Tuesday, December 8, 2015

अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर को मानहानि करने के लिए कानूनी नोटिस l



विधिक नोटिस : दिनांक 06 दिसम्बर 2015
सेवा में,
श्रीमती नूतन ठाकुर
पत्नी श्री अमिताभ ठाकुर
निवासी 5/426, विरामखंड, गोमतीनगर, लखनऊ, पिन कोड-226010

महोदया,
       मैं इस विधिक नोटिस के माध्यम से आपको आगाह कर रहा हूँ कि आपने मेरे विरुद्ध असत्य,आधारहीन, बगैर साक्ष्य के अवमानकारी आरोप लगाए हैं और उनका प्रकाशन दिनांक 11 सितम्बर 2015 को नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर कराया है नवभारत टाइम्स की वेबसाइट का सम्बंधित वेबलिंक http://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/politics/lokayukta-libel-nutan-thakur39s-statement-today-will-be-recorded/articleshow/48902041.cms है

नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर प्रकाशित समाचार के अनुसार आपने इस समाचार वेबसाइट को कहा  है उनके पति के खिलाफ वाद दायर करने वाले व्यक्ति का इस तरह लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा की मदद में खड़ा होना दोनों की मिलीभगत को दर्शाता है। जिसका प्रकाशन इस समाचार वेबसाइट ने किया है । मैं इस देश का सम्मानित नागरिक और एक लब्धप्रतिष्ठित समाजसेवी हूँ । आपके द्वारा बिना किसी सबूत  के मेरी यूपी के लोकायुक्त एन.के. मेहरोत्रा से मिलीभगत होने संबंधी नितांत असत्य व्यक्तिगत कथन कर उसका समाचार प्रकाशित कराने से मेरी सामाजिक छवि धूमिlल हुई है और इस प्रकार आपके इस गैरकानूनी कृत्य से मुझे अत्यन्त गंभीर मानसिक आघात भी लगा है । ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे द्वारा यूपी के लोकायुक्त के समक्ष आपके पति की शिकायत किये जाने के कारण मुझसे व्यक्तिगत दुर्भावना रखते हुए आपके द्वारा कायराना और दूषित मानसिकता का परिचय देते हुए जानबूझकर मेरी मानहानि की गयी है । आपके द्वारा किया गया कृत्य आई.पी.सी. और आई.टी. एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है ।

अतः आप ‘मेरी यूपी के लोकायुक्त एन.के. मेहरोत्रा से मिलीभगत’ होने संबंधी वे सभी ठोस साक्ष्य/सबूत/अभिलेख/रिकॉर्डिंग आदि मुझे 15 दिनों में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें जिनके आधार पर आपने मेरे विरुद्ध उपरोक्त व्यक्तिगत वक्तव्य का सार्वजानिक प्रकाशन कराया है अन्यथा यह मान लिया जाएगा कि आपके पास उक्त के बावत कोई साक्ष्य/ सबूत/अभिलेख आदि उपलब्ध नहीं हैं और आपके इस आपराधिक कृत्य से मुझे हुई मानहानि और क्षति के बावत मेरे द्वारा सक्षम न्यायालय में मुकद्दमा दाखिल करके आपके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जाएगी जिसके समस्त हर्जे,खर्चे आदि की समस्त जिम्मेदारी आपकी होगी ।
(नोटिस A4 आकार के बिना कटे फटे कागज पर प्रिंटेड है) 


( संजय शर्मा )
102,नारायण टावर
एफ ब्लाक ईदगाह के सामने,राजाजीपुरम
लखनऊ,उत्तर प्रदेश,पिन कोड – 226017 

 
 

Friday, December 4, 2015

यूपी निलंबित आईजी अमिताभ ठाकुर को जांच के डर से हुआ चेस्ट पेन !

