Friday, September 10, 2021

PMO’s big ‘NO’ to disclose information under RTI act on actions taken to enquire use of Pegasus spyware in India.

 

 

भारत में पेगासस स्पाइवेयर प्रयोग मामले की जांच के लिए क्या किया,आरटीआई में नहीं बताएगा पीएमओ.

 

 



लखनऊ / 10 सितम्बर 2021 ……………

इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ द्वारा बनाये गए पेगासस नाम के स्पाइवेयर प्रोग्राम के भारत में प्रयोग किये जाने के मामले की जांच कराने के लिए भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की गई कार्यवाही की सूचना को भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय ने आरटीआई एक्ट के तहत सार्वजनिक करने से मना कर दिया है.

 

दरअसल यूपी की राजधानी लखनऊ के आरटीआई एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा ने प्रधानमंत्री कार्यालय में सूचना का अधिकार कानून के तहत अर्जी देकर यह जानना चाहा था कि बहुचर्चित पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए देश के प्रधानमंत्री कार्यालय ने क्या-क्या कार्यवाहियां कीं हैं.

 

प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव एवं केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी प्रवीन कुमार ने संजय को पत्र भेजकर कहा है कि संजय द्वारा माँगी गई सूचना सूचना का अधिनियम 2005 की धारा 2(f) के अंतर्गत सूचना की परिभाषा में नहीं आती है और सूचना देने से इन्कार कर दिया है.

 

बकौल संजय सूचना का अधिनियम 2005 की धारा 2(f) के अनुसार किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में धारित अभिलेख,दस्तावेज,ज्ञापन,ई-मेल,मत,सलाह,प्रेस विज्ञप्ति,परिपत्र,आदेश,लागबुक,संविदा रिपोर्ट,कागज़ पत्र, नमूने, मॉडल, आंकड़ों संबंधी सामग्री सूचना की परिभाषा में आते है और इस आधार पर संजय का कहना है कि इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ द्वारा बनाये गए पेगासस नाम के स्पाइवेयर प्रोग्राम के भारत में प्रयोग किये जाने के मामले की जांच कराने के लिए भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की गई कार्यवाही की सूचना भी सूचना की परिभाषा से आच्छादित है.

 

प्रवीन कुमार के इस उत्तर को मनमाना और आरटीआई एक्ट के अनुसार नहीं होने की बात कहते हुए संजय ने आरटीआई एक्ट की धारा 19(1) के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रथम अपीलीय अधिकारी को बीते कल प्रथम अपील भेज दी है.

 

बताते चलें कि पेगासस एक स्पाइ सॉफ्टवेयर है जिसे अगर किसी स्मार्टफ़ोन फ़ोन में पंहुचा दिया जाए, तो हैक करने वाला उस स्मार्टफोन के माइक्रोफ़ोन, कैमरा, एन्क्रिप्टेड ऑडियो और एन्क्रिप्टेड टेक्सट मेसेज, ईमेल और लोकेशन तक की जानकारी पा सकता है.

 

 

 

Monday, September 6, 2021

यूपी : जेल में बंद अधिकार वाहिनी ट्रस्ट और अधिकार सेना के मुखिया पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने क्यों कराई थी अधीनस्थ महिला अधिकारी की जासूसी? एडीजी जसवीर सिंह की संस्तुति पर क्या योगी करायेंगे अमिताभ के खिलाफ एफआईआर और सीबीआई जांच?


 

लखनऊ / 07 सितम्बर 2021…………..

सुप्रीम कोर्ट के बाहर एक रेप पीडिता और रेप मामले के गवाह को आत्महत्या के लिए उकसाने की आपराधिक साजिश करने के मामले में दर्ज एफआईआर में बीती 27 अगस्त को गिरफ्तार किये गए अधिकार वाहिनी ट्रस्ट और अधिकार सेना के मुखिया पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर अभी जेल में बंद हैं. उनके द्वारा अपनी बेगुनाही के सबूत अदालत के सामने रखकर एफआईआर को ख़त्म कराने या जमानत कराने जैसे विधिक रास्ते अपनाने की जगह विवेचना और जांच जैसी विधिक प्रक्रियाओं से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराकर मीडिया के माध्यम से अपने पक्ष में माहौल बनाने की असफल कोशिश की जा रही है. इन्टरनेट पर चल रही ख़बरों से यह बात खुलकर सामने आ रही है कि लखनऊ के कुछेक मीडिया संस्थान तो पत्रकारिता के एथिक्स ताक पर रखकर अभियुक्त अमिताभ के पक्ष में माहौल बनाने के लिए खुद एक पार्टी बनकर ऐसी खबरे चला रहे हैं जो पेड ख़बरों जैसी दिखाई दे रही हैं. लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि ये जो पब्लिक है न, ये सब जानती है. और शायद इसीलिये अमिताभ अपनी गिरफ्तारी के समय इतनी जबरदस्त हाई वोल्टेज  ड्रामेबाजी के बाद भी धरातल पर कोई भी जनसमर्थन हासिल नहीं कर पाए.

 


 

अमिताभ के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान करने के बाद देश की जनता के सामने अमिताभ का स्याह पक्ष लाने के लिए अमिताभ को इन कैमरा लाइव बहस की चुनौती दे चुके लखनऊ के सोशल एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा ने यूपी के मुख्यालय पुलिस महानिदेशक, रूल्स एवं मैनुअल, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अपर पुलिस महानिदेशक ( एडीजी )  जसवीर सिंह द्वारा तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ( डीजीपी ) ओ. पी. सिंह को साल 2018 की 9 मई को पत्र लिखकर  तत्कालीन  आईजी अमिताभ ठाकुर द्वारा संयुक्त निदेशक नागरिक सुरक्षा के पद पर रहते अपनी एक अधीनस्थ महिला अधिकारी का फ़ोन अनधिकृत रूप से टेप कराने आदि आपराधिक कृत्यों की एफआईआर दर्ज कराने और सीबीआई जैसी स्वतंत्र इकाई से जांच कराने की संस्तुति करने का मामला देश की जनता  के सामने उठा दिया है. बताते चलें कि इसी चिठ्ठी में जसवीर ने अमिताभ के खिलाफ प्राथमिकी के आलावा विभागीय कार्यवाही कराने की संस्तुति भी डीजीपी से की थी.

 

 


चर्चा आम है कि अमिताभ ने ओ. पी. सिंह पर इसी तरह का दबाब बनाकर जैसा कि वह सुप्रीम कोर्ट के बाहर एक रेप पीडिता और रेप मामले के गवाह को आत्महत्या के लिए उकसाने की आपराधिक साजिश करने के मामले में दर्ज एफआईआर से जुड़े अधिकारियों के मामले में जेल में रहकर भी कर रहे हैं, तत्कालीन डीजीपी को इस पत्र को दबा देने पर मजबूर कर दिया था जिसकी बजह से अमिताभ उस समय अपनी एक अधीनस्थ महिला अधिकारी का फ़ोन अनधिकृत रूप से टेप कराने आदि आपराधिक कृत्यों की एफआईआर और सीबीआई जांच जैसी कार्यवाही से बच गए थे लेकिन जैसे कि सरकारी अमलों में कहा जाता है कि कागज कभी नहीं मरता इसीलिये अब जसवीर सिंह की यह चिट्ठी सामने आने से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार द्वारा अमिताभ ठाकुर को जबरिया रिटायर करने में जसवीर सिंह की इस चिट्ठी की भी महत्वपूर्ण भूमिका जरूर रही होगी.  

 

 

खैर, सच चाहे कुछ भी हो पर बड़ा सबाल यह है कि इस चिठ्ठी के सामने आने के बाद आखिर कब सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ महिला अस्मिता की रक्षा के लिए इस मामले में अमिताभ ठाकुर के खिलाफ अधीनस्थ महिला की जासूसी कराने की एफआईआर दर्ज कराकर सीबीआई से जांच कराएँगे ?

 

यूपी : जेल में बंद पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने क्यों कराई थी अधीनस्थ महिला अधिकारी की जासूसी? एडीजी जसवीर सिंह की संस्तुति पर क्या योगी करायेंगे अमिताभ के खिलाफ एफआईआर और सीबीआई जांच?

 


 



लखनऊ / 07 सितम्बर 2021…………..

सुप्रीम कोर्ट के बाहर एक रेप पीडिता और रेप मामले के गवाह को आत्महत्या के लिए उकसाने की आपराधिक साजिश करने के मामले में दर्ज एफआईआर में बीती 27 अगस्त को गिरफ्तार किये गए पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर अभी जेल में बंद हैं. उनके द्वारा अपनी बेगुनाही के सबूत अदालत के सामने रखकर एफआईआर को ख़त्म कराने या जमानत कराने जैसे विधिक रास्ते अपनाने की जगह विवेचना और जांच जैसी विधिक प्रक्रियाओं से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराकर मीडिया के माध्यम से अपने पक्ष में माहौल बनाने की असफल कोशिश की जा रही है. इन्टरनेट पर चल रही ख़बरों से यह बात खुलकर सामने आ रही है कि लखनऊ के कुछेक मीडिया संस्थान तो पत्रकारिता के एथिक्स ताक पर रखकर अभियुक्त अमिताभ के पक्ष में माहौल बनाने के लिए खुद एक पार्टी बनकर ऐसी खबरे चला रहे हैं जो पेड ख़बरों जैसी दिखाई दे रही हैं. लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि ये जो पब्लिक है न, ये सब जानती है. और शायद इसीलिये अमिताभ अपनी गिरफ्तारी के समय इतनी जबरदस्त हाई वोल्टेज  ड्रामेबाजी के बाद भी धरातल पर कोई भी जनसमर्थन हासिल नहीं कर पाए.

 

 

अमिताभ के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान करने के बाद देश की जनता के सामने अमिताभ का स्याह पक्ष लाने के लिए अमिताभ को इन कैमरा लाइव बहस की चुनौती दे चुके लखनऊ के सोशल एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा ने यूपी के मुख्यालय पुलिस महानिदेशक, रूल्स एवं मैनुअल, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अपर पुलिस महानिदेशक ( एडीजी )  जसवीर सिंह द्वारा तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ( डीजीपी ) ओ. पी. सिंह को साल 2018 की 9 मई को पत्र लिखकर  तत्कालीन  आईजी अमिताभ ठाकुर द्वारा संयुक्त निदेशक नागरिक सुरक्षा के पद पर रहते अपनी एक अधीनस्थ महिला अधिकारी का फ़ोन अनधिकृत रूप से टेप कराने आदि आपराधिक कृत्यों की एफआईआर दर्ज कराने और सीबीआई जैसी स्वतंत्र इकाई से जांच कराने की संस्तुति करने का मामला देश की जनता  के सामने उठा दिया है. बताते चलें कि इसी चिठ्ठी में जसवीर ने अमिताभ के खिलाफ प्राथमिकी के आलावा विभागीय कार्यवाही कराने की संस्तुति भी डीजीपी से की थी.

 

 

चर्चा आम है कि अमिताभ ने ओ. पी. सिंह पर इसी तरह का दबाब बनाकर जैसा कि वह सुप्रीम कोर्ट के बाहर एक रेप पीडिता और रेप मामले के गवाह को आत्महत्या के लिए उकसाने की आपराधिक साजिश करने के मामले में दर्ज एफआईआर से जुड़े अधिकारियों के मामले में जेल में रहकर भी कर रहे हैं, तत्कालीन डीजीपी को इस पत्र को दबा देने पर मजबूर कर दिया था जिसकी बजह से अमिताभ उस समय अपनी एक अधीनस्थ महिला अधिकारी का फ़ोन अनधिकृत रूप से टेप कराने आदि आपराधिक कृत्यों की एफआईआर और सीबीआई जांच जैसी कार्यवाही से बच गए थे लेकिन जैसे कि सरकारी अमलों में कहा जाता है कि कागज कभी नहीं मरता इसीलिये अब जसवीर सिंह की यह चिट्ठी सामने आने से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार द्वारा अमिताभ ठाकुर को जबरिया रिटायर करने में जसवीर सिंह की इस चिट्ठी की भी महत्वपूर्ण भूमिका जरूर रही होगी.  

 

 

खैर, सच चाहे कुछ भी हो पर बड़ा सबाल यह है कि इस चिठ्ठी के सामने आने के बाद आखिर कब सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ महिला अस्मिता की रक्षा के लिए इस मामले में अमिताभ ठाकुर के खिलाफ अधीनस्थ महिला की जासूसी कराने की एफआईआर दर्ज कराकर सीबीआई से जांच कराएँगे ?

 

Thursday, September 2, 2021

 

यूपी:निजी विद्यालयों को RTI में लाने के सूचना आयुक्त के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट पंहुचा सिटी मोंटेसरी स्कूल.

 


लखनऊ / 03 सितम्बर 2021…………..

उत्त्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह के खिलाफ राजाजीपुरम निवासी एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा की शिकायत पर सुनवाई करते हुए सूबे के सूचना आयुक्त सेवानिवृत्त आईपीएस प्रमोद कुमार तिवारी ने बीती 14 जुलाई को सूचना का अधिकार कानून की धारा 19(8)(क)(दो) एवं 25(5) के तहत आदेश जारी करके राज्य सूचना आयोग के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत स्थित प्रत्येक ऐसे विद्यालयों जो कि ‘निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009’ से आच्छादित है, में 14 जुलाई 2021 के आगे तीन माह के अन्दर प्रत्येक विद्यालय में जन सूचना अधिकारी नियुक्त करने की अपेक्षा की और यूपी के मुख्य सचिव को निर्देश जारी किये कि वे कार्यकारी आदेश जारी करके इस आदेश का अनुपालन करायें. सूचना आयुक्त प्रमोद कुमार तिवारी के इस आदेश से RTE के दायरे में आने वाले यूपी के सभी निजी विद्यालय RTI के दायरे में आ गए हैं.

 

संजय शर्मा ने सूचना आयुक्त के इस आदेश के सम्बन्ध में सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह को नोटिस भेजते हुए हाई कोर्ट इलाहाबाद की लखनऊ बेंच में कैविएट याचिका दाखिल की थी और अनुरोध किया था कि सूचना आयुक्त के आदेश के खिलाफ कोई याचिका आने पर प्रथम सुनवाई के समय उनके पक्ष को भी सुना जाए. संजय ने बताया कि उनको सिटी मोंटेसरी स्कूल के अधिवक्ता मनीष वैश ने डाक के माध्यम से याचिका की प्रति उनको भेजी है और मोबाइल पर बातचीत में याचिका को बीते कल हाई कोर्ट इलाहाबाद की लखनऊ बेंच में दाखिल करने की बात बताई है.

 

संजय ने बताया कि सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह द्वारा दाखिल याचिका में प्रमुख सचिव गृह, सूचना आयुक्त,मुख्य सचिव,मुख्य सचिव के जन सूचना अधिकारी और उनको विपक्षी बनाया गया है.

 

संजय ने बताया कि सिटी मोंटेसरी स्कूल समूह की इस याचिका के खिलाफ वे स्वयं इन-पर्सन उपस्थित होकर अपना पक्ष रखेंगे और हाई कोर्ट से याचिका को खारिज करने की गुहार लगायेंगे.