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Wednesday, April 5, 2023

लखनऊ के कोहिनूर पैलेस मैरिज हॉल जाने वाले सावधान : कभी भी धधकती आग का गोला बन सकता है बिना अग्निशमन सुरक्षा चल रहा कोहिनूर पैलेस : मैरिज हॉल को बंद कराने के लिए संजय शर्मा ने लगाईं सीएम योगी से गुहार.

 


 

लखनऊ / गुरूवार, 06 अप्रैल 2023........................

लखनऊ की कैसरबाग बर्लिंगटन कैंट रोड पर ओडियन सिनेमा के सामने स्थित प्लाट संख्या 31 C पर बिना अग्निशमन सुरक्षा लाइसेंस लिए ही पूरी तरह से आग के मुहाने पर खड़ी असुरक्षित बिल्डिंग में चल रहा कोहिनूर पैलेस मैरिज हॉल कभी भी धधकती आग का ऐसा गोला बन सकता है जो इस मैरिज हॉल में कार्यक्रम कर रहे सैकड़ों लोगों को मौत के मुंह में धकेल सकता है लेकिन लगता है कि लखनऊ में विगत में हुए अग्निशमन हादसों से भी अग्निशमन महकमे ने कोई सबक नहीं लिया है और अपने कानों में तेल डाले बैठे सम्बंधित अधिकारी आम जनता को सुरक्षित रखने के लिए सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ द्वारा किये जा रहे जनोन्मुखी प्रयासों की मिट्टी पलीत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

 

 

दरअसल यूपी के राजधानी के राजाजीपुरम क्षेत्र निवासी कंसलटेंट इंजीनियर और ट्रांसपेरेंसी, एकाउंटेबिलिटी एंड ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव फॉर रेवोल्युशन  नाम की पंजीकृत संस्था के संस्थापक अध्यक्ष संजय शर्मा ने लखनऊ के अग्निशमन महकमे में आरटीआई अर्जी डालकर कोहिनूर पैलेस को  अग्निशमन विभाग द्वारा अनापत्ति दिए जाने के सम्बन्ध में कई बिन्दुओं पर सूचना मांगी थी.

 

 

इस सम्बन्ध में लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी मंगेश कुमार ने  अग्निशमन अधिकारी हज़रतगंज की आख्या के आधार पर पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के अपर पुलिस उपायुक्त और जन सूचना अधिकारी  के मार्फत संजय को बताया है कि अग्निशमन महकमे में कोहिनूर पैलेस मैरिज हॉल को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिए जाने से सम्बंधित कोई भी रिकॉर्ड नहीं है.

 

 

मंगेश ने यह भी लिखा है कि कोहिनूर पैलेस मैरिज हॉल के भवन स्वामी द्वारा अग्निशमन अनापत्ति प्राप्त करने के लिए कभी कोई आवेदन दिया ही नहीं गया है और न ही अग्निशमन महकमे ने इस बिल्डिंग की फायर सेफ्टी की कभी जांच ही की है.

 

 

संजय ने यह भी जानना चाहा था कि यदि कोहिनूर पैलेस मैरिज हॉल की बिल्डिंग में भी विगत दिनों लखनऊ के हजरतगंज इलाके में हुए लेवाना होटल अग्निकांड जैसी कोई दुर्घटना भविष्य में होती है तो अग्निशमन सुरक्षा के इंतजामों को पूरा किये बिना कोहिनूर पैलेस मैरिज हॉल को गैरकानूनी रूप से चलने देने और इस प्रकार से आम आदमी की जिन्दगी खतरे में डालने के लिए अग्निशमन विभाग के कौन कौन अधिकारी और कर्मचारी उत्तरदाई होंगे जिस पर मंगेश ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4(2)(ख) को लिखते हुए सूचना देने से मना कर दिया है.

 

 

 

संजय ने लखनऊ के अग्निशमन महकमे के अधिकारियों पर निहित छुद्र स्वार्थों के लिए आम जनमानस के जीवन को जान-बूझकर खतरे में डालने का आरोप लगाया है और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की जनोन्मुखी नीति के खिलाफ काम करने के कारण अवैधानिक रूप से कोहिनूर पैलेस के चलने देने और इसके खिलाफ कार्यवाही नहीं करने के इस मामले में शासन स्तर से जांच कराकर लखनऊ के अग्निशमन महकमे के दोषी अधिकारियों को चिन्हित करके दण्डित करने के साथ साथ कोहिनूर पैलेस मैरिज हॉल को तत्काल बंद कराने की मांग सार्वजनिक रूप से सीएम के सामने रखी है.

