Sunday, May 29, 2022

यूपी : 5 साल में भी पूरी नहीं हो पाई JPNIC निर्माण में अनियमितताओं की जांच : महज 6% अपूर्णता के चलते क्रियाशील नहीं जो पा रहा जनता के 813 करोड़ 13 लाख फूँक चुका JPNIC प्रोजेक्ट – RTI खुलासा.

लखनऊ / 29 मई 2022 ……………...

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक राजधानी लखनऊ स्थित जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर ( JPNIC ) के निर्माण में हुई तकनीकी, वित्तीय और प्रशासकीय अनियमितताओं की जांचों को सूबे का आवास एवं शहरी नियोजन विभाग पांच वर्षों की लम्बी अवधि में भी पूरी नहीं कर पाया है. चौंकाने वाला यह खुलासा लखनऊ निवासी इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा साल 2017 के नवम्बर महीने की 7 तारीख को दायर की गई आरटीआई अर्जी पर सूबे के आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग – 1 के अनुभाग अधिकारी और जन सूचना अधिकारी अरुण कुमार द्वारा संजय को बीती 26 मई को भेजे पत्र से हुआ है.

 







संजय ने JPNIC के सम्बन्ध में शासन स्तर पर आयोजित बैठकों, JPNIC की तकनीकी जांचों, JPNIC की वित्तीय जांचों, JPNIC की प्रशासकीय जांचों, JPNIC की अनियमिताओं की जांचों के आधार पर प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए राजनेताओं, IAS अधिकारियों और PCS अधिकारियों के नामों की सूचना के साथ-साथ JPNIC के सम्बन्ध में तत्कालीन आवास राज्यमंत्री सुरेश पासी और तत्कालीन प्राविधिक शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट मांगी थी. जन सूचना अधिकारी अरुण ने इन सभी सूचनाओं के सम्बन्ध में संजय को बताया है कि क्योंकि जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर ( JPNIC ) की जांच की कार्यवाही का प्रकरण अभी विचाराधीन है इसीलिये यह मामला सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8 ( ज ) से आच्छादित है. 

 

गौरतलब है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8 ( ज ) में ऐसी सूचना को देने की मनाही है जिसके प्रगटीकरण से अपराधियों के अन्वेषण, पकड़े जाने या अभियोजन की प्रक्रिया में बाधा पड़ेगी.

 

अरुण ने संजय को लखनऊ विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता इंदु शेखर सिंह द्वारा बीती 20 मई को जारी पत्र की प्रति भी भेजी है. इस पत्र के माध्यम से इंदु शेखर ने संजय को बताया है कि लेटेस्ट रिकॉर्ड के अनुसार भौतिक रूप से JPNIC के 94 प्रतिशत सिविल और इलेक्ट्रिकल निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं और मात्र 6 प्रतिशत निर्माण कार्य ही अवशेष हैं. इंदु शेखर ने बताया है कि JPNIC की स्वीकृत लागत धनराशि 864 करोड़ 99 लाख रुपये थी जिसके सापेक्ष 20 मई 2022 तक 821 करोड़ 74 लाख रुपये निर्गत हुए हैं जिसमें से 813 करोड़ 13 लाख रुपये अब तक खर्चे जा चुके हैं.

 

इंदु शेखर ने संजय को यह भी बताया है कि JPNIC अभी क्रियाशील नहीं है जिसके कारण JPNIC की सदस्यता की प्रक्रिया को रेगुलेट करने वाले नियमों की सूचना JPNIC के क्रियाशील होने पर प्राप्त करा दी जायेगी.

 

संजय ने बताया कि वे सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उनसे अपील करेंगे कि वे JPNIC प्रोजेक्ट से सम्बंधित सभी लंबित जांचों को शीघ्रता से पूर्ण कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करायें तथा अब तक जनता के टैक्स के पैसों में से 813 करोड़ 13 लाख की भारी-भरकम रकम फूँक चुके JPNIC प्रोजेक्ट के अवशेष 6 प्रतिशत सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्यों को पूरा कराने के लिए शासन स्तर से धनराशि अवमुक्त कराकर जल्द से जल्द जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर ( JPNIC ) को क्रियाशील करायें.  संजय ने बताया कि उनको उम्मीद है कि सूबे के सीएम जल्द ही उनकी इन दोनों मांगों को पूरा करा देंगे.

 

 

Monday, November 1, 2021

पर्यावरण की स्वयं ही हत्या कर रहे ‘शुभ दीपावली, अशुभ पटाखा मार्च’ निकालने वाले कथित शिक्षाविद जगदीश गाँधी : एक्टिविस्ट संजय शर्मा का आरोप.






 

लखनऊ / 02 नवम्बर 2021……………….

लखनऊ के सोशल एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा ने जगदीश गाँधी के कथित पर्यावरण प्रेम को महज दिखावा करार दिया है. लखनऊ के राजाजीपुरम के न्यू टेम्पो स्टैंड के पास ई ब्लाक में बसंत विहार काम्प्लेक्स की गली में हैदर कैनाल से सटे प्लाट पर सिटी मोंटेसरी स्कूल की नई शाखा की निर्माणाधीन बिल्डिंग के निर्माण में अवैध निर्माण करने और निर्माण में पर्यावरण विभाग के मानकों का पालन नहीं किये जाने के आधार पर संजय ने जगदीश गाँधी पर पर्यावरण के मुद्दे पर कथनी और करनी में एक सौ अस्सी डिग्री का अंतर रखने का गंभीर आरोप लगाया है.

