Sunday, September 7, 2025

फिल्म "द बंगाल फाइल्स" को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री करने की संजय शर्मा की मांग.

 

फिल्म "द बंगाल फाइल्स" को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री करने की संजय शर्मा की मांग.

 

लखनऊ, 07 सितम्बर 2025 –
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर लखनऊ के राजाजीपुरम क्षेत्र निवासी लीगल एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने हाल ही में प्रदर्शित फिल्म "द बंगाल फाइल्स" को राज्य में टैक्स फ्री घोषित करने की मांग की है। शर्मा ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि यह फिल्म ऐतिहासिक तथ्यों और बंगाल में हुए जातीय-सामाजिक संघर्षों पर आधारित होने के कारण न केवल राष्ट्रहित में उपयोगी है, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी सिद्ध हो सकती है।

 

पत्र में दिए गए प्रमुख तर्क

  • यह फिल्म राजनीतिक षड्यंत्र, सामाजिक वैमनस्य और ऐतिहासिक संघर्षों को उजागर करती है, जिससे आमजन को घटनाओं की वास्तविकता समझने का अवसर मिलेगा।
  • समाज में समरसता, सामाजिक न्याय और सद्भावना को बढ़ावा देने हेतु यह फिल्म विद्यार्थियों और युवाओं के लिए शिक्षा और प्रेरणा का माध्यम बन सकती है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार पहले भी ऐतिहासिक और शिक्षा-प्रधान फिल्मों जैसे "द साबरमती रिपोर्ट" को टैक्स फ्री कर चुकी है। अतः यह निर्णय सरकार की सांस्कृतिक और फिल्म नीति के अनुरूप होगा।
  • अन्य राज्यों द्वारा भी सत्य घटनाओं पर आधारित फिल्मों को टैक्स फ्री किए जाने के उदाहरण मौजूद हैं, जो जनहित और शासन-जनता जुड़ाव को प्रदर्शित करते हैं।
  • टैक्स फ्री होने से फिल्म की टिकट दर कम होगी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, छात्र व महिलाएं आसानी से इसे देख पाएंगे।

 

अतिरिक्त सुझाव

पत्र में संजय शर्मा ने यह भी आग्रह किया है कि राज्य सरकार इस फिल्म के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष पहल करे। साथ ही सरकारी कर्मचारियों एवं विद्यालय/कॉलेज स्तर पर छात्रों के सामूहिक दर्शनीय आयोजन कराए जाएं। उन्होंने फिल्म के निर्माण दल को राज्य स्तर पर प्रोत्साहन और मान्यता दिए जाने का सुझाव भी दिया।

 

निष्कर्ष

संजय शर्मा ने मुख्यमंत्री से अपील की कि उनकी सकारात्मक दृष्टि और सशक्त नेतृत्व में "द बंगाल फाइल्स" समाज में सत्य, समरसता और राष्ट्रप्रेम का व्यापक संदेश देने में सहायक सिद्ध होगी।

 

संजय शर्मा से मोबाइल नंबर्स 9454461111, 7991479999, 9565-24x7x365 तथा ईमेल  sanjaysharmalko[AT]icloud[DOT]com, sukaylegal[AT]gmail[DOT]com पर संपर्क किया जा सकता है l 

 

फिल्म "द बंगाल फाइल्स" को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री घोषित करने हेतु निवेदन.

 

आदरणीय श्री योगी आदित्यनाथ जी,
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश.

 

विषय: फिल्म "द बंगाल फाइल्स" को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री घोषित करने हेतु निवेदन.

 

सादर निवेदन

मान्यवर,

उत्तर प्रदेश देश के सामाजिक-सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का संचालक प्रदेश है. यहां की जनता ऐतिहासिक तथ्यों और राष्ट्रीय एकता को जानने-समझने के प्रति सदैव उत्सुक रहती है. फिल्म "द बंगाल फाइल्स" बंगाल प्रदेश में हुए ऐतिहासिक, राजनीतिक और जातीय संघर्षों की वास्तविक घटनाओं पर आधारित है, जिसका विषय प्रासंगिक और राष्ट्रहितकारी है.

