Wednesday, August 18, 2021

अमिताभ ठाकुर के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाले एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने अमिताभ को दी लाइव डिबेट की चुनौती.

 


लखनऊ / 19 अगस्त 2021

 

जबरिया रिटायर आईपीएस अमिताभ ठाकुर के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाले लखनऊ के एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने अमिताभ को मीडिया के माध्यम से लाइव डिबेट की सार्वजनिक चुनौती दी है.

 

संजय ने बताया कि अमिताभ ठाकुर ने हाल ही में राजनैतिक पारी खेलने की शुरुआत करते समय सिद्धान्तों और उच्च आदर्शों की बड़ी-बड़ी डींगें हांकी है जबकि हकीकत में अमिताभ ठाकुर का सिद्धान्तों और उच्च आदर्शों से दूर-दूर तक का कोई भी वास्ता नहीं है और अमिताभ पर सार्वजनिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है. बकौल संजय,उनके पास अमिताभ के द्वारा निहित स्वार्थों के लिए आईपीएस पद का दुरुपयोग करके पुलिस के माध्यम से लोगों को जबरदस्त रूप से प्रताड़ित करने के भी प्रचुर अभिलेखीय साक्ष्य हैं जिन्हें वे लाइव डिबेट में देश के सामने रखना चाहते हैं. संजय ने कहा कि सिद्धान्तों और उच्च आदर्शों की बात बोलने मात्र के लिए नहीं होती है बल्कि जीवन में धारण करने के लिए होती है और इसी महत्वपूर्ण पहलू पर अमिताभ ठाकुर का पूरा सच देश के सामने लाने के लिए उन्होंने अमिताभ को यह खुली चुनौती दी है.

 

संजय ने कहा है कि उनके पास अपनी बातों को जनता की अदालत में शत-प्रतिशत प्रमाणित करने के लिए प्रचुर मात्रा में अभिलेखीय साक्ष्य उपलब्ध है और उन्हें इस सम्बन्ध में अमिताभ ठाकुर के उत्तर का इंतज़ार रहेगा. बकौल संजय इस डिबेट में वे स्वयं भी अमिताभ ठाकुर द्वारा उठाये गए प्रश्नों का जबाब देने के लिए स्वयं को प्रस्तुत करेंगे  ताकि आम जनता के सामने उनका और अमिताभ ठाकुर का पूरा सच सामने आ सके और जनता वेहतर विकल्प का चयन कर सके.

 

 

अमेरिकी चुनावों में होने वाली लाइव डिबेट को लोकतंत्र को मजबूती देने का एक महत्वपूर्ण अंग बताते हुए संजय ने कहा कि इस प्रकार की डिबेट्स से आम जनता को अपने प्रत्याशियों के गुण-दोषों का सही से आंकलन करके सर्वश्रेष्ठ प्रत्याशी का चयन करने में आसानी रहती है जिससे सिद्धान्तों और उच्च आदर्शों पर सर्वाधिक खरा प्रत्याशी स्वतः ही सामने आ जाता है जिससे लोकतंत्र और अधिक मजबूत होता है.

 

 

Sunday, August 15, 2021

अमिताभ ठाकुर जब,जहाँ,जो चुनाव लड़ेंगे; क्षेत्र के मतदाताओं को अमिताभ का असल चेहरा दिखाने को मैदान में ताल ठोंकेंगे एक्टिविस्ट संजय शर्मा.


 

लखनऊ / 16 अगस्त 2021……………..

पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ठाकुर के भ्रष्टाचार और कदाचार की शिकायत लोकायुक्त उत्तर प्रदेश में करके लोकायुक्त से अमिताभ के खिलाफ कार्यवाही की अनुशंषा कराने वाले लखनऊ के एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा ने ऐलान किया है कि अमिताभ ठाकुर जब,जहाँ,जो चुनाव लड़ेंगे; उस क्षेत्र के मतदाताओं को अमिताभ का असल चेहरा दिखाने के लिए वे चुनावी मैदान में अमिताभ के खिलाफ उतरेंगे.

 

 

संजय ने कहा कि अमिताभ ने लोकसेवक के रूप में अपने कार्यकाल में तमाम अलोकतांत्रिक, अराजक, दमनकारी, उत्पीड़नात्मक तथा विभेदकारी कार्य किये, वह इनके विरोध में अमिताभ के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे,फिर चाहे अमिताभ जहां से भी चुनाव लड़ें. संजय ने कहा कि अमिताभ ठाकुर ने अपने सेवाकाल में तमाम ऐसे कार्य किए हैं, जिनके विरोध स्वरूप वह उनके खिलाफ हर बार चुनाव लड़ेंगे.

