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Friday, April 7, 2017

मोदी,योगी के फेसबुक पेज पर ओवेसी,आज़म की आपत्तिजनक फोटो ? समाजसेवी संजय शर्मा ने हजरतगंज थाने में दी FIR की तहरीर l









लखनऊ / 07-04-17

वर्तमान समय में सोशल मीडिया नागरिकों की अभिव्यक्ति और संचार के सर्वाधिक सशक्त माध्यमों में से एक माध्यम के रूप में स्थापित हो रहा है l जहाँ एक तरफ सोशल मीडिया ने साधनविहीन हुनरमंद लोगों को अपनी बात विश्व के सामने रख आगे आने के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म मुहैया कराया है , लोगों को कम खर्च में अपने परिजनों, मित्रों से जोड़े रखने का काम किया है तो वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने के मामलों में भी जबरदस्त इजाफा होता जा रहा है l यूपी का मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भड़काऊ पोस्ट डालने के दर्जनों मामलों में ऍफ़.आई.आर. दर्ज होना इसका जीता जागता सबूत है  l इसी बीच लखनऊ के समाजसेवी और मानवाधिकार कार्यकर्ता इं. संजय शर्मा ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से बने फेसबुक पेजों पर सांसद असदुद्दीन ओवेसी और यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री व वर्तमान विधायक आज़म खान की आपत्तिजनक फोटो अपलोड करने के मामले की ऍफ़.आई.आर. की  तहरीर यूपी की राजधानी के हजरतगंज थाने में देकर विधिक कार्यवाही की मांग की  है l

तहरीर में संजय ने नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के नाम से बने फेसबुक पेजों पर डाली गई पोस्टों को दंगे भड़काने व  धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली पोस्ट बताया है l समाजसेवी ने बताया कि इन पेजों पर डाली गई एक पोस्ट में सांसद असदुद्दीन ओवेसी और यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री व वर्तमान विधायक आज़म खान के फोटो से छेड़-छाड़ कर इन दोनों माननीयों को  राम नाम की ईंटे सिर पर रखे  आपत्तिजनक  रूप में दिखाया गया है l  बकौल संजय इन पेजों पर डाली गई पोस्टों से भारत के नागरिकों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और साथ ही यह पोस्ट लोगों में उन्माद पैदा कर दंगे भड़काने का कार्य भी कर रही है l संजय के अनुसार फेसबुक पर डाली गई इन पोस्टों को हज़ारों की संख्या में लाइक और शेयर किया गया है तथा इन पर तरह-तरह के कमेन्ट भी किये जा रहे हैं जो माहौल बिगाड़ने का कार्य कर रहे हैं l

संजय की तहरीर में यह जांच कराने का अनुरोध किया गया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से बना यह पेज स्वयं नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के ही हैं या इन पेजों के माध्यम से अन्य किसी व्यक्ति या संस्था के द्वारा नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है l

23 पेज के साक्ष्यों के साथ थाना हजरतगंज भेजी गई इस तहरीर में नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के नाम से फेसबुक पर बने दर्जनों पेजों और प्रोफाइलों पर भी लगातार लोगों में उन्माद पैदा कर दंगे भड़काने वाले पोस्टें डालकर नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के नाम का दुरुपयोग किये जाने का आरोप लगाते हुए आई.पी.सी. और आई.टी.एक्ट की सुसंगत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर साइबर सेल के सहयोग से विवेचना कराकर अभियुक्त/अभियुक्तों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही करने की मांग की गई है  l

देखना दिलचस्प होगा कि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट डालने पर तुरंत सख्त रुख अपनाकर ऍफ़.आई.आर. लिखने वाली यूपी पुलिस ओवेसी और आज़म के खिलाफ डाली गई इस आपत्तिजनक पोस्ट पर वही सख्त रुख रखकर ऍफ़.आई.आर. दर्ज करती है या इस मामले को ठन्डे बस्ते में डालकर अपने वर्तमान राजनैतिक आकाओं को खुश रखकर योगीराज में भी ‘अखिलेशी’ कार्यसंस्कृति बदस्तूर जारी रखने के सबूत देती है ।

Monday, August 1, 2016

पीएम मोदी भूले गंगा से किये वादे ! : ऐश्वर्या की RTI से उजागर हुई ‘नमामि गंगे’ पर ‘मोदी सरकार’ की सुस्ती.