1. ऐतिहासिक व राष्ट्रहित में फिल्म की उपयोगिता

  • यह फिल्म राजनीतिक स्वार्थ, षड्यंत्र और समाज में फैली वैमनस्यता के कारण अस्तित्व में आई घटनाओं को उजागर करती है.
  • समाज को सत्य और ऐतिहासिक घटनाओं का सही बोध कराने के लिए ऐसी फिल्मों तक आमजन की पहुंच आवश्यक है.
  • फिल्म में दिखाए गए सत्य घटनाओं से देशवासियों को वास्तविकता से रूबरू कराने का प्रयास है.

2. समरसता, सामाजिक न्याय एवं सीख का माध्यम

  • "द बंगाल फाइल्स" सामाजिक भेदभाव, हिंसा और कुरीतियों के विरुद्ध न केवल जागरूकता फैलाती है, बल्कि सामूहिक सद्भावना को प्रोत्साहन देती है.
  • छात्र-युवा वर्ग के लिए यह फिल्म सीख एवं प्रेरणा का स्रोत है। इससे भावी पीढ़ी में समरसता, एकता और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित होगी.

3. राज्य सरकार की संस्कृति एवं फिल्म नीति का सम्मान

  • उत्तर प्रदेश सरकार सामाजिक, ऐतिहासिक और शिक्षाप्रद विषय सामग्री वाली फिल्मों को टैक्स फ्री करने की पहल पूर्व में भी कर चुकी है ("द साबरमती रिपोर्ट" इत्यादि).
  • सरकार की नीतियां जनहित, शिक्षा और समाज के उत्थान के लिए हैं, अतः यह कदम उन नीतियों की पुष्टि करेगा.

4. अन्य राज्यों की मिसाल

  • अन्य राज्यों द्वारा सत्य घटना या सामाजिक सरोकार वाली फिल्मों को टैक्स फ्री किए जाने की मिसालें मौजूद हैं, जो शासन का जनता से जुड़ाव दर्शाती हैं.

5. आर्थिक, सामाजिक व व्यापक जनहित

  • टैक्स फ्री किए जाने से फिल्म की टिकट दर कम होकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, छात्र व महिलाओं तक सहज पहुंच सुनिश्चित होगी.
  • प्रदेश की बहुसंख्यक जनता जागरूक होगी, समाज में सकारात्मक संवाद उत्पन्न होगा।

6. फिल्म की विशिष्टता और दिशाबोध

  • फिल्म ना केवल मनोरंजन प्रदान करती है, बल्कि समाज को सही दिशा, प्रेरणा एवं शिक्षा भी देती है.
  • सत्य को उजागर करने वाली इस फिल्म को प्रमोट करना प्रदेश सरकार की तात्कालिक जिम्मेदारी है।

7. आग्रह और अनुरोध

अतः उपरोक्त समस्त तर्कों और पक्षों को ध्यान में रखते हुए आपसे विनम्र अनुरोध है कि

  • "द बंगाल फाइल्स" को उत्तर प्रदेश राज्य में मनोरंजन कर (Tax) मुक्त घोषित किया जाए।
  • फिल्म के वृहद प्रचार-प्रसार और सरकारी कर्मचारियों/छात्रों का सामूहिक दर्शनीय आयोजन कराया जाए।
  • सरकार की ओर से फिल्म निर्माण दल को प्रोत्साहन एवं राज्य स्तरीय मान्यता दी जाए।

कृपा कर जनहित, राष्ट्रहित, शिक्षा और सामाजिक समरसता के नाम पर जरूरी कदम उठायें।


आपकी सकारात्मक दृष्टि और नेतृत्व में यह फिल्म समाज में सत्य, समरसता और राष्ट्रप्रेम के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगी.

 

सादर.

