्युअलों के सामान्य पाठकों को उलझन में डालेगा.

 

संजय ने बताया कि उनको लगता है कि शायद इन पब्लिकेशन्स के लेखकों ने भारतीय न्याय संहिता के बिल के हिंदी संस्करण के आधार पर इन हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों की इन धाराओं को हिंदी में छाप दिया है क्योंकि यदि इन हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों को गज़ट हुए कानूनों के हिंदी संस्करणों के आधार पर छापा जाता तो ये गलतियाँ नहीं होतीं.  

 

संजय ने बताया कि वे अभी इन हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों का गहन अध्ययन कर रहे हैं और यदि उनको अन्य नई  गलतियाँ मिलती हैं तो वे उनको भी समय समय पर आम जनता के सामने लायेंगे.

 

संजय ने सभी से अपील की है कि वे नए आपराधिक कानूनों के हिंदी अंग्रेजी द्विभाषी क्रिमिनल मैन्युअलों का हिंदी टेक्स्ट ठीक से जांचने के बाद ही नए क्रिमिनल मैन्युअल के द्विभाषी संस्करण खरीदें नहीं तो कहीं ऐसा न हो कि हिंदी में लिखी भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 76 एवं 77 जैसी गलतियों के कारण उलझन में पड़ उनको बाद में पछताना पड़े या उनका अन्य कोई नुक्सान हो जाए.   

 

Saturday, June 1, 2024

यूपी में हाजियों के जीवन और स्वास्थय से खिलवाड़ : हज कमेटी ने बिना खाद्ध्य लाइसेंस वाली फर्म को दे दिया हज हाउस कैंटीन का ठेका!

 लखनऊ/शनिवार, 01 जून 2024 .......................

लखनऊ से हज यात्रा पर जाने वाले हाजियों की सुविधा के लिए सरोजिनीनगर लखनऊ स्थित मौलाना अली मियां मेमोरियल हज हाउस में कैंटीन की व्यवस्था की गई है लेकिन यूपी हज कमेटी के अधिकारियों ने हज 2025 के हाजियों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने में भी शर्म नहीं की और भ्रष्टाचार में लिप्त होकर बिना खाद्ध्य लाइसेंस वाली फर्म को हज हाउस की कैंटीन का ठेका दे दिया.

इस बात का खुलासा राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजिनियर संजय शर्मा द्वारा की गई एक शिकायत पर खाध्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच रिपोर्ट से हुआ है जिसमें खाध्य  विभाग ने संजय को लिखकर दिया है कि हज हाउस की कैंटीन में खान-पान का काम देख रही फर्म के पास फ़ूड लाइसेंस नहीं है.

संजय शर्मा ने इस मामले में हाजियों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के इस मामले में यूपी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उप निदेशक और हज कमेटी के सचिव एवं प्रशासनिक अधिकारी शिव प्रकाश तिवारी के साथ-साथ हज कमेटी के ओ.एस.डी. मोहम्मद जावेद खान की मुख्य भूमिका बताई है और इनके साथ साथ टेंडर के आरम्भ से अंत तक की कार्यवाही के लिए हज कमेटी के अन्य सभी उत्तरदाई अधिकारियों पर भ्रष्टाचार करके टेंडर देने का आरोप लगाया है और इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ से की है.

संजय बताते हैं कि पिछले साल तक हज कमेटी की वेबसाइट भी नहीं थी और कमेटी मनमानी करके ऑफलाइन टेंडरों में खेल कर रही थी लेकिन उनके द्वारा काफी प्रयास करने के बाद हज कमेटी को मजबूरी में इस वर्ष अपनी वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन टेंडर की व्यवस्था शुरू करनी पड़ गई थी.

 संजय कहते है कि ऑनलाइन टेंडर व्यवस्था लागू होने के बाद भी हज हाउस की कैंटीन में खान-पान का ठेका एक ऐसी फर्म को दे देना जिसके पास फ़ूड लाइसेंस तक नहीं हो, हज कमेटी का एक बहुत ही हैरतअंगेज़ कारनामा है और पूरी की पूरी ऑनलाइन टेंडरिंग व्यवस्था की शुचिता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है.

संजय ने हज 2025 के लिए हज हाउस कैंटीन की संचालक फर्म को तत्काल ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग उठाई है.

 

 


Tuesday, May 14, 2024

शिकायत के बाद सुधरे यूपी सूचना आयोग ने वेबसाइट पर अपलोड कीं सूचना कानून की धारा 4 (1)(b) की सूचनाएं.

