Friday, October 28, 2022

डा. पी. के. जैनs का यौन रोग विशेषज्ञ का प्रचार अवैधानिक : कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा की शिकायत पर यूपी आयुष और पुलिस महकमे ने जैन क्लीनिक्स पर कसा शिकंजा.

डा. पी. के. जैनs के यौन रोग क्लिनिक और यौन रोग विशेषज्ञ के प्रचार के खिलाफ यूपी आयुष विभाग और पुलिस महकमे ने कसा शिकंजा : कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा की शिकायत पर हुई बड़ी कार्यवाही.

 

 

लखनऊ / शनिवार, 29 अक्टूबर 2022 …………………..

यूपी की राजधानी लखनऊ में गैरकानूनी रूप से स्वयंभू रूप से यौन रोग विशेषज्ञ बन बैठे आयुर्वेदिक डॉक्टर पी. के. जैन,पियूष जैन और संचय जैन द्वारा लखनऊ की लाटूश रोड पर बांसमंडी चौराहे के आगे होटल आशा के पास डा. पी. के. जैन’क्लीनिक प्राइवेट लिमिटेड तथा हुसैनगंज मेट्रो स्टेशन गेट संख्या 2 के सामने होटल मेरा मन के पास डा. पी. के. जैन’महराणा क्लीनिक प्राइवेट लिमिटेड नाम के आयुर्वेदिक क्लीनिक्स को यौन रोग ( सेक्स ) क्लीनिक्स के रूप में अवैधानिक रूप से प्रचारित-प्रसारित करने के खिलाफ सूबे के आयुष विभाग और लखनऊ के पुलिस महकमे ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. स्थानीय राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा की शिकायतों को जांच के बाद सही पाते हुए आयुष विभाग और लखनऊ पुलिस के अधिकारियों ने इन डॉक्टर्स और क्लीनिक्स के सेक्स क्लीनिक्स और सेक्सोलोजिस्ट वाले विज्ञापनों को हटाने के लिए कार्यवाही शुरू कर दी है.


 

संजय कहते हैं कि यह सुनने में तो अटपटा लग सकता है लेकिन मेडिकल टर्म में कोई खुद को सेक्सॉलजिस्ट या यौन रोग विशेषज्ञ नहीं कह सकता है. सेक्सॉलजिस्ट बनने के लिए MBBS के बाद भी कोई स्पेशल ब्रांच नहीं है. इसके लिए कई ब्रांच की पढ़ाई करनी होती है जिनमें साइकायट्री, एंड्रॉलजी, यूरोलॉजी जैसे कई कोर्सों  के बाद इंसानी सेक्सुअल रेस्पॉन्स जैसे विषयों में पीएचडी जैसी डिग्रियां हासिल करनी होती हैं  लेकिन  पी. के. जैन,पियूष जैन और संचय जैन के द्वारा मात्र आयुर्वेदिक विधा की डिग्री के आधार पर पंजीकरण कराकर मरीजों के साथ धोखाधड़ी करते हुए खुद को सेक्सोलोजिस्ट और अपने क्लीनिक्स को सेक्स क्लीनिक्स के रूप में गैरकानूनी रूप से स्थापित करने वाले विज्ञापन और दावे इन्टरनेट,सोशल मीडिया,मीडिया, नगर निगम के होर्डिंग्स आदि माध्यमों से किये जाने की शिकायत मोबाइल हेल्पलाइन 7991479999 पर प्राप्त होने पर उन्होंने प्रमाणों के साथ मुख्यमंत्री को शिकायतें भेजी थीं जिसके बाद सूबे का सरकारी अमला हरकत में आया है.

