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Tuesday, November 17, 2015

None of Half a dozen NGOs floated by Amitabh-Nutan Thakur Couple is registered !



पंजीकृत नहीं है अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति के आधा दर्जन एनजीओ में से कोई भी एनजीओ !


लखनऊ/बुधवार 18 नवम्बर 2015/ जीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही के मुद्दों पर बड़ी-बड़ी बातें करने बाली लखनऊ की अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति पारदर्शिता और जबाबदेही के मुद्दे पर खुद ही कटघरे में आ गयी है l अब उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार के कार्यालय में भेजी गयी एक शिकायत से खुलासा हुआ है कि इस दंपत्ति द्वारा बनाए गए आधा दर्जन एनजीओ में से कोई भी उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार के कार्यालय में पजीकृत नहीं पाया गया है l


बताते चलें कि पारदर्शिता और जबाबदेही पर कार्य करने बाली सामाजिक संस्था ‘तहरीर’ के संस्थापक अध्यक्ष लखनऊ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने ठाकुर दंपत्ति द्वारा संचालित एनजीओ नेशनल आरटीआई फोरम,पीपुल्स फोरम,पीके-ओएमजी ट्रस्ट,इंस्टिट्यूट फॉर डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और आरटीआई फंड की गतिविधियों को संदिग्ध बताते हुए इनके माध्यम से पीआइएल ट्रेडिंग करने और काला धन सफेद करने की सम्भावना व्यक्त करते हुए इसकी शिकायत उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त से की थी l लोकायुक्त ने संजय की इस शिकायत को सही पाते हुए शिकायत पर अग्रिम जांच हेतु अनुशंषा राज्य सरकार को प्रेषित की थी l


बीते 07 अक्टूबर को संजय ने उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार को लोकायुक्त की रिपोर्ट प्रेषित करते हुए ठाकुर दंपत्ति द्वारा बनाए गए इन एनजीओ की संदिग्ध गतिविधियों, इनके माध्यम से पीआइएल ट्रेडिंग करने और काला धन सफेद करने, इनके आय के स्रोतों,बैलेंस शीट,ऑडिट रिपोर्ट व अन्य जांचे कराने का अनुरोध किया था l


उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार पी० एन० दुबे ने बीते 19 अक्टूबर के एक पत्र के माध्यम से संजय को बताया है कि उनके कार्यालय में उपलब्ध कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड में नेशनल आरटीआई फोरम,पीपुल्स फोरम,पीके-ओएमजी ट्रस्ट,इंस्टिट्यूट फॉर डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंस और आरटीआई फंड में से कोई भी एनजीओ पंजीकृत नहीं पायी गयी है l


इस सम्बन्ध में संजय का कहना है कि उत्तर प्रदेश के फर्म्स,सोसाइटीज एवं चिट्स के रजिस्ट्रार पी० एन० दुबे के इस जबाब से उनके द्वारा लोकायुक्त के समक्ष ठाकुर दंपत्ति के इन एनजीओ के माध्यम से पीआइएल ट्रेडिंग करने,काला धन सफेद करने आदि गैर-कानूनी गतिविधियाँ संचालित कर धन का घालमेल करने संबंधी आरोप खुद-ब-खुद पुष्ट हो रहे हैं l संजय ने अमिताभ-नूतन ठाकुर दंपत्ति पर पारदर्शिता और जबाबदेही के मुद्दों पर बड़ी-बड़ी बातें करने का ढकोसला मात्र करने का आरोप लगाते हुए इस दंपत्ति द्वारा गैर कानूनी गतिविधियाँ संचालित करने के उद्देश्य से आधा दर्जन एनजीओ बनाने की बात कही है और इन सभी गैर-पंजीकृत एनजीओ द्वारा संदिग्ध गतिविधियाँ संचालित करने के मामलों  की जांच हेतु सूबे के राज्यपाल,मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जांच कराये जाने की बात कही है l



   

Thursday, May 28, 2015

Expel Nutan Thakur ( NGO Member ) off UP Civil Defense Vishakha Committee, demands TAHRIR.

Expel Nutan Thakur ( NGO Member ) off UP Civil Defense Vishakha Committee, demands TAHRIR.


Monday, February 23, 2015

Lucknow based NGO TAHRIR demands SIT investigation in Corporate espionage in GOI ministries

गोपनीय दस्तावेजों की चोरी द्वारा 'मंत्रालयों की जासूसी' और 'राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध' के मामलों की एसआईटी जाँच की माँग :सामाजिक संगठन 'तहरीर' ने भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर की है एसआईटी जाँच की माँग

हालिया जासूसी मामले में बरामद दस्तावेज ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा’’ से भी जुड़े हैं. मतलब साफ है राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ भी समझौता किया गया है. इनमें मुकेश अंबानी की कंपनी आरआईएल, रुइया मित्तल की कंपनी एस्सार, केयर्न्स इंडिया, अनिल अंबानी की कंपनी एडीएजी और जुबीलैंट एनर्जी जैसी दिग्गज कंपनियों के अधिकारी चुराये गये दस्तावेज मंत्रालयों से प्राप्त करते थे जो उनके कार्यालय परिसरों पर छापे के दौरान बरामद किये गये हैं. गोपनीय दस्तावेजों की चोरी का यह मामला पेट्रोलियम मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय , वित्त मंत्रालय, कोयला मंत्रालय और बिजली मंत्रालय तक फैला है.

मामले में दो ऊर्जा सलाहकारों शांतनु सैकिया और प्रयास जैन को भी गिरफ्तार किया गया है. शांतनु पूर्व पत्रकार हैं जिन्होने दावा किया है कि यह 10 हजार करोड़ से भी ज़्यादा का बहुत बड़ा घोटाला है और यह भी कि उनको फंसाया जा रहा है. खुफिया विभाग ने इस मामले में कई अधिकारियों के शामिल होने की रिपोर्ट दी है और गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी जानते हैं कि ये काम लंबे समय से हो रहा है पर सितंबर में आईबी द्वारा रिपोर्ट देने से अभी तक कोई भी बड़ा सरकारी अधिकारी गिरफ्त में नही आया है हालाँकि ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी भी शक के घेरे में हैं.
जब यह स्पष्ट हो चुका है कि जासूसी का कि ये खेल 10-12 साल से चल रहा है तो यह भी साफ है कि अब तक दस्तावेजों के लीक होने से सरकारी खजाने को अकूत धनराशि का का चूना लग चुका होगा जिसमें अनेकों आईएएस अधिकारियों और मंत्रियों की संलिप्तता रही होगी. वैसे भी भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध के इस मामले में इन मंत्रालयों में संबंधित अवधि में तैनात आईएएस अधिकारी और मंत्री अपनी स्पष्ट जबाबदेही से बच नहीं सकते हैं और इनको भी दंडित किया जाना आवश्यक है.

हमारा मानना है कि यह कोई सामान्य केस नहीं है और दिल्ली पुलिस द्वारा इस खेल में बड़ी मछलिय़ों के नाम जानकर उजागर करना और इस समंदर के दायरे का सच सामने ला पाना लगभग असंभव है अतः इस खेल के खिलाड़ियों की पूरी लिस्ट संसार के सामने लाकर उनको दंडित कराने के लिए हमारे संगठन 'तहरीर' ने भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर ‘एसआईटी’ जाँच की माँग की है.