 लखनऊ/मंगलवार, 14 मई 2024 ...............

कहावत है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं. कुछ ऐसा ही हाल उत्तर प्रदेश के सूचना आयोग का भी नज़र आ रहा है जहाँ सूचना कानून की धारा 4 (1)(b) की सूचनाओं को वित्तीय वर्ष 2021-22 के बाद से अपडेट ही नहीं किया जा रहा था लेकिन सूबे की राजधानी लखनऊ के राजाजीपुरम क्षेत्र निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा बीते माह में की गईं कई शिकायतों के बाद सूचना आयोग को महीने भर के अन्दर ही सुधरना पड़ गया है और आयोग ने सूचना कानून की धारा 4 (1)(b) की सूचनाएं अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दीं हैं.

 

संजय ने शिकायत में सूचना आयोग पर आरोप लगाया था कि सूचना आयोग ने सूचना कानून की धारा 4 (1)(b) की सूचनाओं को वित्तीय वर्ष 2021-22 के बाद से अपडेट ही नहीं किया था जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024-25 में उपरोक्त सूचनाएं पब्लिक अथॉरिटी के रूप में राज्य सूचना आयोग द्वारा अपडेट की जानी चाहिए थीं.

आयोग की इस लचर कार्यप्रणाली को अत्यंत खेदपूर्ण बताने के साथ-साथ संजय ने एक पब्लिक अथॉरिटी के रूप में आयोग के स्तर पर अपने कर्तव्यों के निर्वहन में नितांत  अक्षमता और  असंवेदनशीलता और का द्योतक बताते हुए इसके लिए आयोग के आतंरिक प्रशासन के सम्पूर्ण निकाय को समग्र रूप से उत्तरदाई ठहराया था.

 

अपनी शिकायत में सूचना कानून और सुप्रीम कोर्ट की साल 2021 की सिविल याचिका संख्या 990 ( KISHAN CHAND JAIN VERSUS UNION OF INDIA & ORS. ) के आदेश की बात कहते हुए संजय ने कहा था कि पूरे सूबे के सभी सरकारी कार्यालयों द्वारा सूचना कानून की धारा 4 (1)(b) का पालन करवाने की जिम्मेदारी सूचना आयोग की है लेकिन ऐसा सूचना आयोग अपनी जिम्मेदारियों को क्या निभाएगा जो खुद धारा 4 (1)(b) का पालन करने के मामले में कई वर्षों से गहरी नींद में सोया पड़ा था. 

 

संजय ने सूचना आयोग के आतंरिक प्रशासन के सम्पूर्ण निकाय पर देश के प्रधानमन्त्री और सूबे के मुख्यमंत्री के अथक प्रयासों को विफल करने की साजिश जैसी करने का आरोप भी अपनी शिकायत में लगाया था.

 

बताते चलें कि सूचना कानून को लाने वाले नीति नियंताओं ने सूचना कानून 2005 की धारा 4 (1)(b) में सभी सरकारी कार्यालयों के ऐसे सामान्य विषयों को चुना जिन से सम्बंधित सूचनाएं देश के नागरिकों द्वारा बार-बार मांगे जाने की संभावनाएं अधिक थीं और धारा 4 (1)(b) में ऐसी सूचनाओं के 17 बिंदु देकर प्रत्येक लोक प्राधिकारी के लिए ये आवश्यक किया वह कानून लागू होने के 120 दिन के अन्दर इन सभी बिन्दुओं की बिन्दुवार सूचनाएं अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा और प्रत्येक वर्ष इन सूचनाओं को आवश्यक रूप से अपडेट करेगा ताकि आरटीआई अर्जियों की अनावश्यक पुनरावृत्ति से बचा जा सके.

 

संजय का कहना था कि आयोग की वेबसाइट पर धारा 4(1)(b) की अशुद्ध और कालातीत सूचनाएं प्रदर्शित रहने से भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने के साथ-साथ सूचना का अधिकार कानून का भी निरंतर उल्लंघन हो रहा था एवं इस स्थिति से उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवमानना भी हो रही है जो सर्वथा अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण था.

 

संजय बताते हैं कि उनके द्वारा सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त,रजिस्ट्रार,सचिव आदि के साथ सूबे के राज्यपाल और मुख्यमंत्री समेत तमाम आला अधिकारियों को शिकायत भेजने के बाद आयोग ने आयोग की वेबसाइट से आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 4(1)(b) की अशुद्ध सूचनाएं हटवाकर शुद्ध एवं अद्यतन सूचनाएं शीघ्रता से अपलोड करा दी हैं किसके लिए उन्होंने देश-विदेश के तमाम आरटीआई प्रयोगकर्ताओं की तरफ से सूचना आयोग के प्रबंधन को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी ये सूचनाएं नियमानुसार आयोग की वेबसाइट पर अपलोड होती रहेंगी.