 

 

संजय का कहना है कि ये सिद्धांतों की लड़ाई है और इसमें कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है.वह चुनाव में वृहद् लोकहित में गलत के खिलाफ अपना सप्रमाण विरोध पूरी शिद्दत के साथ जताएंगे.

 

संजय ने आम जनता से अपील की है कि अमिताभ ठाकुर से किसी भी रूप में प्रताड़ित व्यक्ति अपनी व्यथा उनसे मोबाइल और व्हाट्सएप नंबर 7991479999 पर साझा कर सकते हैं.

Wednesday, August 4, 2021

ग्लोबल इण्टरफेथ सम्मेलन तभी सार्थक जब क्रियाकलापों में पारदर्शिता लाये जगदीश गाँधी का सिटी मोंटेसरी स्कूल : एक्टिविस्ट संजय शर्मा की अपील.

 


 

लखनऊ/05 अगस्त 2021……………..

सिटी मोन्टेसरी स्कूल के इण्टरनेशनल रिलेशन्स विभाग द्वारा आज सीएमएस गोमती नगर (प्रथम कैम्पस) ऑडिटोरियम में ग्लोबल इण्टरफेथ सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. इस सम्मेलन को समयानुकूल बताते हुए सिटी मोन्टेसरी स्कूल द्वारा दावा किया जा रहा है  कि यह सम्मलेन विभिन्न धर्मों व विचारों का संगम सिद्ध होगा और यह भी कि भावी पीढ़ी को यह समझाने की आवश्यकता है कि सभी धर्म हमें एक ही परमपिता परमात्मा की ओर ले जाते हैं. कहा तो यह भी जा रहा है कि यह सम्मेलन सम्पूर्ण  विश्व समाज में एकता, शान्ति व सौहार्द का वातावरण स्थापित करने में सहायक होगा. इसी बीच राजधानी लखनऊ स्थित समाजसेवी और इंजीनियर संजय शर्मा ने एक बयान जारी करके जगदीश गाँधी के  सिटी मोंटेसरी स्कूल से अपील की है कि यह ग्लोबल इण्टरफेथ सम्मेलन तभी सार्थक हो सकता है जब जगदीश गाँधी का सिटी मोंटेसरी स्कूल अपनी कथनी और करनी के अंतर को मिटाकर अपने क्रियाकलापों में पूरी पारदर्शिता बरतना शुरू करे और शिक्षा में समानता की बात को धरातल पर मनसा-वाचा-कर्मणा लागू करे.

 

एक्टिविस्ट संजय ने कहा कि शिक्षा में समानता का अर्थ यह है कि सभी विद्यार्थियों तक शिक्षा की समान पहुँच हो तथा जाति, वर्ग, प्रदेश, धर्म, लिंग, आर्थिक स्थिति  आदि के भेदभाव के बिना समान अवसरों की प्राप्ति  सुनिश्चित हो रही हो. जगदीश गाँधी के सिटी मोंटेसरी स्कूल पर शिक्षा का अधिकार कानून और सूचना का अधिकार कानून का पूरी तरह पालन नहीं करने  और शिक्षा का अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों को अपने विद्यालयों में प्रवेश नहीं देने के लिए तरह-तरह के कानूनी व अन्य हथकण्डे अपनाने को ग्लोबल इण्टरफेथ सम्मेलन की मूल भावना का पूरी तरह विरोधी बताते हुए संजय ने सम्मेलन में शामिल होने वाले सभी धर्मगुरुओं से अपील की है कि वे आयोजक संस्था जगदीश गाँधी के सिटी मोंटेसरी स्कूल को अपनी कथनी और करनी के अंतर को मिटाकर सभी धर्मों में निहित ‘ईश्वर के समक्ष समानता’  की मूल भावना का पालन धरातल पर करने की सीख दें.

