समाचार सार News©TAHRIRnews: मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर यूपी के सीएम
अखिलेश यादव और उनकी समाजवादी पार्टी शायद महज लम्बी-चौड़ी डींगें हांककर मुस्लिमों
को गुमराह करने तक ही सीमित है क्योंकि लखनऊ की समाजसेविका और येश्वर्याज सेवा
संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा द्वारा दायर एक आरटीआई अर्जी पर यूपी के कार्मिक विभाग
के राज्य लोक सूचना अधिकारी जे. पी.
श्रीवास्तव के जबाब से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने
के मुद्दे पर UP की अखिलेश सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार को कोई भी ख़त नहीं लिखा है.
Lucknow/24 June 2016/ Sanjay Sharma News©TAHRIRnews
आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की
कुल आबादी की लगभग 20% आबादी मुस्लिम होने के चलते जब-जब चुनाव का समय नजदीक आता
है तब-तब कमोवेश सभी राजनैतिक दल मुस्लिमों को लुभाकर उनका वोट पाने की कवायद के
तहत उनको आरक्षण देने का चुनावी झुनझुना झाड-पोंछ कर बाहर निकाल बजाने लगते हैं पर
सरकारें बनने के बाद सत्तानशीन होने के बाद इस मुद्दे को भुलाकर फिर ठन्डे बस्ते
में डाल देते हैं. कुछ यही हाल अखिलेश यादव की अगुआई में चल रही यूपी की वर्तमान
समाजवादी पार्टी की सरकार का भी है. वैसे तो समाजवादी पार्टी और इसके सभी बड़े नेता
यूपी में मुस्लिमों का सबसे बड़ा खैरख्वाह बनने के बड़े-बड़े दावे करते हैं पर शायद
हकीकत इसके उलट ही है और यह सरकार भी मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के नाम पर गुमराह
करने से अधिक कुछ भी नहीं कर रही है क्योंकि लखनऊ की समाजसेविका और येश्वर्याज
सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा द्वारा दायर एक आरटीआई अर्जी पर यूपी के
कार्मिक विभाग के राज्य लोक सूचना अधिकारी
जे. पी. श्रीवास्तव के जबाब से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि UP के CM अखिलेश यादव ने भारत के PM नरेंद्र मोदी को
मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर कोई भी ख़त नहीं लिखा है. आरटीआई जबाब से स्पष्ट
है कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी मुस्लिम आरक्षण पर चाहें जितनी बड़ी-बड़ी
बातें कर लें पर पिछले 3 साल से अधिक समय से अखिलेश यादव ने मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने
की कोई सुधि नहीं ली है और इस सम्बन्ध में भारत के प्रधानमंत्री से पिछले 3 सालों
में कोई पत्राचार नहीं किया है. समाजवादी
पार्टी की वर्तमान सरकार के इन चार वर्षों से अधिक के कार्यकाल में सूबे की सरकार मुसलमानों
को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर केंद्र की सरकार को महज 1 प्रस्ताव भेजने और 1 पत्र
लिखने से अधिक कुछ भी नहीं कर पायी है. इस प्रकार अखिलेश सरकार ने मुसलमानों को
आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर इन चार सालों से अधिक के समय में केंद्र की सरकार को महज
11 पेज भेजने से अधिक कुछ भी नहीं किया है.
मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर यह चौंकाने वाला खुलासा लखनऊ
की समाजसेविका और येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा द्वारा सूबे के
मुख्य सचिव के कार्यालय में बीते 21 मई को दायर की गयी एक आरटीआई अर्जी पर आये
जबाब से हुआ है. मुख्य सचिव कार्यालय के अनु सचिव और जन सूचना अधिकारी पी. के.
पाण्डेय ने उर्वशी की इस अर्जी को बीते 25 मई को आरटीआई एक्ट की धारा 6(3) के तहत यूपी
के कार्मिक विभाग के जन सूचना अधिकारी को अंतरित किया था. कार्मिक अनुभाग-2 के राज्य
लोक सूचना अधिकारी जे. पी. श्रीवास्तव बीते
10 जून के पत्र के माध्यम से उर्वशी की 5 बिन्दुओं की आरटीआई अर्जी पर सूचना दी है पर गलती से पत्र भेजने की तिथि
10 मई अंकित कर दी है.
उर्वशी को दिए गए जबाब में बताया गया है कि यूपी के वर्तमान
सीएम अखिलेश यादव ने मार्च 2012 में मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के बाद से अब तक
के चार सालों में मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर महज 1 प्रस्ताव केंद्र
सरकार को भेजा है. मुसलामानों को आरक्षण दिलाने के परिपेक्ष्य में सच्चर समिति और
रंगनाथ मिश्र आयोग द्वारा की गयी संस्तुति के सन्दर्भ में सार्थक एवं प्रभावी
कार्यवाही कराने हेतु अखिलेश द्वारा दिसम्बर 2012 में केंद्र सरकार को भेजा गया 9
पेजों का यह प्रस्ताव इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र को भेजा गया एकमात्र प्रस्ताव बनकर
रह गया है. जे.पी. श्रीवास्तव के द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार यूपी के वर्तमान
सीएम अखिलेश यादव ने मार्च 2012 में मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के बाद से अब तक
के चार सालों में मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर महज 1 पत्र केंद्र
सरकार को भेजा है. मुसलामानों को आरक्षण दिलाने के परिपेक्ष्य में अखिलेश द्वारा अप्रैल
2013 में केंद्र सरकार को भेजा गया 2 पेजों का यह पत्र इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश
सरकार द्वारा केंद्र को भेजा गया एकमात्र
प्रस्ताव बनकर रह गया है.जे.पी. श्रीवास्तव ने उर्वशी को इस प्रस्ताव, इस पत्र और
इससे सम्बंधित 4 पेज की नोट-शीट्स भी दीं हैं.
समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने इस स्वतंत्र पत्रकार से की गयी एक
विशेष बातचीत में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी मुसलमानों
को जीते-जागते इंसान समझने के स्थान पर महज वोट-बैंक समझा जा रहा है. बकौल
उर्वशी यूपी में कांग्रेस,सपा और बसपा द्वारा चुनावों से पहले मुसलमानों को सब्जबाग़
दिखाकर इनके वोट पाने के लिए आरक्षण जैसे मुद्दों को चुनावी घोषणा पत्रों में
शामिल कर वोट तो पा लिया जाता है पर सरकार बनने के बाद इन मुद्दों को जिस तरह भुलाकर
सूबे के मुस्लिमों को धोखा दिया जाता है, उसकी बानगी उनकी यह आरटीआई सामने रख रही
है.
यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा आने वाले दिनों में अपने आवास पर आयोजित
किये जाने वाले रोजा-इफ्तार कार्यक्रम का संदर्भ देते हुए उर्वशी ने इस सार्वजनिक
कार्यक्रम में जाकर अखिलेश से भेंटकर उन को आरटीआई से सम्बंधित प्रपत्र सौंपकर उन से
मुस्लिम आरक्षण पर अपने चुनावी वादों के अनुसार सार्थक कार्य कर कथनी-करनी के
अंतर को मिटाने की नसीहत देने की बात भी कही है. उर्वशी ने कहा कि उनको उम्मीद है
कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रोजेदारों के बीच बैठकर किये गए मुस्लिम
आरक्षण के वादे को और बाकी राजनैतिक वादों की तरह झूठा नहीं होने देंगे.
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Sanjay Sharma is a Lucknow based
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