 

 

 

संजय ने उम्मीद जताई है कि उनके द्वारा सीएम से वृहद् लोकहित में गुहार लगाने के बाद कानों में तेल डाले बैठा अग्निशमन महकमा नींद से जागेगा और सूबे के सीएम की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जल्द ही आग के मुहाने पर बैठे कोहिनूर पैलेस मैरिज हॉल को सील कर बंद किया जाएगा.

 

Friday, June 24, 2016

OMG! मुस्लिम आरक्षण पर UP की अखिलेश सरकार ने नहीं लिखा केंद्र की मोदी सरकार को कोई ख़त !



समाचार सार News©TAHRIRnews: मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर यूपी के सीएम अखिलेश यादव और उनकी समाजवादी पार्टी शायद महज लम्बी-चौड़ी डींगें हांककर मुस्लिमों को गुमराह करने तक ही सीमित है क्योंकि लखनऊ की समाजसेविका और येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा द्वारा दायर एक आरटीआई अर्जी पर यूपी के कार्मिक विभाग के राज्य लोक  सूचना अधिकारी जे. पी. श्रीवास्तव के जबाब से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर UP की अखिलेश सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार को  कोई भी ख़त नहीं लिखा है. 



Lucknow/24 June 2016/ Sanjay Sharma News©TAHRIRnews
आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की कुल आबादी की लगभग 20%  आबादी मुस्लिम होने के चलते जब-जब चुनाव का समय नजदीक आता है तब-तब कमोवेश सभी राजनैतिक दल मुस्लिमों को लुभाकर उनका वोट पाने की कवायद के तहत उनको आरक्षण देने का चुनावी झुनझुना झाड-पोंछ कर बाहर निकाल बजाने लगते हैं पर सरकारें बनने के बाद सत्तानशीन होने के बाद इस मुद्दे को भुलाकर फिर ठन्डे बस्ते में डाल देते हैं. कुछ यही हाल अखिलेश यादव की अगुआई में चल रही यूपी की वर्तमान समाजवादी पार्टी की सरकार का भी है. वैसे तो समाजवादी पार्टी और इसके सभी बड़े नेता यूपी में मुस्लिमों का सबसे बड़ा खैरख्वाह बनने के बड़े-बड़े दावे करते हैं पर शायद हकीकत इसके उलट ही है और यह सरकार भी मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के नाम पर गुमराह करने से अधिक कुछ भी नहीं कर रही है क्योंकि लखनऊ की समाजसेविका और येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा द्वारा दायर एक आरटीआई अर्जी पर यूपी के कार्मिक विभाग के राज्य लोक  सूचना अधिकारी जे. पी. श्रीवास्तव के जबाब से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि UP के CM  अखिलेश यादव ने भारत के PM नरेंद्र मोदी को मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर कोई भी ख़त नहीं लिखा है. आरटीआई जबाब से स्पष्ट है कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी मुस्लिम आरक्षण पर चाहें जितनी बड़ी-बड़ी बातें कर लें पर पिछले 3 साल से अधिक समय से अखिलेश यादव ने मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने की कोई सुधि नहीं ली है और इस सम्बन्ध में भारत के प्रधानमंत्री से पिछले 3 सालों में कोई  पत्राचार नहीं किया है. समाजवादी पार्टी की वर्तमान सरकार के इन चार वर्षों से अधिक के कार्यकाल में सूबे की सरकार मुसलमानों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर केंद्र की सरकार को महज 1 प्रस्ताव भेजने और 1 पत्र लिखने से अधिक कुछ भी नहीं कर पायी है. इस प्रकार अखिलेश सरकार ने मुसलमानों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर इन चार सालों से अधिक के समय में केंद्र की सरकार को महज 11 पेज भेजने से अधिक कुछ भी नहीं किया है.

मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर यह चौंकाने वाला खुलासा लखनऊ की समाजसेविका और येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा द्वारा सूबे के मुख्य सचिव के कार्यालय में बीते 21 मई को दायर की गयी एक आरटीआई अर्जी पर आये जबाब से हुआ है. मुख्य सचिव कार्यालय के अनु सचिव और जन सूचना अधिकारी पी. के. पाण्डेय ने उर्वशी की इस अर्जी को बीते 25 मई को आरटीआई एक्ट की धारा 6(3) के तहत यूपी के कार्मिक विभाग के जन सूचना अधिकारी को अंतरित किया था. कार्मिक अनुभाग-2 के राज्य लोक  सूचना अधिकारी जे. पी. श्रीवास्तव बीते 10 जून के पत्र के माध्यम से उर्वशी की 5 बिन्दुओं की आरटीआई अर्जी  पर सूचना दी है पर गलती से पत्र भेजने की तिथि 10 मई अंकित कर दी है.
 
उर्वशी को दिए गए जबाब में बताया गया है कि यूपी के वर्तमान सीएम  अखिलेश यादव ने मार्च 2012 में मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के बाद से अब तक के चार सालों में मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर महज 1 प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है. मुसलामानों को आरक्षण दिलाने के परिपेक्ष्य में सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्र आयोग द्वारा की गयी संस्तुति के सन्दर्भ में सार्थक एवं प्रभावी कार्यवाही कराने हेतु अखिलेश द्वारा दिसम्बर 2012 में केंद्र सरकार को भेजा गया 9 पेजों का यह प्रस्ताव इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार  द्वारा केंद्र को भेजा गया एकमात्र प्रस्ताव बनकर रह गया है. जे.पी. श्रीवास्तव के द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार यूपी के वर्तमान सीएम  अखिलेश यादव ने मार्च 2012 में मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के बाद से अब तक के चार सालों में मुस्लिमों को आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर महज 1 पत्र केंद्र सरकार को भेजा है. मुसलामानों को आरक्षण दिलाने के परिपेक्ष्य में अखिलेश द्वारा अप्रैल 2013 में केंद्र सरकार को भेजा गया 2 पेजों का यह पत्र इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार  द्वारा केंद्र को भेजा गया एकमात्र प्रस्ताव बनकर रह गया है.जे.पी. श्रीवास्तव ने उर्वशी को इस प्रस्ताव, इस पत्र और इससे सम्बंधित 4 पेज की नोट-शीट्स भी दीं हैं.

समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने इस स्वतंत्र पत्रकार से की गयी एक विशेष बातचीत में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी मुसलमानों  को जीते-जागते इंसान समझने के स्थान पर महज वोट-बैंक समझा जा रहा है. बकौल उर्वशी यूपी में कांग्रेस,सपा और बसपा द्वारा चुनावों से पहले मुसलमानों को सब्जबाग़ दिखाकर इनके वोट पाने के लिए आरक्षण जैसे मुद्दों को चुनावी घोषणा पत्रों में शामिल कर वोट तो पा लिया जाता है पर सरकार बनने के बाद इन मुद्दों को जिस तरह भुलाकर सूबे के मुस्लिमों को धोखा दिया जाता है, उसकी बानगी उनकी यह आरटीआई सामने रख रही है.

यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  द्वारा आने वाले दिनों में अपने आवास पर आयोजित किये जाने वाले रोजा-इफ्तार कार्यक्रम का संदर्भ देते हुए उर्वशी ने इस सार्वजनिक कार्यक्रम में जाकर अखिलेश से भेंटकर उन को आरटीआई से सम्बंधित प्रपत्र सौंपकर उन से मुस्लिम आरक्षण पर अपने चुनावी वादों के अनुसार सार्थक कार्य कर  कथनी-करनी के अंतर को मिटाने की नसीहत देने की बात भी कही है. उर्वशी ने कहा कि उनको उम्मीद है कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रोजेदारों के बीच बैठकर किये गए मुस्लिम आरक्षण के वादे को और बाकी राजनैतिक वादों की तरह झूठा नहीं होने देंगे.  
News©TAHRIRnews
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Sanjay Sharma is a Lucknow based freelancer and President at TAHRIR. He can be contacted at associated.news.asia@gmail.com Mobile/Whatsapp No. 7318554721.

