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Sunday, July 10, 2016

कल उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के लखनऊ आगमन पर येश्वर्याज ने 2 स्थानों पर की उपराष्ट्रपति के विरोध की तैयारी.





विशेष समाचार का सार  ©TAHRIR : उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के कल लखनऊ आगमन पर सामाजिक संगठन येश्वर्याज सेवा संस्थान ने 2 स्थानों पर उपराष्ट्रपति के विरोध की तैयारी की है. संगठन की तरफ से इस सम्बन्ध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ दायर याचिका की सुनवाई कल ही कराने के लिए न्यायालय में अर्जी देने की बात भी कही जा रही है.



Lucknow/10 July 2016/ Written by Sanjay Sharma ©TAHRIR
कल उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के नए बने भवन ‘आरटीआई भवन’ , जिसमें सूबे का सूचना आयोग पिछले 11 अप्रैल से ही में पूरी तरह से कार्यशील हो चुका है, का उद्घाटन होना है जिसमें भारत के उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने आ रहे हैं पर कल ही  पर लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में लामबंद आरटीआई कार्यकर्ताओं ने, जिनके विरोध के चलते ‘आरटीआई भवन’ के उद्घाटन पर अब तक 3 बार गृहण लग चुका है, कल 2 स्थानों पर उपराष्ट्रपति के विरोध की तैयारी पूरी कर ली है.


येश्वर्याज की सचिव और समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने इस पत्रकार को एक विशेष बातचीत में बताया कि कल  सायं 04:30 बजे उनके संगठन के 2 सदस्य हाथ में काली पट्टी बांधकर उपराष्ट्रपति और कार्यक्रम के अन्य अतिथियों को गुलाब का फूल देकर अपना विरोध व्यक्त करेंगे और संगठन के 2 सदस्य कल ही हजरतगंज जीपीओ स्थित महात्मा गांधी पार्क में पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 2 बजे तक अपने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे.


उर्वशी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के इन दोनों कार्यक्रमों के लिए जिला प्रशासन को सूचित कर दिया गया है और विरोध प्रदर्शन के इन दोनों कार्यक्रमों की अनुमति के मामले को लेकर उनके संगठन येश्वर्याज ने सूबे के गृह सचिव, लखनऊ के जिलाधिकारी, लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एडीएम ( ट्रान्स गोमती ) लखनऊ, यूपी के मुख्य सूचना आयुक्त और सचिव के खिलाफ उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ में एक याचिका भी दायर कर दी है जिसकी सूचना इन पांचो विपक्षियों को नोटिस संख्या 32016026216 के मार्फत 08 जुलाई को ही दी जा चुकी है. बकौल उर्वशी उनके अधिवक्ता एस.पी. त्रिपाठी कल न्यायालय में एक अर्जी देकर इस मामले की सुनवाई कल ही करने के लिए अनुरोध भी करेंगे.



बताते चलें कि लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन येश्वर्याज सेवा संस्थान विगत 2 वर्षों से  उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में महिला यौन-उत्पीडन मामलों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार विशाखा समिति बनाने और आयोग की सभी कार्यवाहियों की शत-प्रतिशत वीडियो रिकॉर्डिंग कराने,इन रिकॉर्डिंग्स को आईटी एक्ट में प्राविधानित समय तक संरक्षित रखकर किसी भी पक्ष द्वारा मांगे जाने पर उपलब्ध कराने की व्यवस्थाएं कराने की मुहिम चला रहा है.




येश्वर्याज की सचिव उर्वशी ने बताया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 में प्रदत्त उनके अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के तहत वे और येश्वर्याज का कोई 1 अन्य सदस्य कल दोनों स्थानों पर आरटीआई भवन उद्घाटन कार्यक्रम के सभी आगंतुकों का विरोध करेंगे. आरटीआई भवन के पूर्णतया कार्यशील होने के 3 माह बाद आरटीआई भवन के उद्घाटन कार्यक्रम के आयोजन को जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी करने वाला गलत कदम बताते हुए उर्वशी ने कार्यक्रम में शिरकत करने वाले सभी अतिथियों को  सामंतवादी मानसिकता का व्यक्ति करार देते हुए उनके इस कदम की भर्त्सना की है और कहा है कि जब तक उनकी मांगे मानी नहीं जाती हैं, उनका यह विरोध-आन्दोलन जारी रहेगा.