विशेष समाचार का सार  ©TAHRIR : लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल की राजाजीपुरम शाखा की कक्षा 10 की छात्रा और ‘आरटीआई गर्ल’ के नाम से विख्यात 14 वर्षीय ऐश्वर्या पाराशर की एक आरटीआई पर भारत सरकार के जल संसाधन,नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा दिए गए जबाब को देखकर लगता है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी चुनाव से पूर्व गंगा नदी की सफाई पर किये गए अपने बड़े बड़े वादों को शायद भूल गए हैं और गंगा नदी की साफ-सफाई के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की बहुप्रचारित नमामि गंगे योजना महज फाइलों, सरकारी विज्ञापनों, राजनैतिक आयोजनों और राजनैतिक बयानबाजी तक ही सिमट कर रह गयी है.



Lucknow/02 August 2016/ Written by Sanjay Sharma ©TAHRIR


लगभग सवा दो साल पहले भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार  बनाए गए नरेन्द्र मोदी ने उत्तरप्रदेश की  बनारस लोकसभा सीट से नामांकन भरने के पहले सार्वजनिक रूप से कहा था पहले मुझे लगा था मैं यहां आया, या फिर मुझे पार्टी ने यहां भेजा है, लेकिन अब मुझे लगता है कि मैं मां गंगा की गोद में लौटा हूं. तब मोदी  ने सार्वजनिक रूप से भावुक होते हुए कहा था न तो मैं आया हूं और न ही मुझे भेजा गया है.दरअसल, मुझे तो मां गंगा ने यहां बुलाया है.यहां आकर मैं वैसी ही अनुभूति कर रहा हूं, जैसे एक बालक अपनी मां की गोद में करता है. मोदी ने उस समय यह भी कहा था कि वे गंगा को साबरमती से भी बेहतर बनाएंगे. पर अब लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल की राजाजीपुरम शाखा की कक्षा 10 की छात्रा और ‘आरटीआई गर्ल’ के नाम से विख्यात 14 वर्षीय ऐश्वर्या पाराशर की एक आरटीआई पर भारत सरकार के जल संसाधन,नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा दिए गए जबाब को देखकर लगता है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी चुनाव से पूर्व गंगा नदी की सफाई पर किये गए अपने बड़े बड़े वादों को शायद भूल गए हैं और गंगा नदी की साफ-सफाई के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की बहुप्रचारित नमामि गंगे योजना महज फाइलों, सरकारी विज्ञापनों, राजनैतिक आयोजनों और राजनैतिक बयानबाजी तक ही सिमट कर रह गयी है.



दरअसल ऐश्वर्या ने बीते 09 मई को प्रधानमंत्री कार्यालय में एक आरटीआई अर्जी देकर नमामि गंगे योजना पर केंद्र सरकार द्वारा किये गए खर्चों, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठकों और गंगा के प्रदूषण  को रोकने के सम्बन्ध में 7 बिन्दुओं पर जानकारी चाही थी. प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव और केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी सुब्रतो हाजरा ने बीते 6 जून को ऐश्वर्या को सूचित किया कि नमामि गंगे योजना से सम्बंधित कोई भी जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय में नहीं है और ऐश्वर्या की अर्जी अधिनियम की धारा 6(3) के अंतर्गत भारत सरकार के जल संसाधन,नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग को अंतरित कर दी. जल संसाधन,नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अवर सचिव एवं जन सूचना अधिकारी के. के. सपरा ने बीते 4 जुलाई के पत्र के माध्यम से ऐश्वर्या को जो सूचना दी है वह अत्यधिक चौंकाने वाली है और नमामि गंगे योजना के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वास्तव में गंभीर होने पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रही है. ऐश्वर्या को दी गयी सूचना  के अनुसार सरकार बनाने के बाद से अब तक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने गंगा की साफ-सफाई के लिए निर्धारित बजटीय आबंटन में कटौती तो की ही है साथ ही साथ सरकार आबंटित बजट की धनराशि को खर्च करने में भी विफल रही है.