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Wednesday, June 3, 2015

नीतियों के स्थान पर सत्ताधारी राजनैतिक दलों की मंशा के अनुसार काम कर रही यूपी की रीढ़विहीन नौकरशाही.



तहरीर।  ०३ जून २०१५।  लखनऊ।  शायद प्रशासन को मजबूती देने के लिए बनायी गयी नौकरशाही, जिसे स्टील फ्रेम भी कहा जाता था, अब खुद ही शक्तिहीन हो गयी है या ये भी कह सकते  हैं कि यह  स्टील फ्रेम अब जंग लग  कर इस कदर टूट-फूट चूका है कि खुद ही सीधा खड़ा नहीं हो पा रहा है l  ऐसे में कमोवेश पूर्णतया रीढ़विहीन हो चुकी इस नौकरशाही द्वारा   नीतियों के स्थान पर सत्ताधारी राजनैतिक दलों  की मंशा के अनुसार काम करने की घटनाएं आम होती जा रही हैं। कुछ ऐसा ही खुलासा मेरी एक आरटीआई से हुआ है कि यूपी का संस्कृति विभाग किसी नीति नहीं अपितु सत्ताधारी राजनैतिक दल की मंशा के अनुसार काम करता है।




दरअसल मैने साल २००९ से २०१४ तक के सैफई महोत्सवों में यूपी की सरकार द्वारा खर्च के गयी धनराशि की सूचना माँगी थी. जनवरी २०१४ में माँगी गयी सूचना १६  महीने बाद मई २०१५ में दी गयी है हालाँकि आरटीआई एक्ट के अनुसार ये सूचना एक माह के बाद ही मिल जानी चाहिए थी ।




संस्कृति निदेशालय द्वारा मुझे दी गयी सूचना के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने साल २००९,२०१०,२०११ में सैफई महोत्सव के आयोजन के लिए  कोई आर्थिक मदद नहीं दी थी  जबकि साल २०१२ में १३८.५२  लाख , साल २०१३ में ९६.५९ लाख और  साल २०१४  में ९५.२९ लाख रुपयों की आर्थिक मदद  दी ।

 

गौरतलब है कि यूपी में वर्ष २००९,२०१०,२०११ में मायावती की अगुआई बाली बहुजन समाजवादी पार्टी की सरकार थी और वर्ष २०१२,२०१३ और २०१४ में अखिलेश यादव की अगुआई बाली  समाजवादी पार्टी की सरकार । इस संबंध में मेरा यह कहना है कि यूपी की सरकार द्वारा मायावती के कार्यकाल में सैफई महोत्सव को कोई आर्थिक मदद  नही देने और अखिलेश के कार्यकाल में करोड़ों की मदद देने से यह स्वतः सिद्ध हो  रहा  है कि सैफई महोत्सव को  आर्थिक मदद देने का निर्णय सत्ताधारी राजनैतिक दलों की मंशा के अनुसार लिया जाता है न कि किसी नीति के अंतर्गत ।




इस आरटीआई जबाब से यह भी सिद्ध हो रहा है कि शायद प्रशासन को मजबूती देने के लिए बनायी गयी नौकरशाही, जिसे स्टील फ्रेम भी कहा जाता था, अब खुद ही शक्तिहीन हो गयी है या ये भी कह सकते  हैं कि यह  स्टील फ्रेम अब जंग लग  कर इस कदर टूट-फूट चूका है कि खुद ही सीधा खड़ा नहीं हो पा रहा है ।  ऐसे में कमोवेश पूर्णतया रीढ़विहीन हो चुकी इस नौकरशाही द्वारा   नीतियों के स्थान पर सत्ताधारी राजनैतिक दलों  की मंशा के अनुसार काम करने की घटनाएं, जो कि  आम होती जा रही , इस आरटीआई का खुलासा सिद्ध कर रहा है  कि यूपी का संस्कृति विभाग भी किसी नीति नहींअपितु सत्ताधारी राजनैतिक दल की मंशा के अनुसार ही काम करता है।

 

आरटीआई जबाब यह भी दर्शा रहा है कि मीडीया के दखल से पैदा हुए जन-दवाव के चलते अखिलेश सरकार को भी सैफई महोत्सव की सरकारी मदद में कमी करनी पड़ी है ।



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ई० संजय शर्मा

संस्थापक - तहरीर

मोबाइल ८०८१८९८०८१