 

संजय ने धर्मगुरुओं से यह भी अपील की है कि वे जगदीश गाँधी के सिटी मोंटेसरी स्कूल को यह ज्ञान भी अवश्य दें कि ग्लोबल इण्टरफेथ सम्मेलन की सार्थकता तभी है जब  सिटी मोंटेसरी स्कूल शिक्षा के व्यवसायीकरण को छोड़कर गुरुकुल सिद्धांत अपनाते हुए शिक्षा को सेवा मानकर काम करे और अपने क्रियाकलापों में पूरी पारदर्शिता लाते हुए  शिक्षा का अधिकार कानून और सूचना का अधिकार कानून का मनसा-वाचा-कर्मणा पालन करे और  गरीब बच्चों को भी अपने विद्यालयों में खुले दिल से प्रवेश दे और  शिक्षा में समानता की बात मात्र  मंचों से कहने तक ही सीमित नहीं रखे बल्कि उसे धरातल पर लागू भी करे.

 

बकौल संजय यदि सिटी मोन्टेसरी स्कूल धर्मों में बताये गए उच्च आदर्शों और शिक्षा में समानता की बात को धरातल पर लागू नहीं करता है तो ऐसे आयोजनों को विद्यालय में पढने वाले अभिभावकों की गाढ़ी कमाई को जगदीश गांधी की सामाजिक प्रतिष्ठा पाने की महत्वाकांक्षा पर लुटाने के आयोजन मात्र माना जाएगा जिनसे अंतिमतः विश्व और समाज का कोई भला नहीं होगा.

Saturday, July 31, 2021

लखनऊ : आखिर कब सार्वजनिक करेंगें सिटी मोन्टेसरी स्कूल संस्थापकों के परिवारीजन अपनी देश विदेश की चल-अचल संपत्तियां ? : एक्टिविस्ट संजय ने उठाया सबाल.


 


लखनऊ/ 31 जुलाई 2021 ………..

गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में दर्ज लखनऊ के सिटी मोन्टेसरी स्कूल ( सीएमएस ) की 17 शाखाएं संचालित हैं जिनमें 12वीं तक करीब 55 हजार छात्र-छात्राएं के पढने की बात बताई जाती है. प्रायः सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ के संस्थापक डा. जगदीश गांधी व उनकी पत्नी डॉ भारती गांधी अपनी व्यक्तिगत सम्पत्ति की घोषणा करके अपने जीवन में नितांत ईमानदार होने के बड़े-बड़े दावे करते हैं और  मीडिया के माध्यम से समाचारों का प्रकाशन कराकर अच्छी खासी लोकप्रियता भी हासिल करते रहे हैं .

लखनऊ के एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने आज एक प्रेसवार्ता के माध्यम से कहा है कि जगदीश गाँधी और भारती गाँधी की यह घोषणाएं तब तक  महज सस्ती लोकप्रियता पाने के हथकंडे मानी जायेंगी जब तक वे अपने ब्लड रिलेशन के सभी जीवित परिवारीजनों की देश-विदेश की सभी चल व अचल संपत्तियों की घोषणा को सार्वजनिक नहीं कर देते हैं. संजय ने जगदीश गाँधी और भारती गांधी से मीडिया के मार्फत खुली मांग की है कि यदि वे अपने जीवन में वास्तव में ईमानदार रहे हैं तो वे अपने ब्लड रिलेशन के सभी जीवित परिवारीजनों की देश-विदेश की चल व अचल संपत्तियों की घोषणा को सार्वजनिक करने की उनकी चुनौती को स्वीकार करें ताकि वास्तव में यह सिद्ध हो सके कि सिटी मोन्टेसरी स्कूल का साम्राज्य खडा करने के दौरान उन्होंने या उनके परिवारीजनों ने कोई निजी लाभ नहीं कमाया है.

 

संजय ने ख़ास तौर पर सिटी मोन्टेसरी स्कूल की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक प्रो. गीता गाँधी किंगडम तथा सिटी मोन्टेसरी स्कूल के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर रोशन गाँधी को अपने-अपने परिवारों  की देश व विदेश की चल व अचल संपत्ति को जगदीश गाँधी व भारती गाँधी की तर्ज पर सार्वजनिक करने की चुनौती दी है.

 

देखना दिलचस्प होगा कि संजय की चुनौती के बाद प्रो. गीता गाँधी किंगडम,रोशन गाँधी तथा  सीएमएस संस्थापकों जगदीश गाँधी व भारती गाँधी के अन्य परिवारीजन जगदीश-गीता के पद-चिन्हों का अनुसरण करते हुए अपने-अपने परिवारों  की देश व विदेश की चल व अचल संपत्ति को सार्वजनिक करके जगदीश गाँधी व भारती गाँधी द्वारा बताये  जा रहे ईमानदारी के उच्च आदर्शों की सत्यता को स्थापित करेंगे या इस मामले में चुप्पी साधकर जगदीश गाँधी व भारती गाँधी द्वारा बताये  जा रहे ईमानदारी के उच्च आदर्शों का  महज कागजी कार्यवाही तक सीमित होने का कड़वा सच  सामने लायेंगे.