©TAHRIR
( This news item can be reproduced/used but only with specific mention of TAHRIR blog  )


Sanjay Sharma is a Lucknow based freelancer and President at TAHRIR. He can be contacted at associated.news.asia@gmail.com Mobile/Whatsapp No. 7318554721.


Wednesday, May 20, 2015

यूपी में ‘महिला-सम्मान प्रकोष्ठ' पर अखिलेश यादव की अगुआई बाली समाजवादी पार्टी की सरकार के दावे खोखले : महज कागजों में दफन है सरकार के मंचों, प्रचारों में प्रमुखता से प्रसारित 'महिला सम्मान प्रकोष्ठ' l



लखनऊ.TAHRIR. 20/05/15.यूपी में जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार रही है, क़ानून व्यवस्था पर हमेशा उंगली उठती रही है. महिलाओं के विरुद्ध होने बाले अपराध भी इनमे से एक हैं. इन सबके बीच सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के "लड़के हैं,लड़कों से ग़लती हो जाती है"  और "आवादी के हिसाब से यूपी में महिलाओं के विरुद्ध अपराध कम हैं" जैसे वक्तव्यों से समाज में जाती सपा सरकार की ग़लत छवि को सुधारने के लिए सूबे के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी सांसद पत्नी डिंपल यादव ने आगे आकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए कई लुभावनी योजनाओं की घोषणा बड़े जोरदार ढंग से की हैं.

बताते चलें कि इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते साल के अगस्त महीने में महिलाओं, नाबालिग बच्चियों व मासूमों के साथ होने वाले अपराधों पर लगाम कसने और उनके आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवाने के लिए पुलिस महकमे में महिला सेल को और ताकतवर बनाते हुए महिला सम्मान प्रकोष्ठ का गठन किए जाने की घोषणा की थी.इस सेल को सुरक्षा के साथ महिलाओं से जुड़े अन्य मामलों जैसे भ्रूण हत्या, देहातों में शौचालयों की कमी जैसे सामाजिक मुद्दों पर कार्रवाई में भी मदद करनी थी. जिलों की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और वीमेन पावर लाइन 1090 की नोडल एजेंसी भी इसी प्रकोष्ठ को बनाया गया था. डीजीपी के नेतृत्व में एडीजी स्तर के अधिकारी को इसका  प्रमुख बनाया गया था. तब अखिलेश ने घोषणा की थी कि   महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों व उत्पीड़न के मामलों की संवेदनशीलता और उनकी रोकथाम के लिए इस  प्रकोष्ठ के गठन का  फैसला लिया गया था. इस सेल के लिए जरूरी सभी संसाधन डीजीपी द्वारा उपलब्ध कराए जाने की बात थी.

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा  इस योजना  को गाहे बगाहे संचार के सभी माध्यमों से तो ज़ोर-शोर से प्रसारित-प्रचारित किया ही गया, साथ ही साथ अखिलेश ने स्वयं भी सार्वजनिक और राजनैतिक मंचों से  महिला सम्मान की इस  योजना की जोरदार चर्चा करके इसे  अपनी सरकार की उपलब्धि बताकर अपनी सरकार की छवि को सुधारने का भरसक प्रयास किया है. बड़ा सबाल यह है कि क्या अखिलेश यादव और सपा सरकार के महिलाओं के हितैषी होने के दावे सच्चे हैं ? क्या मंचों से की गयी अखिलेश की महिला सम्मान रक्षा की ये घोषणायें जमीनी स्तर पर क्रियान्वित हुई हैं या वह सपा सरकार की मात्र भाषणों और प्रचार-प्रसार के लिए की गयी राजनैतिक बाजीगरी  थी जो अब तक महज कागजों में ही दफ़न हैं? मेरी एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश के महिला सम्मान प्रकोष्ठ के जन सूचना  अधिकारी के जबाब के बाद यह बड़ा सबाल उठ खड़ा हुआ है.