 

संजय का कहना है कि जगदीश गाँधी द्वारा अपने विद्यालय की शाखाओं में प्रायः पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ी-बड़ी आदर्शवादी बातें की जाते हैं लेकिन जब बात खुद पर्यावरण संरक्षण पर अमल करने की आती है जगदीश गाँधी उसमें पूरी तरह से फेल हो जाते हैं. संजय ने जगदीश गाँधी द्वारा अपने विद्यालय की विभिन्न शाखाओं में किये गए पर्यावरण संबंधी  कार्यक्रमों को अपनी इमेज बिल्डिंग के अजेंडे के तहत महज सस्ती लोकप्रियता पाने का हथकंडा मात्र बताया है और जगदीश गाँधी से अपेक्षा की है कि वे अपनी कथनी और करनी के अंतर को समाप्त करेंगे और छुद्र स्वार्थों के लिए राजाजीपुरम में निर्माणाधीन बिल्डिंग के निर्माण में पर्यावरण विभाग के मानकों का पालन नहीं करके पर्यावरण की हत्या करने जैसा कोई भी काम नहीं करेंगे.

 

जगदीश गाँधी के सिटी मोन्टेसरी द्वारा हाल ही में निकाले गए ‘शुभ दीपावली, अशुभ पटाखा मार्च’ को जगदीश गाँधी की सस्ती लोकप्रियता की भूख का एक और कौर बताते हुए संजय ने सीएमएस के संस्थापक और कथित शिक्षाविद डा. जगदीश गाँधी से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण के अपने कथित सारगर्भित विचारों को मनसा-वाचा-कर्मणा अपने जीवन में धारण भी करें और इन बातों को महज दूसरों को उपदेश देने तक ही सीमित न रखें.

  

बकौल संजय सीएमएस अपने  कैम्पसों में वृक्षारोपण कार्यक्रमों का दिखावा करके उतना भी पर्यावरण संरक्षण नहीं कर सकता है जितनी पर्यावरण हानि वह राजाजीपुरम की इस निर्माणाधीन बिल्डिंग के अवैध निर्माण और पर्यावरण मानकों के उल्लंघन यथा ग्रीन नेट के बिना निर्माण आदि द्वारा कर चुका है.

         


सीएमएस के विद्यालयों की बिल्डिंग्स के अवैध निर्माणों को पर्यावरण के लिए अतीव विनाशकारी बताते हुए एक्टिविस्ट संजय ने सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. भारती गाँधी, प्रेसीडेन्ट प्रो. गीता गाँधी किंगडन, चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर रोशन गाँधी,क्वालिटी अश्योरेन्स एवं इनोवेशन डिपार्टमेन्ट की हेड सुष्मिता बासु एवं सी.एम.एस. के विभिन्न कैम्पस की प्रधानाचार्याओं के अलावा सी.एम.एस. की चीफ एकेडमिक एडवाइजर सुनीता गाँधी से भी अपेक्षा की है कि वे सब पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को अपने कथनों तक ही सीमित न रखें और पर्यावरण संरक्षण को अपने मन और कर्मों में भी धारण करें.



 

 

Tuesday, October 12, 2021

सूचना आयोगों की उदासीनता से बिना दांत का बाघ बना सूचना कानून 16 वर्षों में ले चुका है सैकड़ों आरटीआई एक्टिविस्टों की बलि - ‘तहरीर’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय शर्मा का बयान - ‘तहरीर’ संस्था ने सूचना का अधिकार कानून की 16वीं वर्षगाँठ मना जारी किया रिपोर्ट कार्ड. ( सूचना का अधिकार दिवस पर विशेष रिपोर्ट ).

 


 

लखनऊ / 12 अक्टूबर 2021 ………………

12 अक्टूबर 2005 को पूरे देश में लागू हुआ पारदर्शिता का कानून यानि कि सूचना का अधिकार अधिनियम आज 17वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है. आरटीआई एक्ट की 16वीं सालगिरह के अवसर पर यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन ‘तहरीर’ के सदस्यों ने संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय शर्मा की अगुआई में संस्था के राजाजीपुरम कार्यालय में आयोजित एक सादा समारोह में पारदर्शिता और जबाबदेही की जंग में शहीद हो चुके देश भर के सैकड़ों सूचना का अधिकार कार्यकर्ताओं की निःस्वार्थ वीरता को नमन करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किये और एक्ट के क्रियान्वयन के विभिन्न आयामों पर विस्तृत परिचर्चा की.