दिनांक : 07-09-2025

 

भवदीय,

( संजय शर्मा )

मोबाइल 9454461111,7991479999, 9565-24x7x365

ई मेल sanjaysharmalko[AT]icloud[DOT]com , sukaylegal [AT]gmail[DOT]com

पत्राचार का पता - 102,नारायण टावर,ऍफ़ ब्लाक, राजाजीपुरम,होटल मंगलम के पास,ईदगाह के सामने  लखनऊ -226017

 

 

Wednesday, September 3, 2025

हुसैनगंज पावर हाउस के अधिकारी पर झूठे आरोप, क्या बिजली चोरी माफिया के इशारे पर सक्रिय हैं एसपी विधायक रविदास मेहरोत्रा?


लखनऊ ......... 03/09/2025 ………….हुसैनगंज पावर हाउस के उपखंड अधिकारी अमित कुमार सिंह के खिलाफ लगातार शिकायतें और पत्राचार कर रहे समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा एक नए विवाद में फंसते नज़र आ रहे हैं । राजाजीपुरम निवासी संजय शर्मा ने खुलकर आरोप लगाया है कि विधायक मेहरोत्रा बिजली चोरी माफिया के दबाव में आकर अमित कुमार सिंह को परेशान करने की मुहिम चला रहे हैं ।

 


संजय शर्मा का कहना है कि अमित कुमार सिंह ने अपने कार्यकाल में क्षेत्र में बिजली चोरी रोकने और पारदर्शी कार्यप्रणाली लागू करने के लिए कड़े कदम उठाए । यही वजह है कि बिजली चोरी करने वाले संगठनों और उनके राजनीतिक संरक्षणकर्ताओं की नींद उड़ गई । अब इन्हीं के दबाव में विधायक मेहरोत्रा बार-बार ऊँचे स्तर पर पत्र लिखकर अमित कुमार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं ।

 


हाल ही में विधायक मेहरोत्रा ने ऊर्जा मंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अमित कुमार सिंह पर मनगढ़ंत आरोप लगाए । परंतु जांच में बार-बार यही स्पष्ट हुआ कि शिकायतें निराधार हैं और अधिकारी के कार्य में कोई गड़बड़ी नहीं मिली।

 


संजय शर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे झूठे आरोपों और राजनीतिक दबाव के चलते ईमानदार अधिकारियों का उत्पीड़न जारी रहा तो इसका सबसे ज़्यादा नुकसान आम जनता को होगा, जो सही समय पर बिजली आपूर्ति चाहती है। उन्होंने मांग की है कि सरकार विधायक की भूमिका की भी जांच कराए और यह देखा जाए कि आखिर किसके इशारे पर वे ईमानदार अधिकारियों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।

 


आम जनमानस भी मानता है कि योगी सरकार के अधिकारियों की सख्ती से ही हुसैनगंज क्षेत्र में बिजली चोरी पर नकेल कसी गई है। ऐसे में विधायक द्वारा लगातार बिजली अधिकारियों के खिलाफ झूंठी शिकायतों का मोर्चा खोलना जनता द्वारा चुने जनप्रतिनिधियों की सत्यनिष्ठा पर गंभीर संदेह पैदा करता है ।

 


संजय शर्मा से मोबाइल नंबर्स 8004560000, 9454461111, 7991479999 और ईमेल  sanjaysharmalko[AT]icloud[DOT]com, sukaylegal[AT]gmail[DOT]com पर संपर्क किया जा सकता है l



 

 

Friday, August 29, 2025

पत्रकारों को ब्लैकमेल करने वाले लखनउआ कउआ गैंग पर कसा शिकंजा : निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रेस काउंसिल ने संजय शर्मा से मांगी विस्तृत जानकारी.

 


लखनऊ / शुक्रवार, 29 अगस्त 2025 ..................................

 

 