क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, लखनऊ ने सिसवारा राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के डा. शीलेन्द्र को संजय की शिकायत की जांच सौंपी. शीलेन्द्र ने इन डॉक्टर्स को अवैधानिक प्रचार करने का दोषी पाते हुए विज्ञापनों से यौन रोग विशेषज्ञ हटाने का आदेश देने के साथ-साथ भविष्य में विज्ञापन जारी करने से पहले विज्ञापन हेतु विभागीय अनुमति लेने तथा विज्ञापन शुल्क जमा कराने के निर्देश दिए और दोनों क्लीनिक्स से औषधियों के नमूने परीक्षण के लिए सीज किये. इन नमूनों को विश्लेषण के लिए राजकीय औषधि प्रयोगशाला भेजे जाने की बात भी शीलेन्द्र ने अपनी जांच आख्या में लिखी.

 

 

 


संजय बताते हैं कि जब आयुर्वेदिक विभाग की जांच के बाद भी डॉक्टर पी. के. जैन,पियूष जैन,संचय जैन और इनकी क्लीनिक्स के नंबर वन सेक्सोलोजिस्ट तथा सेक्स क्लीनिक्स जैसे दावों वाली प्रचार सामग्री इन्टरनेट,सोशल मीडिया और नगर निगम के होर्डिंग्स से नहीं हटे तो उन्होंने पुनः मुख्यमंत्री को शिकायतें भेजीं जिन पर कार्यवाही करते हुए राजधानी के थाना हुसैनगंज के उपनिरीक्षक चन्द्रभान गिरि ने इन डॉक्टर्स द्वारा विवादित शब्दों वाले विज्ञापन हटा लेने का वादा करने की बात बताई है, थाना नाका के प्रभारी निरीक्षक ने संजय की शिकायत को सही पाते हुए पुलिस महकमे के मार्फत आयुष विभाग को दो बार रिपोर्ट भेजी है और कैसरबाग़ के सहायक पुलिस आयुक्त ने प्रकरण का सीधा सम्बन्ध प्रशासकीय आयुष विभाग से होने के आधार पर किसी पुलिस कार्यवाही की आवश्यकता नहीं होने की बात कही है.

 



संजय ने सूबे के सीएम को पत्र लिखकर मांग की है कि सूबे में सेक्स एजुकेशन और साइको-सेक्शुअल अवेयरनेस को बढाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों को बढ़ाया जाए तथा साइको-सेक्शुअल काउंसलिंग के  विषय पर काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों को बढ़ावा दिया जाए ताकि ऐसे मरीज़ पी. के. जैनs और इनके क्लीनिक्स जैसे झूंठे विज्ञापनों के ज़रिए की जा रही धोखाधड़ी से बचे रहे.

 

 

 


Tuesday, October 25, 2022

एलडीए में मानचित्र जमा किये बिना ही अवैध रूप से बनकर चल रहा है होटल पाल अवध : आरटीआई खुलासा.

 



 

लखनऊ / बुधवार, 26 अक्टूबर 2022 …………………..

लखनऊ यूपी की राजधानी है और राजधानी के विकास प्राधिकरण से ये उम्मीद की जाती है कि वह अपने अमले की सभी व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखेगा लेकिन लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) इन उम्मीदों को पूरा करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है. अब इसे एलडीए के प्रशासनिक अधिकारियों और इंजिनियरों की अक्षमता कहा जाए या उनका भ्रष्टाचार कि राजधानी के नाका हिंडोला क्षेत्र में सुभाष मार्ग, दुगावान स्थित प्लाट संख्या 215 बटा 409 पर बनी बिल्डिंग में चल रहे होटल पाल अवध का हाल भी उस होटल लेवाना जैसा ही है जिसमें कुछ सप्ताह पहले हुए भीषण अग्निकांड में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. राजधानी के राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा बीती 26 सितम्बर को दायर की गई आरटीआई पर एलडीए के मानचित्र सेल के अधिशासी अभियंता ने बीती 19 अक्टूबर को पत्र जारी करके संजय को बताया है कि नाका हिंडोला क्षेत्र में सुभाष मार्ग, दुगावान स्थित प्लाट संख्या 215 बटा 409 के नाम से मानचित्र जमा की कोई भी सूचना प्राधिकरण के रिकॉर्ड में नहीं है.