 

तहरीर के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इंजीनियर संजय शर्मा ने बताया कि गैर-सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक देश में 100 से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है और 500 से अधिक आरटीआई कार्यकर्ता गंभीर उत्पीड़न का शिकार हो चुके हैं. सूचना का अधिकार कानून को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत हथियार बताते हुए संजय ने कहा कि हालांकि यह अधिकार देश के प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है लेकिन आम जनमानस की उदासीनता के कारण ही इस कानून के लागू होने के 16 साल बाद भी देश की पांच फीसदी (5%) से कम आबादी ही इस कानून का प्रयोग कर पाई है जिनमें से ग्रामीण आबादी द्वारा एक्ट के प्रयोग के मामले शहरी आबादी के मुकाबले बहुत कम हैं जबकि आज भी देश की अपेक्षाकृत अधिक आबादी गांवों में ही रह रही है .

 

बताते चलें कि ‘तहरीर’ (पारदर्शिता, जबाबदेही और मानवाधिकार क्रांति के लिए एक पहल ) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित एक पंजीकृत सामाजिक संस्था है जो लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही की सुनिश्चितता स्थापित करने के साथ-साथ मानवाधिकारों के संरक्षण के क्षेत्रों में विगत कई वर्षों से कार्यशील है . संस्था जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध व्यापक स्वर मुखरण हेतु सतत संघर्षरत एवं कटिबद्ध है. संस्था द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी हेल्पलाइन 7991479999, लीगल हेल्पलाइन 8004560000  और आरटीआई हेल्पलाइन 9451036633 संचालित हैं जिनके माध्यम से अब तक असंख्य पीड़ितजन  निःशुल्क राय लेकर अपनी समस्याओं का समाधान करा चुके हैं.

 

  

 

कार्यक्रम में बोलते हुए संजय ने कहा कि भारत का आरटीआई कानून लागू होते समय विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर था लेकिन देश भर के सूचना आयोगों की लचर कार्यप्रणाली के चलते भारत इस विश्व रैंकिंग में लगातार नीचे गिरता चला आ रहा है जो चिंताजनक है.

 

संजय ने कहा कि आरटीआई एक्ट का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाने के लिए हालाँकि आरटीआई एक्ट के क्रियान्वयन के सभी स्टेकहोल्डर्स यानि कि आम जनता, लोक प्राधिकारी, सूचना आयोग, सरकार आदि सभी  जिम्मेवार हैं किन्तु वर्तमान में सबसे खराब स्थिति देश भर के सूचना आयोगों की हो गई है जो अब खुद ही भ्रष्टाचार और भाई-भातीजाबाद की गिरफ्त में आ चुके हैं. बकौल संजय सूचना आयोगों की उदासीनता के कारण ही बिना दांत का बाघ बना सूचना कानून विगत 16 वर्षों में सैकड़ों आरटीआई एक्टिविस्टों की बलि ले चुका है.

 

यूपी के मुख्य सूचना आयुक्त भावेश कुमार द्वारा खुले सुनवाई कक्ष में आरटीआई एक्ट की धारा 20 का उल्लंघन करने के मामलों में दण्ड नहीं लगाने की सार्वजनिक घोषणा करने के कृत्य की सार्वजनिक भर्त्सना करते हुए संजय ने भावेश सरीखे आयुक्तों को आरटीआई एक्टिविस्टों की हत्याओं और उत्पीडन का सीधे-सीधे जिम्मेवार बताया है. बकौल संजय आज देश में आरटीआई एक्ट की धारा 20 के उल्लंघन के महज 5 फीसदी मामलों में ही दण्ड लगाया जा रहा है जो चिंताजनक है. बताते चलें कि आरटीआई एक्ट के तहत मांगी सूचना अधिकारी को 30 दिन के भीतर देना होता है. उसके बाद सूचना में देरी होने पर प्रतिदिन 250 रुपये और अधिकतम 25,000 रुपये जुर्माने का प्रविधान है.

 

संजय ने कहा कि लोक प्राधिकरणों द्वारा सही जानकारी देने में गैर-अनुपालन, नागरिकों के प्रति जन सूचना अधिकारियों के शत्रुतापूर्ण दृष्टिकोण,जानकारी छिपाने के लिए अधिनियम के प्रावधानों की गलत व्याख्या, सार्वजनिक हित क्या है, इस पर स्पष्टता की कमी, निजता का अधिकार और सूचना आयुक्तों के खाली पड़े पद आरटीआई अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के रास्ते में मुख्य बाधाएं हैं.

 

 

आरटीआई एक्ट को नागरिकों और सरकारों के बीच पारस्परिक पंहुच के लिए एक पुल जैसा बताते हुए संजय ने निजी स्वार्थ के लिए आरटीआई एक्ट का दुरुपयोग करने वाले लोगों की भर्त्सना भी की और सरकार से आरटीआई कार्यकर्ताओं को सुरक्षा और संरक्षण देने की नीति के साथ-साथ एक्ट का दुरुपयोग रोकने के लिए भी नीति बनाने की मांग की है. संजय ने बताया कि एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संस्था के माध्यम से देश के राष्ट्रपति,प्रधान मंत्री तथा सभी प्रदेशों के राज्यपाल व मुख्यमंत्रियों को 10 सूत्रीय ज्ञापन भेजा जाएगा ताकि एक्ट विश्व रैंकिंग में फिर से पहले स्थान पर आ सके.