 




























 

 

Friday, May 10, 2024

लखनऊ : बिल्डरों को धमकाने के आरोपों की जाँच कराकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र अथवा इंडी गठबंधन सांसद प्रत्याशी रविदास मेहरोत्रा के विरुद्ध एफआईआर की मांग.

 

लखनऊ / शनिवार, 11 मई 2024 ....................

लखनऊ से इंडी गठबंधन के सांसद प्रत्याशी रविदास मेहरोत्रा ने बीते गुरूवार को रॉयल होटल स्थित विधायक निवास में की गई प्रेस कांफ्रेंस में देश के रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के पुत्र पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि मौजूदा सांसद के बेटे अपने आवास पर सपा से जुड़े सभी बिल्डरों को बुलाकर धमका रहे हैं.आरोप यह भी था कि चुनाव में सपा की आर्थिक मदद करने पर बिल्डरों को उनके अपार्टमेंट सील कराने की धमकी दी गई है. इस समाचार का प्रकाशन भी बीती 10 मई के हिंदी दैनिक नव भारत टाइम्स कानपुर संस्करण के पेज 6 पर “सपा प्रत्याशी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, पार्टी से जुड़े बिल्डरों को धमका रहे रक्षा मंत्री के बेटे” शीर्षक से हुआ था.

 

 

इंडी गठबंधन के सांसद प्रत्याशी रविदास मेहरोत्रा के इन आरोपों के आधार पर राजधानी के राजाजीपुरम क्षेत्र निवासी कंसलटेंट इंजिनियर संजय शर्मा ने सूबे के गृह विभाग, डीजीपी कार्यालय और लखनऊ कमिश्नरेट के अधिकारियों को शिकायत भेजकर संज्ञान लेने और विधि-अनुसार कार्यवाही करने की मांग की है.

 

 

संजय ने अपनी शिकायत में लिखा है कि रॉयल होटल स्थित विधायक निवास में हुई प्रेस कांफ्रेंस में मौजूदा सांसद के बेटे पर अपने आवास पर सपा से जुड़े सभी बिल्डरों को बुलाकर धमकाने और चुनाव में सपा की आर्थिक मदद करने पर बिल्डरों को उनके अपार्टमेंट सील कराने की धमकी देने के रविदास मेहरोत्रा के सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोप यदि सही हैं तो ये आरोप भारतीय दंड संहिता एवं चुनाव आचार संहिता के तहत कारित किये गए गंभीर आपराधिक कृत्य हैं जिनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही किया जाना आवश्यक है.

 

 

अधिकारियों के साथ-साथ सूबे के राज्यपाल और सीएम को भी भेजी गई इस शिकायत के मार्फत संजय ने अनुरोध किया है कि प्राथमिक प्रमाण के साथ की जा रही उनकी इस शिकायत पर पुलिस महकमे द्वारा इंडी गठबंधन के सांसद प्रत्याशी रविदास मेहरोत्रा से मौजूदा सांसद के बेटे द्वारा सपा से जुड़े सभी बिल्डरों को अपने आवास पर बुलाकर धमकाने और चुनाव में सपा की आर्थिक मदद करने पर बिल्डरों को उनके अपार्टमेंट सील कराने की धमकी देने के आरोपों के सम्बन्ध में साक्ष्य मांगे जाएँ और पर्याप्त प्राथमिक साक्ष्य प्राप्त होने पर मौजूदा सांसद के बेटे के खिलाफ सुसंगत कानूनों की सुसंगत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करके वैधानिक कार्यवाही की जाये एवं यदि इंडी गठबंधन के सांसद प्रत्याशी रविदास मेहरोत्रा  मौजूदा सांसद के बेटे पर लगाए गए आरोपों के सम्बन्ध में साक्ष्य देने में असमर्थ रहते हैं तो रक्षा मंत्री और मौजूदा सांसद राजनाथ सिंह के बेटे पर मिथ्या आरोप सार्वजनिक रूप से लगाने का आपराधिक कृत्य करने के लिए इंडी गठबंधन के सांसद प्रत्याशी रविदास मेहरोत्रा के खिलाफ सुसंगत कानूनों की सुसंगत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करके वैधानिक कार्यवाही कराई जाये और कृत कार्यवाही से उनको अवगत कराया जाए.