सपरा ने ऐश्वर्या को बताया है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में गंगा सफाई के राष्ट्रीय अभियान के लिए 2137 करोड़ रुपयों का बजटीय आवंटन निर्धारित किया गया था जिसमें 84 करोड़ की कटौती कर संशोधित आबंटन 2053 करोड़ किया गया किन्तु सरकार इस वित्तीय वर्ष में महज 326 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाई तो वहीं वित्तीय वर्ष 2015-16 में इस अभियान के लिए 2750 करोड़ रुपयों का बजटीय आवंटन निर्धारित था जिसमें 1100 करोड़ की भारीभरकम कटौती कर संशोधित आबंटन 1650 करोड़ किया गया किन्तु सरकार इस वित्तीय वर्ष में भी 1632 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाई. इस प्रकार केंद्र सरकार वितीय वर्ष 2014-15 में आबंटित धनराशि में से 1727 करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाई और वितीय वर्ष 2015-16 में भी 1100 करोड़ की भारीभरकम कटौती के बाद किये गए संशोधित बजटीय आबंटन में से भी 18 करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाई है.



ऐश्वर्या को देने के लिए 20 जून को तैयार की गई इस सूचना के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016-17 में गंगा सफाई के राष्ट्रीय अभियान के लिए 2500 करोड़ रुपयों का बजटीय आवंटन निर्धारित किया गया है पर इस आबंटन के सापेक्ष संशोधित आबंटन या बास्तविक खर्चों की कोई भी सूचना केंद्र सरकार के पास नहीं है.

  
ऐश्वर्या ने एक विशेष बातचीत में कहा कि हालाँकि माँ गंगा के आशीर्वाद ने नरेंद्र मोदी को न केवल बनारस से लोकसभा में पंहुचाया अपितु उनकी पार्टी को आशातीत सफलता का आशीर्वाद देते हुए मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पंहुचाया पर लगता है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद हमारे प्रधानमंत्री गंगा मां से किये अपने वायदों को भूल गए हैं. गंगा साफ-सफाई पर बजटीय आबंटन के सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2014-15 में  महज 15% खर्च और वित्तीय वर्ष 2015-16 में भी मात्र 59% खर्च पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए ऐश्वर्या ने वित्तीय वर्ष 2016-17 में गंगा सफाई के राष्ट्रीय अभियान के लिए महज 2500 करोड़ रुपयों का बजटीय आवंटन निर्धारित किये जाने को गंगा साफ-सफाई पर अगले 5 वर्षों में 20000 करोड़ रुपये खर्च करने की मोदी सरकार की बीते साल 13 मई में की गयी घोषणा के आधार पर नाकाफी बताया.


ऐश्वर्या कहती हैं कि गंगा सफाई पर हुई बैठकों की सूचना के लिए मुझे वेबसाइट को देखने का निर्देश दिया गया था. ऐश्वर्या के अनुसार जब उन्होंने वेबसाइट को देखा तो उनको पता चला कि साल 2009 में राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण (एनजीआरबीए) के गठन से अब तक इसकी 6 बैठकें हुईं हैं जिनमें से 3 बैठक क्रमशः दिनांक 05-10-2009, 01-11-2010 और 17-04-2012 को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुईं और 3 बैठक क्रमशः दिनांक 27-10-2014, 26-03-2015 और 04-07-2016 को वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में. ऐश्वर्या ने बताया कि इन बैठकों के कार्यवृत्तों को डाउनलोड कर देखने पर मालूम चला कि जहाँ एक तरफ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने  कार्यकाल में हुई तीनों बैठकों की अध्यक्षता की तो वहीं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल में हुई 3 बैठकों में से एक मात्र  दिनांक 26-03-2015 की बैठक में ही उपस्थित रहे और बाकी 2 बैठकों की अध्यक्षता जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने की. ऐश्वर्या बताती हैं कि राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण (एनजीआरबीए) के पदेन अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं और सामान्यतया इस प्राधिकरण की बैठकों की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री के द्वारा की जानी चाहिए किन्तु वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस प्राधिकरण की दिनांक 27-10-2014 और 04-07-2016 की बैठक में अनुपस्थिति से गंगा साफ-सफाई पर उनके  वास्तव  में गंभीर होने पर प्रश्नचिन्ह तो लग ही रहा है.