यह क्या हुआ कि निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर द्वारा अपने मातहत कार्यरत महिला कर्मचारी का उत्पीडन करने के आरोपों की जांच में पीड़ित महिला का सामना करने की बात आते ही आईजी को चेस्ट पेन हो गया है और वह बलरामपुर अस्पताल में भरती हो गए हैं l

गौरतलब है कि महिला उत्पीडन के आरोपी अमिताभ ठाकुर का आज ही जाँच अधिकारी के सामने उस महिला से आमने सामने जबाब तलब होना था l

ऐसा तो नहीं कि कहीं अमिताभ ठाकुर में इस महिला का सामना करने की हिम्मत नहीं है और इसीलिये अब वे घबरा रहे हैं l

जो भी हो पर झूठ कभी बच नहीं सकता और सांच को कभी आंच नहीं आती है, ऐसा मेरा मानना है l

यूपी पुलिस की नौकरी में अगड़े पीछे पिछड़े आगे: 41% हो गए ओबीसी तो महज 35% पर ही सिमट गए सामान्य ।



 हाल ही में बसपा प्रमुख मायावती ने राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दूसरे दिन अगड़ी जाति के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग करके बड़ा धमाका किया है। गौरतलब है कि प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने भी पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में अगड़ी जातियों के लिए आयोग गठित करने की बात कही थी। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव भी सामान्य श्रेणी की जातियों के गरीब लोगों को आरक्षण का लाभ देने के हिमायती रहे हैं।

यूपी के आगामी 2017 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र मायावती के इस वक्तव्य में उनके अपने निहितार्थ हो सकते हैं और सपा के पूर्व के वक्तव्यों में भी उनके कुछ राजनैतिक निहितार्थ हो सकते हैं परन्तु यदि उत्तर प्रदेश के पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद द्वारा लखनऊ के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा की एक आरटीआई पर दिए गए जबाब को संकेतक मानें तो स्पष्ट हो जाता है कि सरकारी नौकरियों में अगड़ों की घटती संख्या के मद्देनज़र सरकारी सेवाओं में उनको आरक्षण प्रदान करने की मांग अब प्रासंगिक होती जा रही है    
 
अब बात उत्तर प्रदेश के पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद द्वारा लखनऊ के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा की आरटीआई पर दिए गए जबाब की दरअसल संजय ने बीते साल के फरवरी माह में यूपी के पुलिस महानिदेशक के कार्यालय में एक आरटीआई दायर करके यूपी पुलिस में कार्यरत तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी के कुल कार्मिकों में से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के कार्मिकों की संख्या की सूचना माँगी थी। पुलिस महकमा इस मामले में हीलाहवाली करता रहा और राज्य सूचना आयोग के दखल के बाद पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद के पुलिस अधीक्षक कार्मिक ने बीते 26 नवम्बर के पत्र के माध्यम से संजय को सूचना उपलब्ध कराई है
 
समाजसेवी संजय को उपलब्ध कराई गयी सूचना के अनुसार यूपी पुलिस में कार्यरत तृतीय श्रेणी के कुल 192799 कार्मिकों में से महज 67764 (35.15%) ही सामान्य श्रेणी के हैं जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के 81403 (42.22%) कार्मिक कार्यरत हैं तथा अनुसूचित जाति के 42064 (21.82%)  और अनुसूचित जनजाति के 1568 (0.81%) कार्मिक कार्यरत हैं इसी प्रकार यूपी पुलिस में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी के कुल 13489 कार्मिकों में से 6013 (44.54%) सामान्य श्रेणी के हैं जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के 3771 (27.94%) कार्मिक कार्यरत हैं तथा अनुसूचित जाति के 3594 (26.63%)  और अनुसूचित जनजाति के 120 (0.89%) कार्मिक कार्यरत हैं   


यदि यूपी पुलिस में वर्तमान में कार्यरत तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी के कार्मिकों की सम्मिलित संख्या के आधार पर देखें तो कुल 206288 कार्मिकों में से महज 73768 (35.76%) ही सामान्य श्रेणी के हैं जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के 85174 (41.29%) कार्मिक कार्यरत हैं तथा अनुसूचित जाति के 45658 (22.13%)  और अनुसूचित जनजाति के 1688 (0.82%) कार्मिक कार्यरत हैं     
 

संजय कहते हैं कि एम् आर बालाजी बनाम मैसूर एआईआर (AIR)) 1963 SC 649 में अदालत ने आरक्षण पर 50% की अधिकतम सीमा लगाई थी पर  यदि इन आंकड़ो को देखें तो पता चलता है कि आज यूपी पुलिस में कार्यरत 64.24% कार्मिक आरक्षित वर्गों से हैं ।
 
समाजसेवी संजय ने कहा कि यूपी में शीघ्र ही होने जा रही सिपाहियों की भरती के बाद यूपी पुलिस में सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों का प्रतिनिधित्व और भी कम हो जायेगा और इस पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि वे शीघ्र यूपी के राज्यपाल,मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मिलकर उनसे अगड़ी जाति के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण  देने की व्यवस्था कराने सम्बन्ध में  केंद्र की सरकार को एक प्रस्ताव भेजने की गुजारिश करेंगे    