 

Saturday, October 12, 2019

वेबसाइट्स पर अधिक सूचना डालने के लिए मोदी सरकार की और देश भर में सर्वाधिक पीआईओ को दण्डित करने के लिए यूपी सूचना आयोग की हुई प्रशंसा : शहीद आरटीआई एक्टिविस्टों को श्रद्धांजलि देकर ‘तहरीर’ संस्था ने मनाई RTI एक्ट की 14वीं वर्षगांठ.


लखनऊ/12 अक्टूबर 2019 ………….

12 अक्टूबर 2005 को पूरे देश में लागू हुआ पारदर्शिता का कानून यानि कि सूचना का अधिकार अधिनियम आज 15वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है. आरटीआई एक्ट की 14वीं सालगिरह के अवसर पर यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन ‘तहरीर’ के सदस्यों ने एक सादा समारोह में पारदर्शिता और जबाबदेही की जंग में शहीद हो चुके देश भर के सैकड़ों सूचना का अधिकार कार्यकर्ताओं की निःस्वार्थ वीरता को नमन करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किये और एक्ट के क्रियान्वयन के विभिन्न आयामों पर विस्तृत परिचर्चा की l 

 

तहरीर के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इंजीनियर संजय शर्मा ने बताया कि गैर-सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक देश में 100 से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है और 500 से अधिक आरटीआई कार्यकर्ता गंभीर उत्पीडन का शिकार हो चुके हैं. सूचना का अधिकार कानून को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत हथियार बताते हुए संजय ने कहा कि हालाँकि यह अधिकार देश के प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है लेकिन आम जनमानस की उदासीनता के कारण ही इस कानून के  लागू होने के 14 साल भी देश की महज ढाई फीसदी ( 2.5% ) आबादी ही इस कानून का प्रयोग कर पाई है.

 


बताते चलें कि ‘तहरीर नामक संस्था देश भर में पारदर्शिता, जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही अग्रणी संस्थाओं में से एक है. कार्यक्रम में बोलते हुए संजय ने कहा  कि भारत का आरटीआई कानून लागू होते समय  विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर था लेकिन लचर क्रियान्वयन के कारण भारत साल 2016 में विश्व रैंकिंग नीचे गिरकर चौथे स्थान पर आ गया और साल 2018 में 2 पायदान और नीचे गिरकर छठे स्थान पर आ गया है जो चिंताजनक है.



आरटीआई एक्ट का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाने के लिए आरटीआई एक्ट के क्रियान्वयन के सभी स्टेकहोल्डर्स आम जनता, लोक प्राधिकारी, सूचना आयोग, सरकार आदि को जिम्मेवार बताते हुए संजय ने सभी स्टेकहोल्डर्स से अपनी अपनी तयशुदा जिम्मेवारियों को और अधिक ईमानदारी से निभाने की अपील की.

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा अधिक से अधिक सूचना वेबसाइट्स पर डालने की नीति की सराहना करते हुए संजय ने उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्तों द्वारा देश भर में सर्वाधिक मामलों में आरटीआई एक्ट की धारा 20 के तहत जन सूचना अधिकारियों को दण्डित करने के लिए यूपी के सूचना आयुक्तों को सार्वजनिक साधुवाद ज्ञापित किया.  संजय ने बताया कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एक्ट लागू होने के बाद के 13 वर्षों में  देश भर के सभी सूचना आयोगों ने लगभग 16 हज़ार मामलों में जन सूचना अधिकरियों को दण्डित किया था जिनमें से यूपी के सूचना आयोग ने अकेले ही मात्र 2 ही वर्षों  में 1500 के लगभग जन सूचना अधिकरियों पर दंड लगा दिया है जो सराहनीय है.