कांव-कांव कर आपके सर पर मंडराते कौवों के झुण्ड से क्या आप अपने जीवन में कभी दो-चार हुए हैं  ? यदि हुए हैं, तो आप स्मरण कर रहे होंगे कि कांव-कांव करते कउआ झुण्ड ने आपको कुछ पलों के लिए संघ्याशून्यता की स्थिति में ला दिया था. संघ्याशून्यता की स्थिति इसलिए नहीं कि वे शक्तिशाली थे अपितु इसलिए कि वे निहायत गंदे थे और आपको उनकी गन्दगी अपने ऊपर आ जाने का भय था, उनकी झुण्ड वाणी घनघोर कर्कश शोर थी जिसमें आप कुछ भी कहने में खुद को असमर्थ पा रहे थे और वे आपके पास रही कोई चीज आपसे छीनकर ले जाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार थे क्योंकि उनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं था और आपके पास उनसे पाने के लिए कुछ भी नहीं था. शायद पत्रकारों को ब्लैकमेल करने वाले ऐसे ही लखनउआ कउआ गैंग के खिलाफ वरिष्ठ पत्रकार  स्वर्गीय दिलीप सिन्हा ने अपनी लेखनी को मुखर किया था जिनकी मृत्यु के बाद उनके द्वारा उठाये मामलों में निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रमुख कानूनी अधिकार,पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकारों के प्रमुख पैरोकारों में से एक संजय शर्मा की शिकायतों के बाद संजय से विस्तृत जानकारी मांगकर जांच कराने की बात कही है.

   

 

दिलीप सिन्हा की रहस्यमयी मौत से उठे सवाल

लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सिन्हा की यूपीएसआरटीसी बस की चपेट में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पत्रकारिता जगत और नागरिक समाज को झकझोर दिया है। इस केस में अब तक कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो इसे सिर्फ दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित षड्यंत्र की ओर इशारा करते हैं। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संजय शर्मा, जो पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकारों के प्रमुख पैरोकार के रूप में जाने जाते हैं, ने इस घटना को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के समक्ष उठाया है और मामले को न्यायिक मुकाम तक पहुंचाने के लिए ठोस कार्रवाई शुरू कर दी है।

 

 

 

PCI ने लिया संज्ञान, मांगी विस्तृत जानकारी

पेश किए गए पत्र के मुताबिक संजय शर्मा की ओर से दिलीप सिन्हा की संदिग्ध मौत और पत्रकारों की प्रताड़ना संबंधी शिकायतें 13 जुलाई 2025 को दर्ज की गई थीं, जिसे PCI ने Press Council Act, 1978 की धारा 13 के अंतर्गत संज्ञान में लिया है। PCI ने इस मामले में संजय शर्मा को निर्देशित किया है कि वे दिलीप सिन्हा की मौत की सभी परिस्थितियों, शिकायतों, और दस्तावेजी प्रमाण का विस्तार से प्रतिनिधित्व करें ताकि पूरी गंभीरता से जांच हो सके।

पत्र के दूसरे पैराग्राफ में विशेष तौर पर यह उल्लेख किया गया है कि संजय शर्मा द्वारा दी गई जानकारी में दिलीप सिन्हा के सूचना विभाग में दर्ज कराई गई शिकायतों और बार-बार हुई प्रताड़ना (harassment) व प्रेस स्वतंत्रता के दमन (suppression of press freedom) का विवरण शामिल है। PCI ने स्पष्ट किया है कि विस्तृत प्रस्तुति और सभी सहायक दस्तावेजों के बिना केस को आगे बढ़ाना संभव नहीं है, अतः पत्राचार और प्रमाणों की आवश्यकता है।

 

ब्लैकमेलिंग के तंत्र का खुलासा

शिकायत के केंद्र में एक ऐसा संगठित ब्लैकमेलिंग गैंग है, जिसकी गतिविधियां लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। इस गैंग की कार्यप्रणाली बेहद खतरनाक है:

  • यह गिरोह ऐसे स्थानीय बेरोज़गार और अशिक्षित गुंडा किस्म के लोगों को अपने गिरोह में शामिल करता है जिनकी स्वयं की समाज में कोई इज्जत नहीं होती है ।
  • इस गिरोह के सदस्य काली कमाई के पैसों से ऑफिसों को खोल उनमें लगे वॉयस रिकॉर्डिंग वाले सीसीटीवी कैमरों की मनमाफिक क्लिप्स से और निःशुल्क साइबर कैफ़े और निःशुल्क मदद के नाम पर दुकान खोलकर लोगों के आधार,पैन,मोबाइल,ईमेल जैसे निजी डाटा इकठ्ठा करके इन लोगों को ब्लैकमेल करके उनको अपने गिरोह में शामिल कर अपने मनमाफिक गैरकानूनी काम कराते हैं या उनसे पैसे मांगते हैं l
  • सरकारी तंत्र की निगाह से बचे रहने के लिए इस गिरोह के सदस्य वरिष्ठ पत्रकारों, स्वतंत्र आवाज उठाने वालों, और सरकारी महकमों में सक्रिय लोगों के खिलाफ अलग-अलग नामों से लगातार IGRS, RTI, कोर्ट केस, और फर्ज़ी FIR दर्ज करवाते हैं और उनको संगठित रूप से ब्लैकमेल करते हैं ।
  • गैंग के कई सदस्यों द्वारा फर्जीबाड़े से चल रहे समाचार पत्रों और सोशल मीडिया का घनघोर इस्तेमाल कर पत्रकारों के चरित्र हनन, सामाजिक दबाव और ब्लैकमेलिंग को अंजाम दिया जाता है।
  • गिरोह को राजनैतिक व्यक्तियों का भी संरक्षण प्राप्त है, जो अपने बच्चों और प्रतिनिधियों के माध्यम से इन अपराधियों के कृत्यों के सहभागी हैं और गैंग को  राजनीतिक और प्रशासनिक राहत दिलवाते हैं और ब्लैकमेलिंग के लिए गिरोह के इशारे पर विधान सभा में प्रश्न तक उठाये जाते हैं ।
  • गैंग सोशल मीडिया पर स्वयं को एक अजेय शक्ति के रूप में प्रदर्शित करने की कोशिश करता है और गैंग के शातिर सदस्य लाइक,शेयर,कमेंट का इस्तेमाल अपने शिकार के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश की रणनीति बनाकर करते हैं l

 

संजय शर्मा की अद्वितीय सक्रियता

संजय शर्मा ने दिलीप सिन्हा की मौत में सामने आए इन तथ्यों को PCI के समक्ष भेजकर न सिर्फ एक अत्यन्त जरूरी जांच की नींव रखी है, बल्कि पत्रकारों की स्वतंत्रता के पक्ष में निर्णायक पहल की है। उन्होंने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया कि दिलीप सिन्हा की शिकायतें सूचना विभाग में लम्बे समय तक लंबित रहीं, और इसके बाद गैंग ने उनके खिलाफ लगातार कई फर्जी मामलों, दमनकारी काग़ज़ात, और सामाजिक/अदालतों में प्रताड़ना के रास्ते खोले। संजय शर्मा का संघर्ष केवल न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका प्रयास समाज में जवाबदेही और पारदर्शिता की संस्कृति स्थापित करना है।

 

PCI के हस्तक्षेप और उम्मीद की किरण

PCI के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद जगी है कि न सिर्फ दिलीप सिन्हा के केस में निष्पक्ष जांच होगी, बल्कि पत्रकारिता के लोकतांत्रिक स्वरूप की रक्षा भी सुनिश्चित होगी। PCI की सक्रियता और संजय शर्मा के प्रयास एक सामूहिक क्रांति का आह्वान करते हैं, जिससे लखनऊ सहित पूरे देश में पत्रकारिता दबाव, भय व ब्लैकमेलिंग से मुक्त रह सकेगी।

 

निष्कर्ष: न्याय, पारदर्शिता और पत्रकारिता की स्वतंत्रता

यह मामला न्याय व्यवस्था, पत्रकारिता जगत और नागरिक संस्थाओं के लिए कसौटी है। यदि निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई होती है, तो भविष्य में ऐसे ब्लैकमेलिंग गैंग और उनके संरक्षकों पर नकेल कसी जा सकेगी। संजय शर्मा की पहल ने न सिर्फ दिलीप सिन्हा के मामले को उजागर किया है, बल्कि पत्रकारिता में बढ़ती समस्याओं और प्रताड़ना के खिलाफ समाज को सजग किया है।

 

संजय शर्मा से मोबाइल नंबर्स 8004560000, 9454461111, 7991479999 और ईमेल  sanjaysharmalko[AT]icloud[DOT]com, sukaylegal[AT]gmail[DOT]com पर संपर्क किया जा सकता है l