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Wednesday, August 26, 2015
Saturday, May 30, 2015
यूपी के माननीयों की निजी संपत्ति,देनदारियों पर पारदर्शिता निभाने के अखिलेश यादव के वादे झूठे : आरटीआई।
स्नैपशॉट्स
-> यूपी के क़ानून बनाने बाले ही तोड़ रहे क़ानून ! : अखिलेश सरकार के पास नहीं
है यूपी के मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल सदस्यों द्वारा द्वारा सार्वजनिक
कीं गयीं परिसंपत्तियाँ ( टोटल वेल्थ,
एसेट्स ) और देयतायें (लायबिलिटीज़) !: अखिलेश
यादव यूपी के सीएम और मंत्रियों की निजी संपत्ति,देनदारियों
पर पारदर्शिता निभाने के आश्वासन में विफल !
लखनऊ.
३० मई २०१५. तहरीर.
असीम
त्रिवेदी का कार्टून 'गैंग रेप ऑफ मदर इंडिया' देखा. लगा वास्तव में क्या सही सोच है
असीम भाई की. लगा कि ऐसे राजनेताओं में से कुछ हमारी यूपी के भी हैं. मिलिए इनसे.
वर्तमान
में उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार के कई मंत्रियों की संपत्ति में तेजी से हो रही बृद्धि की खबरें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक
और सोशल मीडिया पर सुर्खियों में रही हैं ऐसे में मेरी आरटीआई से यह खुलासा होना कि
यूपी के सीएम और उनकी मंत्रिपरिषद के 2011 से अब तक सार्वजनिक कीं गयीं
परिसंपत्तियाँ ( टोटल वेल्थ, एसेट्स ) और देयतायें (लायबिलिटीज़) के विवरण प्रदेश
की सरकार के पास नहीं हैं, एक महत्वपूर्ण खुलासा है जो कानून बनाने बालों के द्वारा
ही कानून को तोड़े जाने का जीवंत उदहारण तो है ही, यह इन माननीयों के दोहरे चरित्र को
भी उजागर कर रहा है।
कहने
को तो सरकारों के लिए उच्च पदों पर भ्रष्टाचार
देश की आम जनता के जीवन को सीधे-सीधे प्रभावित करने बाले समकालीन मुद्दों में सर्वाधिक
बड़ा मुद्दा है. सरकारें ऐसा भी मानती है कि
यदि देश के उच्च पदों पर आसीन लोकसेवक अपनी
परिसंपत्तियों को सार्वजनिक करने लगें तो भ्रष्टाचार पर काफ़ी हद तक लगाम लगाई जा सकती
है. पूरे देश की जनता भी ऐसा ही मानती है जिसकी बानगी पूरे देश ने अन्ना आंदोलन के
दौरान देखी जिसकी परिणति के रूप में देश को लोकपाल क़ानून भी मिला जिसमें लोकसेवकों
और उनके परिवार के सभी सदस्यों की परिसंपत्तियाँ सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया गया
पर जब परिसंपत्तियाँ सार्वजनिक करने पर अमल करने की बात आती है तो सर्वाधिक उच्च पदों
पर आसीन लोग ही दोगला व्यवहार कर अपना मुँह छुपाते नज़र आते है.
कुछ
ऐसा ही खुलासा मेरे द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव कार्यालय में दायर एक आरटीआई
पर उत्तर प्रदेश के गोपन विभाग के जनसूचना अधिकारी द्वारा मुझे १४ मई २०१५ को भेजे
जबाब से हुआ है .
दरअसल
मैने बीते साल
के सितंबर माह
में उत्तर प्रदेश
के मुख्य सचिव
कार्यालय में
एक आरटीआई दायर करके
यूपी के मुख्यमंत्री
और मंत्रिमंडल सदस्यों
की वित्तीय वर्ष
२०१०-११,२०११-१२,२०१२-१३,२०१३-१४ एवं
२०१४-१५ की
कुल परिसंपत्तियों ( टोटल वेल्थ, एसेट्स ) और देयताओं ( लायबिलिटीज़ ) तथा ये
विवरण
न देने पर
दंडित किए गये मुख्यमंत्री
और मंत्रिमंडल सदस्यों की
सूचना माँगी थी.