 

 

एलडीए द्वारा दी गई सूचना के बाद संजय ने एलडीए के जोन 6 के सहायक अभियंता ओमकार चौधरी, अवर अभियंता रंगनाथ सिंह के साथ-साथ लखनऊ के जिलाधिकारी कार्यालय,अग्निशमन विभाग,पर्यटन विभाग और नगर निगम को कटघरे में खड़ा करते हुए इन सबकी कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाया है और सवाल उठाया है कि आखिर कैसे बिना मानचित्र जमा किये ही होटल पाल अवध न केवल बन गया बल्कि राजधानी में खुलेआम व्यवस्थाओं को मुंह चिढाते हुए इन सभी विभागों के आला अधिकारियों की नाक के नीचे चल भी रहा है. संजय का कहना है कि या तो इन विभागों के जिम्मेदार अधिकारी अपने कार्य को करने में अक्षम हैं जिसके लिए सरकार द्वारा इनको अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर घर बैठा दिया जाना चाहिए या ये अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त होकर इस होटल को अवैध रूप से चलाने के गैरकानूनी काम को संरक्षण दे रहे है जिसके लिए सरकार द्वारा इनके साथ-साथ होटल मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इनको जेल भेज दिया जाना चाहिए.

 

 

बकौल संजय ऐसे अधिकारियों से बने लचर और भ्रष्ट तंत्र के कारण ही चारबाग के एस.एस.जे. होटल अग्निकांड और हजरतगंज के होटल लेवाना अग्निकांड जैसी वारदातें होती हैं जिसकी कीमत इन अधिकारियों और सरकारी तंत्र पर विश्वास करके ऐसे होटलों में ठहरने वाले लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है.

 

एलडीए में मानचित्र जमा किये बिना ही अवैध रूप से बनकर चल रहे होटल पाल अवध को इस आरटीआई जवाब के आधार पर ‘मौत का होटल’ बताते हुए संजय ने सूबे के मुखिया को पत्र लिखकर इस होटल को तत्काल बंद कराने की मांग उठाने की बात कही है. बकौल संजय उनको उम्मीद है कि सीएम एक्शन लेकर एलडीए के साथ-साथ लखनऊ के जिलाधिकारी कार्यालय,अग्निशमन विभाग,पर्यटन विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के पेंच कसेंगे और राजधानी के होटल पाल अवध जैसे सभी होटलों को जल्द से जल्द बंद कराकर पर्यटकों को राजधानी में सुरक्षित होटल-प्रवास की गारंटी देंगे.

 

 

 

  

Tuesday, October 18, 2022

चौधरी कैफुलवरा की अध्यक्षी में बदहाल यूपी उर्दू एकेडमी : आरटीआई खुलासा.

 

















लखनऊ / मंगलवार,18 अक्टूबर 2022 ………

उर्दू भाषा और साहित्य के विकास और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए साल 1972 में स्थापित की गई उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी वर्तमान अध्यक्ष चौधरी कैफुलवरा के कार्यकाल में बदहाली के दौर से गुज़र रही है. उर्दू एकेडमी की बदहाली का खुलासा राजधानी लखनऊ के राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा की आरटीआई अर्जी पर एकेडमी के जन सूचना अधिकारी आमिर द्वारा बीती 30 सितम्बर को दिए गए जबाव से हुआ है.

 संजय बताते हैं कि बीते साल के सितम्बर महीने की 10 तारीख को चौधरी कैफुलवरा को एकेडमी का अध्यक्ष बनाया बनाया गया था इसीलिए उन्होंने कैफुलवरा के कार्यकाल की बीती अगस्त माह की 29 तारीख तक की सूचनाएं मांगीं थीं.