ऐश्वर्या ने बताया कि वे अपने ‘अंकल मोदी’ को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध करेंगी कि वे आगे से ‘नमामि गंगे’ योजना पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देकर गंगा को निर्धारित समयान्तर्गत साफ करायें और माँ गंगा से किये अपने सभी वादे पूरे करें. ऐश्वर्या को विश्वास है कि विश्व में भारत के नाम का डंका बजबाने वाले उसके ‘अंकल मोदी’ उसके पत्र का संज्ञान लेकर गंगा को साफ कराकर एक नई मिसाल कायम करने में कामयाब होंगे.

©TAHRIR
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Sanjay Sharma is a Lucknow based freelancer and President at TAHRIR. He can be contacted at associated.news.asia@gmail.com Mobile/Whatsapp No. 7318554721.

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Friday, June 24, 2016

OMG! मुस्लिम आरक्षण पर UP की अखिलेश सरकार ने नहीं लिखा केंद्र की मोदी सरकार को कोई ख़त !



समाचार सार News©TAHRIRnews: मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर यूपी के सीएम अखिलेश यादव और उनकी समाजवादी पार्टी शायद महज लम्बी-चौड़ी डींगें हांककर मुस्लिमों को गुमराह करने तक ही सीमित है क्योंकि लखनऊ की समाजसेविका और येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा द्वारा दायर एक आरटीआई अर्जी पर यूपी के कार्मिक विभाग के राज्य लोक  सूचना अधिकारी जे. पी. श्रीवास्तव के जबाब से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर UP की अखिलेश सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार को  कोई भी ख़त नहीं लिखा है. 



Lucknow/24 June 2016/ Sanjay Sharma News©TAHRIRnews
आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की कुल आबादी की लगभग 20%  आबादी मुस्लिम होने के चलते जब-जब चुनाव का समय नजदीक आता है तब-तब कमोवेश सभी राजनैतिक दल मुस्लिमों को लुभाकर उनका वोट पाने की कवायद के तहत उनको आरक्षण देने का चुनावी झुनझुना झाड-पोंछ कर बाहर निकाल बजाने लगते हैं पर सरकारें बनने के बाद सत्तानशीन होने के बाद इस मुद्दे को भुलाकर फिर ठन्डे बस्ते में डाल देते हैं. कुछ यही हाल अखिलेश यादव की अगुआई में चल रही यूपी की वर्तमान समाजवादी पार्टी की सरकार का भी है. वैसे तो समाजवादी पार्टी और इसके सभी बड़े नेता यूपी में मुस्लिमों का सबसे बड़ा खैरख्वाह बनने के बड़े-बड़े दावे करते हैं पर शायद हकीकत इसके उलट ही है और यह सरकार भी मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के नाम पर गुमराह करने से अधिक कुछ भी नहीं कर रही है क्योंकि लखनऊ की समाजसेविका और येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा द्वारा दायर एक आरटीआई अर्जी पर यूपी के कार्मिक विभाग के राज्य लोक  सूचना अधिकारी जे. पी. श्रीवास्तव के जबाब से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि UP के CM  अखिलेश यादव ने भारत के PM नरेंद्र मोदी को मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर कोई भी ख़त नहीं लिखा है. आरटीआई जबाब से स्पष्ट है कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी मुस्लिम आरक्षण पर चाहें जितनी बड़ी-बड़ी बातें कर लें पर पिछले 3 साल से अधिक समय से अखिलेश यादव ने मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने की कोई सुधि नहीं ली है और इस सम्बन्ध में भारत के प्रधानमंत्री से पिछले 3 सालों में कोई  पत्राचार नहीं किया है. समाजवादी पार्टी की वर्तमान सरकार के इन चार वर्षों से अधिक के कार्यकाल में सूबे की सरकार मुसलमानों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर केंद्र की सरकार को महज 1 प्रस्ताव भेजने और 1 पत्र लिखने से अधिक कुछ भी नहीं कर पायी है. इस प्रकार अखिलेश सरकार ने मुसलमानों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर इन चार सालों से अधिक के समय में केंद्र की सरकार को महज 11 पेज भेजने से अधिक कुछ भी नहीं किया है.

मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर यह चौंकाने वाला खुलासा लखनऊ की समाजसेविका और येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा द्वारा सूबे के मुख्य सचिव के कार्यालय में बीते 21 मई को दायर की गयी एक आरटीआई अर्जी पर आये जबाब से हुआ है. मुख्य सचिव कार्यालय के अनु सचिव और जन सूचना अधिकारी पी. के. पाण्डेय ने उर्वशी की इस अर्जी को बीते 25 मई को आरटीआई एक्ट की धारा 6(3) के तहत यूपी के कार्मिक विभाग के जन सूचना अधिकारी को अंतरित किया था. कार्मिक अनुभाग-2 के राज्य लोक  सूचना अधिकारी जे. पी. श्रीवास्तव बीते 10 जून के पत्र के माध्यम से उर्वशी की 5 बिन्दुओं की आरटीआई अर्जी  पर सूचना दी है पर गलती से पत्र भेजने की तिथि 10 मई अंकित कर दी है.
 
उर्वशी को दिए गए जबाब में बताया गया है कि यूपी के वर्तमान सीएम  अखिलेश यादव ने मार्च 2012 में मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के बाद से अब तक के चार सालों में मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर महज 1 प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है. मुसलामानों को आरक्षण दिलाने के परिपेक्ष्य में सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्र आयोग द्वारा की गयी संस्तुति के सन्दर्भ में सार्थक एवं प्रभावी कार्यवाही कराने हेतु अखिलेश द्वारा दिसम्बर 2012 में केंद्र सरकार को भेजा गया 9 पेजों का यह प्रस्ताव इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार  द्वारा केंद्र को भेजा गया एकमात्र प्रस्ताव बनकर रह गया है. जे.पी. श्रीवास्तव के द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार यूपी के वर्तमान सीएम  अखिलेश यादव ने मार्च 2012 में मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के बाद से अब तक के चार सालों में मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर महज 1 पत्र केंद्र सरकार को भेजा है. मुसलामानों को आरक्षण दिलाने के परिपेक्ष्य में अखिलेश द्वारा अप्रैल 2013 में केंद्र सरकार को भेजा गया 2 पेजों का यह पत्र इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार  द्वारा केंद्र को भेजा गया एकमात्र प्रस्ताव बनकर रह गया है.जे.पी. श्रीवास्तव ने उर्वशी को इस प्रस्ताव, इस पत्र और इससे सम्बंधित 4 पेज की नोट-शीट्स भी दीं हैं.

समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने इस स्वतंत्र पत्रकार से की गयी एक विशेष बातचीत में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी मुसलमानों  को जीते-जागते इंसान समझने के स्थान पर महज वोट-बैंक समझा जा रहा है. बकौल उर्वशी यूपी में कांग्रेस,सपा और बसपा द्वारा चुनावों से पहले मुसलमानों को सब्जबाग़ दिखाकर इनके वोट पाने के लिए आरक्षण जैसे मुद्दों को चुनावी घोषणा पत्रों में शामिल कर वोट तो पा लिया जाता है पर सरकार बनने के बाद इन मुद्दों को जिस तरह भुलाकर सूबे के मुस्लिमों को धोखा दिया जाता है, उसकी बानगी उनकी यह आरटीआई सामने रख रही है.

यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  द्वारा आने वाले दिनों में अपने आवास पर आयोजित किये जाने वाले रोजा-इफ्तार कार्यक्रम का संदर्भ देते हुए उर्वशी ने इस सार्वजनिक कार्यक्रम में जाकर अखिलेश से भेंटकर उन को आरटीआई से सम्बंधित प्रपत्र सौंपकर उन से मुस्लिम आरक्षण पर अपने चुनावी वादों के अनुसार सार्थक कार्य कर  कथनी-करनी के अंतर को मिटाने की नसीहत देने की बात भी कही है. उर्वशी ने कहा कि उनको उम्मीद है कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रोजेदारों के बीच बैठकर किये गए मुस्लिम आरक्षण के वादे को और बाकी राजनैतिक वादों की तरह झूठा नहीं होने देंगे.  
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Friday, July 3, 2015

PM Narendra Modi made 12 foreign tours, visited 19 countries in 13 months.



पीएम मोदी ने 13 महीने में ही 12 विदेश यात्राएं कर घूम लिए संसार के 10% मुल्क ,  घूमे धरती के 196 देशों में से 19 देश !


भारत का  प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही अन्य बातों के अलावा नरेंद्र मोदी की  विदेश यात्राएं भी खासी चर्चा में रहीं हैं।  पर क्या आपको मालूम है कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी   13 महीनों में ही  हमारी इस धरती के 196 देशों में से 19 देश घूम चुके हैं।  इन देशों को घूमने के लिए मोदी ने 12 विदेश यात्राएं कीं।  इस प्रकार नरेंद्र मोदी ने 13 महीने में ही  संसार के 10% मुल्क घूम लिए हैं।  यह सनसनीखेज खुलासा मेरी एक आरटीआई अर्जी पर प्रधानमंत्री कार्यालय के जनसूचना अधिकारी द्वारा  दिए गए जबाब से हुआ है।


मैंने बीते 26 मई को प्रधानमंत्री कार्यालय में आरटीआई अर्जी लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की  गयी  विदेश यात्राओं की संख्या और उनके द्वारा घूमे गए देशों के नामों की जानकारी माँगी थी।  बीते 26 जून  को प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसचिव और जनसूचना अधिकारी बी.  के. रॉय ने मुझे जो सूचना   दी है उसके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने 26 मई 2014 को सरकार बनाने से 26 जून 2015 तक की  13 महीनों की अवधि  में 12 विदेश यात्राएं कीं और इन 12  विदेश यात्राओं में नरेंद्र मोदी  ने  घरती के 19 देश घूमे



जनसूचना अधिकारी द्वारा  दी गयी सूचना के अनुसार इस अवधि में नरेंद्र मोदी द्वारा  भूटान,ब्राज़ील, नेपाल,जापान,यू. एस. ए. , म्यांमार,ऑस्ट्रेलिया,फिजी,सेसल्स,मॉरिसस,श्री लंका,सिंगापुर,फ्रांस,जर्मनी, कनाडा, चीन,मंगोलिया,साउथ कोरिया और बांग्लादेश की यात्राएं की  गयीं हैं।  


इस बारे में मेरा यह कहना है कि इस प्रकार नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद 13 महीनों में ही 196 देशों बाली पृथ्वी पर भारत समेत 20 मुल्कों का पानी पी चुके हैं और इस प्रकार संसार के 10 प्रतिशत देश घूम चुके हैं।  अगर नरेंद्र मोदी इसी रफ्तार से विदेश यात्राएं करते रहे तो अपने वर्तमान प्रधानमंत्रित्वकाल में वे दुनिया के 88 देश घूम लेंगे अर्थात वर्तमान सरकार के 5 सालों में वे दुनिया के 45 % देश घूम चुके होंगे।  अगर नरेंद्र मोदी इसी रफ्तार से विदेश यात्राएं करते रहें  तो विश्व के सभी 196 मुल्क घूमने के लिए 135 महीने अर्थात 11 वर्ष 3 माह का समय चाहिए होगा। 


तो क्या नरेंद्र मोदी बनाएंगे दुनिया के सभी मुल्क घूमने बाला प्रधानमंत्री बनने का रिकार्ड ? यह तय करेगा समय और मोदी द्वारा किये गए जनकल्याणकारी काम, मेरा तो यही मानना है। 


इंजीनियर संजय शर्मा
संस्थापक अध्यक्ष - 'तहरीर'
मोबाइल - 8081898081, 9455553838