दरअसल मेरी एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश के महिला सम्मान प्रकोष्ठ के जन सूचना  अधिकारी के जबाब से सरकार की इस योजना के लिए किए गये सभी सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। महिला सम्मान प्रकोष्ठ के संबंध में अखिलेश सरकार के दावे हकीकत से बिल्कुल विपरीत हैं। यह खुलासा सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत हुआ है। दरअसल मैने बीते साल 30 अगस्त को गृह विभाग के जन सूचना अधिकारी को एक अर्जी देकर  उत्तर प्रदेश के महिला सम्मान प्रकोष्ठ की गतिविधियों के संबंध में जानकारी माँगी थी.  महिला सम्मान प्रकोष्ठ के जन सूचना  अधिकारी  ने मुझे जो जवाब दिया है वह वाकई चौंकाने वाला है। मुझे बताया गया है कि 30 अगस्त 2014 तक महिला सम्मान प्रकोष्ठ का तो कोई कार्यालय था और ही कोई स्टाफ. महिला सम्मान प्रकोष्ठ के जन सूचना  अधिकारी  ने मुझे यह भी बताया है कि अब भी महिला सम्मान प्रकोष्ठ में कोई भी नियमित स्टाफ नहीं है और मात्र कुछ लोग यहाँ संबद्ध किए गये हैं. और तो और, आरटीआई एक्ट में 30 दिनों में सूचना देने की वाध्यता होने पर भी महिला सम्मान प्रकोष्ठ के जन सूचना  अधिकारी  ने महिला सम्मान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी सूचना माँगे जाने के साढ़े आठ माह बाद और 02 माह के अतिरिक्त समय की माग की है.


महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई और कार्रवाई पर रखेंगे नजर रखने,एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और वीमेन पावर लाइन की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने,पॉक्सो एक्ट, महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, प्रीवेंशन आफ इमौरल ट्रैफिकिंग एक्ट, कार्यस्थल पर यौन शोषण से जुड़े मामलों, रेप, घरेलू हिंसा और दहेज से जुड़े मामलों की सुनवाई और कार्रवाई को देखने,मानव तस्करी को रोकने के लिए योजना बनाने,एसिड अटैक के मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने और पीड़िता को मुआवजा दिलाने,पुलिसकर्मियों को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने और समय-समय पर उनकी महिला अपराधों की संवेदनशीलता को लेकर ट्रेनिंग कराने,गुमशुदा महिलाओं व बच्चों के साथ होने वाले अपराधों व उनके डीएनए का डाटाबेस बनाने और सूबे की पुलिस के साथ दूसरे राज्यों की पुलिस से समन्वय स्थापित करने,महिलाओं की सुरक्षा के लिए नई तकनीकों के बारे में पता करने और उन्हें सूबे में लागू करवाने,पुलिस , सरकारी विभागों और सिविल सोसायटी में महिला संबंधी नीतियों जैसे भ्रूण हत्या , देहातों में शौचालय के निर्माण , पर फीडबैक देने, पुलिस की वेबसाइट पर आने वाली महिलाओं की शिकायतों का प्रभावी तरीके से निस्तारण व कार्रवाई कराने,वैवाहिक विवादों में मीडिएशन के लिए बनी सेवाओं की देखरेख का कार्य करने और महिलाओं व बच्चों से जुड़े अपराधों में मुआवजा दिलाने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य  करने जैसी बड़ी बड़ी ज़िम्मेदारियों के लिए सूबे के डीजीपी के नेतृत्व में एडीजी स्तर के अधिकारी के अधीन कार्य करने को बनाए गये अखिलेश सरकार के इस चर्चित महिला सम्मान प्रकोष्ठ में संसाधनों की पूर्ण अनुपलब्धता अखिलेश यादव और सपा सरकार की कथनी और करनी के अंतर को को स्वयं ही उजागर कर रही है. 

हमें खेद के साथ कहना पड़  रहा है कि अपर पुलिस महानिदेशक- मानवाधिकार सुतापा सान्याल, जो  महिला सम्मान प्रकोष्ठ की प्रभारी भी हैं, ने महिला होते हुए भी आधे साल से अधिक बीत जाने पर भी इस प्रकोष्ठ को ज़मीनी स्तर पर कार्यशील बनाने की  दिशा में कोई भी प्रयास  नही किया है और सरकार की महिला सम्मान की यह पहल आज भी कागजों में ही दफ़न है.

हमारा संगठन 'तहरीर' सूबे के राज्यपाल राम नाइक और सूबे के मुखिया अखिलेश यादव को माँग-पत्र  भेजकर उत्तर प्रदेश  महिला सम्मान प्रकोष्ठ को नियमित कार्यालय,स्टाफ,बजट और अन्य ज़रूरी संसाधन और सहायता तत्काल  उपलब्ध कराते हुए इस प्रकोष्ठ के कार्यों का अनुश्रवण  नियमित रूप से स्वयं करने का आग्रह भी कर रहा है.

इंजीनियर संजय शर्मा
संस्थापक अध्यक्ष - तहरीर
मोबाइल 8081898081