 आमिर ने संजय को जो सूचना दी है उससे इस बात का खुलासा हुआ है कि उर्दू एकेडमी के वर्तमान अध्यक्ष चौधरी कैफुलवरा के अब तक के कार्यकाल में उर्दू भाषा का संरक्षण करने, उर्दू को बढाने और उर्दू का विकास करने से सम्बंधित कोई भी सूचना एकेडमी में नहीं है. आमिर ने संजय को यह भी बताया है कि इस कालखंड में प्रकाशित होने वाली साहित्यिक और अकादमिक योग्यता की मूल रचनाएँ और उर्दू में लोकप्रिय और बच्चों की किताबें लिखने वाले  लेखकों के नामों की सूचना भी एकेडमी में नहीं है. इस अवधि में साहित्यिक और वैज्ञानिक कार्यों के साथ-साथ अन्य विषयों की उर्दू भाषा में अनुवादित कार्यों की सूचना एकेडमी में नहीं होने की बात भी आमिर ने संजय को बताई है. आमिर ने संजय को यह भी लिखकर दिया है कि उपरोक्त अवधि के दौरान उर्दू में तैयार और प्रकाशित संदर्भ कार्यों के और प्रकाशित कराये गए पुराने उर्दू साहित्य के वैज्ञानिक रूप से संपादित ग्रंथों के नामों की भी कोई सूचना एकेडमी के रिकॉर्ड में नहीं है. इस अवधि में एकेडमी में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किए गए प्रख्यात विद्वानों और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नामों के साथ-साथ एकेडमी द्वारा अर्जित की गई चल एवं अचल संपत्ति की सूचना भी एकेडमी में नहीं होने की बात भी संजय को बताई गई है.   

 संजय का कहना है कि उनको दी गई सूचना से यह बात सीधे सीधे सामने आ रही है चौधरी कैफुलवरा के कार्यकाल में उर्दू अकादमी अपने संस्थापन प्रलेख ( मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन ) में दिए गए अनेकों प्रमुख कार्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कोई भी काम नहीं कर सकी है.  
 आमिर ने संजय को बताया है कि इस अवधि में 6 पुस्तकें अप्रकाशित हैं जिनका प्रकाशन किया जाना है. आमिर द्वारा दी गई सूचना के अनुसार इस अवधि में उर्दू के 19 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक सहायता दी गई है जिनका पूरा व्योरा भी आमिर ने संजय को दिया है. इस अवधि में साल 2020 की पुस्तकों पर पुरस्कार भी दिए गए हैं जिनकी 9 पेजों की उर्दू में लिखी सूची भी आमिर ने संजय को दी है. इस अवधि में 125 से अधिक बूढ़े, जरूरतमंद लेखकों को मासिक सहायता देने के साथ-साथ कक्षा 6 से पी.एच.डी. तक के 2301 छात्रों को मेरिट के आधार पर 76 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने की बात भी आमिर ने संजय को बताई है.
 आमिर ने संजय को यह भी बताया है कि इस अवधि में मुशायरा,सेमिनार, शाम-ए-ग़ज़ल,उर्दू ड्रामा,दास्तान-गोई,बैत-बाजी के 62 कार्यक्रम कराये गए हैं. इस अवधि में उर्दू अकादमी ने मासिक खबरनामा,त्रैमासिक अकादमी और मासिक बागीचा नाम की 3 पत्रिकाओं का प्रकाशन करने के साथ-साथ सेल डिपो से पुस्तकें बेंचकर 7 लाख से अधिक की आय भी प्राप्त की है.
 संजय ने चौधरी कैफुलवरा से सार्वजनिक अपील की है कि वे उर्दू अकादमी के मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन में दिए गए सभी कार्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए काम करें ताकि उर्दू अकादमी अपने गठन के उद्देश्यों को पूरा कर सके.  
 
 

  

 

 

 

 

  

Monday, October 3, 2022

जगदीश गाँधी के CMS स्कूलों के अवैध निर्माणों के मामलों को लेवाना अग्निकांड PIL के साथ जुडवाने के लिए संजय शर्मा ने हाई कोर्ट न्यायमित्र से की बात.

 लखनऊ / सोमवार, 03 अक्टूबर 2022 ………….

शिक्षाविद के रूप में देश-विदेश प्रसिद्धि पा चुके जगदीश गाँधी द्वारा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थापित सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की शाखाओं की बिल्डिंग्स के अवैध निर्माणों का मामला हाई कोर्ट जा रहा है. राजधानी लखनऊ निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा ने सीएमएस स्कूल समूह के स्कूलों की बिल्डिंग्स के अवैध निर्माणों के सभी मामलों को हाई कोर्ट में चल रही लेवाना होटल अग्निकांड जनहित याचिका में जुडवाने के लिए हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त किये गए न्यायमित्र से बात की है.

 

बताते चलें कि विगत दिनों लखनऊ के हजरतगंज इलाके में हुए लेवाना होटल अग्निकांड मामले में हाई कोर्ट इलाहाबाद की लखनऊ बेंच ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करके सुनवाई शुरु की. इसके बाद कई लोगों ने हाई कोर्ट के समक्ष हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल करके कोर्ट से अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्यवाही की गुहार लगाईं जिसके बाद कोर्ट ने आदेश जारी कर कहा कि अगर कोई व्यक्ति अवैध निर्माण से जुड़ी कोई समस्या उठाना चाहता है तो कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमित्र अधिवक्ता के जरिये कोर्ट के समक्ष रख सकता है.

 

बकौल संजय, सूचना का अधिकार ( आरटीआई ) अधिनियम के तहत लखनऊ विकास प्राधिकरण,उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद और अग्निशमन महकमे ने उनको जो सूचनाएं दी हैं उनसे उनसे यह बात सीधे सीधे सामने आ रही है कि गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की अधिकाँश शाखाओं की बिल्डिंग्स अवैध निर्माणों से अटी पड़ी हैं अर्थात ढांचागत रूप से असुरक्षित हैं और इन शाखाओं में अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्थायें भी मानकों के अनुसार नहीं हैं और इस ये बिल्डिंग्स ढांचागत सुरक्षा और अग्निशमन सुरक्षा की दृष्टि से नितांत असुरक्षित हैं जिनमें होटल लेवाना जैसी दुर्घटना कभी भी हो सकती है जिस कारण से इन शाखाओं में पढने वाले शिक्षार्थियों का जीवन निरंतर खतरे में हैं .

 

 

संजय ने बताया कि ढांचागत सुरक्षा और अग्निशमन सुरक्षा की दृष्टि से असुरक्षित बिल्डिंग्स में चल रही सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की शाखाओं के अवैध निर्माणों के सम्बन्ध में प्राथमिक जानकारी देते हुए उन्होंने होटल लेवाना अग्निकांड पीआईएल मामले में नियुक्त न्यायमित्र अधिवक्ता से बात की है और इस मामले को होटल लेवाना पीआईएल में जुड़वाने के लिए हाई कोर्ट के सामने रखने की बात रखी है.

 

संजय ने बताया कि मामले से सम्बंधित प्रपत्र प्राप्त करने के लिए न्यायमित्र अधिवक्ता ने उनको समय दे दिया है और न्यायमित्र अधिवक्ता द्वारा दिए समय पर वे सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की अनियमिताओं और इन अनियमितताओं को सम्बंधित लोकसेवकों के संरक्षण से सम्बंधित प्रपत्र न्यायमित्र को सौंपकर ढांचागत सुरक्षा और अग्निशमन सुरक्षा की दृष्टि से असुरक्षित बिल्डिंग्स में चल रही सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की शाखाओं को बंद कराकर इन शाखाओं में पढ़ रहे देश के नौनिहालों के जीवन को सुरक्षित कराने और मामले में दोषी विद्यालय प्रबंधन और लखनऊ विकास प्राधिकरण,उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद और अग्निशमन महकमे के लोकसेवकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग करेंगे.