उप्र पुलिस की नौकरी में अगड़े हुए पीछे

राष्ट्रीय
Friday, 04 December 2015 20:40
लखनऊ, 4 दिसंबर (आईएएनएस/आईपीएन)। उत्तर प्रदेश के पुलिस महकमे में नौकरी कर रहे अगड़ी जातियों के लोगों की संख्या पिछड़ी जातियों के लोगों की अपेक्षा कम है। यह जानकारी आरटीआई के तहत दी गई है। सामान्य श्रेणी के 35.15 प्रतिशत, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के 42.22 प्रतिशत कार्मिक कार्यरत हैं।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने हाल ही में राज्यसभा में अगड़ी जाति के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग करके ये मुद्दा फिर गरमा चुकी हैं। वहीं इससे पहले देश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने भी पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में अगड़ी जातियों के लिए आयोग गठित करने की बात कही थी।

सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव भी सामान्य श्रेणी की जातियों के गरीब लोगों को आरक्षण का लाभ देने के हिमायती रहे हैं। इन सबके बीच अगर उत्तर प्रदेश के पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद द्वारा एक आरटीआई पर दिए गए जवाब को संकेतक मानें तो स्पष्ट हो जाता है कि सरकारी नौकरियों में अगड़ों की घटती संख्या के मद्देनजर सरकारी सेवाओं में उनको आरक्षण प्रदान करने की मांग अब प्रासंगिक होती जा रही है।

दरअसल, यूपी के पुलिस महानिदेशक के कार्यालय में बीते साल फरवरी माह में सामाजिक कार्यकर्ता संजय शर्मा ने एक आरटीआई दायर करके यूपी पुलिस में कार्यरत तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी के कुल कार्मिकों में से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के कार्मिकों की संख्या की सूचना मांगी थी।

पुलिस महकमा इस मामले में हीलाहवाली करता रहा और राज्य सूचना आयोग के दखल के बाद पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद के पुलिस अधीक्षक कार्मिक ने बीते दिनों पत्र के माध्यम से संजय को सूचना उपलब्ध कराई है।

संजय को उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार, यूपी पुलिस में कार्यरत तृतीय श्रेणी के कुल 192799 कार्मिकों में से महज 67764 (35.15 प्रतिशत) ही सामान्य श्रेणी के हैं, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के 81403 (42.22 प्रतिशत )कार्मिक कार्यरत हैं तथा अनुसूचित जाति के 42064 (21.82 प्रतिशत) और अनुसूचित जनजाति के 1568 (0.81 प्रतिशत) कार्मिक कार्यरत हैं।

इसी प्रकार यूपी पुलिस में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी के कुल 13489 कार्मिकों में से 6013 (44.54 प्रतिशत ) सामान्य श्रेणी के हैं जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के 3771 (27.94 प्रतिशत) कार्मिक कार्यरत हैं तथा अनुसूचित जाति के 3594 (26.63 प्रतिशत) और अनुसूचित जनजाति के 120 (0.89 प्रतिशत) कार्मिक कार्यरत हैं।

यदि यूपी पुलिस में वर्तमान में कार्यरत तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी के कार्मिकों की सम्मिलित संख्या के आधार पर देखें तो कुल 206288 कार्मिकों में से महज 73768 (35.76 प्रतिशत) ही सामान्य श्रेणी के हैं जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के 85174 (41.29 प्रतिशत) कार्मिक कार्यरत हैं तथा अनुसूचित जाति के 45658 (22.13 प्रतिशत) और अनुसूचित जनजाति के 1688 (0.82 प्रतिशत) कार्मिक कार्यरत हैं।

संजय ने आईपीएन को बताया कि एम.आर. बालाजी बनाम मैसूर एआईआर 1963 एससी 649 में अदालत ने आरक्षण पर 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा लगाई थी, पर यदि इन आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि आज यूपी पुलिस में कार्यरत 64.24 प्रतिशत कार्मिक आरक्षित वर्गो से हैं।

बकौल संजय, यूपी में शीघ्र ही होने जा रही सिपाहियों की भर्ती के बाद यूपी पुलिस में सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों का प्रतिनिधित्व और भी कम हो जाएगा। वह अब जल्द ही प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मिलकर उनसे अगड़ी जाति के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की व्यवस्था कराने संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की गुजारिश करेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

जिस प्रदेश में हों अमिताभ ठाकुर सरीखे छली आईपीएस वहां शातिर अपराधियों के सामने क्या करें बेचारे जांच अधिकारी और पीड़ित महिलाओं को कहाँ से मिले त्वरित न्याय ?