आरटीआई एक्ट को नागरिकों और सरकारों के बीच पारस्परिक पंहुच के लिए एक पुल जैसा बताते हुए संजय ने निजी स्वार्थ के लिए आरटीआई एक्ट का दुरुपयोग करने वाले लोगों की भर्त्सना की और सरकार से आरटीआई कार्यकर्ताओं को सुरक्षा और संरक्षण देने की नीति के साथ-साथ एक्ट का दुरुपयोग रोकने के लिए भी नीति बनाने की मांग की है.

संजय ने बताया कि एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संस्था के माध्यम से देश के राष्ट्रपति,प्रधान मंत्री तथा सभी प्रदेशों के राज्यपाल व मुख्यमंत्रियों को 10 सूत्रीय ज्ञापन भेजा जाएगा ताकि एक्ट विश्व रैंकिंग में फिर से पहले स्थान पर आ सके.

संजय ने बताया कि आज के समागम में निर्णय लिया गया है कि आगामी दिसम्बर माह में संस्था तहरीर पारदर्शिता, जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के मुद्दे पर एक राष्ट्रीय सेमिनार और सम्मान समारोह का आयोजन करेगी जिसमें जनसामान्य के लिए आरटीआई एक्ट का प्रयोग करने के लिए देश भर में विख्यात आरटीआई कार्यकर्ता ज्ञानेश पाण्डेय को सम्मानित किया जाएगा.

Wednesday, July 31, 2019

गजब RTI खुलासा : अदालती आदेश की नाफ़रमानी पर स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस और लुधियाना स्टेशन कुर्की का आदेश हो गया पर रेल विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी नहीं !


लखनऊ / 31 जुलाई 2019 ........

लुधियाना-चंडीगढ़ रेल ट्रैक बनाने के लिए रेलवे द्वारा एक्वायर की गई सम्पूर्ण सिंह नाम के किसान की जमीन के मुआ‌वजे का भुगतान नहीं करने पर अदालत द्वारा स्वर्ण शताब्दी ट्रेन और लुधियाना स्टेशन की कुर्की करने का आदेश देने का मामला साल 2017 का था. तब इस मामले की बजह से केंद्र सरकार और रेल विभाग की दुनियाभर में बड़ी फजीहत हुई थी. तब से अब तक लगभग 2 साल बीत जाने पर भी केंद्र सरकार और रेल विभाग ने इस भयंकर चूक की जिम्मेदारी रेल विभाग के किसी भी अधिकारी और कर्मचारी पर फिक्स नहीं की है. चौंकाने वाला यह खुलासा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित तहरीरनाम के सामाजिक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नामचीन मानवाधिकार कार्यकर्ता इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा रेल विभाग में दायर की गई एक आरटीआई के जबाब से हुआ है.


बताते चलें कि पारदर्शिता, जबाबदेही और मानवाधिकार क्रांति के लिए एक पहल नामक यह संस्था लोकजीवन को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए कार्य कर रही देश की अग्रणी संस्थाओं में से एक है और संस्था अखिल भारतीय भ्रष्टाचार विरोधी मोबाइल हेल्पलाइन 7991479999 भी चला रही है. 



उत्तर रेलवे के उप मुख्य अभियंता निर्माण द्वितीय चंडीगढ़ ने बीती 23 जुलाई को पत्र जारी करके संजय को बताया है कि सम्पूर्ण सिंह को मुआवजा देने के न्यायालय के आदेश का अनुपालन ना करने के लिए रेलवे के किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी को दोषी नहीं पाया गया है .


संजय बताते हैं कि दी गई सूचना से सामने आ रहा है कि रेल विभाग ने इस मामले का पूरा दोष रेलवे का केस देख रहे वकील इकबाल सिंह के सर मढ़ दिया है लेकिन इकबाल सिंह के खिलाफ भी कार्यवाही करने के नाम पर प्रधान कार्यालय को एक पत्र लिखकर खानापूर्ति मात्र कर दी है. वकील इकबाल सिंह के खिलाफ कार्यवाही की सिफारिश वाला यह पत्र आज भी प्रधान कार्यालय की फाइलों में दफन है. 



संजय कहते हैं कि इस मामले से साफ हो रहा है कि किस तरह से सरकारी तंत्र में जबाबदेही ख़त्म होती जा रही है जिसकी बजह से भ्रष्टाचार आसानी से गहरे तक अपनी पैठ बनाता चला जा रहा है. संजय ने बताया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर रेल विभाग की इस भयंकर चूक के मामले में रेल विभाग के दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों को चिन्हित करके दण्डित करने की मांग करेंगे  l