मुख्य
सचिव कार्यालय ने मेरा आरटीआई आवेदन उत्तर
प्रदेश के गोपन विभाग को अंतरित कर दिया था. राज्य सूचना आयोग के हस्तक्षेप के बाद
गोपन विभाग के विशेष सचिव एवं जनसूचना अधिकारी कृष्ण गोपाल द्वारा मुझे भेजे पत्र से ये चौंकाने बाला खुलासा हुआ है कि यूपी के मुख्यमंत्री
और मंत्रिमंडल सदस्यों की कुल परिसंपत्तियों ( टोटल वेल्थ, एसेट्स ) और देयताओं ( लायबिलिटीज़ ) तथा ये विवरण
न देने पर दंडित किए गये मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल
सदस्यों की कोई भी सूचना गोपन विभाग में धारित नहीं है.
गोपन
विभाग के जनसूचना
अधिकारी ने ये
भी अभिलिखित किया
है कि उनको
यह भी नहीं
पता है कि
मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल
सदस्यों की कुल
परिसंपत्तियों ( टोटल वेल्थ,
एसेट्स ) और
देयताओं ( लायबिलिटीज़ ) की ये
सूचना उत्तर प्रदेश
के किस विभाग
द्वारा धारित है और
मेरा आरटीआई आवेदन
और पोस्टल आर्डर
मुझे बापस कर
दिया है.
सूबे
के मुख्य सचिव
के कार्यालय,गोपन
विभाग और राज्य
सूचना आयोग के
हस्तक्षेप के बाद
भी मुझे मुख्यमंत्री
और मंत्रिमंडल सदस्यों
की कुल परिसंपत्तियों
( टोटल वेल्थ, एसेट्स ) और देयताओं
( लायबिलिटीज़ ) की
सूचना मिलने के स्थान
पर आरटीआई आवेदन
बापस मिलने से
ये तो स्पष्ट
है कि उत्तर
प्रदेश के मुख्यमंत्री
और मंत्रिमंडल सदस्य
अपनी कुल परिसंपत्तियों
( टोटल वेल्थ, एसेट्स ) और देयताओं
( लायबिलिटीज़ ) की
सूचना उत्तर प्रदेश सरकार
को देते ही
नहीं है। मेरे अनुसार
ये स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण
है और उच्च
पदों पर आसीन
और
माननीय कहे जाने बाले
इन लोगों के
दोगले चेहरे उजागर
कर रही है.