जांच अधिकारियों और पीडिता के हटते ही निलंबित आईजी भले-चंगे हो घर आ गए और यह सामने आ ही गया कि आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अपने मातहत कार्यरत महिला कर्मचारी का उत्पीडन करने के आरोपों की आज की जांच में पीड़ित महिला का सामना करने से बचने के लिए ही चेस्ट पेन जैसी गंभीर बीमारी और आईसीयू में भरती होने जैसा ड्रामा किया था l

सोचा होगा कि पीडिता का सामना करने से भी बच जायेंगे और लगे हाथों लोगों की सहानुभूति भी ले लेंगे l
पर कब तक बचेंगे और कितनी बार लोगों की सहानुभूति लें पायेंगे आईजी अमिताभ ठाकुर ?

1- बकरे की अम्मा कब तक खैर मनायेगी ?
और
2- काठ की हांडी कितनी बार चडेगी ?
सच तो आखिर सच ही होता है और सामने आकर रहता ही है l


Thursday, December 3, 2015

आईपीएस अधिकारी होने के नाम पर कलंक है यूपी का निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर!


राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामला अभी न्यायालय में है पर यूपी के निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर को कोर्ट के आदेश का इंतजार करना गवारा नहीं है और जनता के पैसों से अपने परिवार का पेट पालने बाला यह जनता का चाकर अपनी मालिक जनता से नमकहरामी तक करके कहता फिर रहा है कि जिस दिन अयोध्या में राम मंदिर बन जाएगा, उस दिन से सांस्कृतिक उत्साह में एक नया उछाल स्वतः ही देखने को मिलेगा और इसके साथ ही देश पर थोपी गयी फर्जी साम्प्रदायिकता में ही भारी कमी आएगी l 

अरे भाई साम्प्रदायिकता हमेशा असली ही होती है, कभी फर्जी नहीं होती और देशवासियों के उत्साह में उछाल तभी आएगा जब सभी भारतवासियों का वास्तविक विकास हो l

सोचिये अगर देश के सभी आईएएस,आईपीएस,सेना के अधिकारी और लोकसेवक भी अमिताभ ठाकुर की मानिंद जनता के नमक के फर्ज को भूलकर अपनी स्वच्छंद मानसिक सोच के लिए काम करने लगें मतलब कि मदिर,मस्जिद,गिरिजे,गुरुद्वारे आदि की बात करने लगें या खुलेआम राजनैतिक दलों का समर्थन करने लगें तो क्या होगा भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का और क्या होगा भारत में लोकतंत्र के बजूद का l

वास्तव में सरकारी खजाने से पैसा लेकर भी न्यायालय में लंबित अयोध्या राम मदिर मामले पर टिप्पणी देने जैसी बेहूदा बात कहने बाला अमिताभ ठाकुर प्रशासनिक अधिकारी होने के नाम पर कलंक ही है l

कुछ दिन पहले तक तक घोर अधार्मिक होने का ढोंग करने वाला और अब अपने और अपने परिवार की काली कमाई बचाने के निहित स्वार्थों को पूरा करने के लिए हिंदूवादी होने का ढोंग करने वाला अमिताभ ठाकुर पहले अपनी नौकरी छोड़े और फिर ऐसी बात करे तो फिर भी चलेगा पर जनता के खजाने से पेट पालने वालों के द्वारा ऐसी बातें कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रतिकूल है और कतई नहीं की जानी चाहियें l

Sanjay Sharma संजय शर्मा लखनऊ 


यूपी आईपीएस ( सम्प्रति निलंबित ) अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के आधा दर्जन एनजीओ की अनाधिकृत गतिविधियों की जांच हेतु राज्यपाल को पत्र l

यूपी आईपीएस ( सम्प्रति निलंबित ) अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के आधा दर्जन एनजीओ की अनाधिकृत गतिविधियों की जांच हेतु राज्यपाल को पत्र l





























अमिताभ ठाकुर के खिलाफ संजय शर्मा की शिकायत पर लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट l

अमिताभ ठाकुर के खिलाफ संजय शर्मा की शिकायत पर लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट l