Saturday, July 4, 2015

विधुत उत्पादन पूंजी निवेश में माया से 18% फिसड्डी अखिलेश !



क्या विकास की योजनाओं का पैसा लोक-लुभावन योजनाओं में लगा रहे अखिलेश ? : उत्तर प्रदेश में बिजली उत्पादन  लागत 17 रुपये 76 पैसे प्रति यूनिट भी और  1 रुपये 97 पैसे प्रति यूनिट भी !
 

मायावती की सरकार की कार्यप्रणाली से नाखुश  उत्तर प्रदेश की जनता ने साल 2012 के आम चुनाव में शिक्षा से इंजीनियर अखिलेश यादव के युवा नेतृत्व में चुनाव लड़ने बाली समाजवादी पार्टी  को ऐतिहासिक बहुमत प्रदान कर बहुत बड़ी बड़ी अपेक्षाएं पाली थीं।  क्या मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतर रहे हैं या सूबे की जनता एक बार फिर अपने आप को ठगा गया महसूस कर रही है ?


यह एक ऐसा सबाल है जिसका उत्तर देना आसान नहीं है और यदि उत्तर दे भी दिया जाये तो भी अपनी गलती मानने की मानसिकता से ग्रसित ये राजनैतिक दल बिना प्रमाणों के दिए गए उत्तरों को तो मानने से रहे।  सो यहाँ सरकार से ही प्राप्त प्रमाणों के आधार पर यूपी की वर्तमान सरकार की सुस्त रफ्तार , कथनी और करनी के अंतर और अंधेर नगरी चौपट राजा बाली कार्यप्रणाली पर कुछ खुलासे कर रहा हूँ।


उत्तर प्रदेश में विकास की बातें तो बहुत होतीं है पर विकास करने के रत्ती भर भी प्रयास नहीं होते है। बिजली विकास का प्रमुख कारक है और समाज के हर तबके की मूलभूत आवश्यकता भी।  बिजली की कमी से खेती,उद्योग,ऑफिस और सामान्य जनजीवन, सभी प्रतिकूल  प्रभावित होते हैं।  यह बात हम तो समझते हैं पर शायद अखिलेश यादव के नेतृत्व बाली सपा सरकार ऐसा नहीं समझती। शायद  इसीलिये  अखिलेश ने मुख्यमंत्री के रूप में काम करते हुए अपने तीन वर्ष के कार्यकाल में विधुत उत्पादन की परियोजनाओं के  पूंजीनिवेश बढ़ाने की जगह  अपनी पूर्ववर्ती मायावती के मुकाबले पूंजीनिवेश में 1071 करोड़ से अधिक की भारीभरकम कटौती कर डाली।

मेरा मानना  है  कि मुद्रा अवमूल्यन और बढ़ती आवादी तथा बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण बढ़ती विधुत आवश्यकता के मद्देनज़र विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में पूर्ववर्ती सरकार के मुकाबले  पूंजीनिवेश को बढ़ाने की आवश्यकता थी पर लोक-लुभावन योजनाओं को तरजीह देने बाली अपरिपक्व सरकार विकास की मूलभूत आवश्यकताओं के खर्चों में कटौती करती रही जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता अब की जा रही लम्बी-लम्बी बिजली कटौती के दंश के रूप में उठा रही है।

मेरी एक आरटीआई के जबाब में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक (लेखा) एम. सी. पाल ने जो सूचना दी है   उसके अनुसार उत्तर प्रदेश की 27 विधुत उत्पादन परियोजनाओं में  वित्तीय वर्ष 2007-08 में 1690.48 करोड़  की, वित्तीय वर्ष 2008-09 में 2014.92करोड़  की, वित्तीय वर्ष 2009-10 में 2195.99 करोड़  की, वित्तीय वर्ष 2010-11 में 3037.97 करोड़  की, वित्तीय वर्ष 2011-12 में 2238.09 करोड़  की, वित्तीय वर्ष 2012-13 में 2450.99 करोड़  की, वित्तीय वर्ष 2013-14 में 975.50 करोड़  की और वित्तीय वर्ष 2014-15 में 1403.42 करोड़  की पूंजी व्यय की गयी।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मायावती के नेतृत्व बाली बहुजन समाज पार्टी की सरकार के आरंभिक 3 वर्षों में उत्तर प्रदेश की विधुत उत्पादन परियोजनाओं में  5901.39 करोड़  की पूंजी व्यय की गयी जबकि अखिलेश के नेतृत्व बाली  समाजवादी  पार्टी की सरकार के आरंभिक 3 वर्षों में उत्तर प्रदेश की विधुत उत्पादन परियोजनाओं में  4829.91 करोड़  की पूंजी व्यय की गयी है जो पूर्ववर्ती मायावती सरकार के मुकाबले  1071.48 करोड़ ( 18%) कम  है । मायावती सरकार ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में विधुत उत्पादन परियोजनाओं में  11177.45 करोड़ का खर्चा किया था और अखिलेश को कागज पर मायावती की बराबरी करने के लिए भी बचे दो वर्षों में विधुत उत्पादन परियोजनाओं में  6347.54 करोड़ रुपये खर्चने होंगे।


मेरा मानना  है  कि उत्तर प्रदेश का सकल बजट साल दर साल बढ़ने के बाबजूद अखिलेश द्वारा विकास के मुख्य कारक बिजली के उत्पादन की परियोजनाओं के बजट में कटौती करने से एक बड़ा सबाल यह भी खड़ा हो रहा है कि क्या अखिलेश विकास के प्रति वास्तव में संजीदा हैं और  यह भी कि क्या अखिलेश ने यही धन अपनी लोकलुभावन योजनाओं पर व्यय किया। गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2007 -08  से 2014 -15  तक की 8 वर्षों की अवधि में यूपी में वित्तीय वर्षवार वित्तीय वर्ष  2007 -08 में 100911 करोड़, वित्तीय वर्ष  2008 -09 में 112472 करोड़, वित्तीय वर्ष  2009 -10 में 133596 करोड़, वित्तीय वर्ष  2010 -11 में 153199 करोड़, वित्तीय वर्ष  2011 -12 में 169000 करोड़, वित्तीय वर्ष  2012 -13 में 200110 करोड़, वित्तीय वर्ष  2013 -14 में 221201 करोड़,  और वित्तीय वर्ष  2014 -15 में 259848 करोड़  का सकल बजट पारित किया गया  था।

मेरा मानना  है  कि यह आरटीआई जबाब विकास के मुद्दे पर वर्तमान सरकार की सुस्त रफ्तार तथा विकास पर इस सरकार और अखिलेश यादव की  कथनी और करनी के अंतर को स्वतः ही सिद्ध कर रही है।

सूबे के मुखिया अखिलेश यादव इंजीनियर हैं और उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड के ऊर्जा विभाग के मातहत तो अनगिनत इंजीनियर और मैनेजर कार्यरत है पर मेरा मानना  है  कि  अन्धेर नगरी चौपट राजा बाली कहावत जितनी इस विभाग पर चरितार्थ होती है, शायद ही कहीं और हो।  मेरी इसी  आरटीआई के जबाब में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक (लेखा) एम. सी. पाल ने यह भी  सूचना दी है   कि  उत्तर प्रदेश की विधुत उत्पादन परियोजनाओं में  वित्तीय वर्ष 2013 - 14  के सम्प्रेक्षित लागत लेखों के अनुसार प्रति यूनिट बिजली की उत्पादन लागत  17 रुपये 76 पैसे प्रति यूनिट भी है और  1 रुपये 97 पैसे प्रति यूनिट भी। 

मुझे दी गयी सूचना के अनुसार सूबे में सबसे सस्ती बिजली का उत्पादन अनपरा '' तापीय परियोजना में 1 रुपये 97 पैसे प्रति यूनिट की दर पर हो रहा है तो वहीं सबसे मंहगी बिजली हरदुआगंज तापीय परियोजना में  17 रुपये 76 पैसे प्रति यूनिट पर बिजलीबन रही है।  अनपरा ' ' तापीय परियोजना में बिजली का उत्पादन 2  रुपये 27  पैसे प्रति यूनिट की दर पर, ओबरा ''  तापीय परियोजना में बिजली का उत्पादन 2  रुपये 66   पैसे प्रति यूनिट की दर पर, पारीछा 2x250 मे० वा०  तापीय परियोजना में बिजली का उत्पादन 4   रुपये 56   पैसे प्रति यूनिट की दर पर, पारीछा 2x210 मे० वा०  तापीय परियोजना में बिजली का उत्पादन 4   रुपये 72   पैसे प्रति यूनिट की दर पर,2x250 मे० वा०  हरदुआगंज तापीय परियोजना में बिजली का उत्पादन  5   रुपये  03  पैसे प्रति यूनिट की दर पर, ओबरा ' ' तापीय परियोजना में बिजली का उत्पादन 5  रुपये 89   पैसे प्रति यूनिट की दर पर, पारीछा 2x110 मे० वा०  तापीय परियोजना में बिजली का उत्पादन  6   रुपये  51   पैसे प्रति यूनिट की दर पर और पनकी  तापीय परियोजना में 7 रुपये 17 पैसे प्रति यूनिट पर बिजली बना रही है। 

इस प्रकार उत्तर प्रदेश 2 रुपये प्रति यूनिट से कम की भी बिजली बना रहा है और 17 रुपये प्रति यूनिट से अधिक की भी।  है   अन्धेर नगरी चौपट राजा बाली व्यवस्था।  मैं तो ऐसा ही मानता हूँ।


मैं सोचता हूँ कि काश अखिलेश ने बार-बार बिजली की दरें बढ़ाने के स्थान पर 2 रुपये प्रति यूनिट की दर से अधिक से अधिक बिजली बनाने के लिए प्रयास किये होते तो आम जनता को भी राहत होती और सही अर्थों में समाजवाद को पोषित होते देख लोहिया की आत्मा भी तृप्त होती।  पर मुझे लगता है कि अखिलेश को जनता, समाजवाद  और लोहिया की फिक्र ही नहीं  है।  वह तो बस राजसुख भोग रहे हैं।

13 महीनों में दुनिया के 10 प्रतिशत मुल्कों का दौरा किया मोदी ने

http://ipnlive.in/view_full_news.php?news_id=8183

राष्ट्रीय
 
13 महीनों में दुनिया के 10 प्रतिशत मुल्कों का दौरा किया मोदी ने
Posted on: Jul 02, 2015 on 05:05:04 PM (IST)
 
लखनऊ(आईपीएन)। प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही नरेन्द्र मोदी अपनी विदेश यात्राओं को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं। खासतौर से कांग्रेस विदेशी धरती पर मोदी द्वारा यूपीए सरकार पर हमला बोलने के कारण उनकी कड़ी आलोचना करती रही है। हालांकि इस आलोचना से बेपरवाह पीएम मोदी विदेश यात्राएं जारी रखे हुए हैं। वहीं अब आरटीआई के जरिए खुलासा हुआ है कि पीएम मोदी 13 महीनों में ही धरती के 196 देशों में से 19 देश घूम चुके हैं। इन देशों को घूमने के लिए मोदी ने 12 विदेश यात्राएं कीं। इस प्रकार नरेंद्र मोदी ने 13 महीने में ही संसार के 10 प्रतिशत मुल्कों का दौरा कर चुके हैं, जो अपने आप में एक रिकार्ड है।
 
 
 

Friday, July 3, 2015

PM Narendra Modi made 12 foreign tours, visited 19 countries in 13 months.



पीएम मोदी ने 13 महीने में ही 12 विदेश यात्राएं कर घूम लिए संसार के 10% मुल्क ,  घूमे धरती के 196 देशों में से 19 देश !


भारत का  प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही अन्य बातों के अलावा नरेंद्र मोदी की  विदेश यात्राएं भी खासी चर्चा में रहीं हैं।  पर क्या आपको मालूम है कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी   13 महीनों में ही  हमारी इस धरती के 196 देशों में से 19 देश घूम चुके हैं।  इन देशों को घूमने के लिए मोदी ने 12 विदेश यात्राएं कीं।  इस प्रकार नरेंद्र मोदी ने 13 महीने में ही  संसार के 10% मुल्क घूम लिए हैं।  यह सनसनीखेज खुलासा मेरी एक आरटीआई अर्जी पर प्रधानमंत्री कार्यालय के जनसूचना अधिकारी द्वारा  दिए गए जबाब से हुआ है।


मैंने बीते 26 मई को प्रधानमंत्री कार्यालय में आरटीआई अर्जी लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की  गयी  विदेश यात्राओं की संख्या और उनके द्वारा घूमे गए देशों के नामों की जानकारी माँगी थी।  बीते 26 जून  को प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसचिव और जनसूचना अधिकारी बी.  के. रॉय ने मुझे जो सूचना   दी है उसके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने 26 मई 2014 को सरकार बनाने से 26 जून 2015 तक की  13 महीनों की अवधि  में 12 विदेश यात्राएं कीं और इन 12  विदेश यात्राओं में नरेंद्र मोदी  ने  घरती के 19 देश घूमे



जनसूचना अधिकारी द्वारा  दी गयी सूचना के अनुसार इस अवधि में नरेंद्र मोदी द्वारा  भूटान,ब्राज़ील, नेपाल,जापान,यू. एस. ए. , म्यांमार,ऑस्ट्रेलिया,फिजी,सेसल्स,मॉरिसस,श्री लंका,सिंगापुर,फ्रांस,जर्मनी, कनाडा, चीन,मंगोलिया,साउथ कोरिया और बांग्लादेश की यात्राएं की  गयीं हैं।  


इस बारे में मेरा यह कहना है कि इस प्रकार नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद 13 महीनों में ही 196 देशों बाली पृथ्वी पर भारत समेत 20 मुल्कों का पानी पी चुके हैं और इस प्रकार संसार के 10 प्रतिशत देश घूम चुके हैं।  अगर नरेंद्र मोदी इसी रफ्तार से विदेश यात्राएं करते रहे तो अपने वर्तमान प्रधानमंत्रित्वकाल में वे दुनिया के 88 देश घूम लेंगे अर्थात वर्तमान सरकार के 5 सालों में वे दुनिया के 45 % देश घूम चुके होंगे।  अगर नरेंद्र मोदी इसी रफ्तार से विदेश यात्राएं करते रहें  तो विश्व के सभी 196 मुल्क घूमने के लिए 135 महीने अर्थात 11 वर्ष 3 माह का समय चाहिए होगा। 


तो क्या नरेंद्र मोदी बनाएंगे दुनिया के सभी मुल्क घूमने बाला प्रधानमंत्री बनने का रिकार्ड ? यह तय करेगा समय और मोदी द्वारा किये गए जनकल्याणकारी काम, मेरा तो यही मानना है। 


इंजीनियर संजय शर्मा
संस्थापक अध्यक्ष - 'तहरीर'
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