उत्तर
प्रदेश सहित भारत में ज्यादातर राज्य अपने सीएम और मंत्रियों की संपत्ति सार्वजनिक
करने में असमर्थ रहे हैं है। उत्तर प्रदेश
के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद अखिलेश यादव ने प्रशासन में पारदर्शिता की वकालत करते हुए मुख्यमंत्री
और मंत्रियों की निजी संपत्ति को सार्वजनिक
करने की बात कही थी , लेकिन इस आरटीआई से पता
चला है मोटे तौर पर वह इसमें पूर्णतः विफल रहे हैं। हमारा मानना
है कि इस खुलासे से उच्च स्थानों पर पारदर्शिता
और जवाबदेही स्थापित करने की मुहीम को एक बड़ा झटका लगा है ।
उत्तर
प्रदेश मंत्रियों और विधायकों (आस्तियों और देयताओं का प्रकाशन) अधिनियम (1975) राज्य
विधानसभा के हर सदस्य के लिए प्रत्येक और नए वित्तीय वर्ष के पहले 20 दिनों के भीतर
अपनी संपत्ति और देनदारियों का विवरण प्रस्तुत
करना अनिवार्य बनाता है।
लोक
प्रतिनिधि अधिनियम 1951 के तहत आचार संहिता के अनुसार भी प्रत्येक विधायक को हर साल
नियमित रूप से उनके और उनके परिवार के सदस्यों की संपत्ति और देनदारियों की घोषणा करके
समाज के समक्ष एक उदाहरण स्थापित करने की उम्मीद
की जाती है ।
इन
नियमों के पिछले 40 वर्षों से अस्तित्व में होने के बावजूद हमारे नेताओं द्वारा इनको गंभीरता से नहीं
लिया गया है और मेरी इस आरटीआई के जवाब से
पता चलता है कि यूपी के क़ानून बनाने बाले ही क़ानून तोड़ रहे हैं।
ये
सूचना मायावती और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल की हैं जिससे स्पष्ट है कि मायावती
के पदच्युत होने और अखिलेश के पदारूढ़ होने से केवल सत्ता के चेहरे मात्र ही बदले और इन माननीयों द्वारा अपनी संपत्तियां छुपाने की पुरानी मानसिकता जस की तस रही.
मेरा
मानना है कि इन उच्च पदस्थ माननीयों के पारदर्शी हुए बिना भ्रष्टाचार मुक्त तंत्र की स्थापना संभव नहीं है और इसीलिये मैं सामाजिक
संगठन 'तहरीर' के संस्थापक अध्यक्ष की हैसियत से यूपी के राज्यपाल को ज्ञापन देकर सूबे
के मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल सदस्यों को उनकी
कुल परिसंपत्तियों ( टोटल वेल्थ, एसेट्स ) और देयताओं ( लायबिलिटीज़ ) की सूचना प्रत्येक वर्ष नियमित रूप से सार्वजनिक करने के निर्देश जारी करने
की अपील
करूंगा.
संजय
शर्मा
संस्थापक
'तहरीर'
मोबाइल
८०८१८९८०८१
Thursday, May 28, 2015
अखिलेश के मंत्री विनोद सिंह / 'पंडित सिंह' द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन मामले में सामाजिक संगठन 'तहरीर' की शिकायत पर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल भी सक्रिय।
लखनऊ। 28
मई 2015। तहरीर।
यूपी के माध्यमिक शिक्षा मंत्री विनोद सिंह उर्फ पंडित सिंह द्वारा पुलिसबालों की मदद से गोंड़ा के आकाश अग्रवाल
और उसके परिवार को महिला शालीनता को भंग करने बाली गालियां देते हुए जान से मारने की
धमकी देने के मामले में मानवाधिकार संगठनों
के कूद जाने से विनोद सिंह की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं। लखनऊ के सामाजिक संगठन
'तहरीर' द्वारा सक्रिय होने से अखिलेश के इस
बड़बोले मंत्री की कारगुजारियां अब अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल के रडार पर आ गयीं है।
गौरतलब है कि राजधानी लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन
'तहरीर' के संस्थापक और मानवाधिकार कार्यकर्ता संजय शर्मा ने पंडित सिंह द्वारा पुलिसबालों की मदद से गोंड़ा के आकाश अग्रवाल और
उसके परिवार को महिला शालीनता को भंग करने बाली गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी
देने के इस मामले में बीते 24 मई को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, सूबे के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव,पुलिस महानिदेशक,लखनऊ
और गोंडा के जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को ज्ञापन देकर विनोद सिंह को मंत्री पद से हटाने, इनके विरुद्ध
एफआईआर लिखाने और मानवाधिकार उल्लंघन के लिए जांच कराने की मांग की थी।
सामाजिक संगठन 'तहरीर' की मांग http://tahririndia.blogspot.in/2015/05/tahrir-demands-fir-suspension-from.html
संजय ने बताया कि उन्होंने इस मामले में में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी संपर्क
साधा था। उनमें से एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था
एमनेस्टी इंटरनेशनल की सपोर्टर इंगेजमेंट टीम ने
इस मामले में 'तहरीर' के संस्थापक और मानवाधिकार कार्यकर्ता इंजीनियर संजय शर्मा
द्वारा भेजी गयी ई-मेल का संज्ञान लिया है और संजय की ई-मेल एमनेस्टी इंटरनेशनल की भारत स्थित इकाई को
अग्रेषित की है।
चोटी की अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था के इस
मामले में कूदने से संजय खासे उत्साहित हैं और उनका कहना है कि उनका संगठन मानवाधिकार उल्लंघन के इस मामले में
दोषियों को सजा दिलाने के लिए पूरी तरह कृतसंकल्प है और इस मामले में शीघ्र ही राज्यपाल
से बात करने भी जा रहा है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की सपोर्टर इंगेजमेंट टीम द्वारा
एमनेस्टी इंटरनेशनल की भारत स्थित इकाई को अग्रेषित ई-मेल यहाँ पाएं : http://tahririndia.blogspot.in/2015/05/blog-post_3.html
Tuesday, May 26, 2015
सामाजिक संगठन 'तहरीर' ने उठायी रेप कराने की आरोपी नूतन ठाकुर को नागरिक सुरक्षा विभाग की 'महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 की धारा 4 के अधीन बनायी गयी समिति' के गैर सरकारी संगठन के सदस्य पद से हटाये जाने की मांग ।
नूतन ठाकुर को नागरिक सुरक्षा विभाग की 'महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 की धारा 4 के अधीन बनायी गयी समिति' के गैर सरकारी संगठन के सदस्य पद से हटाये जाने के सम्बन्ध में ।
Sanjay Sharma<tahririndia@gmail.com> | |||||
| To: dgp@up.nic.in, uppcc-up@nic.in, uppcc@up.nic.in | |||||
| Cc: hshso <hshso@nic.in>, hgovup@nic.in, hgovup@up.nic.in, hgovup@gov.in, cmup@nic.in, cmup <cmup@up.nic.in>, csup@up.nic.in, csup@nic.in, igkarmik-up@nic.in | |||||
सेवा में,
अरविन्द कुमार जैन,उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक,उत्तर प्रदेश,लखनऊ। dgp@up.nic.in , uppcc-up@nic.in , uppcc@up.nic.in Letter No. : TAHRIR/2015-16/150522/6 Date : 25-05-2015 विषय : नूतन ठाकुर को नागरिक सुरक्षा विभाग की 'महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 की धारा 4 के अधीन बनायी गयी समिति' के गैर सरकारी संगठन के सदस्य पद से हटाये जाने के सम्बन्ध में । महोदय भिज्ञ होंगे कि बीते जनवरी माह में गाजियाबाद की एक महिला ने नूतन ठाकुर पर अपने पति आईपीएस और आपके कार्यालय में संयुक्त निदेशक नागरिक सुरक्षा के पद पर कार्यरत अमिताभ ठाकुर से इनके आवास पर जबरन रेप कराने का आरोप लगाया है। नूतन पर नौकरी का लालच देकर उस महिला को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित अपने आवास पर बुलाने का आरोप भी है। हाल ही में गाजियाबाद की महिला ने नूतन ठाकुर और अमिताभ ठाकुर पर केस वापस लेने के लिए मोबाइल से धमकी देने का आरोप भी लगाया है जिसके सम्बन्ध में वह न्यायालय भी गयी है। नूतन ठाकुर ने भी इस नए धमकी मामले में पुलिस महानिदेशक से जांच की मांग करने की बात कही है l सामाजिक संगठन तहरीर को पता चला है कि दिनाक नवम्बर २०१४ में आई.जी. - नागरिक सुरक्षा अमिताभ ठाकुर ने कानपुर के एक यौन उत्पीडन मामले की जाँच के दौरान अकेले पीडिता के ही बयान लिए तथा घटना के चश्मदीद गवाह का बयान नहीं लिया था। अमिताभ ने प्रेस-वार्ता में पीडिता की पहचान भी उजागर की। बाद में इस मामले में जो जाँच समिति बनाई गयी थी उसमे भी इस यौन उत्पीडन आरोप के सह अभियुक्त ए.डी.सी. रवीन्द्र प्रताप की डिप्टी कन्टोलर पत्नी अनीता प्रताप को पीठासीन अधिकारी बनाया अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर को समिति सदस्य। इस से स्पष्ट है कि इस समिति का गठन किसी दुर्योजना के तहत किया गया था जिसमें नूतन ठाकुर की भूमिका भी संदिग्ध है क्योंकि कथित रूप से एक समाजसेविका और एक अधिवक्ता होते हुए भी नूतन ने इस जांच में इन विधिक और एथिकल बिन्दुओं पर अपनी कोई आपत्ति प्रगट नहीं की जबकि बिभिन्न मामलों में ये प्रायः ही नियमानुकूल और एथिकल आपत्तियां उठाती रहती हैं जो प्रायः ही समाचार पत्रों के माध्यम से हमारे सामने आते रहते हैं। यद्यपि स्वयं को समाजसेविका कहने बाली नूतन ठाकुर को उनके ऊपर रेप समेत अन्य महिला अपराधों के आरोप लगने के बाद अंतरात्मा की आवाज पर और एथिकल ग्राउंड्स पर स्वतः ही इस पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए था किन्तु क्योंकि उनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया है अतः हमारा आपसे निवेदन है कि उपरोक्त के दृष्टिगत कृपया नूतन ठाकुर को वर्णित समिति के सदस्य पद से तत्काल हटाने की कार्यवाही करें l साथ ही साथ हमारा आपसे निवेदन है कि इस समिति को भंग कर नयी समिति गठित कर कानपुर प्रकरण जांच नए सिरे से कराना चाहें। प्रतिलिपि : आवश्यक कार्यवाही हेतु सादर ई-मेल द्वारा प्रेषित। १- राजनाथ सिंह, माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार द्वारा गृह सचिव, भारत सरकार। hshso@nic.in २- राम नाइक, माननीय राज्यपाल,उत्तर प्रदेश,लखनऊ। hgovup@nic.in , hgovup@up.nic.in , hgovup@gov.in ३- अखिलेश यादव, माननीय मुख्यमंत्री,उत्तर प्रदेश,लखनऊ। cmup@nic.in , cmup@up.nic.in ४-अलोक रंजन, मुख्य सचिव,उत्तर प्रदेश,लखनऊ। csup@up.nic.in , csup@nic.in ५- तनूजा श्रीवास्तव - आईजी ( कार्मिक ) उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक,उत्तर प्रदेश,लखनऊ। igkarmik-up@nic.in भवदीय Sanjay Sharma سنجے شرما संजय शर्मा ( Founder & Chairman) Transparency, Accountability & Human Rights Initiative for Revolution ( TAHRIR ) 101,Narain Tower,F Block, Rajajipuram Lucknow,Uttar Pradesh-226017 https://www.facebook.com/ Website :http://tahririndia.blogspot. E-mail : tahririndia@gmail.com Twitter Handle : @tahririndia Mobile : +91 - 8081898081 TAHRIR ( Transparency, Accountability & Human Rights initiative for revolution ) is a Bareilly/Lucknow based Social Organization, working at grass-root level by taking up & solving issues related to strengthening transparency & accountability in public life and protection of Human Rights in India. तहरीर (पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकार क्रांति के लिए पहल ) भारत में लोक जीवन में पारदर्शिता संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के मानवाधिकारों के संरक्षण के हितार्थ जमीनी स्तर पर कार्यशील संस्था है l
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